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जल संसाधन विभाग
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सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/
12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15 दिनांक 07.01. 03.13 (न्याय निर्णय की तिथि) तक पूर्ण वेतन के हकदार है तथा दिनांक 22 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 वर्णित स्थिति में उनके द्वारा बिना किसी छान बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारियों केे आदेश प्राप्त किये रसीद काटने एवं अपनी स्वार्थ सिद्वि को पूर्ण करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 104 दिनांक 20.01.14 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से निम्नलिखित असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा किया गयाः- '' विभागीय भू-खण्ड के लीज की प्रमाणिकता की बिना जॅाच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली की गई जबकि लीज कागजात फर्जी थे। अतएव विभागीय बहुमूल्य भू-खण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत ढ़ंग से रेन्ट रसीद निर्गत कर विभाग को भू-खण्ड से वेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्तता प्रमाणित होती है।'' श्री पाण्डेय से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री पाण्डेय द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि श्री पी0 आर0 गुहा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, डिहरी प्रमण्डल, डिहरी के द्वारा दिनांक 03.03.47 को Home Street Land के लिए कैडेस्टल सर्वे 118 का 24 डि0 भू-खण्ड मोहिउद्दीन खॅा, पिता-स्व0 गुलाव खॅा, करबिगहिया, पटना के नाम पर वर्ष 1943-46 से 1946-49 के लीज पर दी गई। इस लीज डीड में अंकित लीज रेन्ट के आधार पर वर्ष 1943 से ही मनी रसीद निर्गत किया जाता रहा है। इससे साबित हो जाता है कि लीज कागजात फर्जी नहीं थे। रेन्ट का मनी रसीद निर्गत कर विभाग का स्वामित्व इस भू-खण्ड पर बरकरार रखा गया। समीक्षा में पाया गया कि श्री पाण्डेय द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में स्वयं स्वीकार किया गया है कि तथाकथित लीज को समाप्त करने के लिए कार्यपालक अभियन्ता द्वारा वर्ष 2012-13 में वाद दायर किया गया था। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा इस भूमि को लीज पर दिये जाने की न तो केाई अनुमति दी गई और न ही स्वीकृति दिया गया था। श्री पाण्डेय द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिये इनके विरूद्व तथाकथित लीज को बिना जॅाच पड़ताल के रेन्ट रसीद काटने का आरोप प्रमाणित पाया गया। वर्णित तथ्यों के आलोक में उक्त अवैध कार्य में इनकी संलिप्तता की पुष्टि होती है। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1555 दिनांक 22.10.2014 द्वारा श्री पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (1) दो वेतनवृद्वि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। निलंबन अवधि के सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11(5) के तहत नोटिस निर्गत किये जाने एवं नोटिस के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा। उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री पाण्डेय द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक शून्य दिनांक 28.11.14 समर्पित किया गया। श्री पाण्डेय से प्राप्त उक्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा के दरम्यान सरकार के संज्ञान में ऐसा कोई नया तथ्य पुनर्विलोकन अर्जी में नहीं पाया गया जिससे की उनके पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य माना जा सके। समीक्षोपरान्त श्री पाण्डेय से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने तथा विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1555 दिनांक 22.10.14 द्वारा संसूचित दण्ड को यथावत रखने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री शशिरंजन कुमार पाण्डेय, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, नौबतपुर सम्प्रति कार्यपाालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, सालमारी, कटिहार से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक शून्य दिनांक 28.11.2014 को अस्वीकृत किया जाता है तथा विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1555 दिनांक 22.10.14 द्वारा संसूचित दण्ड (1) ''दो वेतनवृद्वि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
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