(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत (cid:24) आि(cid:15)वन 1(cid:24)3(cid:25) (cid:26)श(cid:15)(cid:27)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 1132) पटन(cid:4)
2(cid:15)15
पटन(cid:4)(cid:28) व५ह(cid:31)प०तव(cid:4)र, 1 [Çत३बर 2(cid:15)15
जल संसाधन विभाग
&&&&&&&&
vf/klwpuk
19 vxLr 2015
सं0 22 नि0 सि0 (पट0)-03-04/2014/
22 नि0 सि0 (पट0)-03-04/2014/1851—श्री विजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, केन्द्रीय श्री विजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, केन्द्रीय 2010 जिसके लिये श्री कुमार को भवन प्रमंडल, पटना के विरूद्ध प्राप्त निगरानी विभाग के पत्रांक 1492 दिनांक 19.03.2010 जिसके लिये श्री कुमार को भवन प्रमंडल, पटना के विरूद्ध प्राप्त निगरानी विभाग के पत्रांक 1492 दिनांक 19 ा उपयोग करने के दोषी पाये जाने के कारण भवन विधान सभा के दक्षिण में निर्माणाधीन नाला में तीन नं0 ईंट का उपयोग करने के दोषी पाये जाने के कारण भवन विधान सभा के दक्षिण में निर्माणाधीन नाला में तीन नं0 ईंट क निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 3347 दिनांक 30 10 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 3347 दिनांक 30.04.10 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षोपरान्त पाया गया कि स्पष्टीकरण में पूछे गये बिन्दुओं का समावेश उत्तर में नहीं रहने के कारण भवन निर्माण समीक्षोपरान्त पाया गया कि स्पष्टीकरण में पूछे गये बिन्दुओं का समावेश उत्तर में नहीं रहने के कारण भवन निमा समीक्षोपरान्त पाया गया कि स्पष्टीकरण में पूछे गये बिन्दुओं का समावेश उत्तर में नहीं रहने के कारण भवन निमा विभाग के पत्रांक 8929 (भ0) दिनांक 26.11.10 द्वारा पुनः स्पष्टीकरण पूछा गया। विभाग के पत्रांक 8929 (भ0) दिनांक 26
श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय स्तर (भवन निर्माण विभाग) पर की गयी एवं पाया गया श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय स्तर (भवन निर्माण विभाग) पर की गयी एवं पाया गया श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय स्तर (भवन निर्माण विभाग) पर की गयी एवं पाया गया कि इस निर्माण में एकरारनामा के अनुरूप ईंट का व्यवहार नहीं होने के कारण उक्त प्रमाणि कि इस निर्माण में एकरारनामा के अनुरूप ईंट का व्यवहार नहीं होने के कारण उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कि इस निर्माण में एकरारनामा के अनुरूप ईंट का व्यवहार नहीं होने के कारण उक्त प्रमाणि कुमार को दोषी पाया गया। फलस्वरूप उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना कुमार को दोषी पाया गया। फलस्वरूप उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना कुमार को दोषी पाया गया। फलस्वरूप उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना 13 द्वारा श्री कुमार को निम्न दंड 08.13 सह ज्ञापांक- 11889 (भ0) दिनांक 27.08.13 द्वारा श्री कुमार को निम्न दंड सं0- 11888 (भ0) दिनांक 27.08 संसूचित किया गया-
वार्षिक वेतनवृद्धि का असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
(1) दो वार्षिक वेतनवृद्धि का असंचयात्मक प्रभाव से रोक। (2) उक्त निर्माण में सरकार को हुई वित्तीय क्षति का आकलन कर उक्त राशि की वसूली संबंधी आदेश बाद (2) उक्त निर्माण में सरकार को हुई वित्तीय क्षति का आकलन कर उक्त राशि की वसूली संबंधी आदेश बाद (2) उक्त निर्माण में सरकार को हुई वित्तीय क्षति का आकलन कर उक्त राशि की वसूली संबंधी आदेश बाद में निर्गत किया जायेगा। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 मंतव्य एवं पूर्व में उपलब्ध कराये गये सभी अभिलेखों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि भवन निर्माण विभाग में अपने मंतव्य में अंकित किया है कि श्री कुमार के विरूद्ध विधान सभा के दक्षिण में निर्माणाधीन नाला में प्राक्कलन के विशिष्टियों के विपरीत निम्न कोटि का तीन नम्बर का ईंट प्रयोग करने का आरोप प्रमाणित पाया गया है। समीक्षा में यह भी पाया गया कि तीन नम्बर का ईंट का प्रयोग का आरोप तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन में नेत्रानुमान पर आधारित है। यदि ईंट की गुणवत्ता सही नहीं थी तो इसकी जाँच प्रयोगशाला में कराया जाना चाहिये था ताकि प्राप्त जाँचफल के आलोक में आरोप को सिद्ध किया जा सकता, परन्तु ऐसा नहीं किया गया। साथ ही समीक्षा में यह भी पाया गया कि कार्य की प्राक्कलित राशि मात्र दो लाख रूपये की थी और इतने छोटे कार्य के कारण गुणवत्ता पर जितना अपेक्षित ध्यान आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिया जाना चाहिए था, नहीं दिया गया। इसलिये इसमें वित्तीय क्षति से अधिक लापरवाही का मामला बनता है। समीक्षोपरान्त भवन निर्माण विभाग के अधिसूचना सं0-11888 (भ0) दिनांक 27.08.13 सह ज्ञापांक 11889 (भ0) दिनांक 27.08.13 द्वारा संसूचित दण्ड ''दो वेतनवृद्वि का असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' के बदले निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गयाः-
(1) निन्दन वर्ष 2006-07 उक्त निर्णय के आलोक में श्री विजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, केन्द्रीय भवन प्रमंडल, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, अनिसाबाद, पटना को भवन निर्माण विभाग के अधिसूचना सं0-11888 (भ0) दिनांक 27.08.13 सह ज्ञापांक 11889 (भ0) दिनांक 27.08.13 द्वारा संसूचित दण्ड ''दो वेतनवृद्वि का असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' के बदले निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः-
(1) निन्दन वर्ष 2006-07
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1132%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in