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जल संसाधन विभाग
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सं0 22 नि0 सि0(पट0)-03-12/2012/
2012 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकलप ज्ञापांक 12 दिनांक 07.01.2013 द्वारा 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 श्री श्रीवास्तव से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री श्रीवास्तव द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री चन्द्रमणि बैठा द्वारा प्रमंडल से संबंधित कार्यों एवं क्षेत्रों की विवरणी से संबंधित कार्य संलेख उन्हें दिया गया था जिसमें उक्त विवादित एवं अतिक्रमित भूमि का उल्लेख नहीं था। इसके अतिरिक्त सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-21130/12 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 21.03.13 के पृ0 14 पर उल्लेख किया गया है कि जल संसाधन विभाग द्वारा दिये गये प्रतिशपथ पत्र में अतिक्रमित भूमि का कस्टोडियन (Custodian) वर्ष 2010 से ही कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, खगौल हैं। इस प्रकार दूसरे के कार्य क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं होता है। इसके बावजूद भी उनके संज्ञान में आते ही उनके द्वारा समुचित कार्रवाई की गयी। समीक्षा में पाया गया कि उनके द्वारा पूर्व में कही गई बातों को दुहराते हुए कहा गया है कि उक्त अतिक्रमित भूमि उनके क्षेत्राधिकार में नहीं था। जब उक्त भूमि उनके क्षेत्राधिकार से बाहर था तो उनके मौखिक संज्ञान में आते ही कार्रवाई प्रारंभ क्यों नहीं की गई। अगर कार्रवाई की गई तो उसे दृढ़ता से अतिक्रमित बहुमूल्य भूमि को खाली कराने में ठोस कदम उठाना चाहिये था जो उनके द्वारा नहीं किया गया जिसके कारण विभाग का बहुमूल्य कीमती जमीन पर बहुमंजिली ईमारत खड़ा कर दिया गया। इस प्रकार श्री श्रीवास्तव प्रशासनिक विफलता के लिए दोषी पाये गये। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री श्रीवास्तव को निम्न दंड देने हेतु प्रस्तावित किया गयाः- (1) पाँच प्रतिशत पेंशन पर पाँच वर्षाें तक रोक, निलंबन अवधि में सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 (5) के तहत नोटिश निर्गत किये जाने एवं नोटिश के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा।
उक्त दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का परामर्श प्राप्त किया गया। तत्पश्चात मामले की पुर्नसमीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि सहायक अभियंता, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा अवर प्रमंडल सं0-1, पटना सिटी, करबिगहिया, पटना द्वारा दिनांक 24.05.11 को पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी, करबिगहिया अन्तर्गत विभागीय जमीन पर किये गये अतिक्रमण का जो ब्योरा प्रस्तुत किया गया है, से स्पष्ट है कि खेसरा नं0- 588, 589 एवं 478 पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी, करबिगहिया के अधीन है। साथ ही मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा दिनांक 22.08.2012 को करबिगहिया स्थित पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी अन्तर्गत अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने के संबंध में की गयी कार्रवाई से संबंधित जो अद्यतन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है, से स्पष्ट होता है कि श्री श्रीवास्तव द्वारा उक्त भूमि पर अवैध निर्माण को रोकने के लिए जक्कनपुर थाना को लिखा भी गया है। अतः इससे प्रमाणित होता है कि उक्त अतिक्रमित भूमि श्री श्रीवास्तव के क्षेत्राधिकार में था। समीक्षोपरान्त श्री श्रीवास्तव को उक्त प्रस्तावित दण्ड देने का निर्णय लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी सम्प्रति सेवानिवृत्त को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- (1) पाँच प्रतिशत पेंशन पर पाँच वर्षाें तक रोक, निलंबन अवधि में सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 (5) के तहत नोटिश निर्गत किये जाने एवं नोटिश के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।