(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
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जल संसाधन विभाग
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सं0 22/नि0सि0(सम0)-02-16/2010/
22/नि0सि0(सम0)-02-16/2010/2027—श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के पदस्थापन अवधि में प्रमंडलान्तर्गत प्रथम चरण में सम्पादित जमींदारी बांध के कार्यों की नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के पदस्थापन अवधि में प्रमंडलान्तर्गत प्रथम चरण में सम्पादित जमींदारी बांध के कार्यों की नियंत्रण प्रमण्डल, दरभंगा के पदस्थापन अवधि में प्रमंडलान्तर्गत प्रथम चरण में सम्पादित जमींदारी बांध के कार्यों की 0-7950/08-09 श्री उमाधार प्रसाद सिंह बनाम लोक सूचना पदाधिकारी सह कार्यपालक 0-7950/08-09 श्री उमाधार प्रसाद सिंह बनाम लोक सूचना पदाधिकारी सह कार्यपालक स्थलीय जाँच वाद सं0-7950/08-09 श्री उमाधार प्रसाद सिंह बनाम लोक सूचना पदाधिकारी सह कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा के संदर्भ में माननीय राज्य सूचना आयोग द्वारा दिये गये निदेश के आलोक मेें अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा के संदर्भ में माननीय राज्य सूचना आयोग द्वारा दिये गये निदेश के आलोक मेें अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा के संदर्भ में माननीय राज्य सूचना आयोग द्वारा दिये गये निदेश के आलोक मेें तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग द्वारा की गयी। निगरानी विभाग स े प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग द्वारा की गयी। निगरानी विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए निम्न आरोप गठित कर श्री राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्व विभागीय संकल्प निम्न आरोप गठित कर श्री राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्व विभागीय संकल्प निम्न आरोप गठित कर श्री राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्व विभागीय संकल्प 11 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 17 के ज्ञापांक 1132 दिनांक 07.09.11 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 17 के 11 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयीः- तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयीः-
1. शाहपुर पी0 डब्लू0 डी0 रोड से बरहेता धरनी पट्टी होते हुए थलवारा तक जमींदारी बांध अन्तर्गत शाहपुर पी0 डब्लू0 डी0 रोड से बरहेता धरनी पट्टी होते हुए थलवारा तक जमींदारी बांध अन्तर्गत शाहपुर पी0 डब्लू0 डी0 रोड से बरहेता धरनी पट्टी होते हुए थलवारा तक जमींदारी बांध अन्तर्गत ं की मापी की जाँच मापपुस्त में अंकित मापी से की गयी। जाँचोपरान्त संपादित सात अदद तटबंध मेंं कराये गये कार्यों की मापी की जाँच मापपुस्त में अंकित मापी से की गयी। जाँचोपरान्त संपादित सात अदद तटबंध मेंं कराये गये कार्यो 17 प्रतिशत की कमी पायी गयी। साथ ही तटबंध की चौड़ाई एवं सात में से दो बांधों में भुगतेय मिट्टी की मात्रा में 35.17 प्रतिशत की कमी पायी गयी। साथ ही तटबंध की चौड़ाई एवं सात में से दो बांधों में भुगतेय मिट्टी की मात्रा में 35 स्लोप विशिष्टि के अनुरूप नहीं था। तारालाही लोहसारी से बलुआ नदी तक जमींदार ी बांध के चैनेज 100 मी0 पर स्लोप विशिष्टि के अनुरूप नहीं था। तारालाही लोहसारी से बलुआ नदी तक जमींदारी बांध के चैनेज 100 मी0 पर प्रावधानित 900 मि0 मी0 ब्यास के कलभर्ट के स्थान पर बिना कार्य कराये ही पूर्व से निर्मित 750 मि0 मी0 ब्यास के प्रावधानित 900 मि0 मी0 ब्यास के कलभर्ट के स्थान पर बिना कार्य कराये ही पूर्व से निर्मित 750 मि0 मी0 ब्यास के प्रावधानित 900 मि0 मी0 ब्यास के कलभर्ट के स्थान पर बिना कार्य कराये ही पूर्व से निर्मित 750 मि0 मी0 ब्यास के कलभर्ट का भुगतान 900 मि0 मी0 ब्यास के रूप में मापपुस्त मेंं दर्ज कर भुगतान किया गया जो सरकारी राशि कलभर्ट का भुगतान 900 मि0 मी0 ब्यास के रूप में मापपुस्त मेंं दर्ज कर भुगतान किया गया जो सरकारी राशि कलभर्ट का भुगतान 900 मि0 मी0 ब्यास के रूप में मापपुस्त मेंं दर्ज कर भुगतान किया गया जो सरकारी राशि रू0 1,33,770/- के गबन को प्रमाणित करता है।
गबन को प्रमाणित करता है।
मब्बी योजना के उत्तरी कोठिया, करकोली, हरिपुर लोधा होते हुए मोहम्मदपुर तक जमीेंदारी बांध की 2. मब्बी योजना के उत्तरी कोठिया, करकोली, हरिपुर लोधा होते हुए मोहम्मदपुर तक जमीेंदारी बांध की मब्बी योजना के उत्तरी कोठिया, करकोली, हरिपुर लोधा होते हुए मोहम्मदपुर तक जमीेंदारी बांध की स्थलीय जाँच की गयी एवं तटबंध की चौड़ाई एवं साइड स्लोप स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं पाया गया तथा स्थलीय जाँच की गयी एवं तटबंध की चौड़ाई एवं साइड स्लोप स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं पाया गया तथा स्थलीय जाँच की गयी एवं तटबंध की चौड़ाई एवं साइड स्लोप स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं पाया गया तथा 76 की कमी पायी गयी। अतः अधिकाई भुगतान एवं विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं 76 की कमी पायी गयी। अतः अधिकाई भुगतान एवं विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं भुगतेय मिट्टी की मात्रा में 37.76 की कमी पायी गयी। अतः अधिकाई भुगतान एवं विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराने के लिए आप दोषी पाये गये हैं। कराने के लिए आप दोषी पाये गये हैं।
3. गोपालपुर से बरियौल तक जमींदारी बांध की स्थानीय जाँच में बांध की चौड़ाई एवं स्लोप विशिष्टि के गोपालपुर से बरियौल तक जमींदारी बांध की स्थानीय जाँच में बांध की चौड़ाई एवं स्लोप विशिष्टि के गोपालपुर से बरियौल तक जमींदारी बांध की स्थानीय जाँच में बांध की चौड़ाई एवं स्लोप विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया एवं भुगतेय मिट्टी की म 37 प्रतिशत की कमी पायी गयी। इस प्रकार विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया एवं भुगतेय मिट्टी की मात्रा में 51.37 प्रतिशत की कमी पायी गयी। इस प्रकार विशिष्टि के अनुरूप कार्य न कराने एवं मिट्टी की मात्रा में अधिकाई भुगतान के लिए आप दोषी पाये गये है। अनुरूप कार्य न कराने एवं मिट्टी की मात्रा में अधिकाई भुगतान के लिए आप दोषी पाये गये है। अनुरूप कार्य न कराने एवं मिट्टी की मात्रा में अधिकाई भुगतान के लिए आप दोषी पाये गये है।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 श्री राय की सेवानिवृत्ति के कारण उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0 06 दिनांक 16.01.14 (ज्ञापांक 83 दिनांक 16.01.14) द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में श्री राय के विरूद्ध आरोप सं0-1, 2 एवं 3 से संबंधित जमीेदारी बांध में मिट्टी की कमी का आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया परन्तु आरोप सं0-1 मंें ह्यूम पाईप कलभर्ट के कार्य में अनियमितता का आरोप प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक् समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के जॅाच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु एवं प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए क्यों नहीं दण्डित किया जाये के निम्न बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 753 दिनांक 19.06.14 द्वारा श्री राय से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
1. संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0-1, 2 एवं 3 से संबंधित जमींदारी बांध के मिट्टी कार्य में न्यून विशिष्टि कार्य कराकर अधिकायी भुगतान करने के आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया है। संचालन पदाधिकारी के अनुसार जमींदारी बांध के निर्माण कार्य 2008 के पूर्व कराया गया है तथा स्थलीय जाँच बाढ़ 2010 के पूर्व किया गया है। अर्थात दो बाढ़ अवधि के पश्चात मिट्टी की मात्रा में कमी आना स्वाभाविक है। पुनः जमींदारी बांध बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में अवस्थित है एवं नदी के किनारे बने हैं। अतः बरसात अवधि में कटाव के कारण मिट्टी की मात्रा में भारी कमी हो सकती है। जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित कि बांधों के प्री लेवल का विस्तुत सत्यापन/जाँच नहीं किया जा सका है। फलतः अब विस्तृत सत्यापित प्री लेवल के बिना मिट्टी कार्य में कमी का वास्तविक मात्रात्मक निर्धारण इतने वर्षों पश्चात संभव नहीं है, जाँच दल का यह कथन गठित आरोप का विरोधाभाषी है।
संचालन पदाधिकारी के उक्त मंतव्य से सहमत नहीं हुआ जा सकता है क्योंकि किसी भी जमींदारी बांध में दो बरसात में 35 से 51 प्रतिशत की पाये गये कमी को स्वाभाविक नहीं माना जा सकता है। जहाँ तक बाढ़ अवधि में नदी कटाव का प्रश्न है इस संदर्भ में आपके द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नही कराया गया है जिससे सत्यापित हो सके कि बाढ़ अवधि मेें नदी से कटाव हुआ है। तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा कराये गये कार्यों की मापी के आधार पर मिट्टी की गणना की गयी है एवं कराये गये कार्यों की भुगतान की मात्रा से तुलना के आधार पर कमी का आकलन किया गया है जिसे गलत ठहराना उचित प्रतीत नहीं होता हैं अतः तीनों योजनाओं मेें मिट्टी की मात्रा में पाये गये कमी एवं अधिकाई भुगतान के लिए आप दोषी हैं।
2. संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0-1 का अंश तारालाही लोहसारी से बसुआ नदी तक जमींदारी बांध के कि0 मी0 0.90 पर प्रस्तावित 900 मि0 मी0 ब्यास का ह्यूम पाईप कलभर्ट का बिना निर्माण कराये ही भुगतान प्राक्कलन के अनुरूप कर कुल 1,33,770/- (एक लाख तैंतीस हजार सात सौ सत्तर) रूपये का गबन के उद्धेश्य से किया गया अनियमित भुगतान का आरोप प्रमाणित पाया गया है।
श्री राय द्वारा समर्पित जवाब में द्वितीय कारण पृच्छा के बिन्दु-1 के संदर्भ में कोई तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है जबकि बिन्दु-2 के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि कलभर्ट का कार्य बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा द्वारा कराया गया है। साक्ष्य के रूप में मुखिया, ग्राम पंचायत राज तारालाही प्रखंड- बहादुर, जिला- दरभंगा का पत्र संलग्न किया गया है। उक्त स्थल पर 900 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप का दो रो में कलभर्ट का निर्माण का प्रावधान है। परन्तु बाजार में 900 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप उपलब्ध नहीं रहने के कारण तथा बाढ़ अवधि का समय रहने के कारण बाजार में उपलब्ध 750 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप तीन रो में लगाया गया हैं पहले से कोई ह्यूम पाईप कलभर्ट उक्त स्थल पर नहीं था। भुगतान हेतु बनाये गये तीन रो में ह्यूम पाईप कलभर्ट का प्राक्कलित राशि 1,52,446/- (एक लाख बावन हजार चार सौ छियालीस) रूपये होता था जबकि स्वीकृत राशि मात्र 1,33,770/- रूपये ही था। अतएव स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार ही भुगतान 1,33,770/- रूपये किया गया एवं सरकार को 18,676/- रूपये का बचत हुआ। साक्ष्य के रूप में एक प्राक्कलन उपलब्ध कराया गया जिस पर कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता तथा कनीय अभियंता का हस्ताक्षर है।
श्री राय से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं पाया गया कि श्री राय द्वारा शाहपुर पी0 डब्लू0 डी0 रोड से बरहेता धरनी पट्टी होते हुए थलवारा तक जमींदारी बांध, मब्बी योजना के उत्तरी कोठिया से मोहम्मदपुर तक जमींदारी बांध तथा गोपालपुर से बरियौल तक जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सृदृढ़ीकरण कार्य में अनियमित भुगतान/अधिकाई भुगतान के संदर्भ में कोई तथ्य उद्धृत नहीं किया गया है। अतएव उक्त तीनों योजनाओं में बरती गयी अनियमितता के कारण अधिकायी भुगतान का आरोप श्री राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रमाणित होता है।
श्री राय द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के बिन्दु-2 के संबंध में उल्लेखित है कि प्राक्कलन के अनुसार उक्त स्थल पर 900 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप का दो रो में कलभर्ट का निर्माण करना था परन्तु 900 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप बाजार में उपलब्ध नहीं रहने के कारण 750 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप के तीन रो में ह्यूम पाईप कलभर्ट का निर्माण विभाग द्वारा किया गया है जिसकी प्राक्कलित राशि 1,52,446/- रूपये आता था। फलस्वरूप स्वीकृत प्राक्कलन में प्रावधानित राशि 1,33,770/- रूपये का ही भुगतान किया गया। ऐसा करने पर 18,676/- रूपये की सरकारी राशि का बचत हुआ है एवं यह कार्य विभाग द्वारा ही कराया गया है। साक्ष्य के रूप में मुखिया, ग्राम पंचायत राज, तारालाही प्रखंड, बहादुर, जिला- दरभंगा का पत्र संलग्न किया गया है जो अस्वीकार योग्य है क्योंकि जमींदारी बांध का मूल प्राक्कलन की स्वीकृति मिट्टी कार्य तथा संरचना कार्य सहित मुख्य अभियंता, समस्तीपुर द्वारा प्रदान की गयी है। नियमानुसार प्राक्कलन स्वीकृति प्रदान करने वाले पदाधिकारी ही संरचना के रूपांकण अथवा आरेखन में किसी तरह की विचलन करने के लिए सक्षम प्राधिकार होते हैं। आरोपी श्री राय द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य3 !बहार गजट (असाधारण), 1 अ(cid:27)तूबर 2015 उपलब्ध नहीं कराया गया है जिससे प्रमाणित हो सके कि उक्त संरचना में प्रावधानिक 900 एम0 एम0 ब्यास के बदले 750 एम0 एम0 ब्यास का ह्यूम पाईप से कलभर्ट का निर्माण सक्षम प्राधिकार से प्राप्त किया गया है तथा जब 750 एम0 एम0 ब्यास का ह्यूम पाईप से कलभर्ट का निर्माण किया गया है तो किस पदाधिकारी के आदेशानुसार 900 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप का भुगतान किया गया। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध बिना ह्यूम पाईप कलभर्ट का निर्माण कराये ही 1,33,770/- (एक लाख तैंतीस हजार सात सौ सत्तर) रूपये का गबन का आरोप प्रमाणित होता है।
इस प्रकार समीक्षोपरान्त श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सृदृढ़ीकारण कार्य में विशिष्टि के अनुरूप कार्य न कराकर अतिरेक भुगतान तथा बिना ह्यूम पाईप कलभर्ट का निर्माण कराये ही 1,33,770/- (एक लाख तैंतीस हजार सात सौ सत्तर) रूपये का गबन का आरोप प्रमाणित पाया गया।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत्त को विभागीय अधिसूचना सं0 685 दिनांक 23.03.15 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- 1. पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की कटौती दस वर्षो के लिए। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया है जिसका मुख्य अंश निम्नवत हैः-
1. आरोप के बिन्दु-1 के संदर्भ में श्री राय द्वारा निम्न तथ्यों पर विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया गया हैः- (क) उक्त तीनों बांधों का उपयोग ग्रामीणों द्वारा आवागमन हेतु प्रयोग किया जाता है तथा उस पर टै्रक्टर आदि भी चलाये जाते हैं इसलिए उसमें मिट्टी का क्षरण होना स्वाभाविक है।
(ख) उक्त तीनों बांध नदी के किनारे अवस्थित हैं तथा बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में हैं। अतः बाढ़ के कारण मिट्टी का क्षरण स्वाभाविक है।
(ग) मिट्टी कार्य के भुगतान में विभागीय मापदण्ड के अनुरूप सेटलमेंट काटा गया है। (घ) मब्बी योजना मेंं उत्तरी कोठिया, बरबौली, हरिपुर लोथा होते हुए मोहम्मदपुर तक जमींदारी बांध का अंतिम विपत्र मेरे द्वारा पारित नहीं किया गया है। संवेदक का 10 प्रतिशत अग्रिम राशि एवं 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिल से काटी गयी रकम का अभीतक भुगतान नहीं किया गया है।
गोपालपुर से बरियौल तक जमींदारी बांध के कराये गये कार्यों का भुगतान भी विभागीय मापदण्ड के अनुसार सेटलमेंट काट कर किया गया है। अभी तक 10 प्रतिशत अग्रिम राशि एवं 10 प्रतिशत अतिरिक्त काटी गयी राशि का भुगतान नहीं हुआ है।
अतः जब तक अंतिम विपत्र पारित नहीं हो जाता तब तक दोषी पाये जाने का कोई प्रश्न नहीं उठता है। 2. शाहपुर P W D Road से बरहेता धरनी पट्टी होते हुए थलवारा जमींदारी बांध के अंतर्गत तारालाही से बसुआ नदी तक जमींदारी बांध के 0.90 कि0 मी0 पर प्रस्तावित 900 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप कलभर्ट के दबले 750 एम0 एम0 ब्यास का ह्यूम पाईप कलभर्ट का निर्माण 900 एम0 एम0 ब्यास वाले ह्यूम पाईप तत्काल बाजार में उपलब्ध नहीं होने के कारण ही विशिष्टि परिवर्तन किया गया है।
लोक निर्माण विभाग के कोड के नियम 294 (1) एवं (2) एवं F2 एकरारनामा के क्लाउज 11 के अनुसार सामान्य विशिष्टि के परिवर्तन के लिए कार्यपालक अभियंता सक्षम पदाधिकारी हैं। कुल प्राक्कलन एक करोड़ से अधिक का था तथा ह्यूम पाईप कलभर्ट की प्राक्कलित राशि उस समय अद्यतन दर पर 1,52,446/- रूपये थी। उसके विरूद्ध संवेदक को 1,33,770/- रूपये का भुगतान किया गया है। जिससे सरकार को 18,676/- रूपये की बचत हुई थी। अतः स्पष्ट है कि दो रो 900 एम0 एम0 ब्यास वाले तीन रो 750 एम0 एम0 ब्यास वाले ह्यूम पाईप कलभर्ट के निर्माणोपरान्त भी दो रो 900 एम0 एम0 ब्यास वाले ह्यूम पाईप कलभर्ट का भुगतान करने से विभाग को 18,676/- रूपये की बचत हुई थी।
उक्त के आलोक में श्री राय का कहना है कि मेरे विरूद्ध आरोप प्रमाणित करने का कोई नियम संगत आधार एवं न्याय संगत औचित्य नहीं रह जाता है क्योंकि उसका अंतिम मापी माप पुस्तिका में प्रविष्टि नहीं हो जाती और उसका भुगतान नहीं होता है तब तक दोषी ठहराना उचित नहीं है तथा कलभर्ट के संबंध में कहना है कि उक्त विशिष्टि परिवर्तन एवं भुगतान से न तो जल बहाव में कोई कमी हुई है, न सरकार को कोई वित्तीय क्षति हुई है। अपितु 18,676/- रूपये की बचत हुई है। अतएव संसूचित दण्ड को निरस्त करने की कृपा करें।
श्री राय से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया किः- आरोप सं0-1 के संदर्भ में आरोपी श्री राय के बचाव बयान को अस्वीकार योग्य माना जा सकता है क्योंकि तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन के अनुसार तीनों जमींदारी बांध में पायी गयी कमी क्रमशः 37.17 प्रतिशत, 37.76 प्रतिशत एवं 51.37 प्रतिशत है। आरोपी द्वारा दर्शाये गये कारणों के आधार पर उक्त कमी को स्वाभाविक नहीं माना जा सकता है। जहाँ तक नदी के कटाव का प्रश्न है आरोपी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है जिससे सत्यापित हो सके कि नदी से पूरे बाँध में कटाव हुआ हो। अतएव तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा कराये गये कार्यों की मापी तथा किये गये भुगतान के आधार पर पायी गयी कमी के आलोक में आरोप सं0-1 प्रमाणित होता है। आरोप सं0-2 के संदर्भ में आरोपी के बचाव बयान में कहा गया है कि बाजार में 900 एम0 एम0 ब्यास का ह्यूम पाईप उपलब्ध नहीं रहने के कारण कार्यपालक अभियंता के प्रदत्त शक्ति के अधीन विशिष्टि में परिवर्तन कर 900 एम0 एम0 ब्यास के बदले 750 एम0 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप से कलभर्ट का निर्माण किया गया तथा 900 एम0 4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 एम0 ब्यास के ह्यूम पाईप का भुगतान करने से 18,676/- रूपये का बचत हुआ हैं परन्तु आरोपी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे परिलक्षित हो सके कि इनके द्वारा प्रदत्त शक्ति के तहत विशिष्टि में परिवर्तन किया गया तथा कलभर्ट का निर्माण इनके द्वारा कराया गया हैं संचालन पदाधिकारी द्वारा भी इस आरोप को प्रमाणित पाया गया है। अतएव बिना ह्यूम पाईप कलभर्ट का निर्माण कराये ही इस मद में कुल 1,33,770/- रूपये का अनियमित भुगतान करते हुए गबन करने का आरोप प्रमाणित होता है। ़उपर्युक्त तथ्यों के अतिरिक्त आरोपी श्री राय द्वारा ऐसा कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है जिससे परिलक्षित हो सके कि विशिष्टि के अनुरूप मिट्टी कार्य कराकर ही भुगतान किया गया है तथा कलभर्ट का निर्माण बाढ़ प्रमंडल, दरभंगा द्वारा ही कराया गया है। अतएव श्री राय के विरूद्ध उक्त दोनों आरोप प्रमाणित होता है। इस प्रकार समीक्षा में वर्णित उपर्युक्त तथ्यों तथा नया तथ्य/साक्ष्य के अभाव में श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध जमींदारी बांधों के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में अनियिमतता बरतते हुए अधिकायी भुगतान करने तथा बिना कलभर्ट के निर्माण कराये ही 1,33,770/- रूपये गबन करने के आरोप को प्रमाणित पाते हुए श्री राय के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने एवं इन्हें पूर्व में संसूचित दण्ड ''पेंशन से 10 प्रतिशत की कटौती दस वर्षों के लिए'' को यथावत रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। तदालोक में श्री राजवश्ां राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवनिवृत्त द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित उक्त दण्ड को यथावत रखा जाता है। उक्त आदेश में श्री राजवश्ां राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत्त को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, विशेष कार्य पदाधिकारी।
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