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7 जुलाई 2015
चूंकि पर्षद का आदेष अपास्त नहीं हुआ है, और न्यास में शून्यता की स्थिति है, इसलिए इसके सुचारू प्रबंधन इसलिए इसके सुचारू प्रबंधन 32 के प्रावधानों के तहत योजना का निरूपण एवं इसे मूर्त्त रूप देने तथा संचालन के लिए अधिनियम की धारा-32 के प्रावधानों के तहत योजना का निरूपण एवं इसे मूर्त्त रूप देने तथा ं में पर्षदीय पत्रांक-769, दिनांक 04.09.2014 द्वारा जिला पदाध्ि
2014 द्वारा जिला पदाधिकारी, बेगुसराय से न्यास
य ने अपने पत्रांक-701/रा0, दिनांक 11.04.
र्क न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पष
2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 16 (cid:25)सत(cid:27)बर 2015''श्री राम जानकी लक्ष्मीनारायण राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी न्यास समिति'' ''श्री राम जानकी लक्ष्मीनारायण राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति ''श्री राम जानकी लक्ष्मीनारायण राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी न्यास समिति'' ''श्री राम जानकी लक्ष्मीनारायण राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी न्यास समिति'' के संधारण, संरक्षण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था सुनिष्चित करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष में से किन्ही दो के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 5. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्य वृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी।
6. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
7. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
8. न्यास समिति न्यास की अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि की वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
9. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।