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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 October 2015

Published 01 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1121
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

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सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/

य अधिसूचना सं0-1110 दिनांक 11.10.12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13 दिनांक 07

12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13 दिनांक 07.01.

2/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/1787—श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल 2001 से दिनांक 27.07.04 तक) तब उनके पदाधिकारी, नौबतपुर जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (दिनांक 26.06.2001 से दिनांक 27 पदाधिकारी, नौबतपुर जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (दिनांक 26 ा फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन के अतिक्रमण विरूद्व जल संसाधन विभाग की वहुमूल्य सरकारी जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन के अतिक्रमण विरूद्व जल संसाधन विभाग की वहुमूल्य सरकारी जमीन क करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्तर्लिप्त रहने, फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्तर्लिप्त रहने, फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्तर्लिप्त रहने, फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 2003-04 तक रसीद काटने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 2003-04 तक रसीद काटने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 2003-04 तक रसीद काटने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1110 दिनांक 11 13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय 13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय 13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाई गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन क ी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। संचालन पदाधिकारी संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मामले की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिस अतिक्रमित भूमि की द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मामले की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिस अतिक्रमित भूमि की द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मामले की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिस अतिक्रमित भूमि की लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है, वह सही लीज है अथवा नहीं, इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, जबकि लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है, वह सही लीज है अथवा नहीं, इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, जबकि लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है, वह सही लीज है अथवा नहीं, इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, जबकि तथाकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। दस्तावेज ााकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। दस्तावेज ााकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। दस्तावेज में वर्ष का उल्लेख नहीं है, फिर भी श्री चौधरी द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के रूप में ग्राह्‌य करते हुए में वर्ष का उल्लेख नहीं है, फिर भी श्री चौधरी द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के रूप में ग्राह्‌य करते हुए में वर्ष का उल्लेख नहीं है, फिर भी श्री चौधरी द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के रूप में ग्राह्‌य करते हुए रसीद काटी गयी। सी छान बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारियों केे आदेश प्राप्त किये वर्णित स्थिति में उनके द्वारा बिना किसी छान बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारियों केे आदेश प्राप्त किये वर्णित स्थिति में उनके द्वारा बिना कि रसीद काटने एवं अपनी स्वार्थ सिद्वि को पूर्ण करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 103 रसीद काटने एवं अपनी स्वार्थ सिद्वि को पूर्ण करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 103 रसीद काटने एवं अपनी स्वार्थ सिद्वि को पूर्ण करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 103 14 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से निम्नलिखित असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा किया गयाः- 14 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से निम्नलिखित असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण प दिनांक 20.01.14 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से निम्नलिखित असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण प '' विभागीय भू-खण्ड के लीज की प्रमाणिकता की बिना जॅाच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली की '' विभागीय भू-खण्ड के लीज की प्रमाणिकता की बिना जॅाच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली की '' विभागीय भू-खण्ड के लीज की प्रमाणिकता की बिना जॅाच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली की गई जबकि लीज कागजात फर्जी थे। अतएव विभागीय बहुमूल्य भू-खण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत गई जबकि लीज कागजात फर्जी थे। अतएव विभागीय बहुमूल्य भू-खण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत गई जबकि लीज कागजात फर्जी थे। अतएव विभागीय बहुमूल्य भू-खण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत से वेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्ता प्रमाणित होती ढ़ंग से रेन्ट रसीद निर्गत कर विभाग को भू-खण्ड से वेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्ता प्रमाणित होती ढ़ंग से रेन्ट रसीद निर्गत कर विभाग को भू-खण्ड है।'' श्री चौधरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया श्री चौधरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया श्री चौधरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि श्री पी0 आर0 गुहा, तत्कालीन गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि श्री पी0 आर0 गुहा, तत्का गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि श्री पी0 आर0 गुहा, तत्का Home Street Land के लिए कैडेस्टल कार्यपालक अभियन्ता, डिहरी प्रमण्डल, डिहरी के द्वारा दिनांक 03.03.47 को Home Street Land कार्यपालक अभियन्ता, डिहरी प्रमण्डल, डिहरी के द्वारा दिनांक 03

2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 सर्वे 118 का 24 डि0 भू-खण्ड मोहिउद्‌दीन खॅा, पिता-स्व0 गुलाव खॅा करबिगहिया, पटना के नाम पर वर्ष 1943-46 से 1946-49 के लीज पर दी गई। इस लीज डीड में अंकित लीज रेन्ट के आधार पर वर्ष 1943 से ही मनी रसीद निर्गत किया जाता रहा है। इससे साबित हो जाता है कि लीज कागजात फर्जी नहीं थे। रेन्ट का मनी रसीद निर्गत कर विभाग का स्वामित्व इस भू-खण्ड पर बरकरार रखा गया। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में स्वयं स्वीकार किया गया है कि तथाकथित लीज को समाप्त करने के लिए कार्यपालक अभियन्ता द्वारा वर्ष 2012-13 में वाद दायर किया गया था। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा इस भूमि को लीज पर दिये जाने की न तो केाई अनुमति दी गई और न ही स्वीकृति दिया गया था। श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिये इनके विरूद्व तथाकथित लीज को बिना जॅाच पड़ताल के रेन्ट रसीद काटने का आरोप प्रमाणित पाया गया। वर्णित तथ्यों के आलोक में उक्त अवैध कार्य में इनकी संलिप्तता की पुष्टि होती है। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1556 दिनांक 22.10.14 द्वारा श्री चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (1) कालमान वेतन के दो वेतन प्रक्रम से नीचे सदैव के लिए अवनति। निलंबन अवधि के सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11(5) के तहत नोटिस निर्गत किये जाने एवं नोटिस के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा। निलंबन अवधि के सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के अनुमान्यता के संबंध में विभागीय पत्रांक 1758 दिनांक 25.11.14 द्वारा श्री चौधरी को नोटिस निर्गत किया गया। उक्त नोटिस के आलोक में श्री चौधरी से प्राप्त नोटिस के जवाब पत्रांक शून्य दिनांक 19.12.14 की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा नोटिस के जवाब में मुख्य रूप से कहा गया है कि निलंबन अवधि के दरम्यान मेरे विरूद्व संचालित किये गये विभागीय कार्यवाही में मेरे द्वारा संचालन पदाधिकारी एवं सरकार को हर स्तर पर सहयोग दिया गया है। अतः निलंबन अवधि को कर्तव्य पर बिताई गई अवधि मानते हुए नियमानुसार भुगतेय वेतन तथा भत्ता के संबंध में आदेश निर्गत किया जाय। श्री चौधरी से प्राप्त नोटिस का जवाब की सम्यक समीक्षोपरान्त ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी'' का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, नौबतपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1121/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1121.