(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत (cid:24) आि(cid:15)वन 1(cid:24)3(cid:25) (cid:26)श(cid:15)(cid:27)
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जल संसाधन विभाग
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सं0 22/नि0सि0(सम0)-02-08/2009/
22/नि0सि0(सम0)-02-08/2009/1913—श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के विरूद्व उक्त प्रमण्डलान्तर्गत वर्ष 2007-08 में प्रथम चरण में संपादित जमींदारी बांधों के नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के विरूद्व उक्त प्रमण्डलान्तर्गत वर्ष 2007-08 में प्रथम चरण में संपादित जमींदारी बांधों के नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के विरूद्व उक्त प्रमण्डलान्तर्गत वर्ष 2007-08 में प्रथम चरण में संपादित जमींदारी बांधों के अनियमितता की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में बरती गयी अनियमितता की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में बरती गयी उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरान्त कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरान्त कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरान्त कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक 315 दिनांक 18.02.10 द्वारा श्री राय से स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर 10 द्वारा श्री राय से स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की 10 द्वारा श्री राय से स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न आरोप गठित करते हुए श्री राजवंश राय, गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न आरोप गठित करते हुए श्री राजवंश राय, गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न आरोप गठित करते हुए श्री राजवंश राय, कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 267 दिनांक 04.03.2011 कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 267 दिनांक 04 कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 267 दिनांक 04 पील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अ प्रारम्भ की गयीः-
जमींदारी बांध के कार्यान्वयन हेतु दिये गये विभागीय निदेशों के आलोक में प्री लेवल की जॅाच कराये 1. जमींदारी बांध के कार्यान्वयन हेतु दिये गये विभागीय निदेशों के आलोक में प्री लेवल की जॅाच कराये जमींदारी बांध के कार्यान्वयन हेतु दिये गये विभागीय निदेशों के आलोक में प्री लेवल की जॅाच कराये बिना ही कार्य कराया गया।
2. बॅाध का स्लोप विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया एवं बिना गुण नियंत्रण से जॅाच कराये ही कार्यो का बॅाध का स्लोप विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया एवं बिना गुण नियंत्रण से जॅाच कराये ही कार्यो का भुगतान किया गया हैं।
3. स्वीकृत प्राक्कलन में जंगल क्लीयरेंस हेतु अनुचित दर का प्रावध्
स्वीकृत प्राक्कलन में जंगल क्लीयरेंस हेतु अनुचित दर का प्रावधान किया गया है जिसके फलस्वरूप
ाान किया गया है जिसके फलस्वरूप रू0 25361.00 राशि का अनियमित भुगतान के लिए आप दोषी हैं।
00 राशि का अनियमित भुगतान के लिए आप दोषी हैं।
4. जॅाच पदाधिकारी के द्वारा सूचित किये जाने के बावजूद आप मुख्यालय से अनुपस्थित थे। साथ ही आपके जॅाच पदाधिकारी के द्वारा सूचित किये जाने के बावजूद आप मुख्यालय से अनुपस्थित थे। साथ ही आपके अधीनस्थ पदाधिकारी द्वारा जॅाच कार्य में सहयोग नहीं किया गया और न ही अभिलेख उपलब्ध कराया गया। अधीनस्थ पदाधिकारी द्वारा जॅाच कार्य में सहयोग नहीं किया गया और न ही अभिलेख उपलब्ध कराया गया। अधीनस्थ पदाधिकारी द्वारा जॅाच कार्य में सहयोग नहीं किया गया और न ही अभिलेख उपलब्ध कराया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही श्री राय दिनांक 31.10.13 को सेवानिवृत हो गये। अतः 13 को सेवानिवृत हो गये। अतः उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही श्री राय दिनांक 31 14 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-56 दिनांक 16.5.14 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-56 दिनांक 16 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया।
विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया गया। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक् समीक्षोपरान्त जॅाच प्रतिवेदन से ा सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक् समीक्षोपरान्त जॅाच प्रतिवेदन से गया। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्ष 14 द्वारा श्री राय से द्वितीय असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित विन्दुओं पर विभागीय पत्रांक 614 दिनांक 22.5.14 द्वारा श्री राय से द्वितीय असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित विन्दुओं पर विभागीय पत्रांक 614 दिनांक 22 कारण पृच्छा की गयीः-
1. संचालन पदाधिकारी द्वारा उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में प्री लेवल क ी जॅाच विभाग द्वारा गठित जॅाच संचालन पदाधिकारी द्वारा उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में प्री लेवल की जॅाच विभाग द्वारा गठित जॅाच दल द्वारा किये जाने का उल्लेख के आधार पर बिना प्री लेवल की जॅाच का ही कार्य कराने के आरोप को प्रमाणित दल द्वारा किये जाने का उल्लेख के आधार पर बिना प्री लेवल की जॅाच का ही कार्य कराने के आरोप को प्रमाणित दल द्वारा किये जाने का उल्लेख के आधार पर बिना प्री लेवल की जॅाच का ही कार्य कराने के आरोप को प्रमाणित2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 नहीं माना गया है। परन्तु संदर्भित कोई साक्ष्य (जॅाचित प्री लेवल बुक) न तो उड़नदस्ता दल एवं न ही आपके द्वारा उपलब्ध कराया गया है। अतः साक्ष्य विहीन तथ्य को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आपके विरूद्व आरोप सं0-1 विभाग द्वारा गठित जॅाचदल से बिना प्री लेवल जॅाच के कार्य कराने का आरोप प्रमाणित होता है।
2. जमींदारी बॅाध का कार्य राजस्थानी टे्रक्टर से कराने, प्राक्कलन में Compaction मद का प्रावधान नहीं रहने के कारण मिट्टी के गुण नियंत्रण से जॅाच का औचित्य नहीं होने तथा उड़नदस्ता द्वारा कराये गये कार्य पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करने मिट्टी की गुणवत्ता की जॅाच नहीं करने एवं पायी गयी भिन्नता मामूली एवं मान्य सीमा के अन्तर्गत माने जाने के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा आपके विरूद्व आरोप सं0-2 प्रमाणित नहीं माना गया है। परन्तु जिससे सहमत नहीं हुआ जा सकता है। शाहपुर P W D Road से बरहेता धरनी पट्टी तक जमींदारी बांध के प्राक्कलन के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इस बांध में 10 अद्द डबल भेट का पाईप कल्बर्ट का प्रावधान है। उक्त संरचना में कंक्रीटिंग कार्य, ब्री वर्क तथा अन्य पक्का कार्य कराया गया है। उक्त कार्य का भी गुण नियंत्रण जॅाच से संबंधित कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। अतः संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए बिना गुण नियंत्रण से जॅाच कराये ही भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है।
(3) आपके द्वारा कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह प्रमाणित हो सके कि प्राक्कलन में प्रावधानित जंगल क्लीयेरेंस आवश्यकता आधारित था। अतः साक्ष्य के अभाव में आपके विरूद्ध प्राक्कलन में अनावश्यक रूप से जगल क्लीयरेंस का प्रावधान कर कुल 25,361/- रूपये का अधिकाई भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है। श्री राय द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/बचाव बयान में निम्न तथ्य अंकित किये गये है :-
(1) प्री लेवल की जॉंच विभाग द्वारा गठित जॉंच दल सं0-3 के सहायक अभियंता, बॉंध एवं गेट प्रमंडल-2, पटना तथा रीडर, बाल्मी, पटना द्वारा की गयी है। जॅाचित प्री लेवल बुक की छाया प्रति संलग्न की गई है। (2) शाहपुर P W D Road से बरहेता धरनी पट्टी तक बॉंध के प्राक्कलन में 10 अदद् डबल भेट का पाईप कल्भर्ट निर्माण कार्य का प्रावधान है एवं निर्माण कराया गया है। उक्त संरचनाओं में कंक्रीटिंग कार्य, ब्रीक वर्क तथा अन्य पक्का कार्य एक एक योजना में बहुत थोड़ा थोड़ा मात्रा में है। कंक्रीटिंग कार्य 15m3 से कम रहने के कारण गुण नियंत्रण कार्य नहीं कराया गया है। साक्ष्य हेतु कंक्रीटिंग मिक्स (Based on Indian Standards) का क्रमांक 8.2 की प्रति संलग्न की गयी है।
(3) प्राक्कलन में स्थल के अनुरूप जंगल क्लीयरेंस का प्रावधान किया गया था। स्थल जॉंचोपरान्त अधीक्षण अभियंता द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी है। कार्य बाढ़ 2008 के पूर्व कराया गया है एवं उड़नदस्ता 2009 में कार्य की जॉंच की गयी है। अतः जॉंच दल द्वारा लगाया गया आरोप वास्तविकता पर आधारित नहीं है।
श्री राय से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त नया साक्ष्य के रूप में संलग्न अभिलेखों यथा जॉंचित प्रीलेवल बुक की छायाप्रति के आलोक में आरोप सं0-1 बिना प्री लेवल की जॉंच कराये कार्य कराने का आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया है।
आरोप सं0-2 जो शाहपुर P W D Road से बरहेता धरनी पट्टी जमींदारी बांधों में कराये गये संरचना कार्य में बिना गुण नियंत्रण की जॉंच कराये भुगतान करने से संबंधित है, के संबंध में श्री राय द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में स्वीकार किया गया है कि उक्त जमींदारी बांध में छोटे-छोटे संरचना रहने के कारण कार्यों का गुण नियंत्रण की जॉंच नहीं करायी गयी है। जबकि नियमानुसार गुण नियंत्रण की जॉंच कराकर ही भुगतान की कार्रवाई करना है। श्री राय द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है जिससे प्रमाणित हो सके कि कराये गये संरचानों के कार्य के भुगतान से पूर्व गुण नियंत्रण की जॉंच करायी गयी है। अतएव आरोपित श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध बिना गुण नियंत्रण जॉंच कराये ही भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है।
उड़नदस्ता जाँचदल द्वारा प्राक्कलन में अनावश्यक रूप से जंगल क्लीयरेन्स का प्रावधान कर कुल 25,361/- रूपये के अनियमित भुगतान माना गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा जमींदारी बाँधों का कार्य वर्ष 2007-08 में किया गया है जबकि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा स्थल जाँच वर्ष 2009 में किया गया हैं के आधार पर आरोप स्थापित नहीं माना गया है। परन्तु साक्ष्य के अभाव में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए श्री राय के विरूद्ध उक्त आरोप को प्रमाणित मानते हुए द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में श्री राय द्वारा कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे पा्रमाणित हो सके कि प्राक्कलन में जंगल क्लीयरेन्स का प्रावधान आवश्यकयता आधारित था। अतएव श्री राय के विरूद्ध अनावश्यक रूप से प्राक्कललन में जंगल क्लीययरेन्स का प्रावधान कर कुल 25,361/- (पच्चीस हजार तीन सौ एकसठ) रूपये के अनियमित भुगतान का आरोप प्रमाणित होता है।
इस प्रकार सम्यक सीक्षोपरान्त श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध आरोप सं0-2 एवं 3 क्रमशः संरचना के कार्यों का भुगतान बिना गुण नियंत्रण जॅाच कराये ही करना तथा अनावश्यक रूप से प्राक्कलन में जंगल क्लीयरेंस का प्रावधान कर कुल 25,361/- (पच्चीस हजार तीन सौ एकसठ) रूपये के अनियमित भुगतान करने का आरोप प्रमाणित पाया गया।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना संख्या-657 दिनांक 17.03.15 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (1) पेंशन से 10 (दस प्रतिशत) की कटौती एक वर्ष के लिए। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया है जिसके मुख्य अंश निम्नवत हैः-3 !बहार गजट (असाधारण), 1 अ(cid:27)तूबर 2015 1. शाहपुर पी0 डब्लू0 डी0 रोड से बरहेता धरनी पट्टी जमींदारी बाँध का अंतिम विपत्र अभीतक पारित नहीं हुआ है। चालू विपत्र से विभागीय मापदण्ड के अनुसार सेटलमेंट की राशि की कटौती की गयी है एवं गुण नियंत्रण जाँच नहीं कराने की भी राशि की कटौती की गयी है। संवेदक का 10 प्रतिशत अग्रिम राशि एवं 10 प्रतिशत बिल में कटौती की गयी राशि अभी भी सुरक्षित है। उसका भुगतान नहीं किया गया है। अतः अंतिम विपत्र का भुगतान के पहले गुण नियंत्रण कराकर ही भुगतान किया जाना था। अतः जब तक अंतिम विपत्र पारित नहीं होता है आरोप प्रमाणित होने का औचित्य ही नहीं बनता हैं।
2. कार्यपालक अभियंता द्वारा प्राक्कलन तैयार नहीं किया जाता है। प्राक्कलन कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता के माध्यम से तैयार होता है। फिर उसकी अधीक्षण अभियंता के स्वीकृति के बाद काम कराया जाता है। जंगल क्लीयरेन्स का प्रावधान जो रूपये 25,362/- का किया गया था, अधीक्षण अभियंता के स्वीकृति के उपरांत उसका भुगतान किया गया है। यदि इसको विभाग अनियमित कहता है तो उसकी कटौती भी अंतिम विपत्र से की जा जाती सकती है, क्योंकि संवेदक का अंतिम भुगतान नहीं किया गया है। संवेदक का कुल प्राक्कलन का 10% अर्नेस्ट मनी के रूप में काटी गयी राशि प्रमंडल में ही है।
उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर लगाये गये आरोप प्रमाणित मानने का कोई नियम सम्मत आधार एवं न्याय संगत औचित्य नहीं रह जाने के आलोक में श्री राय द्वारा उक्त दण्ड से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। श्री राय से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया किः- 1. आरोप सं0-1 के संदर्भ में आरोपी द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेख किया गया है कि उक्त कार्यों का अभीतक अंतिम विपत्र का भुगतान नहीं हुआ है तथा संवेदक से चालू विपत्र में 10 प्रतिशत अग्रिम राशि तथा 10 प्रतिशत राशि गुण नियंत्रण जाँच मद में कटौती की गयी है। उक्त काटी गयी राशि अभीतक प्रमंडल में सुरक्षित है परन्तु आरोपी श्री राय द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। आरोपी का कहना है कि नियमानुसार अंतिम विपत्र के भुगतान से पहले गुण नियंत्रण की जाँच कराया जाना है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि नियमानुसार प्रत्येक विपत्र के भुगतान से पूर्व गुण नियंत्रण की जाँच कराना अनिवार्य है। गुण नियंत्रण की जाँच के लिए विपत्र से किसी प्रकार की कटौती कर भुगतान करने का प्रावधान नहीं है। इसके अतिरिक्त आरोपी द्वारा ऐसा कोई नया साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे परिलक्षित हो सके कि भुगतान से पूर्व गुण नियंत्रण की जाँच कराया गया है।
2. आरोप सं0-3 के संदर्भ में आरोपी का कहना है कि कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता के माध्यम से प्राक्कलन तैयार किया जाता है तथा अधीक्षण अभियंता के स्वीकृति के उपरांत ही जंगल क्लीयरेन्स में कुल 25,361/- रूपये का भुगतान किया गया है, को गलत बयान बाजी माना जा सकता है क्योंकि नियमानुसार कार्यपालक अभियंता का दायित्व है कि सहायक अभियंता से प्राप्त प्राक्कलन के जाँचोपरान्त अधीक्षण अभियंता को पे्रषित करना है एवं कराये गये कार्यों से पूर्णतः संतुष्ट होकर ही भुगतान करना है। इनका कहना कि यदि विभाग इसे अनियमित मानता है तो संवेदक के कुल प्राक्कलित राशि के 10 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी के रूप में जमा राशि से अंतिम विपत्र के माध्यम से कटौती की जा सकती है। चूँकि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा इस कार्य को अनियमित माना गया है। ऐसी स्थिति में श्री राय का उपर्युक्त बचाव बयान अस्वीकार योग्य है। इसके अतिरिक्त श्री राय द्वारा ऐसा कोई नया साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे परिलक्षित हो सके कि जंगल क्लीयरेन्स कार्य कराने के उपरान्त ही भुगतान किया गया है।
इस प्रकार विभागीय समीक्षा में उद्धृत तथ्यों के आधार पर एवं आरोप से संदर्भित नया साक्ष्य एवं तथ्य के अभाव में श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध आरोप सं0-2 एवं 3 यथा बिना गुण नियंत्रण जाँच कराये ही संरचना निर्माण कार्य में अनियमित भुगतान करने तथा अनावश्यक रूप से प्राक्कलन में जंगल क्लीयरेन्स मद में कुल 25,361/- रूपये का अनियमित भुगतान करने के आरोप को प्रमाणित मानते हुए इनके पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने तथा इनके विरूद्ध अधिरोपित दण्ड ''पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की कटौती एक वर्ष के लिए'' को यथावत रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
तदालोक में श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत्त के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित उक्त दण्ड को यथावत रखा जाता है। उक्त आदेश श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, विशेष कार्य पदाधिकारी।
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