(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:20)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत (cid:23) भा(cid:14) 1(cid:19)3(cid:26) (cid:27)श(cid:15)(cid:28)
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पटन(cid:4)(cid:29) श१(cid:31)व(cid:4)र, 2(cid:20) [ग#त 2(cid:15)15 सं0 04/HFA-06/2015—3812
नगर विकास एवं आवास विभाग
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संकल्प
26 अगस्त 2015
भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्गदर्शिका एवं समय-समय पर प्राप्त होने वाले दिशानिर्देश के आलोक विषयः-भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्गदर्शिका एवं समय-समय पर प्राप्त होने वाले दिशानिर्देश के आलोक भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्गदर्शिका एवं समय-समय पर प्राप्त होने वाले दिशानिर्देश के आलोक में राज्य में ''सबके लिए आवास (शहरी) योजना'' के कार्यान्वयन की स्वीकृति एवं भारत सरकार से में राज्य में ''सबके लिए आवास (शहरी) योजना'' के कार्यान्वयन की स्वीकृति एवं भारत सरकार से में राज्य में ''सबके लिए आवास (शहरी) योजना'' के कार्यान्वयन की स्वीकृति एवं भारत सरकार से समय-समय पर प्राप्त होने वाली धन राशि के आलोक में बजटीय उपबंध के अन्तर्गत समय-समय पर प्राप्त होने वाली धन राशि के आलोक में बजटीय उपबंध के अन्तर्गत राज्यांश की
लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का आनुपातिक राशि के व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति एवं लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का आनुपातिक राशि के व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति एवं
50 लाख रूपये प्रति आवास के अतिरिक्त राज्य सरकार का अंशदान निर्माण योजना में केन्द्रांश 1.50 लाख रूपये प्रति आवास के अतिरिक्त राज्य सरकार का अंशदान निर्माण योजना में केन्द्रांश 1
50,000/-रू0 प्रति आवास की स्वीकृति। 50,000/-रू0 प्रति आवास की स्वीकृति।
आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ''सबके लिए आवास (शहरी) आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय
सबके लिए आवास (शहरी)'' योजना का 2015 से किया गया है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2022 तक शहरी क्षेत्रों में निवास कर रहे शुभारंभ दिनांक 17.06.2015 से किया गया है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2022 तक शहरी क्षेत्रों में निवास कर रहे 2015 से किया गया है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2022 तक शहरी क्षेत्रों में निवास कर रहे आवासविहीन परिवारों को कम से कम 30 वर्गमीटर का पक्का आवास उपलब्ध कराना है। योजना के कार्यान्वयन हेतु आवासविहीन परिवारों को कम से कम 30 वर्गमीटर का पक्का आवास उपलब्ध कराना है। योजना के कार्यान् आवासविहीन परिवारों को कम से कम 30 वर्गमीटर का पक्का आवास उपलब्ध कराना है। योजना के कार्यान् मंत्रालय द्वारा मार्गदर्शिका जारी की गयी है । मंत्रालय द्वारा मार्गदर्शिका जारी की गयी है ।
2. इस योजना के निम्नलिखित चार घटक हैः-
इस योजना के निम्नलिखित चार घटक हैः-
I. ''In-situ'' Slum Redevelopment.
situ'' Slum Redevelopment. (स्व-स्थाने स्लम पुनर्विकास)
(स्व-स्थाने स्लम पुनर्विकास):- इसका उद्देश्य पात्र स्लम वासियों को औपचारिक शहरी व्यवस्था में लाते हुए उनको पक्का आवास उपलब्ध कराने के स्लम वासियों को औपचारिक शहरी व्यवस्था में लाते हुए उनको पक्का आवास उपलब्ध स्लम वासियों को औपचारिक शहरी व्यवस्था में लाते हुए उनको पक्का आवास उपलब्ध
ग क्षमता बढ़ाना है। स्लम पुनर्विकास के लिए निजी भागीदार लिए स्लमों के अन्तर्गत भूमि की उपयोग क्षमता बढ़ाना है। स्लम पुनर्विकास के लिए निजी भागीदार लिए स्लमों के अन्तर्गत भूमि की उप2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 28 अग(cid:27)त 2015 का चयन खुली बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए केन्द्र सरकार से एक लाख रूपया प्रति आवास की दर से अनुदान अनुमान्य होगा।
II. Affordable hosing through credit linked subsidy. (ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी योजना) :- इस घटक के अन्तर्गत शहरी गरीबों की आवास की जरूरतों के लिए संस्थागत ऋण प्रवाह को बढ़ाने के लिए मांग पक्ष व्यवस्था के रूप में ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी घटक का कार्यान्वयन किया जाएगा। पात्र शहरी गरीबों (EWS/LIG) द्वारा आवास के निर्माण के लिए लिये गये गृह ऋण पर ऋण आधारित सब्सिडी दी जाएगी।
EWS एवं LIG के लाभार्थी जो बैंकों से गृह निर्माण की मांग करेंगे वे 6.5% की दर पर 15 वर्षों की अवधि के लिए अथवा ऋण अवधि के दौरान, इसमें जो कम हो, के लिए ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र होंगे। ऋण आधारित सब्सिडी केवल छः लाख रूपये तक की ऋण राशि के लिए उपलब्ध होगी तथा छः लाख रूपये से अधिक का ऋण गैर सब्सिडीकृत दर पर होगा। ब्याज सब्सिडी ऋणदाता संस्थाओं के माध्यम से लाभार्थियों के ऋण खाते में अग्रिम के रूप में जमा की जाएगी। ब्याज पर अनुदान की राशि पूर्वतः केन्द्रॉश के रूप में देय होगा।
इसके अन्तर्गत विस्तारणीय आवास के रूप में मौजूदा आवासों के लिए नये निर्माण और कमरों का विस्तार, रसोई, शौचालय आदि के निर्माण हेतु भी ऋण उपलब्ध होगी।
III. Affordable housing in partnership. (भागीदारी से किफायती आवास) ः- यह एक आपूर्ति आधारित व्यवस्था है । इस घटक के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा विभिन्न भागीदारी से बनाये जा रहे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। किफायती दर पर EWS वर्ग के लिए आवासों की उपलब्घता बढ़ाने हेतु राज्य सरकार अपनी एजेंसियों अथवा उद्योग सहित निजी क्षेत्र के साथ भागीदारी के माध्यम से किफायती आवास परियोजनाओं की योजना तैयार कर सकती हैं। ऐसी परियोजनाओं में 1.5 लाख रूपये की दर से केन्द्रीय सहायता सभी EWS आवासों के लिए उपलब्ध होगी। किफायती आवास योजना विभिन्न श्रेणियों के लिए आवासो का योग हो सकता है, परन्तु यह केन्द्रीय सहायता का पात्र तभी होगा यदि परियोजना में आवासों का कम से कम 35% EWS के लिए आरक्षित होगा तथा एक परियोजना में कम से कम 250 आवास हो। IV. Subsidy for beneficiary-led individual housing construction. (लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का निर्माण) :- योजना के इस घटक के अंतर्गत मिशन के अन्य घटकों का लाभ लेने में अक्षम लाभार्थियों को शामिल कर स्वयं उनके द्वारा नये आवासों के निर्माण अथवा मौजूदा आवास के सुधार के लिए आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी से सम्बद्ध वैयक्तिक पात्र परिवारों को सहायता देना है। इस मिशन के अंतर्गत ऐसे पात्र परिवार को नये आवासों के निर्माण के लिए 1.50 लाख रू0 (एक लाख पचास हजार रू0) की केन्द्रीय सहायता प्राप्त होगी । यह प्रस्ताव है कि उसके उपर राज्य सरकार भी राशि 0.50 लाख रू0 (पचास हजार रू0) प्रति आवासीय इकाई देगी। 3. कार्यान्वयन की प्रक्रिया :- प्रथम कदम के रूप में राज्य/संघ क्षेत्र और केन्द्र के बीच (MOA) करार ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे। प्रथम चरण में इस शर्त का अनुपालन करते हुए MOA पर हस्ताक्षर कर मंत्रालय को प्रेषित किया जा चुका है।3 (cid:31)बहार गजट (असाधारण), 28 अग(cid:27)त 2015 योजना के अधीन सभी नगर निकायों से कार्य योजना एवं वार्षिक कार्यान्वयन योजना (AIP) आंमत्रित किया जाना है। इसके लिए सभी नगर निकायों से विहित प्रपत्र में कार्य योजना/वार्षिक कार्यान्वयन योजना समर्पित करने का निर्देश दिया गया है।
प्रौद्योगिकी उप-मिशन
मिशन के अंतर्गत आवासों के तीव्र एवं गुणवत्तापरक निर्माण के लिए आधुनिक, अभिनव एवं हरित प्रोद्योगिकियों तथा भवन सामग्री को अपनाने के लिए एक प्रौद्योगिकी उप-मिशन की स्थापना की जाएगी। उप-मिशन पारंपरिक निर्माण के स्थान पर आधुनिक निर्माण प्रौद्योगिकियों एवं भवन निर्माण सामग्री को बढावा देने के लिए विभिन्न विनियामक एवं प्रशासनिक इकाइयों के साथ समन्वय करेगा। उप-मिशन निम्नलिखित पहलुओं पर कार्य करेगाः (i) प्रारूप एवं योजना (ii) अभिनव प्रौद्योगिकी एवं सामग्री (iii) प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करके हरित भवन और (iv) भूकंप एवं अन्य आपदा रोधी प्रौद्योगिकी एवं प्रारूप।
केन्द्र सरकार की भूमि पर स्लमकेन्द्र सरकार की भूमि पर स्लमकेन्द्र सरकार की भूमि पर स्लमकेन्द्र सरकार की भूमि पर स्लम
केन्द्र सरकार की भूमि स्वामित्व एजेन्सियों को स्लम निवासियों को आवास उपलब्ध कराने के लिए स्लमों द्वारा काबिज अपनी भूमि का संसाधन के रूप में प्रयोग द्वारा ''स्वस्थाने'' स्लम पुनर्विकास भी शुरू करना चाहिए। पुनस्र्थापन की स्थिति में, एजेंसी को या तो भूमि अपने आप मुहैया करानी चाहिए अथवा एजेंसी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/शहर से भूमि प्राप्त करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ सहयोग करना चाहिए। केन्द्र सरकार एजेंसियों को पात्र स्लमवासियों के आवास के प्रयोजनार्थ उपयोग की गई भूमि के लिए भूमि लागतें नहीं लेनी चाहिए।
अनिवार्य शर्तेंअनिवार्य शर्तेंअनिवार्य शर्तेंअनिवार्य शर्तें
शहरी भूमि की उपलब्धता कमजोर वर्गों सहित सभी के लिए आवास मुहैया कराने में सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए, प्रशासनिक और विनियामक अवरोधों को दूर करने के लिए किफयाती आवास सहित आवास क्षेत्र का विकास करने के लिए मिशन में अनिवार्य शर्तें शामिल की गई है। मिशन में भाग लेने तथा केन्द्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को निम्नलिखित अनिवार्य शर्ताेंं को पूरा करने हेतु सहमत होना चाहिएः- यदि भूमि अथवा क्षेत्र पहले ही नगर के मास्टर प्लान में निर्धारित रिहायशी जोन में आते है तो राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का पृथक गैर-कृषि (एनए) अनुमति के लिए आवश्यकता को समाप्त करने हेतु क्रियाविधि और नियमों में समुचित परिर्वतन करने होंगे।
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र किफायती आवास के लिए भूमि का निर्धारण करते हुए अपने-अपने मास्टर प्लान तैयार/संशोधित करंेंगे।
शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर ले आउट अनुमोदन तथा भवन निर्माण की अनुमति के लिए एकल खिड़की, समयबद्व मंजूरी सुनिश्चित करने हेतु एक प्रणाली कार्यान्वित की जानी चाहिए।
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र ईडब्ल्यूएस/ एलआईजी आवास के लिए पूर्व-अनुमोदित ले आउट तथा भवन-निर्माण नक्शों के आधार पर मान्य भवन-निर्माण अनुमति तथा ले-आउट अनुमोदन के दृष्टिकोण को अपनाएंगे अथवा कतिपय निर्मित क्षेत्रफल अथवा भूखंड क्षेत्रफल से कम क्षेत्र के आवासों के लिए अनुमोदन से छूट देंगे। मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मॉडल किराया अधिनियम की तर्ज पर राज्य/संघ राज्य क्षेत्र या तो किराया कानून बनाएंगे अथवा मौजूदा किराया कानूनों में संशोधन करेंगे।
राज्य /संघ राज्य क्षेत्र यदि आवश्यक हो तो स्लम पुनर्विकास तथा निम्न लागत आवास के लिए अतिरिक्त एफएआर/एफएसआई टीडीआर मुहैया कराएंगे और सघनता मानदंडों में ढील देंगे।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 28 अग(cid:27)त 2015 क्षमता निर्माण और प्रशासनिक गतिविधियाँ इस स्कीम के अंतर्गत 5% आवंटन क्षमता निर्माण, सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) और प्रशासनिक और अन्य व्यय (ए एडं ओई) के लिए निर्धारित किया गया है। इस शीर्ष के अंतर्गत उपलब्ध आवंटन का उपयोग मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित विभिन्न कार्यकलापों हेतु किया जाएगा।
प्रशासन और कार्यान्वयन ढ़ांचा
मिशन के कार्यान्वयन, उसके अन्तर्गत अनुमोदन और निगरानी के लिए एक अन्तर - मंत्रालयी समिति अर्थात केन्द्रीय स्वीकृति और निगरानी समिति (सीएसएमसी) का गठन सचिव (MoHUPA) की अध्यक्षता में किया जायेगा। सीएसएमसी की संरचना और इसके निदेशात्मक कार्य मार्गदर्शिका में दिये गये हैं।
मिशन के विभिन्न संघटकों के अन्तर्गत कार्य योजनाओें और परियोजनाओं के अनुमोदन के लिए अन्तरविभागीय राज्य स्तरीय स्वीकृति और निगरानी समितियों (एसएलएसएमसी) का गठन का प्रस्ताव मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में किया जाना प्रस्तावित है।
मिशन के अन्तर्गत राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी (एसएलएनए) का पता लगाना होगा जिसमें स्कीम के समन्वय और सुधार - संबद्ध कार्यकलापों के लिए राज्य स्तरीय मिशन निदेशालय गठित किया जायेगा ।
यूएलबी/कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत डीपीआर के तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन करने के लिए राज्य/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति (एसएलएसी) का गठन भी किया जा सकता है। एसएलएसी अपनी मूल्यांकन रिपोर्टो को अपनी टिप्पणियों और संस्तुतियों सहित, एसएलएसएमसी का अनुमोदन प्राप्त करने के लिए, एसएलएनए को प्रस्तुत करेगी।
निगरानी और मूल्यांकन
मिशन की निगरानी सभी तीन स्तरों पर की जायेगी ः नगर, राज्य और केन्द्र सरकार। सीएसएमसी एचएफएपीओए की तैयारी, वार्षिक कार्यान्वयन योजनाओं (एआईपी) और परियोजना कार्यान्वयन की निगरानी करेगी। मिशन द्वारा उपयुक्त निगरानी तंत्र विकसित किया जायेगा। राज्यों और नगरों के लिए मिशन और उसके विभिन्न संघटकों की प्रगति के लिए निगरानी तंत्र विकसित किया जायेगा। राज्यों और नगरों के लिए भी मिशन और उसके विभिन्न संघटकों की प्रगति के लिए निगरानी तंत्र का विकास करना अपेक्षित होगा।
4. योजना के लिए आवश्यक निधि के स्रोतः- सबके लिए आवास (शहरी) योजना आवास एवं शहरी गरीबी उपशनम मंत्रालय द्वारा सम्पोषित योजना है। इस योजना के चार घटकों में भारत सरकार द्वारा आवास निर्माण हेतु निधि की व्यवस्था की जायेगी। योजना के चौथे घटक Subsidy for beneficiary-led individual housing construction. (लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का निर्माण) हेतु केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि 1.50 लाख रू0 प्रति इकाई के विरूद्ध राज्य सरकार द्वारा 0.50 लाख (पचास हजार रू0) राज्यांश की राशि दी जायेगी। इस योजना में वित्तीय वर्ष 2015-16 से वित्तीय वर्ष 2021-22 तक कुल लगभग 2.00 लाख आवास बनाये जायेंगे। प्रति वर्ष औसतन 30,000 आवास बनाये जायेंगे जिस पर प्रतिवर्ष 150 करोड़ रूपये का सालाना राज्यांश के व्यय का अनुमान है। 5555.... यह एक नई योजना है। अतः इस योजना के कार्यान्वयन हेतु बिहार शहरी विकास अभिकरण (बुडा) को SLNA नामित किया जाना प्रस्तावित है। इस योजना के कार्यान्वयन हेतु वांछित राशि State Level Nodal Agency, Bihar (BUDA), नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, के माध्यम से कार्यान्वयन एजेंसी/नगर निकायों को उपलब्ध कराया जायेगा।
6666.... योजना को मजबूती प्रदान करने हेतु प्रौद्योगिकी उप मिशन, क्षमता निर्माण और प्रशासनिक गतिविधियों, तृतीय पक्ष गुणवत्ता निगरानी एजेंसी (TPQMA), SLTC का गठन आदि का प्रावधान है, जिसके लिए केन्द्र सरकार5 (cid:31)बहार गजट (असाधारण), 28 अग(cid:27)त 2015 एवं राज्य सरकार द्वारा मार्गदर्शिका में अंकित प्रावधानों के अधीन वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी। योजना के कार्यान्वयन एवं संचालन हेतु राज्य सरकार द्वारा मार्गदर्शिका के आलोक में दिशा-निर्देश जारी किया जा सकेगा। 7777.... अतः भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्गदर्शिका एवं समय-समय पर प्राप्त होने वाले दिशानिर्देश के आलोक में राज्य में ''सबके लिए आवास (शहरी) योजना'' के कार्यान्वयन की स्वीकृति एवं भारत सरकार से समय-समय पर प्राप्त होने वाली धन राशि के आलोक में बजटीय उपबंध के अन्तर्गत राज्यांश की आनुपातिक राशि के व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति एवं लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का निर्माण योजना में केन्द्रांश 1.50 लाख रूपये (एक लाख पचास हजार रू0) प्रति आवास के अतिरिक्त राज्य सरकार का अंशदान 50,000/-रू0 (पचास हजार रू0) प्रति आवास की स्वीकृति प्रदान करने पर सरकार की सहमति संसूचित की जाती है।
आदेश :-यह आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प का बिहार राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय एवं इसकी प्रति सरकार के सभी विभागों/विभागाध्यक्षों/प्रमण्डलीय आयुक्तों/जिला पदाधिकारियों/नगर निकायों/महालेखाकार, बिहार, पटना को सूचनार्थ भेजी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
अमृत लाल मीणा,
सरकार के प्रधान सचिव।
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[ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16)
ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 9%&'5)1+2-0'ड(cid:17)-ट/-प(cid:17)-? Website: http://egazette.bih.nic.in