(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
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जल संसाधन विभाग
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सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/1789
2/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/1789—श्री मनोज कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन श्री मनोज कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (मार्च 2010 से अक्टुबर 2012 तक) तब उनके विरूद्व जल नहर प्रमण्डल, खगौल जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (मार्च 2010 से अक्टुबर 2012 तक) तब उनके विरूद्व जल नहर प्रमण्डल, खगौल जब उक्त पद पर पदस्थापित थे (मार्च 2010 से अक्टुबर 2012 तक) तब उनके विरूद्व जल
नसे मांगी गई अनुमति को अमान्य करने संसाधन विभाग की बहुमूल्य सरकारी जमीन पर बहुमंजिली भवन बनाने हेतु उनसे मांगी गई अनुमति को अमान्य करने संसाधन विभाग की बहुमूल्य सरकारी जमीन पर बहुमंजिली भवन बनाने हेतु उ
की त्वरित कार्रवाई नहीं करने एवं अवर प्रमंड ल पदाधिकारी, नौबतपुर द्वारा अनुमति नहीं देने के प्रतिवेदन पर उनके कार्रवाई नहीं करने एवं अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नौबतपुर द्वारा अनुमति नहीं देने के प्रतिवेदन पर उनके द्वारा अवर प्रमण्डल पदाधिकारी को धमकाने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1102 द्वारा अवर प्रमण्डल पदाधिकारी को धमकाने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1102 द्वारा अवर प्रमण्डल पदाधिकारी को धमकाने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1102 दिनांक 10.10.12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11 दिनांक 07 13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक 12 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11 दिनांक 07.01.13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। उक्त निलंबन आदेश के विरूद्व श्री कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पट ना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 उक्त निलंबन आदेश के विरूद्व श्री कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0
12 को अंतरिम न्याय निर्णय पारित किया गया। पारित सं0-21130/12 दायर किया गया जिसमें दिनांक 30.11.12 को अंतरिम न्याय निर्णय पारित किया गया। पारित सं0-21130/12 दायर किया गया जिसमें दिनांक 30
12 के कार्यान्वयन को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया अंतरिम न्याय निर्णय में उक्त निलंबन आदेश दिनांक 10.10.12 के कार्यान्वयन को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया अंतरिम न्याय निर्णय में उक्त निलंबन आदेश दिनांक 10
2013 को अंतिम न्याय निर्णय पारित किया गया जिसमें आदेश दिया गया की गया। उक्त याचिका में दिनांक 21.03.2013 को अंतिम न्याय निर्णय पारित किया गया जिसमें आदेश दिया गया की गया। उक्त याचिका में दिनांक 21
चूॅकि श्री कुमार का निलंबन आदेश उक्त अंतरिम आदेश के आलोक में स्थगित है अतएव दिनांक 10.10.12 से दिनांक चूॅकि श्री कुमार का निलंबन आदेश उक्त अंतरिम आदेश के आलोक में स्थगित है अतएव दिनांक 10 चूॅकि श्री कुमार का निलंबन आदेश उक्त अंतरिम आदेश के आलोक में स्थगित है अतएव दिनांक 10
13 तक (न्याय निर्णय की तिथि) पूर्ण वेतन का भुगतान आदेश प्राप्ति के एक माह के अन्दर किया जाय तथा 13 तक (न्याय निर्णय की तिथि) पूर्ण वेतन का भुगतान आदेश प्राप्ति के एक माह क 21.03.13 तक (न्याय निर्णय की तिथि) पूर्ण वेतन का भुगतान आदेश प्राप्ति के एक माह क
13 से जीवन निर्वाह भत्ता का माह दर माह भुगतान किया जाय बशर्ते की श्री कुमार अपने निर्घारित दिनांक 22.03.13 से जीवन निर्वाह भत्ता का माह दर माह भुगतान किया जाय बशर्ते की श्री कुमार अपने निर्घारित 13 से जीवन निर्वाह भत्ता का माह दर माह भुगतान किया जाय बशर्ते की श्री कुमार अपने निर्घारित मुख्यालय में उपस्थित रहते है और विभागीय कार्यवाही में सहयोग प्रदान करते है। मुख्यालय में उपस्थित रहते है और विभागीय कार्यवाही में सहयोग प्रदान करते है। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 उक्त न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश सं0-85 सह ज्ञापांक 697 दिनांक 19.06.13 द्वारा श्री कुमार को दिनांक 10.10.12 से दिनांक 21.03.13 तक पूर्ण वेतन का भुगतान करने तथा दिनांक 22.03.13 से इनका निलंबन प्रभावी रहेगा अतएव निलंबन अवधि में नियमानुसार अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान करने का आदेश संसूचित किया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य दिया गया कि उक्त जालसाजी एवं धोखाघड़ी में इनकी संलिप्तता/आरोप प्रमाणित नहीं होता है फिर भी उक्त वर्णित जालसाजी एवं धोखाघड़ी का मामला प्रकाश में आने के पश्चात जालसाजी के विरूद्व ये यथोचित कार्रवाई करने में सफल नहीं रहे। समीक्षा में पाया गया कि श्री कुमार, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल में मार्च 2010 से अक्टूबर 2012 तक पदस्थापित रहे है। उक्त अवधि में यह अतिक्रमित भूमि उनके अधीन था। उक्त भूमि पर जालसाजी एवं धोखाघड़ी कर निर्माण कार्य कराये जाने की कार्रवाई उनके पदस्थापन अवधि में हुई। इस दौरान उक्त सरकारी जमीन का रसीद कटता गया, जिसमें विभागीय पदाधिकारी के साथ-साथ अंचलीय पदाधिकारी भी संलिप्त रहे। अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, नौबतपुर के द्वारा अनुमति नहीं देने हेतु भेजे गये पत्र पर श्री कुमार द्वारा अवर प्रमण्डल पदाधिकारी को पत्र देना कि ऐसा प्रतिवेदन भेजना सही कार्य नहीं है, यह कृत्य उनके द्वारा अवर प्रमण्डल पदाधिकारी को धमकाने की कार्रवाई है। इस प्रकार श्री कुमार के विरूद्व जालसाजी में संक्रिय सहभागिता एवं जालसाजी को शह देना स्पष्ट रूप से प्रमाणित है। समीक्षा में यह भी पाया गया कि उनके द्वारा अपने पदस्थापन काल में अतिक्रमित भूमि को वर्तमान स्वरूप क्या है, लीज सही है या गलत, इस जालसाजी में किसकी संलिप्तता है, इसकी भी न तो जानकारी लेने का प्रयास किया गया और न ही वस्तुस्थिति का सत्यापन ही किया गया। यहॅा तक कि उनके द्वारा प्रशासनिक हस्तक्षेप के लिए कार्रवाई नहीं कर अवर प्रमण्डल पदाधिकारी द्वारा अनापति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं करने की अनुशंसा को भी नजर अंदाज कर दिया गया जो उनके अवैध कार्य में पूर्ण सहभागिता को पुष्ट करता है। उक्त के अतिरिक्त यह भी पाया गया कि उक्त अवधि में उक्त अतिक्रमित भूमि उनके प्रमडलाधीन रहते हुए भी उनके द्वारा न तो लीज कीे सत्यता ही जॅाची गई और न ही इस लीज के विरूद्व काटे गये रसीद को कैश बुक में दर्ज की गई। उक्त राशि के संबंध में किसी प्रकार के छानबीन का प्रयास नहीं किया गया बल्कि अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए एवं सरकारी सम्पति को क्षति पहुॅचाने के नियत से अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग पर भी शीध्रता से जॅाच पड़ताल करने की कार्रवाई केबजाय अपने अधीनस्थ पदाधिकारी को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करने के लिए अन्यथा प्रयास किया गया जो उनके कुत्सित मंशा का द्योतक है। इस प्रकार श्री कुमार के विरूद्व दोनों आरोप प्रमाणित पाये गये। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के निम्नांकित विन्दु पर विभागीय पत्रांक 101 दिनांक 20.01.14 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया-
''आपके द्वारा विभागीय भूखण्ड का अवैध रूप से दाखिल खारीज कराने हेतु अपने अधीनस्थों पर दबाव दिया गया। अतएव बहुमूल्य विभागीय भूखण्ड का विभाग से बेदखल कराने में आपकी अहम भूमिका रही।''
श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री कुमार द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि अतिक्रमित भूमि पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, पटनासिटी, करबिगहिया, पटना के अधीन है। जहॅा तक रेन्ट रसीद काटने का प्रश्न है, इसके लिये अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, नौबतपुर द्वारा बिना वैघ आवंटन/लीज की जॅाच किये दूसरे प्रमडलान्तर्गत की भूमि का रेन्ट रसीद काटा गया जिसको रद्द करते हुए जालसाज आवेदकों द्वारा मांगी जा रही अनापति प्रमाण पत्र के आवेदन को निरस्त करते हुए जालसाजों के विरूद्व प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश उनके द्वारा अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, नौबतपुर को दिया गया। 3
!बहार गजट (असाधारण), 1 अ(cid:27)तूबर 2015
समीक्षा में पाया कि श्री कुमार द्वारा कोई नया तथ्य समर्पित नहीं किया गया है बल्कि वही बात कही गई है जो उन्होंने बचाव बयान मेें दिया था। लीज सही है या गलत, इस जालसाजी में किसी संलिप्तता है, इन सब की जॅाच की जानी चाहिये थी। परन्तु उनके द्वारा प्रशासनिक हस्तक्षेप के लिए कार्रवाई नहीं कर अवर प्रमण्डल पदाधिकारी द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं करने संबंधी अनुशंसा को नजर अंदाज किया गया। इसलिए उक्त अवैध कार्य में इनकी संलिप्तता की पुष्टि होती है। समीक्षोपरान्त श्री कुमार के विरूद्व उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1557 दिनांक 22.10.14 द्वारा श्री कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-
(1) कालमान वेतन के दो वेतन प्रक्रम से नीचे सदैव के लिये अवनति।
निलंबन अवधि के सेवा का निरूपणएवं वेतन भत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11(5) के तहत नोटिस निर्गत किये जाने एवं नोटिस के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा।
निलंबन अवधि के सेवा का निरूपण एवं वेतन भत्ता के अनुमान्यता के संबंध में विभागीय पत्रांक 1756 दिनांक 25.11.14 द्वारा श्री कुमार को नोटिस निर्गत किया गया। उस नोटिस के आलोक में श्री कुमार से प्राप्त नोटिस का जवाब पत्रांक शून्य दिनांक 24.01.15 की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री कुमार द्वारा नोटिस के जवाब में मुख्य रूप से कहा गया है कि निलंबन अवधि में मैं मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहा हूॅ एवं विभागीय कार्यवाही में पूर्ण सहयोग किया हूॅ। अतः निलंबन अवधि का पूर्णवेतन एवं भत्ता का भुगतान किया जाय।
श्री कुमार से प्राप्त नोटिस का जवाब की सम्यक समीक्षोपरान्त ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी'' का निर्णय लिया गया।
उक्त निर्णय श्री मनोज कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल सम्प्रति सेवानिवृत तकनीकी सलाहकार तिरहुत नहर अंचल, रतवारा, मुजफफरपुर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
सतीश चन्द्र झा,
सरकार के अपर सचिव।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1123%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in