(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत (cid:24) आि(cid:15)वन 1(cid:24)3(cid:21) (cid:25)श(cid:15)(cid:26)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 113(cid:21)) पटन(cid:4)
2(cid:15)15
पटन(cid:4)(cid:27) व५ह(cid:30)प०तव(cid:4)र, 1 [Çत३बर 2(cid:15)15
जल संसाधन विभाग
&&&&&&&&
vf/klwpuk
21 vxLr 2015
सं0 22/नि0सि0(सिवान)-11-21/2014/
नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज मेें प्रतिनियुक्ति अवधि में सारण तटबंध के 142 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 किया गया जबकि कार्यस्थल पर ड्रेजिंग मशीन आया ही नहीं। जिसके फलस्वरूप प्रथम विपत्र के माध्यम से संपादित कार्य 1,157.55 घनमीटर के विरूद्ध रू0 1,66,941,86.00 का विपत्र के अनियमित राशि भुगतान हेतु अनुशंसा की गयी। जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये। साथ ही, उक्त मामले की विस्तृत जाँच मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग से अलग से भी कराने का निर्णय लिया गया। आरोपित पदाधिकारी श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह के दिनांक 31.12.11 को सेवानिवृत्त हो जाने की स्थिति में विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 230 दिनांक 29.02.12 द्वारा श्री सिंह को निलंबन से मुक्त करते हुए उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन निमयावली के नियम 43 (बी0) के अन्तर्गत सम्परिवर्तित किया गया। संचालित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के उपरांत तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसकी समीक्षोपरान्त तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन में अनियमित भुगतान के लिए दोषी मानते हुए निगरानी विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 1362 दिनांक 16.09.14 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब तथा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरान्त पाया गया कि मात्र जलस्तर के उपर मिट्टी हटाने के उपरांत ही इन्हें समेकित कार्यमद दर से विपत्र पारित करने के पूर्व उच्च पदाधिकारियों अथवा विभाग से दिशा निदेश की माँग करना चाहिए था जो इनके द्वारा नहीं किया गया एवं आरोपी पदाधिकारी द्वारा स्वविवेक का निर्णय लेते हुए मात्र जलस्तर से उपर के मिट्टी कार्य कराकर समेकित दर से विपत्र तैयार कर पारित करते हुए भुगतान हेतु अनुशंसा कर दिया गया जिसे एकरारनामा के विरूद्ध माना जायेगा। उल्लेखनीय है कि निविदा शर्त्त का अनुपालन करना मुख्य रूप से कार्यपालक अभियंता की जिम्मेवारी होती है, फिर भी विपत्र तैयार करने से पूर्व इनसे अपेक्षा थी कि वस्तुस्थिति की जानकारी अपने नियंत्री पदाधिकारी को देते हुए दिशा-निर्देश प्राप्त करते जो इनके द्वारा नहीं किया गया। अतएव श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह के विरूद्ध मात्र बिना ड्रेजिंग कार्य कराये ही समेकित दर से प्रथम चालू विपत्र पारित करते हुए भुगतान हेतु अनुशंसा करने के आरोप को इस सीमा तक प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त को सक्षम प्राधिकार द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गयाः- (क) ''दस प्रतिशत पेंशन की तीन वर्षों तक कटौती'' (ख) निलंबन अवधि में जीवन-निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी। उक्त निर्णय के आलोक में श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त को उक्त दण्ड अधिरोपित करते हुए संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, विशेष कार्य पदाधिकारी।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1137%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in