(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:20)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 24 भा(cid:14) 1(cid:25)3(cid:27) (cid:28)श(cid:15)(cid:29)
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सं0 03/स्मार्ट सिटी-22-03/2015—3952 नगर नगर नगर नगर विकास एवं आवास विभागविकास एवं आवास विभागविकास एवं आवास विभागविकास एवं आवास विभाग -------------------------------- संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 4444 सितम्बर 2015सितम्बर 2015सितम्बर 2015सितम्बर 2015 शहरी विकास मंंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्गदर्शिका एवं समय-समय पर प्राप्त होने वाले विषयः-विषयः-विषयः-विषयः-शहरी विकास मंंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्गदर्शिका एवं समय-समय पर प्राप्त होने वाले शहरी विकास मंंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्गदर्शिका एवं समय-समय पर प्राप्त होने वाले दिशानिर्देशों के आलोक में राज्य में Smart City योजना के कार्यान्वयन एवं मार्गदर्शिका के योजना के कार्यान्वयन एवं मार्गदर्शिका के दिशानिर्देशों के आलोक में राज्य में आलोक में राज्यांश के व्यय की सैद्धांतिक सहमति का प्रस्ताव। आलोक में राज्यांश के व्यय की सैद्धांतिक सहमति का प्रस्ताव। प्रावधानों के आलोक में राज्यांश के व्यय की सैद्धांतिक सहमति का प्रस्ताव। शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा Smart City योजना प्रारंभ की गयी है। इस मिशन का उद्देश्य शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा योजना प्रारंभ की गयी है। इस मिशन का उद्देश्य आर्थिक विकास करना और बेहतर स्थानीय क्षेत्र विकास और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विशेष तौर से प्रौद्योगिकी आर्थिक विकास करना और बेहतर स्थानीय क्षेत्र विकास और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विशेष तौर से प्रौद्योगि आर्थिक विकास करना और बेहतर स्थानीय क्षेत्र विकास और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विशेष तौर से प्रौद्योगि जो स्मार्ट परिणामों का मांग प्रशस्त करती है, से लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। क्षेत्र-आधारित जो स्मार्ट परिणामों का मांग प्रशस्त करती है, से लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। क्षेत्र-आधारित जो स्मार्ट परिणामों का मांग प्रशस्त करती है, से लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। क्षेत्र-आधारित विकास स्लमों समेत विद्यमान क्षेत्रों (रिट्रोफिट और पुनर्विकास) को बेहतर नियोजित क्षेत्रों में बदलेगा जिससे संपूर्ण शहर विकास स्लमों समेत विद्यमान क्षेत्रों (रिट्रोफिट और पुनर्विकास) को बेहतर नियोजित क्षेत्रों में बदलेगा जिससे संपूर्ण शहर विकास स्लमों समेत विद्यमान क्षेत्रों (रिट्रोफिट और पुनर्विकास) को बेहतर नियोजित क्षेत्रों में बदलेगा जिससे संपूर्ण शहर की वास-योग्यता बढ़ेगी। शहरी क्षेत्रों मे बढ़ रही जनसंख्या को स्थान मुहैया कराने के लिए शहरों के आस-पास नए री क्षेत्रों मे बढ़ रही जनसंख्या को स्थान मुहैया कराने के लिए शहरों के आस-पास नए री क्षेत्रों मे बढ़ रही जनसंख्या को स्थान मुहैया कराने के लिए शहरों के आस-पास नए क्षेत्रों (हरित क्षेत्र) को विकसित किया जाएगा। स्मार्ट समाधानों के प्रयोग से शहरी अवस्थापना और सेवाएं बढ़ाने के क्षेत्रों (हरित क्षेत्र) को विकसित किया जाएगा। स्मार्ट समाधानों के प्रयोग से शहरी अवस्थापना और सेवाएं बढ़ाने के क्षेत्रों (हरित क्षेत्र) को विकसित किया जाएगा। स्मार्ट समाधानों के प्रयोग से शहरी अवस्थापना और सेवाएं बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी, की जानकारी और आंकड़ो का उपयोग कर सकेंगे। इस तरीके से व्यापक विकास, जीवन की गुणवत्ता लिए प्रौद्योगिकी, की जानकारी और आंकड़ो का उपयोग कर सकेंगे। इस तरीके से व्यापक विकास, जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएगा, रोजगार उत्पन्न करेगा और सभी के लिए विशेष तौर से गरीबों और वंचितों की आय बढ़ाएगा जिससे समावेशी बढ़ाएगा, रोजगार उत्पन्न करेगा और सभी के लिए विशेष तौर से गरीबों और वंचितों की आय बढ़ाएगा जिससे समावेशी बढ़ाएगा, रोजगार उत्पन्न करेगा और सभी के लिए विशेष तौर से गरीबों और वंचितों की आय बढ़ाएगा जिससे समावेशी शहरों का मार्ग प्रशस्त होगा।
योजना का भौतिक आकार एवं कार्यान्वयन की समय सीमा :- 2222.... योजना का भौतिक आकार एवं कार्यान्वयन की समय सीमा :- योजना का भौतिक आकार एवं कार्यान्वयन की समय सीमा :- योजना का भौतिक आकार एवं कार्यान्वयन की समय सीमा :- योजना का भौतिक आकार एवं कार्यान्वयन की समय सीमा :- योजना का भौतिक आकार एवं कार्यान्वयन की समय सीमा :- योजना का भौतिक आकार एवं कार्यान्वयन की समय सीमा :- योजना का भौतिक आकार एवं कार्यान्वयन की समय सीमा :-
राज्य के चयनित नगर निकायों में लागू की जायेगी। यह वित्तीय वर्ष 2015-16
येगी। यह वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 यह योजना राज्य के चयनित नगर निकायों में लागू की जा तक पाँच वर्षों में कार्यान्वित होगी। तक पाँच वर्षों में कार्यान्वित होगी।
योजना के लिये आवश्यक निधि के स्रोत योजना के लिये आवश्यक निधि के स्रोत योजना के लिये आवश्यक निधि के स्रोत योजना के लिये आवश्यक निधि के स्रोत फंडिंग पैटर्न :-फंडिंग पैटर्न :-फंडिंग पैटर्न :-फंडिंग पैटर्न :-
3333.... योजना के लिये आवश्यक निधि के स्रोत योजना के लिये आवश्यक निधि के स्रोत योजना के लिये आवश्यक निधि के स्रोत योजना के लिये आवश्यक निधि के स्रोत स्मार्ट सिटी मिशन को एक केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम (सीएसएस) के रूप में चलाया जायेगा और केन्द्र सरकार स्मार्ट सिटी मिशन को एक केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम (सीएसएस) के रूप में चलाया जायेगा स्मार्ट सिटी मिशन को एक केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम (सीएसएस) के रूप में चलाया जायेगा द्वारा आगामी 5 वर्षों में प्रत्येक शहर को प्रति वर्ष 100 करोड़ रूपये की राशि दी जायेगी। इतनी ही राशि का योगदान, द्वारा आगामी 5 वर्षों में प्रत्येक शहर को प्रति वर्ष 100 करोड़ रूपये की राशि दी जायेगी। इतनी ही राशि का योगदान, द्वारा आगामी 5 वर्षों में प्रत्येक शहर को प्रति वर्ष 100 करोड़ रूपये की राशि दी जायेगी। इतनी ही राशि का योगदान, समान आधार पर, राज्य/यूएलबी द्वारा किया जायेगा, इस प्रकार, स्मार्ट सिटी विकास के लिए लगभग 1000 करोड़ समान आधार पर, राज्य/यूएलबी द्वारा किया जायेगा, इस प्रकार, स्मार्ट सिटी विकास के लिए लगभग 1000 करोड़ समान आधार पर, राज्य/यूएलबी द्वारा किया जायेगा, इस प्रकार, स्मार्ट सिटी विकास के लिए लगभग 1000 करोड़ रूपये की धनराशि सरकार/यूएलबी को उपलब्ध होंगी। रूपये की धनराशि सरकार/यूएल भारत सरकार की निधियां और राज्यों/यूएलबी द्वारा समान योगदान परियोजना लागत के एक भाग को ही भारत सरकार की निधियां और राज्यों/यूएलबी द्वारा समान योगदान परियोजना लागत के एक भाग को ही भारत सरकार की निधियां और राज्यों/यूएलबी द्वारा समान योगदान परियोजना लागत के एक भाग को ही पूरा कर पायेगें। शेष निधियां निम्नलिखित से जुटाने की प्रत्याशा है; पूरा कर पायेगें। शेष निधियां निम्नलिखित से जुटाने की प्रत्याशा है;
2ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 15 (cid:25)सत(cid:27)बर 2015 i. राज्यों/यूएलबी को अपने स्वयं के स्रोतों से जैसे प्रयोक्ता शुल्क का संग्रहण, लाभार्थी प्रभार और प्रभाव शुल्क, भूमि के मुद्रीकरण, उधार और ऋण आदि।
ii. चौदहवें वित्त आयोग (एफएफसी) की सिफारिशों की स्वीकृति के कारण हस्तांतरित अतिरिक्त संसाधन।
iii. नवीकृत वित्तपोषण तंत्र जैसे यूएलबी की क्रेडिट रेटिंग के साथ नगर पालिका बांड, सामूहिक वित्त तंत्र, कर सवंर्धित वित्तपोषण (टीआईएफ)।
iv. केन्द्र सरकार की अन्य स्कीमें जैसे स्वच्छ भारत मिशन, अमृत, राष्ट्रीय विरासत शहर विकास और संवर्धन योजना (हृदय)।
v. वित्तीय संस्थानों से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहित घरेलु और बाह्य दोनों स्र्रोतो से लीवरेज उधार बढ़ाकर।
vi. राज्य/संघ शासित प्रदेश राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना निधि (एनआईआईएफ), जिसकी घोषणा वित्त मंत्री द्वारा 2015 के अपने बजट भाषण में की गई है और जिसके इसी वर्ष गठन की संभावना है, से भी सहायता ले सकते है।
vii. पीपीपी के माध्यम से निजी क्षेत्र।
4444.... एक स्मार्ट सिटी के प्रमुख अवसंरचना तत्वों में निम्नलिखित शामिल होंगे :
i. पर्याप्त जलापूर्ति, ii. सुनिश्चित विद्युत आपूर्ति, iii. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित सफाई, iv. सक्षम शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन, v. विशेषत : गरीबों के लिए किफायती आवास, vi. सक्षम आईटी कनैक्टिविटी ओर डिजीटेलाइजेशन, vii. सुशासन, विशेषत : ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी viii. सुस्थिर पर्यावरण,
ix. विशेषतः महिलाओं, बच्चों और वृद्ध नागरिकों की सुरक्षा और, x. स्वास्थ्य और शिक्षा 5. कार्यान्वयन रणनीति :-
नगर स्तर पर मिशन का कार्यान्वयन इस प्रयोजन के लिए सृजित प्रयोजन साधन (एसपीवी) के माध्यम से किया जाएगा। एसपीवी स्मार्ट सिटी विकास परियोजनाओं की योजना, मूल्यांकन, अनुमोदन, निधियां के जारी, कार्यान्वयन, प्रबंध, संचालन निगरानी तथा आँकलन करेगा। प्रत्येक स्मार्ट सिटी मे एक विशेष प्रयोजन साधन (एसपीवी) होगा जिसका अध्यक्ष एक पूर्ण कालिक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) होगा तथा इसके बोर्ड में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार तथा शहरी स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि नामित होंगे। राज्य/शहरी स्थानीय निकाय सुनिश्चित करेंगे कि (क) एसपीवी के लिए एक समर्पित और पर्याप्त राजस्व प्रवाह की व्यवस्था हो जिससे इसे स्व-संपोषणीय बनाया जा सके तथा बाजार से अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए अपनी स्वयं की साख विश्वसनीयता विकसित कर सके (ख) स्मार्ट सिटी के लिए सरकारी योगदान का उपयोग केवल उन्ही अवसंरचना के सृजन के लिए किया जाता है, जिसमें सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी), टर्न की संविदाओं, आदि के माध्यम से परियोजनाओं का निष्पादन किया जा सकता है। विशेष प्रयोजन साधन (एसपीवी) नगर स्तर पर कम्पनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत गठित लिमिटेड कम्पनी होगा, जिसमें राज्य और शहरी स्थानीय निकाय 50ः50 इक्विटी अंशधारक के साथ इसके प्रवर्तक होंगे। एसपीवी में इक्विटी अंश लेने के लिए निजी क्षेत्र अथवा वित्तीय संस्थाओं पर विचार किया जा सकता है यदि राज्य तथा शहरी स्थानीय निकाय की 50ः50 अंशधारण पद्धति को बनाए रखा गया है तथा राज्य और शहरी स्थानीय निकाय के पास संयुक्त एसपीवी का अधिकांश अंशधारण तथा नियंत्रण होगा। एसपीवी के लिए स्मार्ट सिटीज मिशन में भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई निधियां अनुबंधित अनुदान के रूप में होंगी तथा ये अलग अनुदान निधि में रखी जाएंगी। ये निधियां केवल उसी प्रयोजन, जिसके लिए अनुमति दी गई है, तथा शहरी विकास मंत्रालय द्वारा दी गई शर्तों के अनुसार प्रयोग में लाई जाएंगी। राज्य सरकार और शहरी स्थानीय निकाय परियोजना के आकार, अपेक्षित वाणिज्यिक वित्त पोषण तथा वित्तीय तौर-तरीकों के अनुषंगिक एसपीवी की प्रदत्त पूंजी आवश्यकताओं का निर्धारण करेंगे। एसपीवी का इक्विटी आधार बनाने तथा इक्विटी पूंजी के उनके अंश के योगदान के लिए शहरी स्थानीय निकायों को सक्षम बनाने हेतु, भारत सरकार अनुदान एसपीवी में इक्विटी पंजी के यूएलबी अंश के रूप में प्रयोग किए जाने हेतु अनुमत हैं जो अनुलग्न-5 में दी गई शर्तों के अधीन होगी। आरंभ में, एसपीवी के लिए न्यूनतम पूंजी आधार सुनिश्चित करने के लिए एसपीवी का प्रदत्त पूंजी इतना हो कि शहरी स्थानीय निकाय का अंश भारत सरकार द्वारा मुहैया कराई गई निधि की प्रथम किस्त (194 करोड़ रू0 की अधिकतम धन राशि तक इसे बढा़ने के विकल्प के साथ कम से कम 100 करोड़ रू0 के बराबर हो। राज्य/ यूएलबी द्वारा समान इक्विटी योगदान के साथ, एसपीवी की आरंभिक प्रदत्त पूंजी 200 करोड़ रू0 (भारत सरकार (जीओआई) योगदान 100 करोड़ रू0 तथा राज्य अंश 100 करोड़ रू0) होगी। क्योंकि राज्य सरकार के समान3 (cid:30)बहार गजट (असाधारण), 15 (cid:25)सत(cid:27)बर 2015 योगदान के साथ-साथ भारत सरकार (जीओआई) का आरंभिक योगदान 194 करोड़ रू0 है अतः आरंभिक प्रदत्त पूंजी एसपीवी के विकल्प के साथ यह 384 करोड़ रू0 तक बढ़ सकता है। प्रदत्त पूंजी को परियोजना आवश्यकताओं के अनुसार बाद के वर्षों में बढ़ाया जाए जिसमें यह सुनिश्चित करते हुए उपर्युक्त प्रावधान किया गया हो कि शहरी स्थानीय निकाय को राज्य के समरूप एसपीवी में इसके अंशधारण को समान रखने हेतु सक्षम बनाया जाए। एसपीवी का ढा़ंचा और कार्य मार्गदर्शिका के अनुलग्नक-5 में दिये गए हैं और संस्था के अंतिर्नियमों में ऐसे प्रावधान अन्तर्विष्ट होंगे। टूल-किट में संस्था के अंतर्नियमों का एक नमूना दिया गया है। चुनौती के चरण-II में शहरों के चयन के पश्चात् एसपीवी के गठन के साथ ही कार्यान्वयन की प्रक्रिया आरंभ हो जायेगी। जैसा कि पहले बताया गया है, स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यान्वयन और प्रबंधन के लिए एसपीवी को पूर्ण स्वतंत्रता दिये जाने का प्रस्ताव है तथा राज्य/यूएलबी इस प्रयोजना के लिए मार्गदर्शिका के अनुलग्नक 5 में अंकित प्रावधान के अनुसार कदम उठाएंगे। एसपीवी क्षेत्र-आधारित परियोजनाआें का डिजाइन बनाने, विकास करने, प्रबंधन और कार्यान्वयन के लिए परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता (पीएमसी) नियुक्त कर सकता है। एसपीवी शहरी विकास मंत्रालय और हैण्ड-होल्डिंग एजेंसियों द्वारा तैयार की गई सूची में से किसी भी सूचीबद्ध परामर्शी फर्मों से सहायता ले सकते है। सामान और सेवाएं प्राप्त करने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रियाओं के लिए शहरी विकास मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मॉडल ढ़ांचों का भी प्रयोग किया जा सकता है।
राज्य सरकार का कार्य :-राज्य सरकार का कार्य :-राज्य सरकार का कार्य :-राज्य सरकार का कार्य :- राज्यों/संघ राज्य क्षत्रों को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा दी गई निर्धारित तिथि तक इन सभी 100 शहरों के लिए प्रस्तावों को शहरी विकास मंत्रालय में प्रस्तुत करना होगा। इन प्रस्तावों का मूल्यांकन एक समिति करेगी, यह समिति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, संगठनों तथा संस्थाओं का समूह होगा। शहरी विकास मंत्रालय प्रथम चक्र की चुनौती के विजेताओं की घोषणा करेगा। तत्पश्चात् एक तरफ विजेता शहर अपने शहर को स्मार्ट बनाने पर कार्य आरंभ कर देते हैं, और जो चयनित नहीं हुए हैं, वे शहर दूसरे चक्र में विचार के लिए अपने स्मार्ट सिटी प्रस्तावों (एससीपी) के सुधार पर कार्य प्रारंभ करेंगे। स्मार्ट सिटी प्रस्तावों की प्रकृति तथा प्रथम चक्र की चुनौतियाें के परिणामों के आधार पर, शहरी विकास मंत्रालय संभाव्य स्मार्ट सिटीज को उनका दूसरे चक्र आरंभ करने से पूर्व उनके प्रस्तावोें के सुधार हेतु हैंडहोल्डिंग सहायता प्रदान करने का निर्णय कर सकता है।
शहरी स्थानीय निकाय का कायशहरी स्थानीय निकाय का कायशहरी स्थानीय निकाय का कायशहरी स्थानीय निकाय का कार्य :- शहर कार्यनीतिक योजना प्रक्रिया के सिद्धातों का प्रयोग करते हुए स्मार्ट सिटी प्रस्तावों को तैयार करेंगे और प्रस्ताव में क्षेत्र-आधारित विकास योजनाएं तथा अखिल शहर पहल समाहित होगें। यह महसूस किया गया कि स्मार्ट सिटी प्रस्ताव (एससीपी) को तैयार करने का कार्य काफी चुनौतिपूर्ण है और राज्यों/शहरी स्थानीय निकायों को विशेषज्ञों की सहायता की आवश्यकता होगी। तकनीकी सहायता लेने के दो मार्ग हैं- परामर्शदात्री फर्मों को किराये पर लेना तथा हैंडहोल्डिंग एजेंसियों को नियुक्त करना।
6. अनुश्रवन की व्यवस्था :- राष्ट्रीय स्तर शहरी विकास मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक शीर्ष कमेटी (एसी) गठित की गई है जो स्मार्ट सिटी मिशन हेतु प्रस्तावों, उनकी प्रगति की निगरानी एवं निधि जारी करने हेतु सभी संबंधित मंत्रालयों एवं संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। यह समिति, जैसा आवश्यक हो, आवधिक रूप से बैठक करेगी। शीर्ष समिति (ए सी) में निम्नलिखित सदस्य होंगे। i. सचिव, आवास एवं गरीबी उपशमन सदस्य ii. सचिव (व्यय) सदस्य iii संयुक्त सचिव, वित्त, शहरी विकास मंत्रालय सदस्य iv निदेशक, एन आई यू ए सदस्य v मुख्य नियोजक, नगर एवं ग्राम नियोजन सदस्य vi राज्यों के चुनिंदा प्रधान सचिव सदस्य vii एस पी वी के चुनिंदा सी.ई.ओ. सदस्य viii मिशन निदेशक सदस्य सचिव राज्य स्तर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति (एचपीएससी) गठित की जाएगी जो अपनी संपूर्णता में इस मिशन का संचालन करेगी। एचपीएससी में राज्य सरकार के विभागों के प्रतिनिधि होंगे। स्मार्ट सिटी से संबंधित शहरी स्थानीय निकाय के महापौर और नगर आयुक्त को एचपीएससी में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। एक राज्य मिशन निदेशक भी होगा जो राज्य सरकार द्वारा नामित किया जाएगा और वह राज्य सरकार के सचिव के स्तर का अधिकारी होगा। राज्य मिशन निदेशक राज्य एचपीएससी के सदस्य - सचिव के रूप में कार्य करेगा। राज्य सरकार द्वारा योजना के अधीन एचपीएससी का गठन किया जा चुका है।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 15 (cid:25)सत(cid:27)बर 2015 शहर स्तर एक स्मार्ट सिटी परामर्शी मंच को परामर्श देने और विभिन्न हितधारकों में सहयोग के लिए शहर स्तर पर स्थापित किया जाएगा और उसमें जिलाधीश, संसद सदस्य, विधायक, महापौर, एसपीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्थानीय युवा, तकनीकी विशेषज्ञ और उस क्षेत्र से कम से कम निम्न क्षेत्र से एक सदस्य शामिल किया जाएगा : i. अध्यक्ष/सचिव जो पंजीकृत रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व करता हो, ii पंजीकृत कर दाता संघ/दर दाता संघ का सदस्या हो iii स्मल स्तरीय परिसंघ का अध्यक्ष/सचिव हो, और
iv एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) अथवा महिला मंडली/वाणिज्य मंडल/युवा संघों के सदस्या हों।
एसपीवी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्मार्ट सिटी परामर्शी मंच का संयोजक होगा। 7. राज्य स्तर से प्रथम चरण की प्रतियोगिता के आधार पर 3 शहरों यथा मुजफ्फरपुर, भागलपुर एवं बिहारशरीफ का चयन कर भारत सरकार को भेजा गया है। इन शहरों को अगले चरण में SCP बनवाकर भेजना होगा। इस डी0पी0आर के आधार पर भारत सरकार द्वारा देश के 100 शहरों के बीच द्वितीय चरण की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके आधार पर इस वर्ष 20 शहरों का चयन किया जायेगा। बिहार राज्य से यदि किसी शहर/शहरों का चयन होता है तब राज्यांश की राशि की आवश्यकता पड़ेगी। अनुमान के अनुसार इस वर्ष राज्यांश की आवश्यकता हेतु अतिरिक्त बजटीय उपबंध आवश्यक नहीं होगा।
8888.... अतः शहरी विकास मंंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्गदर्शिका एवं समय-समय पर प्राप्त होने वाले दिशानिर्देशों के आलोक में राज्य में Smart City योजना के कार्यान्वयन एवं मार्गदर्शिका के प्रावधानों के आलोक में राज्यांश के व्यय की सैद्धांतिक सहमति संसूचित की जाती है। आदेशः-यह आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय एवं इसकी प्रति सरकार के सभी विभागों/विभागाध्यक्षों/प्रमण्डलीय आयुक्तों/जिला पदाधिकारियों/नगर निकायों/महालेखाकार, बिहार, पटना को सूचनार्थ भेजी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अमृत लाल मीणा, सरकार के प्रधान सचिव।
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ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1050%5'1+200%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in