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सं0 11/एम0(विविध)-03/2015—679(11)
स्वास्थ्य विभाग
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संकल्प
20 अगस्त 2015
1. परिचय
से प्रभावित रहे हैं। राज्य सरकार की पहल पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई जिले मस्तिष्क ज्वर (ए0ई0एस0) से प्रभावित रहे हैं। राज्य सरकार की पहल पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई जिले मस्तिष्क ज्वर से विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित जिलों का भ्रमण कर मरीजों के रक्त के नमूने इकट्ठा कर जाँच एवं शोध हेतु विभिन्न से विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित जिलों का भ्रमण कर मरीजों के रक्त के नमूने इकट्ठा कर जाँच एवं शोध हेतु विभिन्न से विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित जिलों का भ्रमण कर मरीजों के रक्त के नमूने इकट्ठा कर जाँच एवं शोध हेतु विभिन्न स्थलों पर भेजा गया है, परन्तु अभी तक मस्तिष्क ज्वर के कारणों का पता नहीं चल पाया है। फलतः मस्तिष्क ज् स्थलों पर भेजा गया है, परन्तु अभी तक मस्तिष्क ज्वर के कारणों का पता नहीं चल पाया है। फलतः मस्तिष्क ज्वर से स्थलों पर भेजा गया है, परन्तु अभी तक मस्तिष्क ज्वर के कारणों का पता नहीं चल पाया है। फलतः मस्तिष्क ज् पीड़ित बच्चों का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है। राज्य के कतिपय जिले जापानी इंसेफ्लाईटिस से भी पीड़ित बच्चों का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है। राज्य के कतिपय जिले जापानी इंसे पीड़ित बच्चों का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है। राज्य के कतिपय जिले जापानी इंसे प्रभावित हैं, परन्तु उन जिलों में सघन टीकाकरण एवं त्वरित इलाज द्वारा इस रोग की विभीषिका पर काबू पाने में प्रभावित हैं, परन्तु उन जिलों में सघन टीकाकरण एवं त्वरित इलाज द्वारा इस रोग की विभीषिका पर काबू पाने में प्रभावित हैं, परन्तु उन जिलों में सघन टीकाकरण एवं त्वरित इलाज द्वारा इस रोग की विभीषिका पर काबू पाने में सफलता मिली है।
पीड़ितों के इलाज के लिए पूरी तरह तत्पर है। इसी क्रम में मस्तिष्क ज्वर संबंधी राज्य सरकार मस्तिष्क ज्वर पीड़ितों के इलाज के लिए पूरी तरह तत्पर है। इसी क्रम में मस्तिष्क ज्वर संबंधी राज्य सरकार मस्तिष्क ज्वर राज्य कार्य बल का गठन किया गया है। इस कार्य बल में राज्य के जाने-माने शिशु रोग विशेषज्ञ एवं चिकित्सकों को राज्य कार्य बल का गठन किया गया है। इस कार्य बल में राज्य के जाने-माने शिशु रोग विशेषज्ञ एवं चिकित्सकों को राज्य कार्य बल का गठन किया गया है। इस कार्य बल में राज्य के जाने-माने शिशु रोग विशेषज्ञ एवं चिकित्सकों को शामिल किया गया है। राज्य कार्य बल ने रोगियों के उपचार के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का सूत्रण किया है, शामिल किया गया है। राज्य कार्य बल ने रोगियों के उपचार के लिए मानक संचालन प्र शामिल किया गया है। राज्य कार्य बल ने रोगियों के उपचार के लिए मानक संचालन प्र जिसमें मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार गॉव से लेकर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों तक इलाज की प्रक्रिया जिसमें मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार गॉव से लेकर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों तक इलाज की प्रक्रिया जिसमें मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार गॉव से लेकर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों तक इलाज की प्रक्रिया का विस्तृत उल्लेख किया गया है। का विस्तृत उल्लेख किया गया है। 2. समस्या का परिणाम
यद्यपि मुजफ्फरपुर एवं गया इस रोग से सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं, परन्तु राज्य के सभी 38 जिलों से यद्यपि मुजफ्फरपुर एवं गया इस रोग से सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं, परन्तु राज्य के सभी 38 जि यद्यपि मुजफ्फरपुर एवं गया इस रोग से सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं, परन्तु राज्य के सभी 38 जि की घटना सूचित की गयी है। बिहार सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए अथक प्रयास किये हैं एवं केस बिहार सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए अथक प्रयास किये हैं एवं केस ए0ई0एस0 की घटना सूचित की गयी है। ए0ई0एस0 से प्रभावित होने के पश्चात् पक्षाघात, फटालिटी रेट को कम करने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। फटालिटी रेट को कम करने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। ए0ई0एस0 से प्रभावित होने के पश्चात् पक्षाघात, फ्फरपुर जिलों में 1 से 3 वर्ष के बच्चे मस्तिष्क क्षति या अन्य गंभीर स्थायी बीमारी के रूप में विकसित हो जाता है। मुजफ्फरपुर जिलों में 1 से 3 वर्ष के बच्चे मस्तिष्क क्षति या अन्य गंभीर स्थायी बीमारी के रूप मे /जेई घटना से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, वही गया जिले में 3 से 10 वर्ष के बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित हो ए0ई0एस0/जेई घटना से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, वही गया जिले में 3 से 10 वर्ष के बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित हो /जेई घटना से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, वही गया जिले में 3 से 10 वर्ष के बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। 3. राज्य सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई
• मरीज के नैदानिक प्रबंधन के
प्रक्रिया (एस.ओ.पी) विकसित राज्य सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई मरीज के नैदानिक प्रबंधन के एक महत्वपूर्ण टूल के रूप में मानक संचालन प्रक्रिया किया गया है, जिससे सामुदायिक एवं अस्पताल स्तर पर ए0ई0एस0 घटना का प्रबंधन किया जा सके। किया गया है, जिससे सामुदायिक एवं अस्पताल स्तर पर ए0ई0एस0 घटना का प्रबंधन किया जा सके। किया गया है, जिससे सामुदायिक एवं अस्पताल स्तर पर ए0ई0एस0 घटना का प्रबंधन किया जा सके।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 27 अग(cid:16)त 2015 • स्वास्थ्य विभाग ने ए0ई0एस0 के लिए आपातकालीन तैयारियॉ एवं कार्य योजना के विकास पर जोर दिया है। इसके लिए संस्थान स्तर पर मानदंड विकसित किए गए हैं। कार्य योजना का मुख्य उद्देश्य है कि ए0ई0एस0 के मामले आने से पहले ही इसकी रोकथाम की पूरी तैयारी की जाए। इस हेतु पॉंच आयामी रणनीति अपनायी गयी है, जिसमें एईएस के प्रकोप को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान, मामलों का सक्रियता से खोज, मामलों के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाना, कड़ी समीक्षा एवं निगरानी और मुफ्त सेवायें उपलब्ध कराना शामिल हैं ।
4. ए0ई0एस0/जे0ई0 फैलने के कारण की पहचान करने में बहुत सारी संस्थाएॅ, शैक्षणिक संस्थान, शोध करने वाली संस्थाएॅ साथ ही राज्य एवं जिला प्रशासन शामिल हैं। ए0ई0एस0/जे0ई0 पर एक कार्यशाला माननीय मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एम्स, पटना के विशेषज्ञ, आर0एम0आर0आई0, बिहार सरकार के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, यूनिसेफ, बिहार एवं अन्य डेवलपमेंट पार्टनर के प्रतिनिधि की उपस्थिति में की गई, जिसमें माननीय मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि एक उच्चस्तरीय समिति की स्थापना की जाय, जिसमें उच्च तकनीकि कर्मियों और विशेषज्ञों को शामिल किया जाय, जो राज्य सरकार को इस दिशा में उचित सुझाव दे सके। 5. संरचना
प्रधान सचिव, स्वास्थ्य, बिहार सरकार की अध्यक्षता मंें राज्य कोर कमिटि के सदस्यों की संरचना इस प्रकार होगी :-
1. प्रधान सचिव, स्वास्थ्य - अध्यक्ष 2. निदेशक, एम्स, पटना - सदस्य 3. निदेशक, मौसम विज्ञान विभाग - सदस्य 4. निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार - सदस्य 5. निदेशक, आर.एम.आर.आई., पटना - सदस्य 6. विभागाध्यक्ष, शिशु विभाग-एस.के.एम.सी.एच., मुजफ्फरपुर एवं ए.एन.एम.एम.सी.एच,गया- सदस्य 7. डॉ0 जी॰एस॰ सहनी, असिस्टेंट प्रोफेसर, शिशु विभाग, एस.के.एम.सी.एच., मुजफ्फरपुर-सदस्य 8. डॉ0 संजय, असिस्टेंट प्रोफेसर, तंत्रिका विज्ञान विभाग, पी.एम.सी.एच.,पटना 9. डॉ0 ए0 के0 ठाकुर, भूतपूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, शिशु विभाग, एन.एम.सी.एच., पटना 10. डॉ0 निगम प्रकाश नारायण, भूतपूर्व एसोसिएट प्रोफेसर, शिशु विभाग, पी.एम.सी.एच., पटना 11. डॉ0 एस0एन0 आर्या, सीनियर कंसलटेंट फिजीसियन 12. डॉ0 एस0पी0 श्रीवास्तव, भूतपूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पी.एम.सी.एच., पटना 13. डॉ॰ घनश्याम शेठ्ठी, यूनीसेफ - सदस्य 14. डॉ॰ एम॰पी॰ शर्मा, एस॰पी॰ओ॰ (ए॰ई॰एस॰/जे॰ई॰) - सदस्य सचिव 15. बी0एम0जी0एफ0, द्वारा नामित एक प्रतिनिधि (तकनीकी विशेषज्ञ) -सदस्य
6. कार्य एवं उारदायित्व 6.1 अनुसंधान गतिविधियों की अगुआई ः- राज्य कोर कमिटि का सबसे मुख्य दायित्व यह होगा कि यह बिहार सरकार के लिए थिंक टैंक के रूप में कार्य करेगी तथा मार्गदर्शन करेगी। कमिटि द्वारा अनुसंधान प्रकाशनों का विश्लेषण किया जायेगा तथा बीमारी फैलने के कारक एवं राष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय रोकथाम के प्रयासों और किये जा रहे कार्याें के साथ समन्वय स्थापित किया जायेगा। यह सभी प्रकार के शोधाें में समन्वय एवं संबंध स्थापित कर यह पता करेगी कि बिहार के परिप्रेक्ष्य में ए0ई0एस0/जे0ई0 होने का मुख्य कारण क्या है।
6.2. मुजफ्फरपुर एवं गोरखपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बीच में समन्वय स्थापित करना ः- बिहार के ए0ई0एस0/जे0ई0 के मामले गोरखपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज हेतु जाते हैं। राज्य कोर कमिटि यह प्रयास करेगी कि मुजफ्फरपुर एवं गोरखपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बीच में प्रभावशाली समन्वय स्थापित हो और वहॉ हो रहे अच्छे पहल एवं मामलों का प्रबंधन किस तरह प्रभावशाली ढंग से किया जा रहा है, को देखा जाए।
6.3. मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.)/आपातकालीन तैयारियॉ एवं कार्य योजना (ई.पी.आर.पी.) का पुनः संशोधनः - राज्य कोर कमिटि समय-समय पर मानक संचालन प्रक्रिया/आपातकालीन तैयारियॉ एवं कार्य योजना के पुनरीक्षण का कार्य करेगी। साथ ही शोध कार्यक्रम में प्रगति का भी अनुश्रवण करेगी। यह मानक संचालन प्रक्रिया/आपातकालीन तैयारियॉ एवं कार्य योजना में तकनीकि इनपुट देगी, ताकि यह अधिक मजबूत एवं प्रभावशाली बन सके। एईएस/जेई हेतु नीति निर्धारण में यह कमिटि बिहार सरकार की मदद करेगी।
6.4. ए0ई0एस0 मामलों का लाईन लिस्टिंग एवं ट्रेकिंग ः- महामारी के बाद यह आवश्यक है कि लाईन लिस्टिंग की जाय। साथ ही पुनर्वास के मामलों का ट्रेकिंग किया जाय। इसके लिए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के संबंधित अधीक्षक एक चिकित्सक को नामित व अधिकृत करेंगे, जिनके द्वारा ऐसे मामलाें का लाईन लिस्टिंग किया जायेगा ।
6.5. ए0ई0एस0/जे0ई0 प्रकोप की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय एवं अन्र्तराज्य निकायों के साथ समन्वय स्थापित करना :- यह कमिटि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण3 !बहार गजट (असाधारण), 27 अग(cid:16)त 2015 कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय स्तर के शोध नेटवर्क के साथ समन्वय स्थापित कर एईएस/जेई के महामारी पर प्रभावशाली रोकथाम का कार्य करेगी।
6.6. ए0ई0एस0/जे0ई0 गतिविधियों की समीक्षा :- कमिटि आपातकालीन तैयारियॉ एवं प्रतिक्रिया योजना के कार्यों की समीक्षा एवं निगरानी करेगी साथ ही जमीनी हालात के अनुरूप सिफारिशें भी करेगी। कमिटि ए0ई0एस0/जे0ई0 महामारी के दरम्यान आवश्यकतानुसार तथा जब महामारी न हो तो तीन महीने में एक बार बैठक करेगी ।
7. इस पूरे कार्यक्रम के अनुश्रवण एवं रोकथाम हेतु यूनिसेफ, पटना, बिहार सचिवालय के रूप में कार्य करेगा, जिसमें समन्वय Facilitation शोध कार्य, भ्रमण आदि के लिए व्यय का वहन यूनिसेफ द्वारा किया जायेगा। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि सर्वसाधारण की जानकारी हेतु इसे राज्य पत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह0) अस्पष्ट, सरकार के संयुक्त सचिव।
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[ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) %&%'5)1+5,,'ड(cid:17),ट.,प(cid:17),? Website: http://egazette.bih.nic.in