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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 October 2015

Published 01 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1115
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

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सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/

2/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/1773—श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्

12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13 दिनांक 07.01.

श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल 2001 से दिनांक 27.07.04 तक) तब उनके पदाधिकारी, नौबतपुर जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (दिनांक 26.06.2001 से दिनांक 27 पदाधिकारी, नौबतपुर जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (दिनांक 26 विरूद्व जल संसाधन विभाग की वहुमूल्य सरकारी जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन के अतिक्रमण विरूद्व जल संसाधन विभाग की वहुमूल्य सरकारी जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन के अतिक्रमण विरूद्व जल संसाधन विभाग की वहुमूल्य सरकारी जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन के अतिक्रमण करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्त र्लिप्त रहने, फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्तर्लिप्त रहने, फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 2003-04 तक रसीद काटने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 2003-04 तक रसीद काटने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 2003-04 तक रसीद काटने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1110 दिनांक 11.10.12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13 दिनांक 07 विभागीय अधिसूचना सं0-1110 दिनांक 11 ार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय 13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय ार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाई गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। संचालन पदाधिकारी संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। संचालन पदाधिकारी संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। संचालन पदाधिकारी गीय समीक्षा में पाया गया कि जिस अतिक्रमित भूमि की द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मामले की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिस अतिक्रमित भूमि की द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मामले की विभा लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है, वह सही लीज है अथवा नहीं, इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, जबकि लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है, वह सही लीज है अथवा नहीं, इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, जबकि लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है, वह सही लीज है अथवा नहीं, इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, जबकि तथाकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। दस्तावेज तथाकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। दस्तावेज तथाकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। दस्तावेज उल्लेख नहीं है, फिर भी श्री चौधरी द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के रूप में ग्राह्‌य करते हुए उल्लेख नहीं है, फिर भी श्री चौधरी द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के रूप में ग्राह्‌य करते हुए में वर्ष का उल्लेख नहीं है, फिर भी श्री चौधरी द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के रूप में ग्राह्‌य करते हुए रसीद काटी गयी। वर्णित स्थिति में उनके द्वारा बिना किसी छान बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारियों केे आदेश प्राप्त किये वर्णित स्थिति में उनके द्वारा बिना किसी छान बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारियों केे आदेश प्राप्त किये वर्णित स्थिति में उनके द्वारा बिना किसी छान बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारियों केे आदेश प्राप्त किये करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 103 रसीद काटने एवं अपनी स्वार्थ सिद्वि को पूर्ण करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 103 रसीद काटने एवं अपनी स्वार्थ सिद्वि को पूर्ण 14 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से निम्नलिखित असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा किया गयाः- 14 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से निम्नलिखित असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा किया गयाः- दिनांक 20.01.14 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से निम्नलिखित असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा किया गयाः- '' विभागीय भू-खण्ड के लीज की प्रमाणिकता की बिना जॅाच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली '' विभागीय भू-खण्ड के लीज की प्रमाणिकता की बिना जॅाच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली की '' विभागीय भू-खण्ड के लीज की प्रमाणिकता की बिना जॅाच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली गई जबकि लीज कागजात फर्जी थे। अतएव विभागीय बहुमूल्य भू-खण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत गई जबकि लीज कागजात फर्जी थे। अतएव विभागीय बहुमूल्य भू-खण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत गई जबकि लीज कागजात फर्जी थे। अतएव विभागीय बहुमूल्य भू-खण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत ढ़ंग से रेन्ट रसीद निर्गत कर विभाग को भू-खण्ड से वेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्ता प्रमाणित होती ढ़ंग से रेन्ट रसीद निर्गत कर विभाग को भू-खण्ड से वेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्ता प्रमाणित होती ढ़ंग से रेन्ट रसीद निर्गत कर विभाग को भू-खण्ड से वेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्ता प्रमाणित होती है।'' श्री चौधरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के ज वाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया श्री चौधरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि श्री पी0 आर0 गुहा, तत्कालीन गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि श्री पी0 आर0 गुहा, तत्कालीन गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि श्री पी0 आर0 गुहा, तत्कालीन Home Street Land के लिए कैडेस्टल कार्यपालक अभियन्ता, डिहरी प्रमण्डल, डिहरी के द्वारा दिनांक 03.03.47 को Home Street Land कार्यपालक अभियन्ता, डिहरी प्रमण्डल, डिहरी के द्वारा दिनांक 03

2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 सर्वे 118 का 24 डि0 भू-खण्ड मोहिउद्‌दीन खॅा, पिता-स्व0 गुलाव खॅा करबिगहिया, पटना के नाम पर वर्ष 1943-46 से 1946-49 के लीज पर दी गई। इस लीज डीड में अंकित लीज रेन्ट के आधार पर वर्ष 1943 से ही मनी रसीद निर्गत किया जाता रहा है। इससे साबित हो जाता है कि लीज कागजात फर्जी नहीं थे। रेन्ट का मनी रसीद निर्गत कर विभाग का स्वामित्व इस भू-खण्ड पर बरकरार रखा गया। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में स्वयं स्वीकार किया गया है कि तथाकथित लीज को समाप्त करने के लिए कार्यपालक अभियन्ता द्वारा वर्ष 2012-13 में वाद दायर किया गया था। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा इस भूमि को लीज पर दिये जाने की न तो केाई अनुमति दी गई और न ही स्वीकृति दिया गया था। श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिये इनके विरूद्व तथाकथित लीज को बिना जॅाच पड़ताल के रेन्ट रसीद काटने का आरोप प्रमाणित पाया गया। वर्णित तथ्यों के आलोक में उक्त अवैध कार्य में इनकी संलिप्तता की पुष्टि होती है। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1556 दिनांक 22.10.14 द्वारा श्री चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (1) कालमान वेतन के दो वेतन प्रक्रम से नीचे सदैव के लिए अवनति। निलंबन अवधि के सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11(5) के तहत नोटिस निर्गत किये जाने एवं नोटिस के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा। उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री चौधरी द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक शून्य दिनांक 28.11.14 समर्पित किया गया। श्री चौधरी से प्राप्त उक्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा के दरम्यान सरकार के संज्ञान में ऐसा कोई नया तथ्य पुनर्विलोकन अर्जी में नहीं पाया गया जिससे की उनके पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य माना जा सकें। समीक्षोपरान्त श्री चौधरी से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने तथा विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1556 दिनांक 22.10.14 द्वारा संसूचित दण्ड को यथावत रखने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, नौबतपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक शून्य दिनांक 28.11.2014 को अस्वीकृत किया जाता है तथा विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1556 दिनांक 22.10.14 द्वारा संसूचित दण्ड (1) '' कालमान वेतन के दो वेतन प्रक्रम से नीचे सदैव के लिए अवनति'' को यथावत रखा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1115/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1115.