(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत (cid:23) आि(cid:15)वन 1(cid:23)3(cid:25) (cid:26)श(cid:15)(cid:27)
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जल संसाधन विभाग
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10 vxLr 2015
सं0 22 नि0 सि0(मोति0)-08-05/2013/
22 नि0 सि0(मोति0)-08-05/2013/1776—श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0 डी0-3464),
श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0 डी0-3464), तत्कालीन सहायक अभियंता, त्रिवेणी नहर निर्माण अवर प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, त्रिवेणी नहर प्रमंडल, सहायक अभियंता, त्रिवेणी नहर निर्माण अवर प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, त्रिवेणी नहर प्रमंडल, सहायक अभियंता, त्रिवेणी नहर निर्माण अवर प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, त्रिवेणी नहर प्रमंडल, 00 पर निर्मित एक्वाडस्ट-सह-स्केप सेतु संरचना दिनांक 27.05.13 को क्षतिग्रस्त होने 00 पर निर्मित एक्वाडस्ट-सह-स्केप सेतु संरचना दिनांक 27 रक्सौल के विरूद्ध वि0 दू0 126.00 पर निर्मित एक्वाडस्ट-सह-स्केप सेतु संरचना दिनांक 27
के क्रम में प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए आरोप प्रपत्र 'क' के साथ विभागीय पत्रांक 1244 दिनांक 04 के क्रम में प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए आर ोप प्रपत्र 'क' के साथ विभागीय पत्रांक 1244 दिनांक 04.10.13 द्वारा
13 प्राप्त हुआ, जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर स्पष्टीकरण पूछा गया। पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब दिनांक 19.10.13 प्राप्त हुआ, जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर स्पष्टीकरण पूछा गया। पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब दिनांक 19
पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह सिंचाई पटवन हेतु नहर संचालन के प्रभारी थे। इन्हें ज्ञात था कि नहर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह सिंचाई पटवन हेतु नहर संचालन के प्रभारी थे। इन्हें पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह सिंचाई पटवन हेतु नहर संचालन के प्रभारी थे। इन्हें
संरचना जर्जर हालात में है। ऐसी स्थिति में इनका दायित्व बनता था कि उक्त संरचना में किसी प्रकार के संरचना जर्जर हालात में है। ऐसी स्थिति में इनका दायित्व बनता था कि उक्त संरचना में किसी प्रकार के संरचना जर्जर हालात में है। ऐसी स्थिति में इनका दायित्व बनता था कि उक्त संरचना में किसी प्रकार के क्रिया-कलाप की पूर्ण जानकारी रखते, जबकि उक्त संरचना पर अवस्थित स्केप के गेट चालक इनके अधीन के क्रिया-कलाप की पूर्ण जानकारी रखते, जबकि उक्त संरचना पर अवस्थित स्केप के गेट चालक इनके अधीन के क्रिया-कलाप की पूर्ण जानकारी रखते, जबकि उक्त संरचना पर अवस्थित स्केप के गेट चालक इनके अधीन के
्रस्त हुआ है। ऐसी स्थिति में यह माना जाना कि इन्हें गेट कर्मचारी थे एवं स्केप खुलने के एक दिन बात संरचना क्षतिग्रस्त हुआ है। ऐसी स्थिति में यह माना जाना कि इन्हें गेट कर्मचारी थे एवं स्केप खुलने के एक दिन बात संरचना क्षतिग 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 उक्त निर्णय के आलोक में श्री सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध निम्न दंड अधिरोपित किया गया है-
(क) एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
उक्त दंड श्री सिंह को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
गजानन मिश्र,