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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 October 2015

Published 01 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1140
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

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22 नि0 सि0 (वीर0)-07-01/2010/1971—श्री ईश्वर सहाय राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, श्री ईश्वर सहाय राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं0-2, वीरपुर सम्प्रति जलपथ प्रमंडल, मोहनियाँ, कैमूर के विरूद्ध पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं0-2, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं0-2, वीरपुर सम्प्रति जलपथ प्रमंडल, मोहनियाँ, कैमूर के विरूद्ध पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं0-2, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं0-2, वीरपुर सम्प्रति जलपथ प्रमंडल, मोहनियाँ, कैमूर के विरूद्ध पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं0-2,

द में कराये गये कार्यों के संबंध में बरती गयी वीरपुर के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय सम विकास योजना मद में कराये गये कार्यों के संबंध में बरती गयी वीरपुर के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय सम विकास योजना म

अनियमितता के लिए समाहर्त्ता, सुपौल के द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1283 अनियमितता के लिए समाहर्त्ता, सुपौल के द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1283 अनियमितता के लिए समाहर्त्ता, सुपौल के द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1283 12 द्वारा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के दिनांक 12.11.12 द्वारा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के 12 द्वारा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः-

े तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः-

विभागीय निदेशों के प्रतिकूल कार्यप्रणालीः- कार्य विभागों को प्रशासनिक विभागों से असैनिक निर्माण हेतु 1. विभागीय निदेशों के प्रतिकूल कार्यप्रणालीः- कार्य विभागों को प्रशासनिक विभागों से असैनिक निर्माण हेतु विभागीय निदेशों के प्रतिकूल कार्यप्रणालीः- कार्य विभागों को प्रशासनिक विभागों से असैनिक निर्माण हेतु नगद या अन्य इस्ट्रूमेंट से राशि प्राप्त होने पर ''शीर्ष 8443'' सिविल जमा लो0 नि0 जमा कार्य निष्पादन हेतु जमा नगद या अन्य इस्ट्रूमेंट से राशि प्राप्त होने पर ''शीर्ष 8443'' सिविल जमा लो0 नि0 जमा नगद या अन्य इस्ट्रूमेंट से राशि प्राप्त होने पर ''शीर्ष 8443'' सिविल जमा लो0 नि0 जमा

शीर्ष तहत प्राप्ति लेते हुए कोषागार में राशि जमा कर आवश्यकतानुसार निकासी कर व्यय करते हुए प्राप्ति एवं व्यय शीर्ष तहत प्राप्ति लेते हुए कोषागार में राशि जमा कर आवश्यकतानुसार निकासी कर व्यय करते हुए प्राप्ति एवं व्यय शीर्ष तहत प्राप्ति लेते हुए कोषागार में राशि जमा कर आवश्यकतानुसार निकासी कर व्यय करते हुए प्राप्ति एवं व्यय का लेखा महालेखाकार को भेजने का प्रावधान है परन्तु इनके द्वारा राष्ट्रीय सम विकास योजनान्तर्गत मो0 6416512.00 का लेखा महालेखाकार को भेजने का प्रावधान है परन्तु इनके द्वारा राष्ट्रीय सम विकास योजनान्तर्गत मो0 6416512 का लेखा महालेखाकार को भेजने का प्रावधान है परन्तु इनके द्वारा राष्ट्रीय सम विकास योजनान्तर्गत मो0 6416512 जार पाँच सौ बारह) रूपये का संचालन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, वीरपुर शाखा के बैंक लेखा (चौसठ लाख सोलह हजार पाँच सौ बारह) रूपये का संचालन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, वीरपुर शाखा के बैंक लेखा जार पाँच सौ बारह) रूपये का संचालन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, वीरपुर शाखा के बैंक लेखा द्वारा किया गया जो विभागीय निदेश के प्रतिकूल है। द्वारा किया गया जो विभागीय निदेश के प्रतिकूल है।

राष्ट्रीय सम विकास योजनान्तर्गत संधारित मूल अभिलेख गायब करनाः- बैंक लेखा से संत्यवहार किये 2. राष्ट्रीय सम विकास योजनान्तर्गत संधारित मूल अभिलेख गायब करनाः- बैंक लेखा से संत्यवहार किये राष्ट्रीय सम विकास योजनान्तर्गत संधारित मूल अभिलेख गायब करनाः- बैंक लेखा से संत्यवहार किये ा यथा- मनी रिसिट बही, एकरारनामा बही, रोकड़ बही, मापीपुस्त बही जैसे महत्वपूर्ण जाने के कारण सभी अभिलेख यथा- मनी रिसिट बही, एकरारनामा बही, रोकड़ बही, मापीपुस्त बही जैसे महत्वपूर्ण ा यथा- मनी रिसिट बही, एकरारनामा बही, रोकड़ बही, मापीपुस्त बही जैसे महत्वपूर्ण अभिलेखों का अतिरिक्त संधारण किया गया तथा इन अभिलेखों को गायब करने में इनकी भूमिका है। अभिलेखों का अतिरिक्त संधारण किया गया तथा इन अभिलेखों को गायब करने में इनकी भूमिका है। अभिलेखों का अतिरिक्त संधारण किया गया तथा इन अभिलेखों को गायब करने में इनकी भूमिका है।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 3. कार्यालय प्रधान के प्रतिकूल कार्यप्रणाली एवं असंवैधानिक आचरणः- राष्ट्रीय सम विकास योजना मद की राशि का संचालन कोषागार के शीर्ष 8782 के माध्यम से किये जाने की जानकारी कार्यालय प्रधान को न हो यह कतई मान्य नहीं है। बैंक लेखा से संत्यवहार किये जाने के कारण ही मनी रिसिट बही, एकरारनामा बही, रोकड़ बही, मापीपुस्त बही जैसे महत्वपूर्ण अभिलेखों का अतिरिक्त संधारण किया गया। इनके द्वारा कनीय अभियंता एवं पत्राचार लिपिक को छोटे विपत्रों पर विविध कार्यों के भुगतान हेतु सीधे अग्रिम भी दिया गया जो नियम के प्रतिकूल है। 4. स्वेच्छाचारिता एवं कर्त्तव्यहीनता- राष्ट्रीय सम विकास योजना मद की 5 (पाँच) स्लूईस संरचना निर्माण योजना (प्राक्कलित राशि - 179.593 लाख) रेज्ड प्लेटफार्म की एक योजना (प्राक्कलित राशि - 16.12 लाख) प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय भवन निर्माण की दो योजनाएँ (प्राक्कलित राशि - 25.662 लाख) नगर भवन निर्माण की दो योजना (प्राक्कलित राशि - 98.714 लाख) आज भी अपूर्ण है एवं नगर भवन निर्माण की एक योजना (प्राक्कलित राशि - 50.00 लाख) निविदा निष्पादन के पश्चात भी राशि एवं योजना प्रत्यार्पित की गई। इन अपूर्ण योजनाओं को पूर्ण कराने में अनावश्यक अतिरिक्त व्यय संभावित है। इन अनावश्यक विलंब एवं सरकार की योजना असफल करने के लिए ये पूर्णतः दोषी हैं।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाये गये है। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम, कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक 1620 दिनांक 05.11.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। इनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः-

आरोप सं0-1ः- श्री राम, आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि राष्ट्रीय सम विकास योजना की राशि 2,37,80,788.00 (दो करोड़ सैंतीस लाख अस्सी हजार सात सौ अट्‌ठासी) रूपये जमा शीर्ष विचलन कर सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया, वीरपुर के बचत खाता में रखे जाने के मामले में विभागीय पत्रांक 974 दिनांक 28.11.08 द्वारा दोषमुक्त किया गया है एवं साथ ही अपने निष्कर्ष में अंकित किया है कि एक ही मामले में एक ही व्यक्ति को दो बार सजा नहीं दी जा सकती है। इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी द्वारा कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। परन्तु आरोपित पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी को उक्त मामले से संबंधित उपलब्ध कराये गये पत्रांक 974 दिनांक 28.11.08 आरोप पत्र एवं जाँच पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन से राष्ट्रीय सम विकास योजना अंतर्गत विमुक्त राशि रू0 2,37,80,788/- अपने व्यक्तिगत बचत खाता में रखे जाने से संबंधित आरोप होने का बोध होता है, जबकि विषयांकित आरोप राष्ट्रीय सम विकास योजना में विमुक्त राशि रू0 64,16,512.00 सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बैंक लेखा से व्यय किये जाने संबंधित है।

उक्त परिप्रेक्ष्य में श्री राम आरोपित पदाधिकारी को आरोप सं0-1 के मामले में द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।

आरोप सं0-2ः- श्री राम, आरोपित पदाधिकारी द्वारा राष्ट्रीय सम विकास योजना से संबंधित कार्योंं का निष्पादन प्राप्त राशि का व्यय जिला पदाधिकारी, सुपौल के निदेशन में किये जाने निविदा पंजी, एकरारनामा पंजी, रोकड़ पंजी जैसे अन्य अतिरिक्त अभिलेख संधारित कर भुगतान किये जाने, मासिक प्रतिवेदन महालेखाकार, पटना तथा जिला पदाधिकारी, सुपौल को भेजे जाने एवं इससे वित्तीय अनियमितता एवं गलत मंशा नहीं होने का उल्लेख किया गया है।3 !बहार गजट (असाधारण), 1 अ(cid:27)तूबर 2015 उक्त परिप्रेक्ष्य में श्री राम, आरोपित पदाधिकारी का आरोप सं0-2 के मामले में संचालन पदाधिकारी के अभिलेखों को सुरक्षित रखने की जवाबदेही संबंधित कस्टडियन/पत्राचार लिपिक के होने के विश्लेषण के संदर्भ में स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।

आरोप सं0-3ः- श्री राम, आरोपित पदाधिकारी ने द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में नव प्रोन्नत कार्यपालक अभियंता तथा प्रशिक्षु लेखा पदाधिकारी होने के परिप्रेक्ष्य में शीर्ष 8782 का जानकारी नहीं होना एवं कार्य के त्वरित निष्पादन के क्रम में छोटे विपत्रों का भुगतान कनीय अभियंता तथा पत्राचार लिपिक से किये जाने का उल्लेख किया है। कार्यपालक अभियंता जो कार्यालय प्रधान होते हैं, को शीर्ष की जानकारी न होना स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।

आरोप सं0-4ः- श्री राम, आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि एकरारनामा में निर्धारित अवधि तक संवेदक द्वारा अधिकतम कार्य दिये जाने के पश्चात प्रथम किस्त (65 प्रतिशत) के बाद अधियाचना के बावजूद वर्ष 2007-08 के समाप्ति के दो दिन पूर्व आवंटन उपलब्ध कराया गया। उनका यह भी कहना है कि 30.04.08 से निलंबित एवं स्थानान्तरित हुआ तथा संवेदक द्वारा समय से कार्य पूर्ण नहीं होने के लिए दोषी मानना उचित नहीं है, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में अंकित आरोपित पदाधिकारी का बचाव-बयान से द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में नये तथ्य का बोध नहीं होता है।

उक्त परिप्रेक्ष्य में श्री राम, आरोपित पदाधिकारी का आरोप सं0-4 के मामले में द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री राम, कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध आरोप सं0 1, 3 एवं 4 प्रमाणित पाया गया तथा आरोप सं0 2 अप्रमाणित पाया गया।

प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री राम, कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गयाः-

(i) दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।

उक्त निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1294 दिनांक 11.08.15 द्वारा सहमति प्रदान की गई है। अतः श्री ईश्वर सहाय राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं0-2, वीरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, मोहिनयाँ, कैमूर को निम्नांकित दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- (i) दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

सतीश चन्द्र झा,

सरकार के अपर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1140/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1140.