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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 October 2015

Published 01 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1112
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

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सं0 22 नि0 सि0(पट0)-03-12/2012/

2012 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकलप ज्ञापांक 12 दिनांक 07.01.2013 द्वारात विभागीय अधिसूचना संख्या-913 दिनांक 02.08. जमीन को हड़पे जाने की साजिश में भूमिका परिलक्षित 22 नि0 सि0(पट0)-03-12/2012/1770—श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, टी सम्प्रति सेवानिवृत जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (माह फरवरी 2010 से पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, पटना सिटी सम्प्रति सेवानिवृत जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (माह फरवरी 2010 से पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, पटना सि करबिगहिया, पटना के अन्तर्गत जल संसाधन विभाग जून 2012 तक) तब उनके विरूद्व पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, करबिगहिया, पटना के अन्तर्गत जल संसाधन विभाग जून 2012 तक) तब उनके विरूद्व पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, की जमीन पर अतिक्रमण करनेवाले अतिक्रमणकारियों को हटाने के क्रम में निर्माणाधीन बहुमंजिली अपार्टमेन्ट को छोड़ की जमीन पर अतिक्रमण करनेवाले अतिक्रमणकारियों को हटाने के क्रम में निर्माणाधीन बहुमंजिली अपार्टमेन्ट को छोड़ दिये जाने के साजिश से संबंधित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1103 दिनांक 10. दिये जाने के साजिश से संबंधित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1103 दिनांक दिये जाने के साजिश से संबंधित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1103 दिनांक 2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक 10.2012 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकलप ज्ञापांक 12 दिनांक 07 नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई इस (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई इस (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के 2013 को सेवानिवृत हो गये। तत्पश्चात विभागीय अधिसूचना संख्या-913 दिनांक 02 बीच श्रीवास्तव दिनांक 30.06.2013 को सेवानिवृत हो गये। तत्पश्चा 13 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए नियम 17 के तहत संचालित उक्त विभागीय 13 द्वारा दिनांक 30.06.13 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए नियम 17 के तहत संचालित उक्त विभागीय 13 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए नियम 17 के तहत संचालित उक्त विभागीय नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पद गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोप प्र्रमाणित पाया गया है। समीक्षा में यह भी पाया गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोप प्र्रमाणित पाया गया है। समीक्षा में यह भी पाया गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोप प्र्रमाणित पाया गया है। समीक्षा में यह भी पाया गया कि उक्त अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए दायर वाद सं0-88/95-96 में दिनांक गया कि उक्त अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए दायर वाद सं0-88/95-96 में दिनांक 01.08.1988 गया कि उक्त अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए दायर वाद सं0-88/95-96 में दिनांक को आदेश पारित किया जा चुका था। परन्तु श्रीवास्तव द्वारा अपने पदस्थापन काल में उक्त आदेश के अनुपालन की को आदेश पारित किया जा चुका था। परन्तु श्रीवास्तव द्वारा अपने पदस्थापन काल में उक्त आदेश के अनुपालन की को आदेश पारित किया जा चुका था। परन्तु श्रीवास्तव द्वारा अपने पदस्थापन काल में उक्त आदेश के अनुपालन की दिशा में कोई ठोस कारगर पहल नहीं की गई। फलतः उक्त भूमि पर बहुमंजिली इमारत का निर्माण हो गया। समीक्षा दिशा में कोई ठोस कारगर पहल नहीं की गई। फलतः उक्त भूमि पर बहुमंजिली इमारत का निर्माण हो गया। समीक्षा दिशा में कोई ठोस कारगर पहल नहीं की गई। फलतः उक्त भूमि पर बहुमंजिली इमारत का निर्माण हो गया। समीक्षा में यह भी पाया गया कि श्री श्रीवास्तव अपने पदस्थापन काल में पूर्व से अतिक्रमण वाद में पारित आदेश के पदस्थापन काल में पूर्व से अतिक्रमण वाद में पारित आदेश के में यह भी पाया गया कि श्री श्रीवास्तव अपने कार्यान्वयन के प्रति सजग नहीं रहे। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 100 दिनांक 20 14 द्वारा संचालन पदाधिकारी से कार्यान्वयन के प्रति सजग नहीं रहे। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 100 दिनांक 20.01.14 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए निम्नांकित बिन्दु पर श्रीवास्तव से द्वितीय कारण पृच्छा किया प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए निम्नांकित बिन्दु पर श्रीवास्तव से द्वितीय कारण पृच्छ प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए निम्नांकित बिन्दु पर श्रीवास्तव से द्वितीय कारण पृच्छ गयाः- ''आप यदि पदस्थापन काल के आरंभ से ही उक्त विभागीय बहुमूल्य भूखण्ड को अतिक्रमण से मुक्त कराने ''आप यदि पदस्थापन काल के आरंभ से ही उक्त विभागीय बहुमूल्य भूखण्ड को अतिक्रमण से मुक्त कराने ''आप यदि पदस्थापन काल के आरंभ से ही उक्त विभागीय बहुमूल्य भूखण्ड को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई करते तो इस भूखण्ड पर अवैध रूप से बहुमंजिली भवन का निर्माण नहीं होता एवं सरकारी सम्पत्ति की कार्रवाई करते तो इस भूखण्ड पर अवैध रूप से बहुमंजिली भवन का निर्माण नहीं होता एवं सरकारी सम्पत्ति की कार्रवाई करते तो इस भूखण्ड पर अवैध रूप से बहुमंजिली भवन का निर्माण नहीं होता एवं सरकारी सम्पत्ति सुरक्षित रहती। अतएव आपकी, सरकारी की बेशकीमती जमीन को हड़पे जाने की साजिश में भूमिका परिलक्षित सुरक्षित रहती। अतएव आपकी, सरकारी की बेशकीमती होती है।'' 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 श्री श्रीवास्तव से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री श्रीवास्तव द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री चन्द्रमणि बैठा द्वारा प्रमंडल से संबंधित कार्यों एवं क्षेत्रों की विवरणी से संबंधित कार्य संलेख उन्हें दिया गया था जिसमें उक्त विवादित एवं अतिक्रमित भूमि का उल्लेख नहीं था। इसके अतिरिक्त सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-21130/12 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 21.03.13 के पृ0 14 पर उल्लेख किया गया है कि जल संसाधन विभाग द्वारा दिये गये प्रतिशपथ पत्र में अतिक्रमित भूमि का कस्टोडियन (Custodian) वर्ष 2010 से ही कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, खगौल हैं। इस प्रकार दूसरे के कार्य क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं होता है। इसके बावजूद भी उनके संज्ञान में आते ही उनके द्वारा समुचित कार्रवाई की गयी। समीक्षा में पाया गया कि उनके द्वारा पूर्व में कही गई बातों को दुहराते हुए कहा गया है कि उक्त अतिक्रमित भूमि उनके क्षेत्राधिकार में नहीं था। जब उक्त भूमि उनके क्षेत्राधिकार से बाहर था तो उनके मौखिक संज्ञान में आते ही कार्रवाई प्रारंभ क्यों नहीं की गई। अगर कार्रवाई की गई तो उसे दृढ़ता से अतिक्रमित बहुमूल्य भूमि को खाली कराने में ठोस कदम उठाना चाहिये था जो उनके द्वारा नहीं किया गया जिसके कारण विभाग का बहुमूल्य कीमती जमीन पर बहुमंजिली ईमारत खड़ा कर दिया गया। इस प्रकार श्री श्रीवास्तव प्रशासनिक विफलता के लिए दोषी पाये गये। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री श्रीवास्तव को निम्न दंड देने हेतु प्रस्तावित किया गयाः- (1) पाँच प्रतिशत पेंशन पर पाँच वर्षाें तक रोक, निलंबन अवधि में सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 (5) के तहत नोटिश निर्गत किये जाने एवं नोटिश के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा।

उक्त दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का परामर्श प्राप्त किया गया। तत्पश्चात मामले की पुर्नसमीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि सहायक अभियंता, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा अवर प्रमंडल सं0-1, पटना सिटी, करबिगहिया, पटना द्वारा दिनांक 24.05.11 को पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी, करबिगहिया अन्तर्गत विभागीय जमीन पर किये गये अतिक्रमण का जो ब्योरा प्रस्तुत किया गया है, से स्पष्ट है कि खेसरा नं0- 588, 589 एवं 478 पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी, करबिगहिया के अधीन है। साथ ही मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा दिनांक 22.08.2012 को करबिगहिया स्थित पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी अन्तर्गत अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने के संबंध में की गयी कार्रवाई से संबंधित जो अद्यतन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है, से स्पष्ट होता है कि श्री श्रीवास्तव द्वारा उक्त भूमि पर अवैध निर्माण को रोकने के लिए जक्कनपुर थाना को लिखा भी गया है। अतः इससे प्रमाणित होता है कि उक्त अतिक्रमित भूमि श्री श्रीवास्तव के क्षेत्राधिकार में था। समीक्षोपरान्त श्री श्रीवास्तव को उक्त प्रस्तावित दण्ड देने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी सम्प्रति सेवानिवृत्त को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- (1) पाँच प्रतिशत पेंशन पर पाँच वर्षाें तक रोक, निलंबन अवधि में सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 (5) के तहत नोटिश निर्गत किये जाने एवं नोटिश के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1112%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1112/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1112.