(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत (cid:23) आि(cid:15)वन 1(cid:23)3(cid:25) (cid:26)श(cid:15)(cid:27)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 1144) पटन(cid:4)
2(cid:15)15
पटन(cid:4)(cid:28) व५ह(cid:31)प०तव(cid:4)र, 1 [Çत३बर 2(cid:15)15
जल संसाधन विभाग
&&&&&&&&
vf/klwpuk
9 flrEcj 2015
सं0 22/नि0सि0(वीर0)-07-06/2009/
प्रमाणित आरोपों के लिए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1300 दिनांक 17.11 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 (ii) आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि मात्र कार्यपालक अभियंता के प्रमाण पत्र के आधार पार 20 (बीस) प्रतिशत वायड की कटौती का निर्णय अभियंता प्रमुख (उत्तर) द्वारा लिया गया जिसके कारण ही 4 लाख 53 हजार 428 रू0 राशि का अधिकाई भुगतान हुआ। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं थी। आरोपित पदाधिकारी का यह कथन युक्तिसंगत नहीं प्रतीत होता है क्योंकि यह सही है कि भुगतान की कार्रवाई सीधे कार्यपालक अभियंता द्वारा की गई है जिसमें आरोपित पदाधिकारी की कोई भूमिका प्रत्यक्ष रूप से परिलक्षित नहीं होता है परन्तु यहॉं पर इस तथ्य को भी नकारा नहीं जा सकता है कि अगर आरोपित पदाधिकारी द्वारा वायड की मात्रा का वास्तविक आकलन करने से संबंधित निदेश का अनुपालन करवाया जाता तो ऐसी परिस्थिति उत्पन्न नहीं होती। अतः आरोपित पदाधिकारी को आरोप के इस भाग से पूर्णतः मुक्त नहीं किया जा सकता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री रेखा लाल राम के विरूद्ध उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री रेखा लाल राम, सोन उच्चस्तरीय नहर अंचल, औरंगाबाद के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0 844 दिनांक 08.04.15 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (i) निन्दन (ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
उक्त दण्डादेश के क्रियान्वयन के क्रम में महालेखाकार (ले0 एवं ह0), बिहार, पटना द्वारा विभाग को सूचित किया गया कि श्री रेखा लाल राम, तत्कालीन अधीक्षण अभियंंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, झंझारपुर के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0 121 दिनांक 14.01.15 द्वारा ''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड संसूचित किया जा चुका है। पुनः अधिसूचना सं0 844 दिनांक 08.04.15 द्वारा ''निन्दन एवं एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड संसूचित किया गया। श्री रेखालाल राम दिनांक 31.01.16 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं जिसके कारण मात्र विभागीय अधिसूचना सं0 121 दिनांक 14.01.15 द्वारा ''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड प्रभावी हो रहा है जबकि विभागीय अधिसूचना सं0 844 दिनांक 08.04.15 द्वारा दिया गया दण्ड प्रभावी नहीं हो पा रहा है। वर्णित स्थिति में महालेखाकार (ले0 एवं ह0) के पत्रांक 88 दिनांक 06.05.15 के आलोक में श्री राम के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0 844 दिनांक 08.04.15 की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री रेखालाल राम के विरूद्ध दिये गये ''निन्दन एवं एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' के दण्ड के स्थान पर ''एक वर्ष के लिए असंचयात्मक प्रभाव से कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति'' का दण्ड देने का निर्णय लिया गया है।
उक्त आदेश श्री रेखा लाल राम, तत्कालीन अधीक्षण अभियंंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, झंझारपुर सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, सोन उच्चस्तरीय नहर अंचल, औरंगाबाद को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।