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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 October 2015

Published 01 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1130
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

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22 नि0 सि0(पट0)-03-1019/90/2190—श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, 88) में बरती गयी अनियमितताओं फुलवरिया नहर प्रमण्डल, सिरदल्ला के पदस्थापन अवधि (दिनांक 12.04.84 से 31.12.88) में बरती गयी अनियमितताओं फुलवरिया नहर प्रमण्डल, सिरदल्ला के पदस्थापन अवधि (दिनांक 12 ीक्षण अभियन्ता, जल पथ अंचल, नवादा एवं की जानकारी मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, पटना, अधीक्षण अभियन्ता, जल पथ अंचल, नवादा एवं की जानकारी मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, पटना, अध महालेखाकार के अंकेक्षण प्रतिवेदन सं0-आई0 आर0-1/88-89 से प्राप्त होने पर विभागीय स्तर पर इसकी जॅाच महालेखाकार के अंकेक्षण प्रतिवेदन सं0-आई0 आर0-1/88-89 से प्राप्त होने पर विभागीय स्तर पर इसकी जॅाच महालेखाकार के अंकेक्षण प्रतिवेदन सं0-आई0 आर0-1/88-89 से प्राप्त होने पर विभागीय स्तर पर इसकी जॅाच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उपरोक्त सभी प्रतिवेदनों के समीक्षोपरान्त श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, तत्कालीन विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उपरोक्त सभी प्रतिवेदनों के समीक्षोपरान्त श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, तत्कालीन विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उपरोक्त सभी प्रतिवेदनों के समीक्षोपरान्त श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, तत्कालीन ा वर्ष 86-87, 87-88 एवं 88-89 की अवधि में नहरो की मरम्मति, सुदृढ़ीकरण, नहर टूट एवं ा वर्ष 86-87, 87-88 एवं 88-89 की अवधि में नहरो की मरम्मति, सुदृढ़ीकरण, नहर टूट एवं कार्यपालक अभियंता वर्ष 86-87, 87-88 एवं 88-89 की अवधि में नहरो की मरम्मति, सुदृढ़ीकरण, नहर टूट एवं अनियमित रूप से नहरों के उड़ाही मद में कार्यो को छोटे-छोटे टुकड़े कर अधिकांशतः 25,000/- (पचीस हजार अनियमित रूप से नहरों के उड़ाही मद में कार्यो को छोटे-छोटे टुकड़े कर अधिकांशतः 25,000/- (पचीस हजार अनियमित रूप से नहरों के उड़ाही मद में कार्यो को छोटे-छोटे टुकड़े कर अधिकांशतः 25,000/- (पचीस हजार र प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर रूपये) के अन्दर का एकरारनामा करने तथा 2,000 (दो हजार रूपये) तक के अन्द रूपये) के अन्दर का एकरारनामा करने तथा 2,000 (दो हजार रूपये) तक के अन्दर प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर हस्त रसीद पर 58.98 लाख रूपये का अनियमित भुगतान के लिए दोषी पाये गये जिसके लिए विभागीय आदेश 98 लाख रूपये का अनियमित भुगतान के लिए दोषी पाये गये जिसके लिए विभागीय आदेश 98 लाख रूपये का अनियमित भुगतान के लिए दोषी पाये गये जिसके लिए विभागीय आदेश 91 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1357 दिनांक 04.06.91 91 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1357 दिनांक 04 सं0-88 दिनांक 26.03.91 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1357 दिनांक 04 र्करण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 1950 के नियम 55 के तहत विभागीय द्वारा उनके विरूद्व सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 1950 के नियम 55 के तहत विभागीय द्वारा उनके विरूद्व सिविल सेवा (वगी कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें क्यों नहीं सेवा से सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें क्यों नहीं सेवा से मुक्त कर दिया जाय, सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें क्यों नहीं सेवा से इस संबंध में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की प्रति उन्हें उपलब्ध कराते हए विभागीय पत्रांक 376 इस संबंध में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की प्रति उन्हें उपलब्ध कराते हए विभागीय पत्रांक 376 इस संबंध में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की प्रति उन्हें उपलब्ध कराते हए विभागीय पत्रांक 376 95 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर की समीक्षा 95 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर की समीक्षा दिनांक .9.04.95 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर की समीक्षा ेपरान्त श्री प्रसाद निम्नलिखित आरोपों के लिए दोषी पाये गयेः- सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद निम्नलिखित आरोपों के लिए दोषी पाये गयेः- सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा (i). वर्ष 1986-87 से 88-89 के बीच नहर के कार्य को टुकडे-टुकड़े कर एकरारनामा करना वर्ष 1986-87 से 88-89 के बीच नहर के कार्य को टुकडे-टुकड़े कर एकरारनामा करना वर्ष 1986-87 से 88-89 के बीच नहर के कार्य को टुकडे-टुकड़े कर एकरारनामा करना (ii). तथा 2,000 (दो हजार रूपये) का प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर हस्त रसीद पर 1 तथा 2,000 (दो हजार रूपये) का प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर हस्त रसीद पर 1.92 लाख रूपये का तथा 2,000 (दो हजार रूपये) का प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर हस्त रसीद पर 1 भुगतान करना। (iii). प्रदत्त वित्तीय शक्तियों का अतिक्रमण कर अनियमित व्यय करना। प्रदत्त वित्तीय शक्तियों का अतिक्रमण कर अनियमित व्यय करना। (iv). प्राक्कलन को टुकड़े-टुकड़े कर अपनी सक्षमता के अन्दर लाना। प्राक्कलन को टुकड़े-टुकड़े कर अपनी सक्षमता के अन्दर लाना। (v). दिसम्बर 87 तथा अक्टुबर, नवम्वर एवं दिसम्वर 88 में जब निरीक्षण हुआ तो अभिलेख उपलब्ध नहीं 7 तथा अक्टुबर, नवम्वर एवं दिसम्वर 88 में जब निरीक्षण हुआ तो अभिलेख उपलब्ध नहीं अनियमितता एवं दुरूपयोग का प्रयास किया गया एवं जॅाच में कराया गया जिससे संकेत मिलता है कि वित्तीय अनियमितता एवं दुरूपयोग का प्रयास किया गया एवं जॅाच में कराया गया जिससे संकेत मिलता है कि वित्तीय सहयोग नही दिया गया।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 इस बीच प्रसाद द्वारा निलंबन आदेश के विरूद्व माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-3334/91 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना के निदेश के आलोक में विभागीय आदेश सं0-25 दिनांक 04.02.92 द्वारा श्री प्रसाद को दिनांक 04.06.91 से पूर्ण वेतन भत्ता भुगतान करने आदेश निर्गत किया गया। विभागीय आदेश सं0-1079 दिनांक 22.09.97 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबन से मुक्त किया गया। उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गयाः- (i) निन्दन वर्ष 88-89 (ii) कार्यपालक अभियन्ता से सहायक अभियन्ता के पद पर पदावनति (रिभर्शन)। (iii) निलंबन अवधि (दिनांक 26.03.91 से 03.09.91) में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा किन्तु निलंबन की अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी। उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें क्यों नहीं कार्यपालक अभियन्ता से सहायक अभियन्ता के पद पर पदावनति कर दिया जाय, इस संबंध में विभागीय पत्रांक 3063 दिनांक 22.09.97 द्वारा श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता से पुनः द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रमाणित पाये गयेः- (i) वर्ष 1986-87 से 1988-89 में 58.98 लाख रूपये के नहर के कार्य को टुकड़ा-टुकड़ा कर एकरारनामा करना। (ii). 2,000 (दो हजार रूपये) का प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर हस्त रसीद पर भुगतान करना (1.61 लाख)। (iii). प्रदत्त वित्तीय शक्तियों का दुरूपयोग कर अनियमित व्यय करना। (iv). प्राक्कलन को टुकड़े-टुकड़े कर अपनी सक्षमता के अन्दर लाना। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1499 दिनांक 30.11.2000 द्वारा श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (i) ''निन्दन'' जिसकी प्रविष्टि उनकी चारित्री वर्ष 88-89 में की जायेगी। (ii) कार्यपालक अभियन्ता से सहायक अभियन्ता के पद पर पदावनति (रिभर्शन)। (iii) निलंबन अवधि (दिनांक 26.03.91 से 03.09.91) में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा किन्तु निलंबन की अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी। उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री प्रसाद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-13057/2000 दायर किया गया। उक्त याचिका में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 31.07.15 को निम्न न्याय निर्णय पारित किया गयाः- 12. I have perused the order passed by the Disciplinary Authority imposing the punishment upon the petitioner as indicated above. I do not find any discussion on the petitioner's representation against the findings of the Inquiry Officer in the said order of punishment. The impugned notification/order of punishment dated 30.11.2000 has thus became vulnerable and requires interference by this Court. The notification dated 30.11.2000 imposing punishment upon the petitioner is, accordingly, quashed 13. The respondents are directed to pass an order afresh after considering the petitioner's respresentation which has been brought on record by way of Annexure-12 to the present writ application. Such order must reflect application of mind showing consideration of the said representation of the petitioner against findings of the Inquiry Officer. This court will not comment upon the nature of punishment which the diciplinary authority may pass thereafter as learned State Counsel appears to the right in his submission that it is purely within the discretion of the disciplinary authority to impose appropriate punishment. 14. However, as has been stated at the bar, the petitioner is said to have attained the age of superannuation on 31.01.2001. the disciplinary authority will consider awarding appropriate punishment upon the petitioner Under Bihar Pension Rules. The disciplinary authority must pass an order, in the light of the present order of this Court within a period of six months from the date of receipt/production of a copy of this order, failing which the petitioner will be entitled to all benefits. उक्त न्याय निर्णय के आलोक में दण्डादेश अधिसूचना ज्ञापांक 1499 दिनांक 30.11.2000 को निरस्त करने तथा श्री प्रसाद के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1357 दिनांक 04.06.91 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं3 !बहार गजट (असाधारण), 1 अ(cid:27)तूबर 2015 अपील) नियमावली 1950 के नियम 55 के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) में सम्परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में दण्डादेश अधिसूचना ज्ञापांक 1499 दिनांक 30.11.2000 को निरस्त किया जाता है तथा श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमण्डल, सिरदल्ला के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1357 दिनांक 04.06.91 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 1950 के नियम 55 के तहत संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1130/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1130.