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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 October 2015

Published 01 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1147
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

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सं0 22/नि0सि0(जम0)-12-1020/1989/

उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार ने श्री सिंह को आदेश संख्या-16 दिनांक

संख्या-16 दिनांक 22.01.2000 द्वारा22/नि0सि0(जम0)-12-1020/1989/2070—श्री श्याम किशोर प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक श्री श्याम किशोर प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक ाा नहर प्रमंडल, हालुदवनी सम्प्रति सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, कदवन बाँध अंचल, इन्द्रपुरी, अभियंता, सुवर्ण रेखा नहर प्रमंडल, हालुदवनी सम्प्रति सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, कदवन बाँध अंचल, इन्द्रपुरी, ाा नहर प्रमंडल, हालुदवनी सम्प्रति सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, कदवन बाँध अंचल, इन्द्रपुरी, 555 कि0 मी0 से 32.308 कि0 मी0 रोहतास के विरूद्ध इनके पदस्थापन अवधि 1989-90 में चांडिल मुख्य नहर के 22.555 कि0 मी0 से 32 रोहतास के विरूद्ध इनके पदस्थापन अवधि 1989-90 में चांडिल मुख्य नहर के 22 करायी गयी। उड़नदस्ता के जाँच के बीच मिट्‌टी कार्य में की गई अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता के जाँच के बीच मिट्‌टी कार्य में की गई अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से प्रतिवेदन के आधार पर आरोप गठित कर विभागीय पत्रांक-2655 दिनांक 01 90 द्वारा सिविल सर्विसेज प्रतिवेदन के आधार पर आरोप गठित कर विभागीय पत्रांक-2655 दिनांक 01.11.90 द्वारा सिविल सर्विसेज क्लासिफिकेशन, कन्ट्रोल एण्ड अपील रूल्स नियम-55(ए) के तहत उनसे स्पष्टीकरण पूछा गया था। उनसे प्राप्त क्लासिफिकेशन, कन्ट्रोल एण्ड अपील रूल्स नियम-55(ए) के तहत उनसे स्पष्टीकरण पूछा गया था। उनसे प्राप्त क्लासिफिकेशन, कन्ट्रोल एण्ड अपील रूल्स नियम-55(ए) के तहत उनसे स्पष्टीकरण पूछा गया था। उनसे प्राप्त ी। समीक्षा के क्रम में कुछ नये तथ्य प्रकाश में आये। फलतः पूरक स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा के क्रम में कुछ नये तथ्य प्रकाश में आये। फलतः पूरक स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गय आरोप गठित कर विभागीय पत्रांक-1082 दिनांक 10 99 द्वारा उनसे पुनः स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण आरोप गठित कर विभागीय पत्रांक-1082 दिनांक 10.05.99 द्वारा उनसे पुनः स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्ध निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाये गयेः- की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्ध निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाये ग की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्ध निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाये ग (क) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 का अंतिम विपत्र (35वाँ) (मेसर्स इंडियन बिल्डर्स के बीच 28 (क) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 का अंतिम विपत्र (35वाँ) (मेसर्स इंडियन बिल्डर्स के बीच 28.865 से 32.308) (क) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 का अंतिम विपत्र (35वाँ) (मेसर्स इंडियन बिल्डर्स के बीच 28 के मापी की जाँच नहीं करना, परन्तु एब्स्ट्रैक्ट ऑफ कॉस्ट पर हस्ताक्षर करना जबकि इस विपत्र के पहले के विपत्रों के मापी की जाँच नहीं करना, परन्तु एब्स्ट्रैक्ट ऑफ कॉस्ट पर हस्ताक्षर करना जबकि इस विपत्र के पहले के विपत्रों के मापी की जाँच नहीं करना, परन्तु एब्स्ट्रैक्ट ऑफ कॉस्ट पर हस्ताक्षर करना जबकि इस विपत्र के पहले के विपत्रों में ब्लॉक लेवेल के बदले औसत लेवेल लिया जाना जो कि तकनीकी रूप से गलत है। में ब्लॉक लेवेल के बदले औसत लेवेल लिया जाना जो कि तक (ख) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के एकरारनामा रद्‌द होने के पहले इनके द्वारा अंतिम मापी का ब्लॉक लेवेल (ख) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के एकरारनामा रद्‌द होने के पहले इनके द्वारा अंतिम मापी का ब्लॉक लेवेल (ख) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के एकरारनामा रद्‌द होने के पहले इनके द्वारा अंतिम मापी का ब्लॉक लेवेल नहीं लिया जाना। (ग) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के कार्यों की अंतिम मापी लिए बिना ही नये संवेदक मेसर्स इंडिया बिल्डर्स से (ग) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के कार्यों की अंतिम मापी लिए बिना ही नये संवेदक मेसर्स इंडिया बिल्डर्स से (ग) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के कार्यों की अंतिम मापी लिए बिना ही नये संवेदक मेसर्स इंडिया बिल्डर्स से पी0 लेवेल की जाँच नहीं करवाना जबकि मिट्‌टी के कार्य के लिए पी0 लेवेल लिया जाना कार्य प्रारम्भ करवाना एवं पी0 लेवेल की जाँच नहीं करवाना जबकि मिट्‌टी के कार्य के लिए पी0 लेवेल लिया जाना पी0 लेवेल की जाँच नहीं करवाना जबकि मिट्‌टी के कार्य के लिए पी0 लेवेल लिया जाना आवश्यक है क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण अभिलेख होता है। आवश्यक है क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण अभिलेख होता है। (?ा) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के अंतिम मापी जिसमें ब्लॉक लेवेल के बदले औसत लेवेल के आधार पर ा) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के अंतिम मापी जिसमें ब्लॉक लेवेल के बदले औसत लेवेल के आधार पर ा) मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 के अंतिम मापी जिसमें ब्लॉक लेवेल के बदले औसत लेवेल के आधार पर ाद यह आकलित किया गया कि मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 को 1,30,000 घ0 भुगतान किया गया, उसकी जाँच के बाद यह आकलित किया गया कि मेसर्स बी0 ए0 पी0 एल0 को 1,30,000 घ0 भुगतान किया गया, उसकी जाँच के ब 00 लाख सहित नहर के लिए काटी गयी मिट्‌टी का मी0 का अधिक भुगतान हुआ। 42.00 लाख डिस्पोजल मद में 7.00 लाख सहित नहर के लिए काटी गयी मिट्‌टी का मी0 का अधिक भुगतान हुआ। 42 डिस्पोजल प्लान भी उपलब्ध नहीं। डिस्पोजल प्लान भी उपलब्ध नहीं। उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार ने श्री सिंह को आदेश निम्नांकित दण्ड संसूचित किया गयाः- निम्नांकित दण्ड संसूचित किया गयाः- (क) निन्दन जिसकी प्रविष्टि वर्ष 89-90 की चारित्री में की जायेगी। (क) निन्दन जिसकी प्रविष्टि वर्ष 89-90 की चारित्री में की जायेगी। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 (ख) भविष्य में प्रोन्नति पर रोक। (ग) सांकेतिक रूप से 5.00 (पाँच) लाख रूपये की वसूली जिसकी कटौती समान रूप से इनके मासिक वेतन से की जायेगी, यदि सेवाकाल में यह वसूली नहीं हो पाती है तो सेवानिवृत्ति के पश्चात इनके पेंशनरी बेनिफिट से की जाएगी। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसकी सम्यक समीक्षोपरान्त विभागीय ज्ञापांक-1209 दिनांक 26.06.01 द्वारा अस्वीकृत किया गया है। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर C W J C सं0-8983/2000 में दिनांक 01.04.15 को निम्न न्याय निर्णय पारित किया गयाः- " So far the third purnishment. i.e. for recovery of amount of Rupees five lakhs as a token amount from the salary or pension of the petitioner is concerned, in view of the fact that the order has already declared to be unsustainable in law, such recovery cannot be permitted to be made. As a result, if the some amount has been recovered from the salary or pension of the petitioner that would be required to be given back to the petitioner within a period of three month from the date of receipt/production of a copy of this order after calculating the same from the records available with the Government. If the amount is not paid within the aforesaid period of three months, the respondents shall also be liable to pay interest upon it at the rate of 10% per annum as has been held in view of the decision of the APEX Court in the identical manner". उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश संख्या-16 दिनांक 22.01.2000 द्वारा निर्गत दण्डादेश का क्रमांक 'ग' में अंकित दण्ड ''सांकेतिक रूप से 5.00 (पाँच) लाख रूपये की वसूली जिसकी कटौती समान रूप से इनके मासिक वेतन से की जाएगी, यदि सेवाकाल में यह वसूली नहीं हो पाती है तो सेवानिवृत्ति के पश्चात इनके पेंशनरी बेनिफिट से की जाएगी'' सरकार द्वारा निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। तदुपरान्त उक्त निर्णय के आलोक में अंकित दण्ड निरस्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द झा, सरकार के अपर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1147/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-01.1147.