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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 08 October 2015

Published 08 October 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-10-08.1192
Languages
English, Hindi

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पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक रोहतास जिलान्तरोहतास जिलान्तरोहतास जिलान्तरोहतास जिलान्तर्गत आनन्द कुटी धाम, ग्रामपो0-र्गत आनन्द कुटी धाम, ग्रामपो0-र्गत आनन्द कुटी धाम, ग्रामपो0-र्गत आनन्द कुटी धाम, ग्रामपो0-तिलौथुतिलौथुतिलौथुतिलौथु पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 3974 है। सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 3974 है।

इस न्यास से संबंधित स्थानीय जनता का एक आवेदन वर्ष 2009 में पर्षद कार्यालय को प्राप्त हुआ, जिसमें इस न्यास से संबंधित स्थानीय जनता का एक आवेदन वर्ष 2009 में पर्षद कार्यालय को प्राप्त इस न्यास से संबंधित स्थानीय जनता का एक आवेदन वर्ष 2009 में पर्षद कार्यालय को प्राप्त बताया गया कि परम धाम परलोक वासी श्री श्री 108 दिवंगत श्री हनुमान दास जी उर्फ श्री पयहारी जी महाराज ने बताया गया कि परम धाम परलोक वासी श्री श्री 108 दिवंगत श्री हनुमान दास जी उर्फ श्री पयहारी जी महाराज ने बताया गया कि परम धाम परलोक वासी श्री श्री 108 दिवंगत श्री हनुमान दास जी उर्फ श्री पयहारी जी महाराज ने सभी प्रखंडवासी, भक्तों के सहयोग से स्थापित आनन्द कुटी धाम का निर्माण 30 साल पूर्व कराया गया था। आवेदन में सभी प्रखंडवासी, भक्तों के सहयोग से स्थापित आनन्द कुटी धाम का निर्माण 30 साल पूर्व कराया गया था। आवेदन में सभी प्रखंडवासी, भक्तों के सहयोग से स्थापित आनन्द कुटी धाम का निर्माण 30 साल पूर्व कराया गया था। आवेदन में पूजारी सुदामा जी पर गंभीर आरोप एव ं परम्पराओं का पालन नहीं करने तथा मनमानी करने का आरोप गठित किया पूजारी सुदामा जी पर गंभीर आरोप एवं परम्पराओं का पालन नहीं करने तथा मनमानी करने का आरोप गठित किया गया। प्राप्त आरोपों के आलोक में पर्षद की ओर से न्यास की जांच करवाई गयी, जिसमें जानकारी प्राप्त हुई कि इस गया। प्राप्त आरोपों के आलोक में पर्षद की ओर से न्यास की जांच करवाई गयी, जिसमें जानकारी प्राप्त हुई कि इस गया। प्राप्त आरोपों के आलोक में पर्षद की ओर से न्यास की जांच करवाई गयी, जिसमें जानकारी प्राप्त हुई कि इस की धारा-34 के अन्तर्गत न्यास की कई शाखाएँ हैं तथा यह एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। साथ ही अधिनियम की धारा- न्यास की कई शाखाएँ हैं तथा यह एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। साथ ही अध्ि न्यास को पंजीकृत करने की भी अनुषंसा की गयी। इसके 20/05/09 के माध्यम से न्यास को पंजीकृत करने की भी अनुषंसा की गयी। इसके बाद पर्षदीय पत्रांक-336, दिनांक 20/05/09 के माध्यम से न्यास को निबंधन कराने हेतु श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी को पत्र दिया गया। तदुपरांत न्यास का निबंधन न्यास को निबंधन कराने हेतु श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी को पत्र दिया गया। तदुपरांत न्यास का निबंधन न्यास को निबंधन कराने हेतु श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी को पत्र दिया गया। तदुपरांत न्यास का निबंधन किया गया। इसके उपरांत श्री सुदामा दास जी के उपर न्यास की सम्पत्ति के निजी उपयोग, मठ की परम्पराओं का किया गया। इसके उपरांत श्री सुदामा दास जी के उपर न्यास की सम्पत्ति के निजी उपयोग, मठ की परम्पराओं का पालन न करना, मठ की वास्तविक आय को छुपाना एवं अन्य गंभीर आरोप प्राप्त होते रहे। प्राप्त आरोपों के आलोक में पालन न करना, मठ की वास्तविक आय को छुपाना एवं अन्य गंभीर आरोप प्राप्त होते रहे। प्राप्त आरोपा पालन न करना, मठ की वास्तविक आय को छुपाना एवं अन्य गंभीर आरोप प्राप्त होते रहे। प्राप्त आरोपा जांच करने का अनुरोध 14/11/13 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, डेहरी-ऑन-सोन से जांच करने का अनुरोध पर्षदीय पत्रांक-1437, दिनांक 14/11/13 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, डेहरी-ऑन-सोन से किया गया। जिसके अनुपालन में अनुमंडल पदाधिकारी, डेह री-ऑन-सोन, रोहतास का पत्रांक-995/गो0, दिनांक किया गया। जिसके अनुपालन में अनुमंडल पदाधिकारी, डेहरी-ऑन-सोन, रोहतास का पत्रांक-995/गो0, दिनांक 09/08/14 द्वारा सूचित किया गया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी, तिलौथु द्वारा इस न्यास की जांच करायी गयी है, 09/08/14 द्वारा सूचित किया गया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी, तिलौथु द्वारा इस न्यास की जांच करायी गयी है, 09/08/14 द्वारा सूचित किया गया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी, तिलौथु द्वारा इस न्यास की जांच करायी गयी है, एकड़ जमीन तिलौथु स्टेट के मालिक द्वारा दान में दिया गया है। शेष जमीन जिसमें लिखा गया कि न्यास को पांच एकड़ जमीन तिलौथु स्टेट के मालिक द्वारा दान में दिया गया है। शेष जमीन जिसमें लिखा गया कि न्यास को पांच चंदे द्वारा क्रय किया गया है। न्यास का खर्चा दान द्वारा प्राप्त आय से होता है। जांच प्रतिवेदन में यह भी लिखा गया चंदे द्वारा क्रय किया गया है। न्यास का खर्चा दान द्वारा प्राप्त आय से होता है। जांच प्रतिवेदन में यह भी लिखा गया चंदे द्वारा क्रय किया गया है। न्यास का खर्चा दान द्वारा प्राप्त आय से होता है। जांच प्रतिवेदन में यह भी लिखा गया कि आय-व्यय का कोई लेखा-जोखा लिखित रूप में नहीं है। कि आय-व्यय का कोई लेखा-जोखा लिखित रूप में नहीं है।

ें महिलाओं का प्रवेष वर्जित था। लेकिन वर्त्तमान में दो महिला कुटिया में रहती हैं। प्रखंड पूर्व में इस कुटिया में महिलाओं का प्रवेष वर्जित था। लेकिन वर्त्तमान में दो महिला कुटिया में रहती हैं। प्रखंड ें महिलाओं का प्रवेष वर्जित था। लेकिन वर्त्तमान में दो महिला कुटिया में रहती हैं। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में इसे धार्मिक आश्रम बताया है एवं सार्वजनिक न्यास हेतु आवष्यक नियम के विकास पदाधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में इसे धार्मिक आश्रम बताया है एवं सार्वजनिक न्यास हेतु आवष्यक नियम के विकास पदाधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में इसे धार्मिक आश्रम बताया है एवं सार्वजनिक न्यास हेतु आवष्यक नियम के 14/01/15 के माध्यम से अन्तर्गत कार्रवाई करने की अनुषंसा की थी। इसके उपरांत पर्षदीय पत्रांक-1361, दिनांक 14/01/15 के माध्यम से अन्तर्गत कार्रवाई करने की अनुषंसा की थी। इस पुनः श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी से स्पष्टीकरण मांग की गयी। पुनः पर्षदीय पत्रांक-949, दिनांक पुनः श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी से स्पष्टीकरण मांग की गयी। पुनः पर्षदीय पत्रांक-949, दिनांक 20/06/15 द्वारा श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी को सूचित किया गया कि इस मठ के सुचारू संचालन हेतु 20/06/15 द्वारा श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी को सूचित किया गया कि इस मठ के सुचारू संचालन हेतु 20/06/15 द्वारा श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी को सूचित किया गया कि इस मठ के सुचारू संचालन हेतु दि आपको कुछ कहना है तो पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के अन्दर सूचित करें, न्यास समिति का गठन प्रस्तावित है। यदि आपको कुछ कहना है तो पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के अन्दर सूचित करें, न्यास समिति का गठन प्रस्तावित है। य2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 8 अ तूबर 2015 अन्यथा न्यास समिति का गठन कर दिया जायेगा। श्री सदा कुमार दास उर्फ सुदामा जी का प्रतिवेदन अप्राप्त रहा। इस न्यास से संबंधित श्री पयहारी जी महाराज के षिष्यगणों जो सभी पंचदेवधारी हैं तथा श्री रंगराज सम्प्रदाय की परम्पराओं का अनुपालन करते हैं, के संतों की ओर से न्यास समिति गठन हेतु ग्यारह संतों एवं अनुयायियों का नाम प्रस्तावित किया गया।

अतः उपरोक्त तथ्यों के आलोक में इस न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार राज्य धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा-32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण आवष्यक प्रतीत होता है।

अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उप विधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''आनन्द कआनन्द कआनन्द कआनन्द कुटी धाम, ुटी धाम, ुटी धाम, ुटी धाम, ग्रामपो0- तिलौथुग्रामपो0- तिलौथुग्रामपो0- तिलौथुग्रामपो0- तिलौथु, रोहतासरोहतासरोहतासरोहतास'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है ।

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1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''आनन्द कुटी धाम न्यास योजना, आनन्द कुटी धाम न्यास योजना, आनन्द कुटी धाम न्यास योजना, आनन्द कुटी धाम न्यास योजना, ग्रामपो0-तिलौथु, रोहतास'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''आनन्द आनन्द आनन्द आनन्द कुटी धाम न्यास समिति, कुटी धाम न्यास समिति, कुटी धाम न्यास समिति, कुटी धाम न्यास समिति, ग्रामपो0-तिलौथु, रोहतास'' होगा, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की संपत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम से किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।

4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 5. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालने करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी।

6. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहुत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद को प्रेषित की जायेगी।

7. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के अनुमोदन के लिए भेजेगी।

8. न्यास समिति न्यास की अतिक्रमित/हस्तांरित भूमि ''यदि कोई हो तो'', उसकी वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।

9. इस योजना में परिवर्त्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाये जायेगें या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।

11. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों को न्यास समिति का गठन किया जाता हैः- (1) श्री जीवन दास - अध्यक्ष गुरू हनुमान देव स्वामी, श्री पयहारी जी सेवाश्रम, अंचल- संदेष, आरा।

(2) श्री संतोष दास - सचिव गुरू हनुमान देव स्वामी, बड़प्पन कुटी धाम, बड़का गांव, तरारी, भोजपुर।

(3) श्री कुमार रविन्द्र सिंह - कोषाध्यक्ष पिता- स्व0 राधा प्रसाद सिंह, गर्दनीबाग, रोड नं0- 6 डी0, चटर्जी लेन, साधनापुरी, पटना 1

(4) श्री नागेन्द्र दास - सदस्य गुरू हनुमान देव स्वामी, विराटपुर कुटी धाम, धर्मपुर, अंधारी, सहार, भोजपुर।

(5) श्री उपेन्द्र दास - सदस्य गुरू मनीराम दास, रमायणी कुटी, रानी बाजार, गोण्डा, उत्तरप्रदेष।

(6) श्री रामनाथ दास - सदस्य गुरू हनुमान देव स्वामी, पता- अहारदाता कुटी धाम, अहीयापुर, अरवल।

(7) श्री सर्वेष्वर दास - सदस्य गुरू हनुमान देव स्वामी, परमार्थ कुटी धाम, तेलाड़ी, चेनारी, रोहतास।

(8) श्री गुप्तेष्वर दास - सदस्य गुरू हनुमान देव स्वामी, सत्यम कुटी धाम, सवार, कर्मचट, कैमुर।3 %बहार गजट (असाधारण), 8 अ तूबर 2015 (9) श्री कृष्णा दास - सदस्य पिता- स्व0 रामलखन पासवान, गांव- भरकुरिया, पो0- मिर्जापूर, थाना- माली, नवीनगर, औरंगाबाद। (10) श्रीराम दास - सदस्य गुरू हनुमान देव स्वामी, हनुमान मंदिर, हठीपुरा, बरोदरा, गुजरात। (11) श्री संजय सिंह - सदस्य पिता- स्व0 गंगा प्रसाद सिंह, हरिहर गंज, नासरिगंज, रोहतास।''

12. इस न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले 05 वर्ष तक लागू रहेगी, लेकिन एक वर्ष के बाद न्यास समिति के कार्यों की समीक्षा की जायेगी और कार्य संतोषप्रद पाये जाने पर आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकेगा एवं कार्य असंतोषप्रद पाये जाने पर न्यास समिति भंग की जा सकती है।

आदेश से, किषोर कुणाल,किषोर कुणाल,किषोर कुणाल,किषोर कुणाल, अध्यक्ष।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 08 October 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-10-08.1192/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-10-08.1192.