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1;बपकरू23द्ध 1;बपकरू24द्ध3;बपकरू26द्ध ;बपकरू27द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू28द्ध
;बपकरू14द्ध;बपकरू15द्ध ;बपकरू4द्ध 12;बपकरू15द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू4द्ध
;बपकरू4द्ध;बपकरू29द्ध ;बपकरू30द्ध ख् िं2;बपकरू15द्ध15
बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद
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अधिसूचना
3 सितम्बर 2015
सं॰ 1760—सिवान जिलान्तर्गत ग्राम-मेहन्दार, पो0-रामगढ़ चैनपुर, थाना-सिसवन स्थित श्री महेन्द्रनाथ षिव सिवान जिलान्तर्गत ग्राम-मेहन्दार, पो0-रामगढ़ चैनपुर, थाना-सिसवन स्थित श्री महेन्द्रनाथ षिव सिवान जिलान्तर्गत ग्राम-मेहन्दार, पो0-रामगढ़ चैनपुर, थाना-सिसवन स्थित श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर (मेहदार मठ) पर्षद के अन्तर्गत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-09 है। मंदिर (मेहदार मठ) पर्षद के अन्तर्गत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-09 है। मंदिर (मेहदार मठ) पर्षद के अन्तर्गत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-09 है। इस न्यास के सुव्यवस्था, संचालन एवं सम्यक विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-891 दिनांक इस न्यास के सुव्यवस्था, संचालन एवं सम्यक
द कुमार, पुलिस उप-महानिरीक्षक सारण प्रमंडल को न्यास समिति की 14 द्वारा अध्यक्ष के रिक्त पद पर श्री बिनोद कुमार, पुलिस उप-महानिरीक्षक सारण प्रमंडल को न्यास समिति की
दीय अधिसूचना ज्ञापांक-891 दिनांक 31.08.2010 द्वारा एक न्यास समिति का गठन 05 वर्षो के लिए किया गया था। इसका कार्यकाल पूरा हो गया है। इस मठ के महंत द्वारा एक न्यास समिति का गठन 05 वर्षो के लिए किया गया था। इसका कार्यकाल पूरा हो गया है। इस मठ के महंत द्वारा एक न्यास समिति का गठन 05 वर्षो के लिए किया गया था। इसका कार्यकाल पूरा हो गया है। इस मठ के महंत 2013 को हो गया। इनके निधन के पश्चात् े अध्यक्ष थे, का देहावसान दिनांक 25.08.2013 को हो गया। इनके निध देव शंकर गिरी, जो न्यास समिति के अध्यक्ष थे, का देहावसान दिनांक 13 द्वारा श्री कमलाकान्त, अपर समाहर्त्ता, द पर पर्षदीय ज्ञापांक-1074 दिनांक 07.09.13 द्वारा श्री कमलाकान्त, अपर समाहर्त्ता, न्यास समिति के अध्यक्ष के रिक्त पद पर पर्षदीय ज्ञापांक-1074 दिनांक र्षदीय आदेष ज्ञापांक-728 दिनांक विभागीय जाँच सिवान को मनोनित किया गया। इनकी सेवा निवृति के बाद पर्षदीय आदेष ज्ञापांक-728 दिनांक विभागीय जाँच सिवान को मनोनित किया गया। इनकी सेवा निवृति के बाद प 28.08.14 द्वारा अध्यक्ष के रिक्त पद पर श्री बिनो अवषिष्ट अवधि के लिए अध्यक्ष मनोनित किया गया था। अवषिष्ट अवधि के लिए अध्यक्ष मनोनित किया गया था।
यह मंदिर बिहार राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर अत्यन्त रमणीय है, जहाँ प्रतिवर्ष यह मंदिर बिहार राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर अत्यन्त रमणीय है, जहाँ प्रतिवर्ष यह मंदिर बिहार राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर अत्यन्त रमणीय है, जहाँ प्रतिवर्ष हजारों प्रवासी पक्षियां भ्रमण के लिए आती है। इ तिहासकारों के अनुसार इस धार्मिक स्थल का निर्माण नेपाल नरेष राजा हजारों प्रवासी पक्षियां भ्रमण के लिए आती है। इतिहासकारों के अनुसार इस धार्मिक स्थल का निर्माण नेपाल नरेष राजा महेन्द्र द्वारा किया गया था। इसलिए इस पौराणिक स्थल का नाम महेन्द्रनाथ धाम रखा गया। यहां भगवान शंकर का महेन्द्र द्वारा किया गया था। इसलिए इस पौराणिक स्थल का नाम महेन्द्रनाथ धाम रखा गया। यहां भगवान शंकर का महेन्द्र द्वारा किया गया था। इसलिए इस पौराणिक स्थल का नाम महेन्द्रनाथ धाम रखा गया। यहां भगवान शंकर का ज्योतिर्लिंग है। इस षिवलिंग का स्थान भगवान शंकर के बारह ज्योर्ति षिवलिंगों में से ए क है। इस न्यास की भूमि पर ज्योतिर्लिंग है। इस षिवलिंग का स्थान भगवान शंकर के बारह ज्योर्ति षिवलिंगों में से एक है। इस न्यास की भूमि पर प्रति वर्ष महाषिवरात्री का विषाल मेला लगता आयोजित होता है, जिसमें लाखों षिव भक्त एकत्रित होते है, एवं भगवान प्रति वर्ष महाषिवरात्री का विषाल मेला लगता आयोजित होता है, जिसमें लाखों षिव भक्त एकत्रित होते है, एवं भगवान प्रति वर्ष महाषिवरात्री का विषाल मेला लगता आयोजित होता है, जिसमें लाखों षिव भक्त एकत्रित होते है, एवं भगवान षिव के षिवलिंग को दूध से अध्र्य प्रदान करते है। यहां प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इक्ट्ठी षिव के षिवलिंग को दूध से अध्र्य प्रदान करते है। यहां प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इक्ट्ठी षिव के षिवलिंग को दूध से अध्र्य प्रदान करते है। यहां प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इक्ट्ठी होती है एवं उनके द्वारा चढ़ावा चढ़ाया जाता है। होती है एवं उनके द्वारा चढ़ावा चढ़ाया जाता है।
मठ के पूर्व न्यासधारी महंत देव शंकर गिरी वयोवृ़़द्ध सन्यासी थे। इस मठ की आय का बन्दरबॉट हो रहा था मठ के पूर्व न्यासधारी महंत देव शंकर गिरी वयोवृ़़द्ध सन्यासी थे। इस मठ की आय का बन्दरबॉट हो रहा था मठ के पूर्व न्यासधारी महंत देव शंकर गिरी वयोवृ़़द्ध सन्यासी थे। इस मठ की आय का बन्दरबॉट हो रहा था 10 द्वारा उनके सहायतार्थ एक न्यास समिति का गठन किया इसलिए पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-891 दिनांक दीय अधिसूचना ज्ञापांक-891 दिनांक 31.08.10 द्वारा उनके सहायतार्थ एक न्यास समिति का गठन किया मान में श्री स्वामी राजागिरी को, जो श्री पंच दषनामी जूना अखाड़ा, वाराणसी के सन्यासी है, पर्षदीय मान में श्री स्वामी राजागिरी को, जो श्री पंच दषनामी जूना अखाड़ा, वाराणसी के सन्यासी है, पष् गया था। वर्त्तमान में श्री स्वामी राजागिरी को, जो श्री पंच दषनामी जूना अखाड़ा, वाराणसी के सन्यासी है, पष् आदेष ज्ञापांक-1071 दिनांक 07 लयों में लम्बित है। अतः न्यास के समुचित प्रबंधन, सम्पत्तियों की अभी भी इस मठ से संबंधित अनेक वाद विभिन्न न्यायालयों में लम्बित है। अतः न्यास के समुचित प्रबंधन, सम्पत्तियों की अभी भी इस मठ से संबंधित अनेक वाद विभिन्न न्याया सुरक्षा, संरक्षण तथा सम्यक विकास हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक है। सुरक्षा, संरक्षण तथा सम्यक विकास हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक है।2 ;बपकरू4द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद् को प्रदत्त अधिकार जो उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए सिवान जिलान्तर्गत ग्राम-मेहन्दार, पो0-रामगढ़ चैनपुर, थाना-सिसवन स्थित श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजनायोजनायोजनायोजना
''श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर, मेहन्दार 1.... अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर, मेहन्दार ''श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर, मेहन्दार ''श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर, मेहन्दार न्यास योजनान्यास योजनान्यास योजनान्यास योजना होगा''होगा''होगा''होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री महेन्द्रनाथ षिव ''श्री महेन्द्रनाथ षिव ''श्री महेन्द्रनाथ षिव ''श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर,मंदिर,मंदिर,मंदिर, न्यास समिति'' न्यास समिति'' न्यास समिति'' न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी।
5. न्यास समिति इस मंदिर तथा इसके अन्दर स्थापित अन्य मंदिरों के पुनर्निमाण कराने एवं इस मंदिर को स्वच्छ रखने, यात्रियों को बेहतर सेवा मुहैया करने का कार्य करेगी तथा मंदिर में पूजा-पाठ, रीति-रिवाज के अनुरूप सुनिष्चित कराने के लिए पूर्णतः जिम्मेवार होगी।
6. श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर में जलापूर्ति, बिजली आदि के व्यवस्था न्यास समिति सुनिष्चित करेगी तथा इस बात का ध्यान रखेगी कि श्रद्धालू भक्तजन के साथ किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं हो। मंदिर परिसर में मांस-मदिरा का सेवन करना वर्जित होगा।
7. न्यास के किसी भी भू-खंड या मंदिर परिसर में किसी तरह का अतिक्रमण है, तो उस अतिक्रमण से भू-खंड/मंदिर परिसर को मुक्त कराने के लिए यथोचित वैधानिक कार्रवाई न्यास समिति न्यास हित में करेगी। 8. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्य वृत आदि सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी।
9.... अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
10. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
11. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
12. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
13. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
14. न्यास समिति न्यास के सर्वांगीण विकास के लिए सतत् प्रयत्नषील रहेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :-
1. महंत स्वामी राजा गिरि, श्री महेन्द्रनाथ षिव मंदिर, ग्राम-मेहन्दार, जिला-सिवान - अध्यक्ष 2. कर्नल नरेन्द्र देव नारायण सिंह, से0 नि0, ग्राम-चैनपुर, थाना-सिसवन - सचिव 3. श्री जितेन्द्र भारती, ग्राम-भदउर मठिया, पो0-चैनपुर, थाना-सिसवन - सदस्य 4. श्री चंदन प्रताप सिंह, ग्राम-पिपरा, पो0-मुहम्मदपुर, थाना-सिसवन - सदस्य 5. श्री अरूण कुमार सिन्हा (अधिवक्ता) महानागर, जिला-सिवान - सदस्य 6. श्री कमलदेव नारायण शर्मा, ग्राम-रामगढ़, जिला-सिवान - सदस्य 7. श्री अरूण कुमार साह, ग्राम-पिपरा, पो0-मुहम्मदपुर, थाना-सिसवन - सदस्य 8. श्री ध्रुव जी उपाध्याय, - सदस्य 9. श्री ब्रज किषोर यादव, ग्राम-गुदरीहाता, पो0-कचनार, थाना-सिसवन - सदस्य3 10. श्री कन्हैया सिंह, ग्राम-महानगर, जिला-सिवान - सदस्य 11. डाँ0 कैप्टेन षिवनाथ बैठा, ग्राम-छितौली, पो0-चैनपुर, थाना-सिसवन - सदस्य इस न्यास समिति का कार्यकाल पॉच वर्षो का होगा। न्यास समिति अधिनियम की घारा-32 के तहत निरूपित उक्त योजना के क्रियान्वयन एवं संचालन के प्रति जिम्मेवारी होगी। यह आदेष तत्काल प्रभावी होगा।
आदेश से, किषोर कुणाल,किषोर कुणाल,किषोर कुणाल,किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
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ख्;बपकरू17द्धँ;बपकरू16द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू27द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू16द्ध
;बपकरू4द्ध;बपकरू16द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू31द्ध;बपकरू4द्ध मरु ;बपकरू27द्धघ् ;बपकरू4द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू15द्ध 1200ः5श्1़10ः;बपकरू17द्ध़ए़;बपकरू17द्ध़घ् Website: http://egazette.bih.nic.in