(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 1(cid:20) आि(cid:15)वन 1(cid:21)3(cid:25) (cid:26)श(cid:15)(cid:27)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 11(cid:20)(cid:21)) पटन(cid:4)
2(cid:15)15
पटन(cid:4)(cid:28) व५ह(cid:31)प०तव(cid:4)र, [Çत३बर 2(cid:15)15
सं0 08/आरोप-01-112/2014-सा॰प्र॰-12508 सं0 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 25 अगस्त 2015
के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, सहरसा के पत्रांक-151 दिनांक 06
श्री ब्रह्मी राम, बि0प्र0से0, (कोटि क्रमांक-439/11) तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी नवहट्टा, श्री ब्रह्मी राम, बि0प्र0से0, (कोटि क्रमांक-439/11) तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी नवहट्टा, श्री ब्रह्मी राम, बि0प्र0से0, (कोटि क्रमांक-439/11) तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी नवहट्टा, 151 दिनांक 06.02.2012 द्वारा छात्रवृत्ति सहरसा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, सहरसा के पत्रांक- की राशि के वितरण में अनियमितता बरतने के लिए आरोप प्रपत्र 'क' गठित कर उपलब्ध कराया गया। प्रतिवेदित की राशि के वितरण में अनियमितता बरतने के लिए आरोप प्रपत्र 'क' गठित कर उपलब्ध कराया गया। प्रतिवेदित की राशि के वितरण में अनियमितता बरतने के लिए आरोप प्रपत्र 'क' गठित कर उपलब्ध कराया गया। प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में श्री राम से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-15325 दिनांक 07.11.2012 द्वारा जिला आरोपों के आलोक में श्री राम से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-15325 दिनांक 07 आरोपों के आलोक में श्री राम से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-15325 दिनांक 07 पदाधिकारी, सहरसा से मंतव्य की मांग की गयी जो उनके पत्रांक-12 दिनांक 24
मंतव्य की मांग की गयी जो उनके पत्रांक-12 दिनांक 24.01.2013 द्वारा उपलब्ध कराया गया।
2013 द्वारा उपलब्ध कराया गया। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 8 अ(cid:27)तूबर 2015 था इसलिए उन्होंने रूपये 4,00000.00 (चार लाख) को उसी दिन नाजीर को दे दिया जिसका वितरण अगले वित्तीय वर्ष में किया जाना था। लेकिन पंचायत सेवक द्वारा इसका वितरण नहीं किया गया।
5. आरोपी पदाधिकारी श्री ब्रह्मी राम के विरूद्ध गठित आरोप, जाँच पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं उनके द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरांत पाया गया है कि :-
(i) वर्ष 1995-99 तक की अवितरित छात्रवृत्ति की राशि को इतने दिनों बाद वितरित किया जाना प्रासंगिक नहीं था।
(ii) पंचायत सेवक ने इस राशि का वितरण किया है या अथवा नहीं इसकी खोज खबर अपने पदस्थापन के दौरान आरोपित पदाधिकारी द्वारा नहीं ली गयी और न हीं वितरण का अनुश्रवण ही किया गया।
(iii) वितरण की सूची, जिसे अभिश्रव के रूप में बिना जाँचे श्री राम द्वारा पारित किया गया, वह जाँच में फर्जी पाया गया। अन्ततः राशि की वसूली के लिए प्राथमिकी दर्ज की गयी एवं पंचायत सेवक के सेवान्त लाभ से वर्षो बाद इस राशि की वसूली की गयी।
6. उक्त समीक्षात्मक तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन से सहमत होते हुए सम्यक् रूप से विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निर्णय लिया गया कि बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी॰) के तहत श्री ब्रह्मी राम, बि0प्र0से0, (कोटि क्रमांक-439/11) तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी नवहट्टा, सहरसा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के पेंशन से 20 प्रतिशत की कटौती 10 वर्षो के लिए की जाय।
7. विभागीय पत्रांक-6108, दिनांक 22.04.2015 द्वारा श्री ब्रह्मी राम के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त विनिश्चित निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गयी। आयोग के पत्रांक-1284, दिनांक 11.08.2015 द्वारा अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय से सहमति व्यक्त की गयी है।