(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत (cid:23) आि(cid:15)वन 1(cid:23)3(cid:25) (cid:26)श(cid:15)(cid:27)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 1121) पटन(cid:4)
2(cid:15)15
पटन(cid:4)(cid:28) व५ह(cid:31)प०तव(cid:4)र, 1 [Çत३बर 2(cid:15)15
जल संसाधन विभाग
&&&&&&&&
vf/klwpuk
11 vxLr 2015
सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/
य अधिसूचना सं0-1110 दिनांक 11.10.12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13 दिनांक 07
12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13 दिनांक 07.01.
2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 सर्वे 118 का 24 डि0 भू-खण्ड मोहिउद्दीन खॅा, पिता-स्व0 गुलाव खॅा करबिगहिया, पटना के नाम पर वर्ष 1943-46 से 1946-49 के लीज पर दी गई। इस लीज डीड में अंकित लीज रेन्ट के आधार पर वर्ष 1943 से ही मनी रसीद निर्गत किया जाता रहा है। इससे साबित हो जाता है कि लीज कागजात फर्जी नहीं थे। रेन्ट का मनी रसीद निर्गत कर विभाग का स्वामित्व इस भू-खण्ड पर बरकरार रखा गया। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में स्वयं स्वीकार किया गया है कि तथाकथित लीज को समाप्त करने के लिए कार्यपालक अभियन्ता द्वारा वर्ष 2012-13 में वाद दायर किया गया था। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा इस भूमि को लीज पर दिये जाने की न तो केाई अनुमति दी गई और न ही स्वीकृति दिया गया था। श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिये इनके विरूद्व तथाकथित लीज को बिना जॅाच पड़ताल के रेन्ट रसीद काटने का आरोप प्रमाणित पाया गया। वर्णित तथ्यों के आलोक में उक्त अवैध कार्य में इनकी संलिप्तता की पुष्टि होती है। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1556 दिनांक 22.10.14 द्वारा श्री चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (1) कालमान वेतन के दो वेतन प्रक्रम से नीचे सदैव के लिए अवनति। निलंबन अवधि के सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11(5) के तहत नोटिस निर्गत किये जाने एवं नोटिस के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा। निलंबन अवधि के सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के अनुमान्यता के संबंध में विभागीय पत्रांक 1758 दिनांक 25.11.14 द्वारा श्री चौधरी को नोटिस निर्गत किया गया। उक्त नोटिस के आलोक में श्री चौधरी से प्राप्त नोटिस के जवाब पत्रांक शून्य दिनांक 19.12.14 की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा नोटिस के जवाब में मुख्य रूप से कहा गया है कि निलंबन अवधि के दरम्यान मेरे विरूद्व संचालित किये गये विभागीय कार्यवाही में मेरे द्वारा संचालन पदाधिकारी एवं सरकार को हर स्तर पर सहयोग दिया गया है। अतः निलंबन अवधि को कर्तव्य पर बिताई गई अवधि मानते हुए नियमानुसार भुगतेय वेतन तथा भत्ता के संबंध में आदेश निर्गत किया जाय। श्री चौधरी से प्राप्त नोटिस का जवाब की सम्यक समीक्षोपरान्त ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी'' का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, नौबतपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1121%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in