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जल संसाधन विभाग
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सं0 22/नि0सि0(जम0)-12-10102/94/
के तहत स्पष्टीकरण किया गया।
बावजूद मेसर्स अरविंद टेक्नो को लौटा दी गई। 98 द्वारा संसूचित किया गयाः-
%) पेंशन पर रोक।
सं0-3054/98 के मामले में दिनांक 05.02. माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा LPA संख्या-284/2009 में दिनांक 08.07 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 उनके पेंशन के बकाये राशि का अविलंब भुगतान करने के आदेश संसूचित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-182 दिनांक 22.02.12 द्वारा श्री मजीद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। श्री राजेश्वर दयाल, अभियंता प्रमुख (उत्तर), जल संसाधन विभाग सह संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-100/को0 दिनांक 30.09.14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए श्री मजीद को द्वितीय कारण पृच्छा करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-2062 दिनांक 22.12.14 द्वारा जाँच प्रतिवेदन से असहमति के निम्न बिन्दुओं को अंकित करते हुए श्री मजीद से द्वितीय कारण पृच्छा किया गयाः- (i) आरोप संख्या-1 के संबंध में संचालन पदाधिकारी ने अंकित किया है कि कार्य निर्धारित अवधि 31.12.89 को पूर्ण हो गया था जबकि विभाग में अभिलेख के समीक्षा में पाया गया कि कार्य 1992 तक पूर्ण नहीं हुआ था। (ii) आरोप संख्या-2 के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आधार पर आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया है कि जितनी राशि की क्षति हुई थी वह मेसर्स टैक्समैको से वसूल कर ली गई है अर्थात् आरोपी पदाधिकारी के इस कृत्य से सरकार को क्षति होना प्रमाणित है। (iii) आरोप संख्या-3 को संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आधार पर प्रमाणित नहीं पाया गया है कि संवेदक द्वारा स्थापना मद में 25 लाख रूपये प्रति वर्ष की माँग की गई थी। अतएव इनके द्वारा जमानत की राशि कम्पनी को लौटा दी गई। समीक्षा में पाया गया कि जब दिनांक 31.12.89 तक ही कार्य की समय वृद्धि दी गई थी तब कार्य पूर्ण नहीं करने की स्थिति में जमानत की राशि से एकरारनामा के अनुसार वसूली किया जाना अपेक्षित था जो श्री मजीद द्वारा नहीं किया गया। उपर्युक्त के आलोक में श्री मजीद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में उठाए गए तथ्यों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त निम्नांकित तथ्य पाए गये। श्री मजीद का यह कथन कि कार्य विस्तारित अवधि दिनांक 31.12.89 तक पूर्ण हो चुका था के संदर्भ में आरोप संख्या-3 स्वतः स्पष्ट है कि माननीय मंत्री, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा निरीक्षण के क्रम में अवशेष कार्य विभागीय स्तर से कराने का निर्देश दिया गया था। श्री मजीद के पत्रांक-01 दिनांक 14.04.91 में अंकित है ''मात्र ब्लैक आउट और सेकंड स्टेज कंक्रीटिंग का कार्य जो लगभग रूपये 20 लाख का था, के लिए एकरारनामा की समाप्ति की तिथि बढ़ाने से एस्कैलेशन के रूप तथा हर्जाना के रूप में लगभग रूपये 62.50 लाख भुगतान करना पड़ता और मैं यह भुगतान के लिए दोषी करार दिया जाता। सेकंड स्टेज कंक्रीट कार्य में विभाग को जितनी राशि का भुगतान करना पड़ा उसकी वसूली मेसर्स टैक्समैको लि0 के ग्यारहवीं (11वीं) चालू विपत्र से कर ली गई है। श्री मजीद के उक्त कथन से स्वतः स्थापित होता है कि विस्तारित अवधि दिनांक 31.12.89 तक कार्य पूर्ण नहीं हुआ था।'' मुख्य अभियता, जमशेदपुर के पात्रांक 2094 के कंडिका-I एवं कंडिका-III में उल्लेख है कि तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 1473 दिनांक 26.12.89 से संवेदक का अवशेष कार्य पूर्ण करने के लिए लिखा जिसकी सम्पुष्टि श्री मजीद, आरोपी पदाधिकारी के पत्रांक 2039 दिनांक 30.12.89 से की गई एवं संवेदक के कार्य पूर्णतः प्रमाण पत्र निर्गत करने के अनुरोध पर श्री मजीद, आरोपित पदाधिकारी ने पत्रांक 12 दिनांक 08.01.90 से बराज के अवशेष कार्य को पूरा करने का आदेश दिया, जिससे बराज निर्माण कार्य विस्तारित अवधि दिनांक 31.12.89 तक पूर्ण रूप से पूर्ण नहीं होने का बोध होता है। इसके अतिरिक्त श्री मजीद द्वारा कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। उक्त पाये गए तथ्यों से श्री मजीद के विरूद्ध आरोप प्रमाणित होता है। उपर्युक्त पाए गए तथ्यों के आलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए श्री मजीद, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गयाः- (i) पेंशन से 2 वर्षों तक पाँच प्रतिशत (5%) की राशि की कटौती। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति प्राप्त है। उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री हसन मजीद, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता को ''उनके पेंशन से दो वर्षों तक पाँच प्रतिशत (5%) की राशि की कटौती'' का दण्ड देते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
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