(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
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जल संसाधन विभाग
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6 vxLr 2015
सं0 22 नि0 सि0 (पट0)-3-12/2012/1730
नि0 सि0 (पट0)-3-12/2012/1730—श्री अजीत कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, श्री अजीत कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ जब उक्त पद पर पदस्थापित थे उनके विरूद्ध निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ जब उक्त पद पर पदस्थापित थे उनके विरूद्ध निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ जब उक्त पद पर पदस्थापित थे उनके विरूद्ध निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र ारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण प्रपत्र ''क'' गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 662 दिनांक 06.06.13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण प्रपत्र ''क'' गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 662 दिनांक 06 एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी- एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी- एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी- 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के दरम्यान श्री सिंह दिनांक 31.01.2014 को सेवानिवृत्त हो गये। फलतः विभागीय अधिसूचना संख्या 447 दिनांक 15.04.14 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों को प्रमाणित पाया गया है। सामीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 1211 दिनांक 29.08.2014 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित आरोपों के संबंध में श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।
श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में मुख्य रूप से कहा गया है कि पंचाने वीयर के क्रेस्ट उँचा करने का प्रस्ताव दिनांक 27.02.11 को जिला पदाधिकारी, नालंदा द्वारा माननीय मुख्यमंत्री को दिया गया था जिसकी सम्पुष्टि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से भी होता है। अतएव भ्रामक सूचना देने का मामला नहीं बनता है। नहरों की सफाई के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि वर्ष 2011-12 का रू0 535.50 लाख का वार्षिक कार्यक्रम शीर्ष 2701 के तहत पत्रांक 67 दिनांक 25.02.2011 के द्वारा मुख्य अभियंता को समर्पित था जिसकी प्रति अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना को भी थी। परन्तु इस तथ्य को छुपा दिया गया कि मुख्य अभियंता के पत्रांक 1141 दिनांक 26.03.12 को 16.78 लाख की स्वीकृति दी गई एवं पत्रांक 1902 दिनांक 07.06.11 द्वारा कार्यक्रम में उल्लेखित सभी कार्यों की प्राक्कलन की मांग की गई। जबकि विभागीय प्रक्रिया के अनुसार शीर्ष 2701 के तहत विभाग द्वारा निर्धारित राशि/आवंटन के अन्तर्गत प्राथमिकता आधारित योजनाओं को कार्यक्रम में संशोधित कर स्वीकृति देने का अधिकार मुख्य अभियंता को है।
उक्त से स्पष्ट है कि वर्ष 2011-12 में पंचाने वीयर के नहरों का प्रस्ताव दिया था एवं माननीय मुख्यमंत्री महोदय को इस बात की जानकारी दी गई थी जिस पर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दूरभाष से विभाग से जानकारी मांगी गई। परन्तु मुख्यालय द्वारा इस प्रकार की कोई प्रस्ताव नहीं होने की जानकारी दी गई एवं मुझ पर गलत बयानी का आरोप लगाया गया। वस्तुतः मैंने अपने विवेक से उन योजनाओं को शीर्ष 2701 मद वर्ष 2011-12 के अन्तर्गत प्रस्तावित किये जाने की सही जानकारी माननीय मुख्यमंत्री महोदय को दी थी, परन्तु दुर्भाग्यवश उन्होंने उसका कोई अलग से प्रस्तावित किये जाने की बात समझ लिया एवं कनीय पदाधिकारी होने के कारण मैं उन्हें इस बात से अवगत कराने में सक्षम नहीं हो सका कि शीर्ष 2701 के अन्तर्गत योजनाओं की स्वीकृति मुख्य अभियंता के सक्षमता में होता है।
श्री सिंह द्वारा संख्या-2 के संबंध में मुख्य रूप से कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा माना गया है कि कार्यान्वयन के क्रम में कुछ छोटे साईज का बोल्डर स्थल पर एवं स्लोप में था जिसे चुनकर स्थल से हटाने का निदेश अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 31.03.12 को दिया गया था जिसका अनुपालन भी किया गया एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा अगले निरीक्षण में नहीं पाया गया। इस क्रम में उड़नदस्ता जाँच में प्रयुक्त बोल्डर मानक सीमा के अन्तर्गत पाया गया है। श्री सिंह द्वारा लगाये गये आरोप को निराधार बतलाते हुए आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही कहा गया है कि लगाये गये आरोप से वित्तीय क्षति नहीं हुई है।
समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह द्वारा समरूप तथ्य ही संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया गया है जिसके समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया। श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य अंकित नहीं किया गया। समीक्षोपरान्त उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया- (1) पाँच प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक। उक्त दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से सहमति की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना ने अपने पत्रांक 1098 दिनांक 17.07.2015 द्वारा उक्त दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई। उक्त निर्णय/सहमति के आलोक में श्री अजीत कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल,