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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 October 2015

Published 01 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1145
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

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सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-04/2003/

22/नि0सि0(मुज0)-06-04/2003/2040—श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के द्वारा वर्ष 2001-02 में इनके पदस्थापन अवधि में बागमती विस्तार योजना के बाँयें मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के द्वारा वर्ष 2001-02 में इनके पदस्थापन अवधि में बागमती विस्तार योजना के बाँयें मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के द्वारा वर्ष 2001-02 में इनके पदस्थापन अवधि में बागमती विस्तार योजना के बाँयें तटबंध के मिट्‌टी कार्य में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गई। तटबंध के मिट्‌टी कार्य में बरती गई अनियमितता की जाँच उड ़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गई।

उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त 04 द्वारा प्रपत्र-'क' गठित करते प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक 956 दिनांक 08.11.04 द्वारा प्रपत्र-'क' गठित करते प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक 956 दिनांक 08 हुए निम्न बिन्दु पर स्पष्टीकरण पूछा गया।

करण पूछा गया।

(i) बागमती विस्तार योजना के कार्यों को अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर कार्य समर्पित की तिथि जो ) बागमती विस्तार योजना के कार्यों को अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर कार्य समर्पित की तिथि जो ) बागमती विस्तार योजना के कार्यों को अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर कार्य समर्पित की तिथि जो 25.02.02 थी। उसका समय 30.12

12.02 तक होना जो छः माह से अधिक है।

(ii) समर्पित कार्यकारी प्राक्कलन का ससमय स्वीकृत नहीं देना तथा इसे कार्यालय में लंबित ) समर्पित कार्यकारी प्राक्कलन का ससमय स्वीकृत नहीं देना तथा इसे कार्यालय में लंबित रखना। ) समर्पित कार्यकारी प्राक्कलन का ससमय स्वीकृत नहीं देना तथा इसे कार्यालय में लंबित श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त श्री सिंह, श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त श्री सिंह, श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त श्री सिंह, 08 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के तत्कालीन मुख्य अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0 657 दिनांक 11.08.08 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के तत्कालीन मुख्य अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0 657 दिनांक 11 नियम 43 (बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। नियम 43 (बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

ालन पदाधिकारी के समक्ष श्री सिंह के द्वारा अपने बचाव बयान में कहा गया किः- ालन पदाधिकारी के समक्ष श्री सिंह के द्वारा अपने बचाव बयान में कहा गया किः- संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री सिंह के द्वारा अपने बचाव बयान में कहा गया किः- (i) उनके द्वारा दिनांक 02 02 को मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर का प्रभार ग्रहण किया गया। बागमती ) उनके द्वारा दिनांक 02.02.02 को मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर का प्रभार ग्रहण किया गया। बागमती विस्तार योजना के कार्यों की समीक्षा के दौरान पाया कि कार्य अभी अधूरा है। जबकि इसे 25.02.02 को समाप्त हो विस्तार योजना के कार्यों की समीक्षा के दौरान पाया कि कार्य अभी अधूरा है। जबकि इसे 25 विस्तार योजना के कार्यों की समीक्षा के दौरान पाया कि कार्य अभी अधूरा है। जबकि इसे 25 जाना चाहिए था। अतः समयवृद्धि देने की आवश्यकता थी। जाना चाहिए था। अतः समयवृद्धि देने की आवश्यकता थी।

(ii) विभागीय नियामनुसार बाँध एवं नहरों के मिट्‌टी कार्यों की अंतिम मापी एक बरसात के बाद किया जाता ) विभागीय नियामनुसार बाँध एवं नहरों के मिट्‌टी कार्यों की अंतिम मापी एक बरसात के बाद किया जाता ) विभागीय नियामनुसार बाँध एवं नहरों के मिट्‌टी कार्यों की अंतिम मापी एक बरसात के बाद किया जाता है ताकि बरसात में हुई क्षति की मरम्मति संवेदक द्वारा एकरारित निधि के अन्तर्गत ही कराया जा सके। ऐसी है ताकि बरसात में हुई क्षति की मरम्मति संवेदक द्वारा एकरारित निधि के अन्तर्गत ही कराया जा सके। ऐ है ताकि बरसात में हुई क्षति की मरम्मति संवेदक द्वारा एकरारित निधि के अन्तर्गत ही कराया जा सके। ऐ 02 तक समयवृद्धि दी गयी। समयवृद्धि परिस्थिति में क्षेत्रीय पदाधिकारियों से विचार विमर्श के उपरान्त दिनांक 30.12.02 तक समयवृद्धि दी गयी। समयवृद्धि परिस्थिति में क्षेत्रीय पदाधिकारियों से विचार विमर्श के उपरान्त दिनांक 30 के कारण विभाग को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई एवं इसकी सूचना विभाग को भी दी गई थी। के कारण विभाग को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई एवं इसकी सूचना विभाग को भी दी गई थी। के कारण विभाग को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई एवं इसकी सूचना विभाग को भी दी गई थी।

(iii) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व कार्यकारी प्राक्कलन तैयार ि कया जाता है जिसकी स्वीकृति के उपरान्त कार्य ) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व कार्यकारी प्राक्कलन तैयार किया जाता है जिसकी स्वीकृति के उपरान्त कार्य प्रारभ्म किया जाता है। पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति तब दी जाती है जब स्वीकृत प्राक्कलन की राशि में 10 (दस) प्रारभ्म किया जाता है। पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति तब दी जाती है जब स्वीकृत प्राक्कलन की राशि में 10 (दस) प्रारभ्म किया जाता है। पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति तब दी जाती है जब स्वीकृत प्राक्कलन की राशि में 10 (दस) प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी होती है। तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा स्वीकृत प्राक्कलन की राशि प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी होती है। तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा स्वीकृत प्राक्कलन की राशि प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी होती है। तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा स्वीकृत प्राक्कलन की राशि थी एवं पुनरीक्षित प्राक्कलन की राशि रू0 2,70,80,000/- थी। अतः निगरानी विभाग द्वारा रू0 2,50,39,700/- थी एवं पुनरीक्षित प्राक्कलन की राशि रू0 2,70,80,000/- थी। अतः निगरानी विभाग द्वारा थी एवं पुनरीक्षित प्राक्कलन की राशि रू0 2,70,80,000/- थी। अतः निगरानी विभाग द्वारा 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 निर्गत पत्रांक 1/स्थापना-27/83-2347/त0 प0 को0 दिनांक 31.12.83 के आलोक में स्वीकृत देना नियमानुसार नहीं था।

(iv) लीड प्लान की स्वीकृति मुख्य अभियंता के कार्यालय के पत्रांक 83 दिनांक 10.01.03 द्वारा दे दी गई थी।

संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य में कहा गया किः- आरोप सं0- (1) आरोपित पदाधिकारी ने अपने बचाव बयान में कहा है कि समयवृद्धि देकर सरकार को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँचायी गयी है। बल्कि ससमय तथा परिस्थिति के अनुकूल समयवृद्धि कार्यहीत में दी गयी। आरोपी पदाधिकारी के द्वारा संलग्न विभागीय परिपत्र के अंतिम कंडिका में वर्णित है कि विभागीय स्तर पर आयुक्त एवं सचिव की अध्यक्षता में गठित निविदा समिति द्वारा निष्पादित निविदाओं के लिए समयवृद्धि एवं अवधि विस्तार विभाग के स्तर से पूर्ववत किया जायेगा। उड़नदस्ता के प्रतिवेदन से स्पष्ट नही हो पा रहा है कि कार्य विभागीय समिति द्वारा आवंटित था या मुख्य अभियंता के स्तर से। अतः विभाग इस बात से सुनिश्चित हो लें कि निविदा की स्वीकृति किस स्तर से की गयी थी। इसके उपरान्त ही इस आरोप पर निर्णय होना श्रेयस्कर होगा। आरोप सं0- (2) इस संबंध में आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान स्वीकार योग्य है। नियमानुकूल पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति हेतु दिशा निर्देश निर्गत है। जिसके आलोक में पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति आवश्यक प्रतीत नहीं होती है क्योंकि उक्त राशि दस प्रतिशत से कम ही है। वर्णित परिस्थिति में समर्पित कार्यकारी प्राक्कलन की स्वीकृति नहीं देना एवं लंबित रखने का आरोप लगाना नियमानुसार सही प्रतीत नहीं होता है। श्री राम विलास सिंह, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा समर्पित बचाव बयान एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये मंतव्य की विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया किः-

(i) आरोप सं0- I के संबंध में जाँच पदाधिकारी द्वारा इस आरोप के लिए स्पष्ट मंतव्य नहीं दिया गया है। आरोपति पदाधिकारी के द्वारा दिनांक 02.02.02 को प्रभार लिया गया जबकि कार्य समाप्ति की तिथि 25.02.02 थी। संवेदक के द्वारा कार्य पूर्ण नहीं किये जाने के फलस्वरूप कार्यहीत में दिनांक 30.12.02 तक समयवृद्धि दी गयी। समयवृद्धि के कारण विभाग को कोई क्षति न होने का उल्लेख आरोपी पदाधिकारी द्वारा किया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा संलग्न विभागीय परिपत्र दिनांक 09.08.04 को जारी है। जबकि उनके द्वारा इसके पूर्व की तिथि में ही समयवृद्धि की स्वीकृति दी गयी। जो विभागीय पत्रांक 96/आई0 सी0 दिनांक 28.05.01 के आलोक में आरोपित पदाधिकारी इसके लिए सक्षम नहीं थे। अतः वे इसके लिए दोषी हैैं। अतः आरोप सं0-1 श्री सिंह पर प्रमाणित होता है।

(ii) आरोप सं0- II निगरानी विभाग द्वारा निर्गत पत्रांक सं0-01/ स्था0-27/ 83-2347/त0 प0 को0 दिनांक 31.12.83 में निहित प्रावधानों के आलोक में आरोप सं0-2 प्रमाणित नहीं होता है क्योंकि पुनरीक्षित प्राक्कलन की राशि 10% से कम थी। संचालन पदाधिकारी के द्वारा भी आरोप को सही नहीं पाया गया है।

(iii) लीड प्लान की स्वीकृति मुख्य अभियंता के पत्रांक 83 दिनांक 10.01.03 द्वारा प्रदत्त की गई है। अतः श्री सिंह के विरूद्ध आरोप सं0-1 जो बागमती विस्तार योजना के कार्यों का अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य समाप्ति की तिथि में छः माह से अधिक की समयवृद्धि देने से संबंधित है, को प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के विभागीय पत्रांक 1177 दिनांक 18.10.12 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री सिंह, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के आलोक में प्रस्तुत बचाव बयान में निम्न बातें कही गयी है।

आरोप सं0-1 समयवृद्धि देने से संबंधित है। यह कार्य दिनांक 25.02.02 तक समाप्त होना था परन्तु कार्य समाप्त नहीं हुआ था। कार्य उसी संवेदक से कराया जाय। इस हेतु समयवृद्धि देना नितान्त आवश्यक था। छः माह की यदि समयवृद्धि दी जाती तो अगस्त में पड़ता जो बरसात का मुख्य महीना होता है। संवेदक की प्रबल इच्छा थी ताकि कार्य का अंतिम विपत्र बरसात में ही बन जाय, ताकि बरसात में होने वाले बाँध की क्षति की मरम्मति नहीं करना पड़े। मिट्‌टी कार्य के अंतिम मापी के संबंध में दिशा निर्देश है कि मिट्‌टी कार्य की नापी बरसात के बाद ही लिया जाय, ताकि संवेदक अपने खर्च से बाँध की क्षति की भरपाई करें। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि इस कार्य का निविदा किस स्तर पर निष्पादित है। पूर्व में मुख्य अभियंता के स्तर पर निष्पादित कार्य की निविदा का समयवृद्वि मुख्य अभियन्ता द्वारा ही दी जाती थी। समय सीमा की बात सहीं थी। इस कार्य की निविदा का निष्पादन मुख्य अभियंता के स्तर पर ही किया गया है। इसलिए उनके द्वारा दी गई समयवृद्धि युक्ति संगत है। श्री राम विलास सिंह, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह द्वारा प्रस्तुत बिन्दु कि ''मिट्‌टी कार्य की अंतिम मापी के संबंध में दिशा-निर्देश है कि उक्त कार्य की मापी बरसात के बाद ही लिया जाय ताकि संवदेक अपने खर्च से बाँध की क्षति की भरपाई करें'' को स्वीकार करने योग्य माना जा सकता है। कार्य 25.02.02 तक समाप्त किया जाना था। परन्तु उक्त तिथि तक कार्य पूरा नहीं हो सका। कार्य उसी संवेदक से कराये जाने हेतु समयवृद्धि दिया जाना आवश्यक था। छः माह की समयवृद्धि दी जाती तो अंतिम मापी अगस्त माह में ही दिया जाना अनिवार्य हो जाता। अतः श्री सिंह द्वारा कृत कार्रवाई को विभागीय हित में माना जा सकता है। किन्तु अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाने के पूर्व उक्त बिन्दु पर अपने स्तर से विभागीय अनुमोदन प्राप्त किया जाना अपेक्षित था।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं तत्पश्चात विभागीय कार्यवाही में वर्णित तथ्यों एवं श्री सिंह, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के समीक्षोपरान्त श्री सिंह को बागमती विस्तार 3

!बहार गजट (असाधारण), 1 अ(cid:27)तूबर 2015

योजना के कार्यों को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर समयवृद्धि दिये जाने के आरोप को प्रमाणित पाया एवं उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0 1119 दिनांक 19.08.14 के द्वारा श्री सिंह को निम्न दण्ड से संसूचित किया गया।

''पेंशन पर एक वर्ष तक के लिए 10% (दस प्रतिशत) की कटौती।'' उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह के द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया जिसमें मुख्यतः निम्न बातें कही गयी है।

मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर का प्रभार दिनांक 02.02.02 को ग्रहण किया। बागमती विस्तार योजना का प्राक्कलन तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा स्वीकृत की गयी थी। इसका निष्पादन मुख्य अभियंता द्वारा स्वीकृत की गयी थी।

मुख्य अभियंता के पद पर आसीन होने के पश्चात कार्यों की समीक्षा करने पर ज्ञात हुआ कि बागमती विस्तार योजना के सभी कार्यों का समापन 25.02.02 को हो जाना चाहिए था। परन्तु कार्य अधूरा था। अतः समयवृद्धि देना अपरिहार्य हुआ। यदि छः माह की समयवृद्धि दी जाती तो अंतिम मापी की तिथि अगस्त में पड़ती जो बरसात का प्रमुख महीना था। अतएव विभागीय हित में निर्णय लिया गया कि समयवृद्धि 30.12.02 तक दिया जाय। समयवृद्धि देने से विभाग को कोई वित्तीय क्षति नहीं हुई बल्कि संवेदक को अपने खर्च पर मरम्मति आदि करना पड़ा। अतः इस कृत कार्रवाई से विभाग को फायदा ही हुआ।

समयवृद्धि देने से संबंधित दो महत्वपूर्ण बिन्दु हैं। (क) निविदा का निष्पादन मुख्य अभियंता से किया गया था। अतः समयवृद्धि के लिए मुख्य अभियंता सक्षम एवं स्वतंत्र थे।

(ख) विभागीय दिशा-निर्देश है कि मिट्‌टी कार्य की मापी बरसात के बाद ही की जाय। इस निर्देश का पालन किया गया है। साथ ही श्री सिंह के द्वारा P L J R 123 सहदेव साहु बनाम बिहार सरकार एवं अन्य 2000(I) के न्याय निर्णय का उल्लेख किया गया है।

श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः-

श्री सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा समयवृद्धि की स्वीकृति 30.12.02 तक दी गयी। श्री सिंह के द्वारा लोक सूचना, मुख्य अभियंता कार्यालय, मुजफ्फरपुर का पत्रांक -3398 दिनांक 15.12.12 के अनुसार प्राक्कलन (प्राक्कलित राशि 250.397 लाख रू0) की स्वीकृति इनके पूर्ववर्ती मुख्य अभियंता द्वारा दी गयी तथा कार्य 28 भाग में विभाजीत कर परिमाण विपत्र की स्वीकृति दी गयी तथा निविदा का निष्पादन मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के स्तर से अपनी-अपनी सक्षमता में किया गया। दिनांक 09.08.04 से जारी विभागीय परिपत्र के अनुसार निविदा निष्पादन की सक्षमता के अन्तर्गत कार्य के समयवृद्धि की स्वीकृति मुख्य अभियंता द्वारा दी जा सकती है। लेकिन श्री सिंह द्वारा समयवृद्धि की स्वीकृति 2002 में ही दिये जाने से उपरोक्त परिपत्र जो 2004 में लागू हुआ का लाभ श्री सिंह को नहीं दिया जा सकता है। विभागीय अधिसूचना पत्रांक-96/आई0 सी0, पटना दिनांक 28.05.01 के अनुसार छः माह (6) से अधिक समयवृद्धि हेतु विभाग की स्वीकृत आवश्यक थी। साथ ही समयवृद्वि देने के कारण एकरारनामा के अनुसार संवेदक से विलम्ब के लिए जो राशि काटी जानी चाहिए थी, वह नहीं काटी गयी। अतएव वित्तीय क्षति भी हुई है। श्री सिंह द्वारा और कोई तथ्य नहीं रखे गये हैं। अतः श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग के विरूद्ध अधिरोपित दण्ड ''पेंशन पर एक वर्ष तक के लिए 10 (दस) प्रतिशत की कटौती'' को बरकरार रखते हुए पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करने का निर्णय सरकार के द्वारा लिया गया है।

तदनुसार उक्त निर्णय श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, विशेष कार्य पदाधिकारी।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1145/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1145.