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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 08 October 2015

Published 08 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-08.1175
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:27)0-40 िनबंधन सं(cid:10)या ॢबह(cid:4)र

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सं॰ 1788—पटना सिटी के बेगमपुर जल्ला इलाके में अवस्थित हनुमान मन्दिर करीब 300 साल पुराना मन्दिर पटना सिटी के बेगमपुर जल्ला इलाके में अवस्थित हनुमान मन्दिर करीब 300 साल पुराना मन्दिर पटना सिटी के बेगमपुर जल्ला इलाके में अवस्थित हनुमान मन्दिर करीब 300 साल पुराना मन्दिर है, जिसकी देखभाल श्री रामावतार तिवारी, पुजारी करते थे। वे कभी महावीर मन्दिर, पटना जंक्षन, पटना के पास यह है, जिसकी देखभाल श्री रामावतार तिवारी, पुजारी करते थे। वे कभी महावीर मन्दिर, पटना जंक्षन, पटना के पास यह है, जिसकी देखभाल श्री रामावतार तिवारी, पुजारी करते थे। वे कभी महावीर मन्दिर, पटना जंक्षन, पटना के पास यह निवेदन लेकर आये थे कि जल्ला स्थित मन्दिर को महावीर मन्दिर पटना जंक्षन, स्वयं लेकर इसका जीर्णोद्धार कराए, निवेदन लेकर आये थे कि जल्ला स्थित मन्दिर को महावीर मन्दिर पटना जंक्षन, स्वयं लेकर इसका जीर्णोद्धार कराए, किन्तु महावीर मन्दिर ने उसको अपने साथ जोड़ना स्वीकार नहीं किया, फिर भी वयोवृद्ध पुजारी के अनुरोध पर इसके किन्तु महावीर मन्दिर ने उसको अपने साथ जोड़ना स्वीकार नहीं किया, फिर भी वयोवृद्ध पुजारी के अनुरोध पर इसके किन्तु महावीर मन्दिर ने उसको अपने साथ जोड़ना स्वीकार नहीं किया, फिर भी वयोवृद्ध पुजारी के अनुरोध पर इसके जीर्णोद्धार में पहल दिखलाई। तदुपरान्त इसके नवनिर्माण के लिए एक निर्माण समिति का गठन हुआ और इस समिति जीर्णोद्धार में पहल दिखलाई। तदुपरान्त इसके नवनिर्माण के लिए एक निर्माण समिति का गठन हुआ और इस समिति के साथ बहुत से भक्त जुड़ते चले गए और कुछ वर्षो में एक भव्य मन्दिर का निर्माण हुआ जो किसी भी शहर के लिए के साथ बहुत से भक्त जुड़ते चले गए और कुछ वर्षो में एक भव्य मन्दिर का निर्माण हुआ जो किसी भी शहर के लिए के साथ बहुत से भक्त जुड़ते चले गए और कुछ वर्षो में एक भव्य मन्दिर का निर्माण हुआ जो किसी भी शहर के लिए गौरव का विषय हो सकता है।

मन्दिर के निर्माण में जो उत्साह एवं भक्ति समिति के सदस्यों ने दर्षायी वह अत्यन्त प्रषंसनीय रही है। इसकी मन्दिर के निर्माण में जो उत्साह एवं भक्ति समिति के सदस्यों ने दर्षायी वह अत्यन्त प्रषंसनीय रही है। मन्दिर के निर्माण में जो उत्साह एवं भक्ति समिति के सदस्यों ने दर्षायी वह अत्यन्त प्रषंसनीय रही है। जितनी तारिफ की जाए वह कम है, किन्तु इस समिति ने इसके निर्माण के क्रम में तथा निर्माण के बाद देष एवं प्रान्त जितनी तारिफ की जाए वह कम है, किन्तु इस समिति ने इसके निर्माण के क्रम में तथा निर्माण के बाद देष एवं प्रान्त जितनी तारिफ की जाए वह कम है, किन्तु इस समिति ने इसके निर्माण के क्रम में तथा निर्माण के बाद देष एवं प्रान्त में व्याप्त नियमों की अवहेलना की और धार्मिक न्यास पर्षद के निर्देष के बाबजूद आज तक न कभी निर्माण के में व्याप्त नियमों की अवहेलना की और धार्मिक न्यास पर्षद के निर्देष के बाबजूद आज तक न कभी निर्माण के में व्याप्त नियमों की अवहेलना की और धार्मिक न्यास पर्षद के निर्देष के बाबजूद आज तक न कभी निर्माण के आय-व्यय का हिसाब, बजट, वार्षिक आय-व्यय विवर णी, पर्षद शुल्क आदि दिया और न मन्दिर के विकास योजनाओं आय-व्यय का हिसाब, बजट, वार्षिक आय-व्यय विवरणी, पर्षद शुल्क आदि दिया और न मन्दिर के विकास योजनाओं की सूचना दी गयी और न ही भावी निर्माण के बारे में जानकारी। यद्यपि पर्षद में इसका निबंधन 2009 ई0 में किया की सूचना दी गयी और न ही भावी निर्माण के बारे में जानकारी। यद्यपि पर्षद में इसका निबंधन 2009 ई0 में किया की सूचना दी गयी और न ही भावी निर्माण के बारे में जानकारी। यद्यपि पर्षद में इसका निबंधन 2009 ई0 में किया गया जिसकी निबंधन संख्या-4017/2009 है; तथापि बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधा गया जिसकी निबंधन संख्या-4017/2009 है; तथापि बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधानों का पालन न गया जिसकी निबंधन संख्या-4017/2009 है; तथापि बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधा स्वयंभू समिति ने किया और न ही इसके अग्रणी कर्णधारों ने। समिति के एक सक्रिय सदस्य ने धार्मिक न्यास की जमीन स्वयंभू समिति ने किया और न ही इसके अग्रणी कर्णधारों ने। समिति के एक सक्रिय सदस्य ने धार्मिक न्यास की जमीन स्वयंभू समिति ने किया और न ही इसके अग्रणी कर्णधारों ने। समिति के एक सक्रिय सदस्य ने धार्मिक न्यास की जमीन पर अपने रिस्तेदार की मोटर साईकिल की दूकान खुलवा दी और बार-बार कहने पर भी वह दूकान खाली नहीं पर अपने रिस्तेदार की मोटर साईकिल की दूकान खुलवा दी और बार-बार कहने पर भी वह दूकान खाली नहीं पर अपने रिस्तेदार की मोटर साईकिल की दूकान खुलवा दी और बार-बार कहने पर भी वह दूकान खाली नहीं पदाधिकारियों एवं सदस्यों में भक्ति भावना ओत-प्रोत थी, बाद में कुछ सदस्यों करवाई गई। प्रारम्भ में जहाँ समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों में भक्ति भावना ओत-प्रोत थी, बाद में कुछ सदस्यों करवाई गई। प्रारम्भ में जहाँ समिति के में इस भावना की कमी पायी गयी। जब इस न्यास का निबंधन हुआ था तो श्री रवीन्द्र शुक्ला, पटना सिटी को इस में इस भावना की कमी पायी गयी। जब इस न्यास का निबंधन हुआ था तो श्री रवीन्द्र शुक्ला, पटना सिटी को इस में इस भावना की कमी पायी गयी। जब इस न्यास का निबंधन हुआ था तो श्री रवीन्द्र शुक्ला, पटना सिटी को इस न्यास का अस्थायी न्यासधारी इस कार्यालय के पत्रांक-2187, ा नियुक्त किया गया था। साथ में न्यास का अस्थायी न्यासधारी इस कार्यालय के पत्रांक-2187, दिनांक 16.02.2011 द्वारा नियुक्त किया गया था। साथ में पर्षद के प्रतिनिधि के रूप में श्री घनष्याम दास हंस की नियुक्ति की गई थी जिन्हें यह दायित्व दिया गया था कि वहाँ पर्षद के प्रतिनिधि के रूप में श्री घनष्याम दास हंस की नियुक्ति की गई थी जिन्हें यह दायित्व दिया गया था कि वहाँ पर्षद के प्रतिनिधि के रूप में श्री घनष्याम दास हंस की नियुक्ति की गई थी जिन्हें यह दायित्व दिया गया था कि वहाँ हो रहे कामकाज के बारे में पर्षद को रिपोर्ट करेंगे और मन्दिर में पूजा-पाठ भी करेंगे। पर्षद के इस पत्र में मन्दिर हो रहे कामकाज के बारे में पर्षद को रिपोर्ट करेंगे और मन्दिर में पूजा-पाठ भी करेंगे। पर्षद के इस पत्र में मन्दिर हो रहे कामकाज के बारे में पर्षद को रिपोर्ट करेंगे और मन्दिर में पूजा-पाठ भी करेंगे। पर्षद के इस पत्र में मन्दिर परिसर में दुकानों के निर्माण के बारे में षिकायत की भी चर्चा की थी और उस पर सम्यक्‌ विचार-विमर्ष के बाद सर में दुकानों के निर्माण के बारे में षिकायत की भी चर्चा की थी और उस पर सम्यक्‌ विचार-विमर्ष के बाद सर में दुकानों के निर्माण के बारे में षिकायत की भी चर्चा की थी और उस पर सम्यक्‌ विचार-विमर्ष के बाद निर्णय लेने के लिए कहा गया था। इस मन्दिर में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव वसंत पंचमी 15 फरवरी, 2013 को किया निर्णय लेने के लिए कहा गया था। इस मन्दिर में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव वसंत पंचमी 15 फरवरी, 2013 को किया निर्णय लेने के लिए कहा गया था। इस मन्दिर में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव वसंत पंचमी 15 फरवरी, 2013 को किया गया। सार्वजनिक चंदे से भव्य मन्दिर क निर्माण का यह एक सुन्दर उदाहरण है, किन्तु यह आदर्ष तब बनता जब गया। सार्वजनिक चंदे से भव्य मन्दिर क निर्माण का यह एक सुन्दर उदाहरण है, किन्तु यह आदर्ष तब बनता जब इसके आय-व्यय की जानकारी पर्षद और जन साधारण को दी जाती; जो अबतक नहीं की गई है। इसके आय-व्यय की जानकारी पर्षद और जन साधारण को दी जाती; जो अबतक नहीं की गई है। इसके आय-व्यय की जानकारी पर्षद और जन साधारण को दी जाती; जो अबतक नहीं की गई है।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 8 अ तूबर 2015 इससे भी दुखद स्थिति यह हुई कि जिस संत घनष्याम दास हंस को न्यास पर्षद प्रतिनिधि तथा पुजारी बनाकर इस मन्दिर में उपर्युक्त पर्षदीय ज्ञापांक, दिनांक द्वारा भेजा गया था उस पुजारी के साथ अनुसूचित जाति के व्यक्ति होने के कारण भेद-भाव और दुव्र्यवहार किया गया और मंदिर से निकाल दिया गया। श्री घनष्याम दास को इस मामले में सीधे एफ0 आई0 आर0 नहीं करके धार्मिक न्यास पर्षद को सूचित करना चाहिए था, किन्तु श्री महावीर मन्दिर निर्माण समिति के अध्यक्ष श्री अमर कुमार अग्रवाल ने महावीर मन्दिर निर्माण समिति के लेटर हेड पर दो पंक्ति का एक पत्र लिखकर श्री धनष्याम दास को मन्दिर की सेवा से मुक्त कर दिया । जब श्री धनष्याम दास पर्षद द्वारा नियुक्त किए गए थे तो इन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं था। अधिक से अधिक धनष्याम दास को मंदिर से वापस लेने की अनुषंसा कर सकते थे। विडम्बना यह है कि जिस लेटर हेड पर श्री अमर कुमार अग्रवाल ने यह पत्र लिखा उस पर संरक्षक के रूप में आचार्य किषोर कुणाल एवं डा0 चन्द्र भूषण जी के नाम भी मुद्रित हैं। मेरे नाम को किसी ऐसे कार्यों के लिए उपयोग करना उचित नहीं था, विषेषकर तब जब मन्दिर का निर्माण सम्पन्न हो गया और प्राण प्रतिष्ठा भी हो गई। मैं श्री अग्रवाल के इस अनधिकृत निर्णय को निष्पक्ष तब मानता जब अनुसूचित जाति के श्री घनष्याम दास हंस के साथ जो जातिगत दुव्र्यवहार हुआ और जिनलोगों ने ऐसा दुव्र्यवहार किया और मन्दिर में पुजारी का काम नहीं करने दिया, उनपर भी कोई कार्रवाई की जाती, किन्तु ऐसी कोई कार्रवाई श्री अग्रवाल ने नहीं किया। मन्दिर ईंट पत्थरों की भव्यता से भव्य नहीं होता, बल्कि इसमें समाज के सभी वर्गो को साथ लेकर चलने की क्षमता होनी चाहिए, जो इस कार्रवाई से परिलक्षित नहीं होता है। इस कार्यालय के ज्ञापांक-8187 दिनांक 16.02.2010 द्वारा श्री रवीन्द्र शुक्ला को एक वर्ष के लिए अस्थायी न्यासधारी बनाया गया था यह अवधि 15.03.2011 को समाप्त हो गई और तब से इस न्यास पर पर्षदीय कार्यालय के पटना प्रक्षेत्र का विषेष ध्यान नहीं गया। यद्यपि इस कार्यालय के पत्रांक-154, दिनांक 13.05.2014 द्वारा इस संबंध में श्री अरूण कुमार रणवीर को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें न्यास समिति के गठन हेतु नामों की मांग की गई थी और उनके परिचित द्वारा मोटर साईकिल का शो-रूम बनाने के लिए स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। इसकी प्रतिलिपि श्री अमर कुमार अग्रवाल एवं श्री रमेष चन्द्र गुप्ता को भी दी गई थी। स्पष्टीकरण कौन कहे कोई जबाब भी नहीं भेजा गया। इसी प्रकार दिनांक 29.05.2015 को भी इस कार्यालय के अधीक्षक द्वारा पत्रांक 655 श्री अरूण कुमार रणवीर को पत्र भेजा गया जिसकी प्रतिलिपि श्री अमर कुमार अग्रवाल एवं श्री रमेष चन्द्र गुप्ता को भेजी गई। इसके बाद इस कार्यालय के पत्रांक-1553, दिनांक 14.08.2015 द्वारा भी श्री महावीर मन्दिर निर्माण समिति के पदाधिकारी होने के कारण एक पत्र भेजा गया, परन्तु इसका जबाब अबतक प्राप्त नहीं हुआ है। इस प्रकार यह महावीर मन्दिर निर्माण समिति अबतक स्वच्छन्दतापूर्वक कार्य करती आयी है। यह बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं अन्य कानूनी प्रावधानों की अवहेलना करती रही है।

इतना सब होने के बावजूद इस मन्दिर के निर्माण से जो लोग सक्रिय रूप से जुड़े रहे है, उनको सदस्य के रूप में इस मन्दिर की न्यास समिति में इसलिए रखा जा रहा है, कि यदि ये समिति में नहीं रहेंगे तो इस मन्दिर के निर्माण का हिसाब-किताब नहीं ज्ञात हो पायेगा। उन्हें सारा हिसाब-किताब प्रस्तुत करने के लिए एक वर्ष का समय दिया जाता है। इस अवधि में वे सारा हिसाब-किताब प्रस्तुत करेंगे, अन्यथा इनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जायेगी। उन्हें यह भी सुझाव दिया जाता है कि वे प्रचलित नियमों का अनुपालन करें।

यहाँ यह स्पष्ट किया जाता है कि इस मन्दिर के निर्माण के लिए एक 21-सदस्यीय समिति अलग से बनी हुई है, वह कार्य करती रहेगी और इसके निर्माण-कार्य में यह न्यास समिति हस्तक्षेप नहीं करेगी। हाँ, निर्माण-समिति को निर्माण-विषयक आय-व्यय की जानकारी न्यास-समिति और धार्मिक न्यास पर्षद को समय-समय पर देनी होगी तथा अंकेक्षित प्रतिवेदन की प्रतिलिपि पारदर्षिता एवं नियम-अनुपालन के लिए प्रस्तुत करनी होगी।

चूंकि पर्षदीय पत्रांक 2187 दिनांक 16.02.2010 द्वारा श्री रवीन्द्र शुक्ला को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया और एक वर्ष की अवधि बहुत पहले ही पूरी हो चुकी है और यहाँ रिक्तता है, अतः इस न्यास के सुचारू प्रबंधन तथा सम्यक्‌ विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की घारा-32 के तहत एक योजना का निरूपण और उसके कार्यान्वयन के लिए एक न्यास समिति का गठन आवष्यक हो गया है।

अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उप-विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री जल्ला महावीर स्थान, बेगमपुर, पटना सिटी, जिला- पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था तथा सम्यक विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसको मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजनायोजनायोजनायोजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम '''''''' श्रीश्रीश्रीश्री जल्ला महावीर स्थान, न्यास जल्ला महावीर स्थान, न्यास जल्ला महावीर स्थान, न्यास जल्ला महावीर स्थान, न्यास योजना''योजना''योजना''योजना'' होगा तथा इसके संचालन एवं क्रियान्वयन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' '''' '''' '''' '' श्रीश्रीश्रीश्री जल्ला जल्ला जल्ला जल्ला महावीर स्थान, महावीर स्थान, महावीर स्थान, महावीर स्थान, न्यास समिति''न्यास समिति''न्यास समिति''न्यास समिति'' होगी।

2. इसकी समस्त चल-अचल संपत्ति एवं आय के प्रबंधन, संचालन एवं प्रषासन का अधिकार न्यास समिति में निहित होगी।

3. इस न्यास समिति का मुख्य दायित्व मंदिर में परंपरागत पूजा-अर्चना, राग-भोग, उत्सव, समैया आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक्‌ प्रबंधन अबिलम्ब सुनिष्चित करना होगा।3 %बहार गजट (असाधारण), 8 अ तूबर 2015 4. मंदिर परिसर में भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की समस्त नगदी राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर सत्यापित पंजी में प्रविष्टि के बाद बैंक खाता में जमा की जायेगी।

5. मंदिर में प्राप्त होने वाले दान, चन्दा, चढ़ावा, उपहारों के लिए दाताओं को उचित पावती रसीद दी जायेगी और उन्हें सत्यापित पंजी में प्रविष्टि के बाद प्रदर्ष के रूप में रखी जायेगी।

6. मंदिर परिसर में होने वाले समस्त मांगलिक/धार्मिक संस्कारों यथा- मुंडन, यज्ञोपवित, विवाह, वाहन पूजा आदि के लिए निर्धारित राषि ही ली जायेगी, जिसका सम्यक लेखा संधारण किया जायेगा। यथा निर्धारित राषि को सूचना पट्‌ट पर अंकित कर मंदिर परिसर में आम लोगों को जानकारी के लिए जगह-जगह लगाया जायेगा। 7. न्यास समिति की असली कसौटी न्यास की आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता सुनिष्चित करना होगा। 8. न्यास की समग्र आय, न्यास के नाम से संधारित राष्ट्रीयकृत बैंक खाता में जमा की जायेगी और आवष्यकतानुसार राषि की निकासी कर व्यय किया जायेगा।

9. न्यास के बैंक खाते का संचालन न्यास समिति के अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष में से किन्हीं दो के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।

10. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए वार्षिक आय-व्यय विवरणी, बजट, अंकेक्षित प्रतिवेदन, बैठकों के कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक रूप से प्रेषण करेगी।

11. जिन नियमों का उल्लेख इस योजना में नहीं है, और न्यास हित में आवष्यक समझा जा रहा हो, तो न्यास समिति विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के अनुमोदन से इसे लागू करेगी।

12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे। सचिव न्यास समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष लेखा का सम्यक संधारण करने के लिए जिम्मेदार होंगे।

13. न्यास समिति की बैठक सामान्यतया मंदिर परिसर में होगी। यह बैठक प्रत्येक तिमाही में कम-से-कम एक बार अवष्य होगी।

14. इस योजना में परिवर्त्तन, परिवर्द्धन अथवा संषोधन का अधिकार पर्षद में निहित होगा। 15. न्यास समिति के कोई सदस्य न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे अथवा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास समिति से लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे या आपराधिक पृष्ठभूमि के होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हत्ता समाप्त हो जायेगी। उपर्युक्त योजना के कार्यान्वयन के लिए न्यास समिति के निम्नलिखित सदस्य नियुक्त किए जाते हैंः- (1) श्री अमर कुमार अग्रवाल, सुर्याबिहार अपार्टमेन्ट, एक्जीविषन रोड, पटना - अध्यक्ष (2) श्री रमेष चन्द्र गुप्ता, 502, संतोषा कॉम्पलेक्स, बंदर बगीचा, पटना - उपाध्यक्ष (3) श्री अरूण कुमार रणवीर, बाहरी बेगमपुर (मंडई) पटना सिटी, पटना - सचिव (4) श्री पवन कुमार झुनझुनवाला, फुलौरी गली पटना सिटी, पटना - सह-सचिव (5) श्री देवकी नन्दन पोद्‌दार, झाउगंज, पटना सिटी, पटना - कोषाध्यक्ष (6) श्री षिव कुमार तिवारी, बेगमपुर, पटना सिटी, पटना - सदस्य (7) श्री विष्वनाथ मेहता पिता- स्व0 रघुनी महतो, - सदस्य कोईरी टोला, बाहरी बेगमपुर, पटना सिटी, पटना (8) श्री मोहन चतुर्वेदी, दुन्दी बाजार, पटना सिटी, पटना - सदस्य (9) श्री डी0 एन0 लाल अ0 प्रा0 वायु सेना अधिकारी, - सदस्य महावीर स्थान, बाहरी बेगमपुर, पटना सिटी, पटना। (10) श्री पी0 के0 अग्रवाल, रोड नं0-26 एस0 के0 नगर, पटना-01 - सदस्य (11) श्री संजय कुमार यादव, मालसलामी, पटना सिटी, पटना - सदस्य इस समिति का गठन तात्कालिक प्रभाव से किया जाता है और इसका कार्यकाल 05 वर्षों का होगा।

आदेश से, किषोर कुणालकिषोर कुणालकिषोर कुणालकिषोर कुणाल,,,, अध्यक्ष अध्यक्ष अध्यक्ष अध्यक्ष ।।।।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 08 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-08.1175/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-08.1175.