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भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Jाओं के पर(cid:15)Jा-फल, कायKबम, छाऽवृ(cid:18)N ूदान, आOद।
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भाग-1-ग—िशJा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Jाफल आOद ---
भाग-2—(cid:18)बहार-राPयपाल और कायाKQयJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आOद। 7-7 भाग-3—भारत सरकार, पRSम बंगाल सरकार और उUच ;यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राPय गजटA के उWरण। ---
भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---
पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ[त (cid:18)वधान मंडल मY उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Oकये जानेवाले ूवर सिमितयA के ूितवेदन और उ[त (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-7—संसद के अिधिनयम Rजनपर रांशपित क] Pयेंठ अनुमित िमल चुक] है। ---
भाग-8—भारत क] संसद मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के ूितवेदन और संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के ूितवेदन और संसद मY पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-9—(cid:18)व^ापन
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भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क] नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प_रवहन सूचनाएं, ;यायालय सूचनाएं और सवKसाधारण सूचनाएं इ`याOद। ---
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पूरक
पूरक-क 8-142 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015
भागभागभागभाग----1111
िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)2श(cid:18)2श(cid:18)2श(cid:18)2, , , , छु 8ट(cid:15) और अ;यछु 8ट(cid:15) और अ;यछु 8ट(cid:15) और अ;यछु 8ट(cid:15) और अ;य वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
पर्यावरण एवं वन विभाग
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अधिसूचनाएं
10 फरवरी 2015
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-418/प0व0—श्री एस0एस0 चौधरी, भा0व0से0 (1984), मुख्य वन संरक्षक कार्य नियोजना प्रशिक्षण एवं विस्तार, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-वन्य प्राणी प्रतिपालक बिहार के रिक्त पद पर अपने ही वेतनमान में अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-419/प0व0—श्री भारत ज्योति, भा0व0से0 (1986), निदेशक, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण बिहार, पटना मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कोष (दुर्गावती) के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-420/प0व0—श्री पी0 के0 गुप्ता, भा0व0से0 (1992), वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर को स्थानांतरित करते हुए मुख्य वन संरक्षक मानव संसाधन विकास बिहार, पटना के रिक्त पद पर अपने ही वेतनमान में अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। ये मुख्य वन संरक्षक (आई0टी0) के रिक्त पद के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-421/प0व0—श्री संतोष तिवारी, भा0व0से0 (1993), वन संरक्षक-सह-अपर निदेशक हरियाली मिशन, उतर बिहार को स्थानांतरित करते हुए मुख्य वन संरक्षक, कार्य नियोजना प्रशिक्षण एवं विस्तार बिहार, पटना के पद पर अपने ही वेतनमान में अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। ये नोडल पदाधिकारी वन संरक्षण भी रहेंगे।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-422/प0व0—श्री ए0 के0 प्रसाद, भा0व0से0 (1988), वन संरक्षक, कार्य नियोजना अंचल,पटना को स्थानांतरित करते हुए वन संरक्षक, वन्य प्राणी अंचल पटना के रिक्त पद पर अपने ही वेतनमान में अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-423/प0व0—श्री जे0 पी0 गुप्ता, भा0व0से0 (1993), वन संरक्षक, भागलपुर को स्थानांतरित करते हुए वन संरक्षक-सह-अपर निदेशक हरियाली मिशन, उतर बिहार के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। श्री गुप्ता प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य वानिकी विकास निगम लि0, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-424/प0व0—श्री ललन प्रसाद सिंह, भा0व0से0 (1996), वन प्रमंडल पदाधिकारी, जमुई को वन संरक्षक कोटि में प्रोन्नति के फलस्वरूप स्थानांतरित करते हुए वन संरक्षक, भागलपुर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-425/प0व0—श्री संजय कुमार सिन्हा, भा0व0से0 (1996), प्रभारी वन संरक्षक को वन संरक्षक कोटि में प्रोन्नति के फलस्वरूप वन संरक्षक (मुख्यालय) प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय बिहार, पटना के पद पर नियमित रूप से अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-426/प0व0—श्री अभय कुमार, भा0व0से0 (2000), वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर को स्थानांतरित करते हुए वन संरक्षक, कार्य नियोजना अंचल, पटना के पद पर अपने ही वेतनमान में अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-427/प0व0—श्री मनोज कुमार सिंह, भा0व0से0 (2001), वन प्रमंडल पदाधिकारी, औरंगाबाद को स्थानांतरित करते हुए वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर के पद पर अपने ही वेतनमान में अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-428/प0व0—श्री अरविन्द कुमार, भा0व0से0 (1986), लीव रिजर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-6498 दिनांक 22.07.2014 द्वारा की गई अधियाचना के तहत इनकी सेवा पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को सौंपी जाती है। सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-429/प0व0—श्री अभय कुमार द्विवेदी, भा0व0से0 वन प्रमंडल पदाधिकारी, मिथिला वन प्रमंडल, दरभंगा को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, जमुई के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-430/प0व0—श्री पी0 के0 जायसवाल, भा0व0से0(2001) वन प्रमंडल पदाधिकारी, शोध प्रशिक्षण एवं जन सम्पर्क प्रमंडल, पटना को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, वन कार्य3 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015 नियोजना प्रमंडल, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। ये वन प्रमंडल पदाधिकारी, शोध प्रशिक्षण एवं जन सम्पर्क प्रमंडल, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-431/प0व0—श्री नंद किशोर, भा0व0से0(2006) वन प्रमंडल पदाधिकारी-सह-उप निदेशक, वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना प्रमंडल-2 बेतिया को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुंगेर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-432/प0व0—श्री एस0 कुमारा सामी, भा0व0से0(2006) वन प्रमंडल पदाधिकारी, बांका को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, रोहतास वन प्रमंडल सासाराम के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-433/प0व0—श्री एस0 सुधाकर, भा0व0से0(2007) वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुंगेर को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, सारण वन प्रमंडल, छपरा के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-434/प0व0—श्री अमित कुमार, भा0व0से0 (2008) वन प्रमंडल पदाधिकारी, रोहतास वन प्रमंडल सासाराम को उनके अनुरोध के आलोक में प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी-सह-उप निदेशक, वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना प्रमंडल-2 बेतिया के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-435/प0व0—श्री सत्यजीत कुमार, भा0व0से0(2010), सहायक वन संरक्षक, वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना प्रमंडल-2 बेतिया को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, बांका के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-436/प0व0—श्री नीरज नारायण, भा0व0से0(2011), प्रशिक्षु पदाधिकारी, रोहतास वन प्रमंडल, सासाराम को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-437/प0व0—श्री सुधीर कुमार कर्ण, बि0व0से0, परामर्शी, पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, औरंगाबाद के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-438/प0व0—श्री दिगम्बर ठाकुर, बि0व0से0, उप वन संरक्षक, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, पटना को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, मिथिला वन प्रमंडल, दरभंगा के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-439/प0व0—श्री अश्विनी कुमार, बि0व0से0, वन प्रमंडल पदाधिकारी, वैशाली, उप वन संरक्षक, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
सं॰ भा0व0से0 (स्था0) 17/11 (खंड)-440/प0व0—श्री अजीत कुमार सिंह, बि0व0से0, उप निदेशक, संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना, परामर्शी, पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रत्नेश झा, उप-सचिव।
——— निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ——— अधिसूचनाएं 12 जनवरी 2015
सं॰ IX-11-18/2014-126—निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-5(1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल ने पूर्वी चम्पारण जिलान्तर्गत पकड़ीदयाल अनुमंडल मुख्यालय में वर्ष 2009-10 में अस्थायी रूप सेे खोले गये अवर निबंधन कार्यालय तथा उक्त कार्यालय के लिए अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी (अराजपत्रित) तथा कार्यालय परिचारी (अराजपत्रित) के एक-एक सृजित पद का वर्ष 2014-15 तक के लिए अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।
2. यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना सं0 2047 दिनांक 06.08.2008, 399 दिनांक 11.02.2011, 5008 दिनांक 11.10.2012 एवं 1547 दिनांक 28.06.2013 के क्रम में निर्गत की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, विशेष सचिव।4 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015
12 जनवरी 2015
सं॰ IX-11-18/2014-127—निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-5 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल ने कैमूर जिलान्तर्गत मोहनियाँ अनुमंडल मुख्यालय में वर्ष 2010-11 में अस्थायी रूप से खोले गये अवर निबंधन कार्यालय तथा उक्त कार्यालय के लिए अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी (अराजपत्रित) तथा कार्यालय परिचारी (अराजपत्रित) के एक-एक सृजित पद का वर्ष 2014-15 तक के लिए अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।
2. यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना सं0 31 दिनांक 05.01.2010, 3572 दिनांक 28.11.2011 एवं 4177 दिनांक 12.12.2013 के क्रम में निर्गत की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, विशेष सचिव।
———
12 जनवरी 2015
सं॰ IX-11-18/2014-128—निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-5 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-'राज्यपाल ने बेगूसराय जिलान्तर्गत बलिया अनुमंडल मुख्यालय में वर्ष 2010-11 में अस्थायी रूप से खोले गये अवर निबंधन कार्यालय तथा उक्त कार्यालय के लिए अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी (अराजपत्रित) तथा कार्यालय परिचारी (अराजपत्रित) के एक-एक सृजित पद का वर्ष 2014-15 तक के लिए अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।
2. यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना सं0 29 दिनांक 05.01.2010, 959 दिनांक 27.03.2012 एवं 4178 दिनांक 12.12.2013 के क्रम में निर्गत की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, विशेष सचिव।
———
12 जनवरी 2015
सं॰ IX-11-18/2014-129—निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-5 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल ने भोजपुर जिलान्तर्गत पीरो अनुमडल मुख्यालय में वर्ष 2010-11 में अस्थायी रूप से खोले गये अवर निबंधन कार्यालय तथा उक्त कार्यालय के लिए अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी (अराजपत्रित) तथा कार्यालय परिचारी (अराजपत्रित) के एक-एक सृजित पद का वर्ष 2014-15 तक के लिए अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।
2. यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना सं0 30 दिनांक 05.01.2010, 961 दिनांक 27.03.2012 एवं 4182 दिनांक 12.12.2013 के क्रम में निर्गत की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, विशेष सचिव।
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12 जनवरी 2015
सं॰ IX-11-18/2014-130—निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-5 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल ने पूर्वी चम्पारण जिलान्तर्गत रक्सौल अनुमंडल मुख्यालय में वर्ष 2010-11 में अस्थायी रूप से खोले गये अवर निबंधन कार्यालय तथा उक्त कार्यालय के लिए अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी (अराजपत्रित) तथा कार्यालय परिचारी (अराजपत्रित) के एक-एक सृजित पद का वर्ष 2014-15 तक के लिए अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।
2. यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना सं0 34 दिनांक 05.01.2010, 964 दिनांक 27.03.2012 एवं 4174 दिनांक 12.
12.2013 के क्रम में निर्गत की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, विशेष सचिव।
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12 जनवरी 2015
सं॰ IX-11-18/2014-131—निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-5 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल ने मुजफ्फरपुर जिलान्तर्गत मोतीपुर अचंल मुख्यालय में वर्ष 2010-11 में अस्थायी रूप से खोले गये अवर निबंधन कार्यालय तथा उक्त कार्यालय के लिए अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी (अराजपत्रित) तथा कार्यालय परिचारी (अराजपत्रित) के एक-एक सृजित पद का वर्ष 2014-15 तक के लिए अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।5 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015 2. यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना सं0 32 दिनांक 05.01.2010, 963 दिनांक 27.03.2012 एवं 4175 दिनांक 12.12.2013 के क्रम में निर्गत की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, विशेष सचिव।
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12 जनवरी 2015
सं॰ IX-11-18/2014-132—निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-5 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल ने सहरसा जिलान्तर्गत सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल मुख्यालय में वर्ष 2010-11 में अस्थायी रूप से खोले गये अवर निबंधन कार्यालय तथा उक्त कार्यालय के लिए अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी (अराजपत्रित) तथा कार्यालय परिचारी (अराजपत्रित) के एक-एक सृजित पद का वर्ष 2014-15 तक के लिए अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।
2. यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना सं0 35 दिनांक 05.01.2010, 966 दिनांक 27.03.2012 एवं 4179 दिनांक 12.12.2013 के क्रम में निर्गत की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, विशेष सचिव।
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12 जनवरी 2015
सं॰ IX-11-18/2014-133—निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-5 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्यपाल ने नवादा जिलान्तर्गत रजौली अनुमंडल मुख्यालय में वर्ष 2010-11 में अस्थायी रूप से खोले गये अवर निबंधन कार्यालय तथा उक्त कार्यालय के लिए अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी (अराजपत्रित) तथा कार्यालय परिचारी (अराजपत्रित) के एक-एक सृजित पद का वर्ष 2014-15 तक के लिए अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।
2. यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना सं0 36 दिनांक 05.01.2010, 960 दिनांक 27.03.2012 एवं 4180 दिनांक 12.12.2013 के क्रम में निर्गत की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, विशेष सचिव।
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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचनाएं
23 जनवरी 2015
सं॰ 1/पी॰एम॰सी॰/विविध/955/2014-91—जल संसाधन विभाग, बिहार के अधिसूचना संख्या 1/पी॰एम॰सी॰/विविध/955/2014-584 पटना दिनांक 14.07.2014 के द्वारा कोशी बांध कटान न्यायिक जांच आयोग से प्राप्त अनुशंसा पर अनुवर्त्ती कार्रवाई जल संसाधन विभाग द्वारा की जा रही है। उक्त अधिसूचना के कंउिका 5 में समिति को अपना प्रतिवेदन छः माह के अनदर (13.01.2015 तक) समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया है। परंतु जांच समिति द्वारा अधिक समय की मांग की गयी है। अतः जांच समिति को अपना प्रतिवेदन समर्पित करने हेतु अगले छः माह (14.01.2015 से 13.07.2015) अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
विपिन बिहारी मिश्र,
सरकार के संयुक्त सचिव (अभियंत्रण)।
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23 जनवरी 2015
सं॰ 1/पी॰एम॰सी॰/विविध/955/2014-92—जल संसाधन विभाग, बिहार के अधिसूचना संख्या 1/पी॰एम॰सी॰/विविध/955/2014-584 पटना दिनांक 14.07.2014 के द्वारा कोशी बांध कटान न्यायिक जांच आयोग से प्राप्त अनुशंसा पर अनुवर्त्ती कार्रवाई जल संसाधन विभाग द्वारा की जा रही है। उक्त अधिसूचना के कंउिका 5 में तकनीकी समिति को अपना प्रतिवेदन छः माह के अनदर (13.01.2015 तक) समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया है। परंतु समिति6 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015 द्वारा अधिक समय की मांग की गयी है। अतः तकनीकी समिति को अपना प्रतिवेदन समर्पित करने हेतु अगले छः माह (14.01.
2015 से 13.07.2015) में समर्पित करने हेतु अवधि विस्तार की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
विपिन बिहारी मिश्र,
सरकार के संयुक्त सचिव (अभियंत्रण)।
——— अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,
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सं0 01-बी0एम0डी0-180-17/99-2700/एम0, बिहार राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड
के निदेशक पर्षद् को तत्कालिक प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निम्नांकित रूप से गठित किया
जाता हैं।
1 श्री शिशिर सिन्हा, प्रधन सचिव,
— अघ्यक्ष खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार, पटना
2 श्री शिशिर सिन्हा, प्रबंध् निदेशक,
— सरकारी सदस्य बिहार राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड, बिहार, पटना
3 श्री शैलेश ठाकुर, उद्योग निदेशक, बिहार, पटना — सरकारी सदस्य
4 श्री बी0 राजेन्द्र, स्चिव ;संसाधनद्ध, वित्त विभाग, बिहार, पटना — सरकारी सदस्य
5 श्री बी0ए0 खान, प्रधन मुख्य वन संरक्षक,
— सरकारी सदस्य पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार, पटना।
2. एतद् संबंध्ी पूर्व निर्गत अध्सिूचनाएँ विलोपित की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
मो0 हसनैन खाँ, संयुक्त सचिव।
——— अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,
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8 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000)))) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत
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सं॰ कारा/नि0को(अधी0)-01-16/2014-949 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग। ——— संकल्प 11 फरवरी 2015
चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री रविन्द्र कुमार चौधरी, काराधीक्षक, उपकारा, बक्सर के पदस्थापन काल में दिनांक 14.06.2014 को चार बंदियों के पलायन की घटना हुई है।
श्री चौधरी का यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के नियम-3 (1) (i) (ii) (iii) के प्रावधानों का घोर उल्लंघन है। साथ ही यह कृत्य इनकी मनमानी, अनुषासनहीनता एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता का द्योतक है एवं सरकारी सेवकों के आचरण के प्रतिकूल है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
2. अतः यह निर्णय लिया गया है कि श्री रविन्द्र कुमार चौधरी, तत्कालीन काराधीक्षक, उपकारा, बक्सर सम्प्रति प्रभारी पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना के विरूद्ध संलग्न प्रपत्र में अंकित आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में विभागीय कार्यवाही संचालित की जाय।
3. इस विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 (2) के तहत् संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा श्री षिवेन्द्र प्रियदर्षी, अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। 4. श्री चौधरी से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
5. विभागीय कार्यवाही के संचालन के प्रस्ताव में माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। 6. संचालन पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन निर्धारित अवधि के अन्दर समर्पित करेंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव, अपर सचिव-सह-निदेशक, प्रशासन।9 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015
सं॰ कारा/नि0(प्रोबेषन)-01/15-869
———
संकल्प
6 फरवरी 2015
चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री मृंत्युजय कुमार, प्रधान प्रोबेषन पदाधिकारी, बेगुसराय को कंकड़बाग थाना कांड संख्या-489/13 में आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना में दिनांक 13.02.2014 से विचाराधीन बंदी के रूप में संसीमित रहने तथा 48 घंटे से अधिक अवधि के लिए कारा निरूद्ध की स्थिति 13.02.2014 से विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 99 दिनांक 14.03.2014 द्वारा निलंबित किया गया है।
2. माननीय उच्च न्यायालय, पटना के पारित न्यायादेष के आलोक में दिनांक 12.08.2014 को जमानत पर रिहा होने के फलस्वरूप तथा श्री कुमार द्वारा दिनांक 14.08.2014 को योगदान समर्पित करने के फलस्वरूप इन्हें विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 08 दिनांक 06.01.2015 के द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए योगदान की तिथि से योगदान स्वीकृत करते हुए प्रधान प्रोबेषन पदाधिकारी, जिला प्रोबेषन कार्यालय, बेगुसराय के पद पर पदस्थापित किया गया।
3. श्री कुमार द्वारा पहली पत्नी के जीवित रहते अवैध तरीके से दूसरी शादी सरकारी पद पर रहते हुए किया गया कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के नियम-3 (i) एवं (ii) के प्रावधानों का घोर उल्लंघन है। साथ ही उक्त कार्य सरकारी सेवकों के आचरण के प्रतिकूल है, तथा इनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
4. अतः यह निर्णय लिया गया है कि श्री मृंत्युजय कुमार, प्रधान प्रोबेषन पदाधिकारी, जिला प्रोबेषन कार्यालय, बेगुसराय के विरूद्ध संलग्न प्रपत्र में अंकित आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में विभागीय कार्यवाही संचालित की जाय।
5. इस विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17(2) के तहत् संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा श्री लियोनार्ड तिर्की, निदेषक प्रोबेषन चर्या, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
6. श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
7. विभागीय कार्यवाही के संचालन के प्रस्ताव में माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। 8. संचालन पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन निर्धारित अवधि के अन्दर समर्पित करेंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव, अपर सचिव-सह-निदेशक, प्रशासन।
———
सं॰ कारा/नि0को(अधी0)-01-10/2014-950
———
संकल्प
11 फरवरी 2015
चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री सीप्रियन टोप्पो, काराधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार के पदस्थापन काल में दिनांक 05.03.2014 को विचाराधीन बंदी मो0 सत्तार उर्फ सद्दाम के पलायन की घटना के सदंर्भ में कारा हस्तक एवं विभागीय प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। श्री टोप्पो द्वारा कारा में 1/4 का जिला सषस्त्र बल उपलब्ध रहने के बावजूद भी, उक्त बंदी को ईलाज हेतु कारा बल के संरक्षण में सदर अस्पताल, कटिहार भेजा गया। श्री टोप्पो का यह कृत्य अनुषासनहीनता एवं लापरवाही का द्योतक है तथा विहित पदीय कर्त्तव्यों एवं कारा हस्तक के प्रावधानों का घोर उल्लंघन है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
2. अतः यह निर्णय लिया गया है कि श्री सीप्रियन टोप्पो, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी के विरूद्ध संलग्न प्रपत्र में अंकित आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में विभागीय कार्यवाही संचालित की जाय। 3. इस विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 (2) के तहत् संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी तथा अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. श्री टोप्पो से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
5. विभागीय कार्यवाही के संचालन के प्रस्ताव में माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।10 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015 6. संचालन पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन निर्धारित अवधि के अन्दर समर्पित करेंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव, अपर सचिव-सह-निदेशक, प्रशासन।
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अधिसूचना
13 फरवरी 2015
सं॰ कारा/नि0को0(क)-47/12-984—श्री उमेष प्रसाद सिंह, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी सम्प्रति निलंबित को मंडल कारा, सीतामढ़ी में पदस्थापन के दौरान प्रतिवेदित कुव्यवस्था, अनियमितता, भ्रष्टाचार एवं प्रषासनिक अदक्षता के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 3704 दिनांक 17.08.2012 द्वारा निलंबित किया गया। 2. श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप पत्र के आधार पर विभागीय सकंल्प ज्ञापांक 984 दिनांक 26.02.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई। विभागीय कार्यवाही के आधार पर दंड अधिरोपित किये जाने की कार्रवाई सम्प्रति प्रक्रियाधीन है। 3. सम्यक् विचारोपरान्त श्री उमेष प्रसाद सिंह को तुरंत के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। 4. निलंबन अवधि के संबंध में अलग से निर्णय संसूचित किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव, अपर सचिव-सह-निदेशक, प्रशासन।
——— समाहरणालय, अररिया ——— आदेष 28 जनवरी 2014 सं0 114 स्था॰—सरकार के संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक 289, दिनांक 13.01.2009 एवं श्री राम बाबू सिंह, उप-सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना द्वारा अररिया जिला अन्तर्गत डेहटी पैक्स में हुई अनियमितता संबंधी जाँच प्रतिवेदन दिनांक 31.12.2008 के आलोक में श्री अम्बा प्रसाद यादव, प्रधान लिपिक, प्रखंड कार्यालय, सिकटी को जिलाधिकारी, अररिया के आदेष ज्ञापांक 23/स्था0, दिनांक 31.01.2009 द्वारा निलंबित किया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिकटी द्वारा श्री अम्बा प्रसाद यादव, निलंबित प्रधान लिपिक, प्रखंड कार्यालय सिकटी के विरुद्ध प्रपत्र-''क'' में अधिरोपित आरोपों के आधार पर श्री अम्बा प्रसाद यादव, निलंबित प्रधान लिपिक, प्रखंड कार्यालय, सिकटी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु जिलाधिकारी, अररिया के आदेष ज्ञापांक 173/स्था0, दिनांक 23.03.2009 द्वारा अपर समाहर्त्ता, अररिया को संचालन पदाधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिकटी को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिकटी द्वारा प्रपत्र-''क'' में श्री अम्बा प्रसाद यादव के विरुद्ध निम्नलिखित तीन आरोप गठित किये गये है :-
1. श्री अम्बा प्रसाद यादव, प्रधान लिपिक, प्रखंड कार्यालय, सिकटी के पदस्थापन काल में इनके द्वारा इंदिरा आवास योजना की खाता संख्या 163 डेहटी पैक्स में जमा की गई राषि निम्न प्रकार है :-
| डेहटी पैक्स में जमा राषि का ब्योरा एवं संबंधित कर्मी का नाम एवं पदनाम | |||||
| क्र क्र0000 क्र क्र | तिथि | जमा की गई जमा की गई राषि | प्र0 वि0 प्र0 वि0 प्र0 वि0 प्र0 वि0 पदाधिकारी | प्रधान प्रधान प्रधान प्रधान सहायक | नाजीर |
| 1 | 03.02.06 | 80.00 लाख | श्री अनिल कुमार | श्री परमानन्द ऋषिदेव | मो0 असगर आलम |
| 2 | 03.03.06 | 25.00 लाख | श्री रमेष झा | श्री परमानन्द ऋषिदेव | मो0 असगर आलम |
| 3 | 23.03.06 | 146.75 लाख | श्री रमेष झा | श्री परमानन्द ऋषिदेव | मो0 असगर आलम |
| 4 | 28.07.06 | 49.00 लाख | श्री रमेष झा | श्री परमानन्द ऋषिदेव | श्री रामविलास राम |
| 5 | 28.07.06 | 21.25 लाख | श्री रमेष झा | श्री परमानन्द ऋषिदेव | श्री रामविलास राम |
| 6 | 15.09.06 | 195.00 लाख | श्री रमेष झा | श्री परमानन्द ऋषिदेव | श्री परवेज नजीर |
| 7 | 24.01.07 | 65.00 लाख | श्री रमेष झा | श्री परमानन्द ऋषिदेव | श्री परवेज नजीर |
| 8 | 12.04.07 | 65.00 लाख | श्री रमेष झा | श्री नवीन कुमार मंडल | श्री परवेज नजीर |
| 9 | 20.04.07 | 195.00 लाख | श्री रमेष झा | श्री नवीन कुमार मंडल | श्री परवेज नजीर |
| 10 | 13.08.07 | 90.25 लाख | श्री रमेष झा | श्री अम्बा प्रसाद यादव | श्री परवेज नजीर |
| 11 | 17.08.07 | 180.00 लाख | श्री रमेष झा | श्री अम्बा प्रसाद यादव | श्री परवेज नजीर |
| 12 | 31.03.06 | 36.625 लाख | श्री रमेष झा | श्री परमानन्द ऋषिदेव | श्री रामविलास राम |
| 13 | 28.07.06 | 5.375 लाख | श्री रमेष झा | श्री परमानन्द ऋषिदेव | श्री रामविलास राम |
श्री अम्बा प्रसाद यादव, दिनांक 20.06.2007 से सिकटी प्रखंड के प्रधान लिपिक के प्रभार में थे जिनके पदस्थापन काल में दिनांक 13.08.07, दिनांक 17.08.07 को दो चेक के माध्यम से कुल 270.25 लाख रुपये डेहटी पैक्स में जमा किया गया है। इंदिरा आवास के मार्ग दर्षिका के अनुसार यह राषि राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा करना था। इनके द्वारा इस अनियमितता पर आपत्ति नहीं की गयी, बल्कि राषि जमा करने में सहयोग किया गया। इस प्रकार जहाँ एक ओर लाभुक इंदिरा आवास योजना के लाभ से वंचित रह गए वहीं दूसरी ओर सरकारी राषि का दुरुपयोग भी हुआ जिसके लिए श्री अम्बा प्रसाद यादव, निलंबित प्रधान लिपिक, प्रखंड कार्यालय, सिकटी दोषी हैं।
2. दिनांक 01.04.04 से लागू इंदिरा आवास मार्गदर्षिका के नियमावली IV के कंडिका 4-7 में स्पष्ट है कि इंदिरा आवास योजना की राषि राष्ट्रीयकृत बैंक या सहकारिता बैंक या डाकघर में रखा जाय परंतु मार्गदर्षिका का अनुपालन नहीं किया गया और राषि डेहटी पैक्स में जमा करने हेतु सहयोग प्रदान किया गया, जिसे लिए श्री अम्बा प्रसाद यादव दोषी हैं।
3. उप विकास आयुक्त, अररिया के आदेष ज्ञापांक 977, दिनांक 26.09.09, पत्रांक 1123, दिनांक 21.11.06 एवं पत्रांक 163/गो0, दिनांक 13.10.07 के द्वारा निदेष दिया गया कि इंदिरा आवास एवं अन्य योजनाओं की राषि राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा किया जाय, लेकिन इस आदेष का अनुपालन नहीं किया गया। उप विकास आयुक्त के निदेष के बावजूद डेहटी पैक्स में राषि जमा करने के लिए श्री अम्बा प्रसाद यादव, प्रधान सहायक, प्रखंड कार्यालय, सिकटी दोषी हैं। इस प्रकार इस अनियमित कार्य में आपकी संलिप्तता स्थापित होती है।
श्री मो0 कैसर अली, बि0प्र0से0, अपर समाहर्त्ता, अररिया द्वारा विधिवत् विभागीय कार्यवाही का संचालन किया गया। उन्होने अपने पत्रांक 1006/रा0, दिनांक 22.08.2009 से संचालन के उपरांत विभागीय कार्यवाही संबंधी अभिलेख जिलाधिकारी, अररिया को भेजा गया, जिसके अवलोकन से निम्नलिखित तथ्य प्रकट होते है। (1) आरोपी का तर्क ः-(1) आरोपी का तर्क ः-(1) आरोपी का तर्क ः-(1) आरोपी का तर्क ः- प्रथम आरोप के संदर्भ में आरोपी का कहना है कि वह दिनांक 20.06.2007 से निलंबन की तिथि तक सिकटी प्रखंड के प्रधान सहायक के प्रभार में था। जबकि डेहटी पैक्स में खाता 03.02.2006 को ही खोला गया है और उस समय से ही इन्दिरा आवास योजनाओं की राषि डेहटी पैक्स में जमा किया जाता रहा है। यह सही है कि उनके कार्यकाल में मो0 270.25 लाख रुपये दो चेक के माध्यम से पूर्व से संधारित खाता में जमा की गयी है। उक्त दोनो चेक डी0आर0डी0ए0, अररिया से कब और किनके द्वारा प्राप्त की गई तथा किनके द्वारा डेहटी पैक्स में चेक जमा की गई, इसकी कोई12 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015 जानकारी उन्हे नहीं है। जब उन्हे चेक प्राप्ति की जानकारी ही नहीं हुई तो डेहटी पैक्स में जमा करने में सहयोग करने का प्रष्न ही नहीं उठता है। यह सही है कि मैं प्रधान सहायक के प्रभार में था, परन्तु प्राप्त चेक उनके समक्ष कभी भी उपस्थापित नहीं किया गया। कार्यालय में भी ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलेगा जिससे यह स्पष्ट होता हो कि मैंने चेक जमा करने में सहयोग किया है। चुँकि प्राप्त चेक से संबंधित संचिका कभी भी उनके पास उपस्थापित नहीं किया गया है। जहाँ तक चेक जमा करने का प्रष्न है, चेक जमा करना या निकासी करना पदाधिकारी के क्षेत्राधिकार में है न कि प्रधान सहायक के। चेक कहाँ जमा किया जाना है इसका निर्णय पदाधिकारी लेते हैं तथा चेक के पार पृष्ठ पर पदाधिकारी का ही हस्ताक्षर होता है। इस तरह उनपर लगाया गया आरोप कि डेहटी पैक्स में उनके द्वारा अनियमित रुप से राषि जमा की गई है तथा राषि जमा करने में सहयोग की गई है बिल्कुल निराधार एवं सत्य से परे है।
साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः-साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः-साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः-साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः- इस संबंध में साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का कहना है कि श्री अम्बा प्रसाद यादव, प्रधान लिपिक के साथ-साथ लेखापाल के रुप में भी रोकड़ पंजी की समय-समय पर जाँचोपरांत हस्ताक्षर कर पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करते है। उस समय राषि डेहटी पैक्स में जमा की जा रही थी तो उनके द्वारा इस जमा की गई राषि पर आपत्ति किया जाना आवष्यक था। श्री यादव के द्वारा आपत्ति नहीं किये जाने के मद्देनजर रखते हुये श्री यादव की डेहटी पैक्स में की गई सरकारी राषि की जमा किये जाने एवं घोटालाबाजी में संलिप्त रहने से इनकार नहीं किया जा सकता है। उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के विरुद्ध प्रथम आरोप को सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध प्रथम आरोप को सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध प्रथम आरोप को सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध प्रथम आरोप को सत्य एवं प्रमाणित पाया। (2) आरोपी का तर्क (2) आरोपी का तर्क (2) आरोपी का तर्क (2) आरोपी का तर्क ः- :- :- :- दूसरे आरोप के सम्बन्ध में आरोपी का कहना है कि वह दिनांक 20.06.2007 से प्रधान सहायक के प्रभार में रहा है। कार्यालय में इंदिरा आवास मार्गदर्षिका एवं उप विकास आयुक्त, अररिया के पत्र के आलोक में प्रखंड कार्यालय, सिकटी के पत्रांक 22, दिनांक 31.03.2008, पत्रांक 434, दिनांक 16.05.2008, पत्रांक 491, दिनांक 03.06.2008, पत्रांक 512, दिनांक 07.06.08, पत्रांक 648, दिनांक 28.07. 2008, पत्रांक 733, दिनांक 19.08.2008, पत्रांक 777, दिनांक 17.10.2008 एवं ज्ञापांक 830, दिनांक 02.12.2008 द्वारा संपूर्ण राषि बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने हेतु पत्राचार किया गया है, परन्तु डेहटी पैक्स द्वारा न तो बैंक ड्राफ्ट द्वारा राषि लौटाई गई और न ही नगद रुप में। बाध्य होकर प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिकटी के द्वारा डेहटी पैक्स प्रबंधक एवं पैक्स अध्यक्ष के विरुद्ध स्थानीय सिकटी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसका मामला सिकटी थाना कांड संख्या 165, दिनांक 20.12.08 है। इस हेतु प्रखंड कार्यालय, सिकटी के पत्रांक 28(मु0), दिनांक 09.04.2008 एवं पत्रांक 22, दिनांक 31. 03.08 द्वारा उप विकास आयुक्त, अररिया एवं पत्रांक 111, दिनांक 13.02.2008 द्वारा निदेषक, लेखा प्रषासन एवं स्वनियोजन जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, अररिया को भी पत्राचार किया गया है।
साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः-साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः-साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः-साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः- इस संबंध में साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का कहना है कि केवल पत्राचार कर देने से इस प्रकार की अनियमितता समाप्त नहीं होती है। जब तक जमा की गई राषि वापस प्राप्त नहीं हो जाय। केवल लिखने से सकारात्मक काम नहीं होता है। बल्कि, बहुत पूर्व में ही राषि नहीं लौटाने पर प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिये थी। उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के विरुद्ध द्वितीय आरोप को भी सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध द्वितीय आरोप को भी सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध द्वितीय आरोप को भी सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध द्वितीय आरोप को भी सत्य एवं प्रमाणित पाया। (3) आरोपी का तर्क ः-(3) आरोपी का तर्क ः-(3) आरोपी का तर्क ः-(3) आरोपी का तर्क ः- तीसरे आरोप के संबंध में आरोपी का कहना है कि वह दोषी नहीं है। चुँकि पैक्स में खाता वर्ष 2006 में ही खोली जा चुकी थी और संधारित खाता में बदलाव करना एक प्रधान सहायक के क्षेत्राधिकार से बाहर है। पूर्व से संधारित खाता में उनके कार्यकाल में भी दो चेक जमा होने का उल्लेख किया गया है। जिसपर न तो उनका हस्ताक्षर है, न ही उनके द्वारा जमा की गयी है। सिर्फ उनका कार्यकाल अवलोकित किया गया है। यह स्थिति विचारणीय एवं क्षम्य योग्य प्रतीत होती है। सत्यतता प्रकट होने पर डेहटी पैक्स में जमा राषि को वापस लौटाये जाने, एवं चेक द्वारा राषि वापस नहीं किये जाने के उपरांत डेहटी पैक्स के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस प्रकार वह बिल्कुल ही निर्दोष है। चेक द्वारा राषि जमा किये जाने में उनकी कोई सहभागिता नहीं है। साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः- साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः- साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः- साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का तर्क ः- इस संबंध में साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी का कहना है कि श्री यादव का तर्क सही नहीं है। श्री यादव द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन अपने कार्यकाल में सही ढंग से नहीं किया गया है और डेहटी पैक्स में सरकारी राषि को13 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015 जमा करने में मौन सहमति दी गयी है। श्री यादव को सरकारी राषि के घोटालाबाजी में संलिप्त रहने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संच ालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के ालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के ालन पदाधिकारी ने आरोपित लिपिक के उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संच उक्त साक्ष्य एवं स्पष्टीकरण के आधार पर संच विरुद्ध तृतीय आरोप को भी सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध तृतीय आरोप को भी सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध तृतीय आरोप को भी सत्य एवं प्रमाणित पाया। विरुद्ध तृतीय आरोप को भी सत्य एवं प्रमाणित पाया। समस्त बिन्दुओं पर विचार करने के उपरांत संचालन पदाधिकारी का अंतिम विवेचना है कि श्री यादव के विरुद्ध प्रपत्र-''क'' में गठित सभी तीनों आरोप सत्य एवं प्रमाणित है तथा उनकी दृष्टि में अनियमितता से अनुचित लाभ प्राप्त करने की मंषा कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही, वित्तीय अनुषासनहीनता, वित्तीय घोटाला में पूर्ण रुपेण मानसिक एवं भौतिक रुप से संलिप्त पाते हुये श्री यादव को दोषी पाया गया है। उनकी अनुषंसा है कि सरकारी मार्गदर्षिका के उल्लंघन एवं सरकारी राषि की अनियमितता करने के लिए श्री यादव कानूनी रुप से दण्ड के भागी है। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री अम्बा प्रसाद यादव, निलंबित प्रधान लिपिक, प्रखंड कार्यालय, सिकटी को जिलाधिकारी के आदेष ज्ञापांक 182/स्था0, दिनांक 08.02.2010 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करते हुये निलंबन/विभागीय कार्यवाही से मुक्त किया गया। (i) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम (iii) में निहित प्रावधान के अंतर्गत सरकार को पहुँचायी गयी वित्तीय हानि मो0 270.25 लाख रुपये की आंषिक राषि मो0 9008333.00 रुपये श्री अम्बा प्रसाद यादव के वेतन से वसूली की जायेगी।
(ii) श्री यादव को निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा। इसकी प्रविष्टि श्री यादव के सेवापुस्त में कर दी जाय।
जिलाधिकारी, अररिया के उक्त आदेष ज्ञापांक 182/स्था0, दिनांक 08.02.10 के विरुद्ध श्री अम्बा प्रसाद यादव के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-7899/2010 दाखिल किया गया। सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 7899/2010 अम्बा प्रसाद यादव बनाम बिहार सरकार अन्य में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा पारित आदेष दिनांक 13.10.11 की प्रमाणित सच्ची प्रतिलिपि की छायाप्रति संलग्न कर श्री अम्बा प्रसाद यादव, लेखा लिपिक, तत्कालीन प्रधान सहायक, सिकटी प्रखंड कार्यालय द्वारा 15.11. 11 को जिलाधिकारी, अररिया के समक्ष इस आषय का आवेदन दिया गया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेष दिनांक 13.10.2011 के आलोक में आवष्यक कार्रवाई करते हुए उनपर लगाये गये आरोप पर पुनर्विचार कर उन्हें आरोप से मुक्त किया जाय। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-7899/2010 अम्बा प्रसाद यादव बनाम बिहार सरकार एवं अन्य में पारित आदेष दिनांक 13.10.2011 के आलोक में श्री अम्बा प्रसाद यादव, प्रधान सहायक, सिकटी प्रखंड प्रतिनियुक्त जिला कोषागार, अररिया से जिलाधिकारी के ज्ञापांक 1307/स्था0, दिनांक 09.12.2011 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री यादव से स्पष्टीकरण का जवाब ससमय प्राप्त नहीं होने पर उन्हें कार्यालय के ज्ञापांक 108/स्था0, दिनांक 06.02.2012 एवं 492/स्था0, दिनांक 04.06.2012 द्वारा जवाब दाखिल करने हेतु स्मारित किया गया। श्री अम्बा प्रसाद यादव, प्रतिनियुक्त, लेखा लिपिक, जिला कोषागार, अररिया द्वारा दिनांक 09.06.2012 को कारणपृच्छा जवाब दाखिल किया गया। श्री यादव द्वारा समर्पित कारणपृच्छा के अवलोकन से स्पष्ट है कि कारणपृच्छा जवाब में कोई नया तथ्य उल्लिखित नहीं है। कारणपृच्छा में वही तथ्य उल्लेखित है जो आरोपी द्वारा संचालन पदाधिकारी (अपर समाहर्त्ता, अररिया) के समक्ष समर्पित किया गया था, फलस्वरुप इसे अस्वीकृत किया गया। श्री यादव द्वारा इतने बड़े कुकृत्य में इनकी संलिप्तता तथा सरकार को काफी बड़ी राषि को हानि पहुँचाने के मद्देनजर भविष्य में इनसे कोई सरकारी कार्य लेना समाज, जिला प्रषासन और सरकार के हित में एकदम संभव नहीं है। उपर्युक्त तथ्यों, संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही का संचालन पूर्ण करने के उपरांत प्रेषित जाँच प्रतिवेदन एवं साक्ष्यों तथा द्वितीय कारणपृच्छा के समीक्षोपरांत आरोपी श्री अम्बा प्रसाद यादव, प्रधान लिपिक, प्रखंड कार्यालय, सिकटी के विरुद्ध प्रपत्र-''क'' के सभी आरोप प्रमाणित होते है। आरोप के विरुद्ध आरोपी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण/कारणपृच्छा तथ्यहीन एवं वास्तविकता से परे है। इनके विरुद्ध लगाये गये आरोप गंभीर प्रकृति के है्र और सरकारी सेवा से बर्खास्त किये जाने का यथेष्ट/पर्याप्त कारण है। अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(x) में निहित प्रावधानों के तहत् प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मैं अजय कुमार चौधरी, भा0प्र0से0, समाहर्त्ता-सह-जिला दण्डाधिकारी, अररिया यथा उपर वर्णित14 (cid:18)बहार गजट, 25 फरवर(cid:15) 2015 आरोपों के प्रमाणित पाये जाने के फलस्वरुप श्री अम्बा प्रसाद यादव, प्रधान लिपिक, प्रखंड कार्यालय, सिकटी को आदेष निर्गत होने की तिथि के अपराह्न से सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismiss) करता हूँ। साथ ही श्री यादव को आदेष दिया जाता है कि उन पर अधिरोपित वसूलनीय राषि मो0 90,08,333.00 (नब्बे लाख आठ हजार तीन सौ तैंतीस) रुपये आदेष प्राप्ति के 30 दिनों के अंदर प्रखंड कार्यालय, सिकटी में जमा करें, अन्यथा Public Demand and Recovery Act के अन्तर्गत वसूल करने की कार्रवाई की जायेगी, जिस हेतु प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिकटी को प्राधिकृत किया जाता है।
श्री अम्बा प्रसाद यादव से संबंधित सूचना निम्नवत है :- 1. नाम ः- श्री अम्बा प्रसाद यादव 2. पिता ः- स्व0 योगी यादव 3. पदनाम ः- लेखा लिपिक (प्रधान सहायक) 4. जन्म तिथि ः- 11.08.1961 5. नियुक्ति की तिथि ः- 05.02.1983 6. स्थायी पता ः- ग्राम-देवगाँव, पो0-धुमनगर,
थाना-आजमनगर, जिला-कटिहार
आदेश से, समाहर्त्ता-सह-जिला दण्डाधिकारी, अररिया।
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