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जल संसाधन विभाग
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सं0 22/नि0सि0(डि0)-14-22/2008/
22/नि0सि0(डि0)-14-22/2008/2189—श्री रामायण सिंह, (आई0डी0-1879), तत्कालीन कार्यपाक श्री रामायण सिंह, (आई0डी0-1879), तत्कालीन कार्यपाक 08 को निगरानी विभाग द्वारा अपने अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, आरा (सम्प्रति सेवानिवृत) को दिनांक 12.11.08 को निगरानी विभाग द्वारा अपने अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, आरा (सम्प्रति सेवानिवृत) को दिनांक 12 नसे दो हजार रूपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ कार्यालय के पत्राचार लिपिक का गलत नियत से वेतन रोकने एवं उनसे दो हजार रूपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ कार्यालय के पत्राचार लिपिक का गलत नियत से वेतन रोकने एवं उ पकड़े जाने के फलस्वरूप श्री सिंह के विरूद्व निगरानी थाना कांड सं0-89/2008 दिनांक 12.11.08 दर्ज करते हुए पकड़े जाने के फलस्वरूप श्री सिंह के विरूद्व निगरानी थाना कांड सं0-89/2008 दिनांक 12 पकड़े जाने के फलस्वरूप श्री सिंह के विरूद्व निगरानी थाना कांड सं0-89/2008 दिनांक 12 न्यायिक हिरासत में भेेजे जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-965 दिनांक 28.11.08 द्वारा निलंबित करते हुए 08 द्वारा निलंबित करते हुए न्यायिक हिरासत में भेेजे जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-965 दिनांक 28 विभागीय संकलप ज्ञापांक 71 दिनांक 18 09 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली प ज्ञापांक 71 दिनांक 18.02.09 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः- 2005 के नियम 17 के तहत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः- 2005 के नियम 17 के तहत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः-
श्री अरूण कुमार सुमन, पत्राचार लिपिक, सोन नहर प्रमण्डल, आरा जो दिनांक 31.12.08 को सेवानिवृत श्री अरूण कुमार सुमन, पत्राचार लिपिक, सोन नहर प्रमण्डल, आरा जो दिनांक 31 1. श्री अरूण कुमार सुमन, पत्राचार लिपिक, सोन नहर प्रमण्डल, आरा जो दिनांक 31 होने वाले थे,का माह मई 2008 एवं जून 2008 का वेतन आपके द्वारा गलत नियत से रोका गया। होने वाले थे,का माह मई 2008 एवं जून 2008 का वेतन आपके द्वारा गलत नियत से रोका गया। होने वाले थे,का माह मई 2008 एवं जून 2008 का वेतन आपके द्वारा गलत नियत से रोका गया। 2. मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के आदेश सं0-528 दिनांक 02
मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के आदेश सं0-528 दिनांक 02.02
02.07 द्वारा दी गई ए0 सी0 हीं किया गया तथा निर्धारण के लिए पॅाच पी0 की स्वीकृति के बावजूद श्री अरूण कुमार सुमन का वेतन निर्धारण नहीं किया गया तथा निर्धारण के लिए पॅाच पी0 की स्वीकृति के बावजूद श्री अरूण कुमार सुमन का वेतन निर्धारण न हजार रूपए की मांग की गई। आपका यह आचरण सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1) में निहित हजार रूपए की मांग की गई। आपका यह आचरण सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1) में निहित हजार रूपए की मांग की गई। आपका यह आचरण सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1) में निहित प्रावधान के विरूद्व है। इसी क्रम में आपको दो हजार रूपए धूस लेते हुए निगरानी अन्वेषण व्यूरो, पटना द्वारा रंगे हाथ प्रावधान के विरूद्व है। इसी क्रम में आपको दो हजार रूपए धूस लेते हुए निगरानी अन्वेषण व्यूरो, पटना द्वारा रंगे हाथ प्रावधान के विरूद्व है। इसी क्रम में आपको दो हजार रूपए धूस लेते हुए निगरानी अन्वेषण व्यूरो, पटना द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया है।
09 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए संकल्प ज्ञापांक 1476 दिनांक 10
उक्त मामले में विभागीय जॅाच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। श्री सिंह उक्त मामले में विभागीय जॅाच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। श्री सिंह उक्त मामले में विभागीय जॅाच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। श्री सिंह 09 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-1479 दिनांक 10.12.09 द्वारा उनकी 09 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-1479 दिनांक 10 के दिनांक 30.11.09 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-1479 दिनांक 10 सेवानिवृति की तिथि 30.11.09 के प्रभाव से निलंबन मु क्त करते हुए संकल्प ज्ञापांक 1476 दिनांक 10.12.09 द्वारा उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 में सम्परिवर्तित किया गया। इसके साथ ही संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 में सम्परिवर्तित किया गया। इसके साथ ही संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 में सम्परिवर्तित किया गया। इसके साथ ही श्री सिंह द्वारा विभागीय कार्यवाही में सहयोग नहीं करने के कारण उनके विरूद्व निम्न पूरक आरोप गठित किया श्री सिंह द्वारा विभागीय कार्यवाही में सहयोग नहीं करने के कारण उनके विरूद्व निम्न पूरक आरोप गठित किय श्री सिंह द्वारा विभागीय कार्यवाही में सहयोग नहीं करने के कारण उनके विरूद्व निम्न पूरक आरोप गठित किय गयाः- 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 अ(cid:27)तूबर 2015 गया जबकि आदर्श आचार संहिता की अवधि में चुनाव कार्य में संलग्न कर्मियों पर ही प्रशासनिक कार्रवाई के पूर्व चुनाव आयोग की अनुमति वांछित होती है और श्री सिंह 30.11.09 को ही सेवानिवृत हो चुके है।
अतः श्री रामायण सिंह के विरूद्व लगभग पॅाच वर्षो से विभागीय कार्यवाही में सहयोग नहीं करने एवं इसे बाधित रखने का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित है।
अपर विभागीय जॅाच आयुक्त (संचालन पदाधिकारी) से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षोपरान्त इससे सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 1863 दिनांक 15.12.14 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री सिंह द्वारा अपने प्रत्युतर में मुख्य रूप से निम्न तर्क दिया गयाः- (i) विभागीय कार्यवाही का विधिवत संचालन नहीं किया गया है। (ii) न्यायालीय प्रक्रिया की तरह विभागीय कार्यवाही में उन्हें संबंधित प्रदर्श, एफ0 एस0 एल0 की रिपोर्ट एवं जब्त नोटों की छायाप्रति उपलब्ध नहीं कराई गई।
(iii) मामले के गवाहों की सूची एवं उनका प्रति परीक्षण करने का अवसर नहीं दिया गया। (iv) परिवादी श्री अरूण कुमार सुमन पर कतिपय आरोप लगाते हुए साजिश के तहत फॅसाने की बात कही गई।
(v) श्री सिंह के मामले से संंबंधित विभिन्न गजट की प्रति उन्हें उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर विभागीय कार्यवाही को नैसर्गिक न्याय के विरूद्व बताया गया।
(vi) श्री सिंह द्वारा बीमारी के चलते बाहर रहने के कारण विभाग द्वारा पे्रषित पत्रों को प्राप्त नहीं होने की बात कही गई।
श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युतर की समीक्षा की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि श्री सिंह द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में अपने कार्यालय के कर्मी से धूस लेने संबंघी आरोप से कही भी इंकार नहीं किया गया है। इनके द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही एवं की गई द्वितीय कारण पृच्छा पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया जो मान्य नहीं किया जा सकता क्योंकि सारी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई परन्तु इनके द्वारा विभागीय कार्यवाही में सहयोग नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा कई बार उपस्थित होने/बचाव बयान समर्पित करने हेतु निदेशित किए जाने के बावजूद वे उपस्थित नहीं हुए। इस प्रकार श्री सिंह द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युतर में प्रमाणित आरोपों के संबंध में कोई ठोस एवं अकाट्य कारण अंकित नहीं किया गया है जिससे उनकी प्रमाणिकता पर संदेह किया जा सके।
अतः सम्यक समीक्षोपरान्त श्री रामायण सिंह, तत्कालीन कार्यपाक अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व अपने कार्यालय के पत्राचार लिपिक का गलत नियत से वेतन रोकने, उनसे दो जार रूपए रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने एवं इस मामले में संचालित विभागीय कार्यवाही में सहयोग नहीं करने के प्रमाणित आरोपों के लिए ''सौ प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार के स्तर से लिया गया।
सरकार के उक्त निर्णय के आलोक श्री रामायण सिंह सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व अधिरोपित किए जाने वाले ''सौ प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक'' के दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 1009 दिनांक 06.05. 15 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति प्रदान करने का अनुरोध किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक 1293 दिनांक 11.08.15 के माध्यम से उक्त दण्ड प्रस्ताव पर परामर्श उपलब्ध कराया गया। बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से प्राप्त परामर्श के आलोक में मामले की पुनः सरकार के स्तर पर समीक्षा की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री रामायण सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत को उनके विरूद्व प्रमाणित आरोपों के लिए ''सौ प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री रामायण सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देते हुए संसूचित किया जाता हे।
1. सौ प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
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