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सं0 11/आ04-जा0जा0प्र0-01/2003-का0—3887
सं0
कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग
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संकल्प
8 नवम्बर 2007
माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील सं0-5854/94 कुमारी माधुरी पाटिल एवं अन्य विषय ः-माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील सं0-5854/94 कुमारी माधुरी पाटिल एवं अन्य माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील सं0-5854/94 कुमारी माधुरी पाटिल एवं अन्य बनाम अपर आयुक्त, जनजाति (आदिवासी) विकास एवं अन्य में पारित न्याय निर्णय के आलोक में बनाम अपर आयुक्त, जनजाति (आदिवासी) विकास एवं अन्य में पारित न्याय निर्णय के आलोक में बनाम अपर आयुक्त, जनजाति (आदिवासी) विकास एवं अन्य में पारित न्याय निर्णय के आलोक में
अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु निदेशालय के गठन के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु निदेशालय के गठन के अनुसूचित जाति एवं
संबंध में।
निदेशानुसार उपर्युक्त बिषय के संबंध में कहना है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील निदेशानुसार उपर्युक्त बिषय के संबंध में कहना है कि माननीय उच् चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील 5854/94-(एराइजिंग आऊट ऑफ एस0एल0पी0) (सी)-14467/93 कुमारी माधुरी पाटिल एवं अन्य बनाम अपर 5854/94-(एराइजिंग आऊट ऑफ एस0एल0पी0) (सी)-14467/93 कुमारी माधुरी पाटिल एवं अन्य बनाम सं0 5854/94-(एराइजिंग आऊट ऑफ एस0एल0पी0) (सी)-14467/93 कुमारी माधुरी पाटिल एवं अन्य बनाम आयुक्त, जनजाति (आदिवासी) विकास एवं अन्य में सरकारी सेवाओं में नियुक्त अथवा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों (यथा आयुक्त, जनजाति (आदिवासी) विकास एवं अन्य में सरकारी सेवाओं में नियुक्त अथवा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों (यथा आयुक्त, जनजाति (आदिवासी) विकास एवं अन्य में सरकारी सेवाओं में नियुक्त अथवा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों (यथा तकनीकी, गैर तकनीकी, सामान्य व्यावसायिक आदि) में नामांकन आदि के क्रम में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तकनीकी, गैर तकनीकी, सामान्य व्यावसायिक आदि) में नामांकन आदि के क्रम में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तकनीकी, गैर तकनीकी, सामान्य व्यावसायिक आदि) में नामांकन आदि के क्रम में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु एक निदेशालय के गठन का निदेश दिया गया है। के जाति प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु एक नि
अतः राज्य सरकार ने भलि-भाँति विचार करने के उपरांत यह निर्णय लिया गया है कि माननीय उच्चतम 2. अतः राज्य सरकार ने भलि-भाँति विचार करने के उपरांत यह निर्णय लिया गया है कि माननीय उच्चतम अतः राज्य सरकार ने भलि-भाँति विचार करने के उपरांत यह निर्णय लिया गया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित उक्त न्याय निर्णय के आलोक में आरक्षण आयुक्त सह-प्रशासनिक सुधार आयुक्त/प्रभारी सचिव, न्यायालय द्वारा पारित उक्त न्याय निर्णय के आलोक में आरक्षण आयुक्त सह-प्रशासनिक सुधार आयुक्त/प्रभारी सचिव, न्यायालय द्वारा पारित उक्त न्याय निर्णय के आलोक में आरक्षण आयुक्त सह-प्रशासनिक सुधार आयुक्त/प्रभारी सचिव, सुधार विभाग के नियंत्रणाधीन राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के जाति कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के नियंत्रणाधीन राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के जाति सुधार विभाग के नियंत्रणाधीन राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु एक निदेशालय का गठन किया जाय, जिसका स्वरूप निम्नवत होगा :- प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु एक निदेशालय का गठन किया जाय, जिसका स्वरूप निम्नवत होगा :- प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु एक निदेशालय का गठन किया जाय, जिसका स्वरूप निम्नवत होगा :-
ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 19 अ(cid:28)तूबर 20152 (i) सामान्य समिति
(ii) निगरानी समिति
(i) सामान्य समिति का गठन निम्नांकित रूप से किया जाता हैः-
| (क) आरक्षण आयुक्त सह-प्रशासनिक सुधार आयुक्त/प्रभारी सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग | - अध्यक्ष | |
| (ख) | निदेशक/संयुक्त सचिव, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग। | - सदस्य |
| (ग) अनुसूचित जाति/जनजाति का एक अवर सचिव/उप-सचिव, जिसे संबंधित जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन, जनजातीय समुदाय के सामाजिक स्थिति आदि की विशेष जानकारी हो, जो आरक्षण आयुक्त सह-प्रशासनिक सुधार आयुक्त/प्रभारी, सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा मनोनित होगा। | - सदस्य |
पदाधिकारी/कर्मचारी से कार्य लिया जा सकेगा।
एतद संबंधी सभी प्रकार के पत्राचार आदि संबंधी कार्य आरक्षण प्रभारी, अवर सचिव/उप सचिव द्वारा आरक्षण आयुक्त-सह-प्रशासनिक सुधार आयुक्त/प्रभारी सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के निदेशानुसार निष्पादित किये जायेंगे।
(ii) निगरानी कोषांग का गठन निम्नांकित रूप से किया जाता हैः-
राज्याधीन जाली जाति प्रमाण पत्र संबंधी जाँच आदि कार्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अल्पसंख्यक) कोषांग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना द्वारा निष्पादित किया जाता है। अतः निगरानी कोषांग का कार्य अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग), अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा निष्पादित किया जायेगा। 3. सामान्य समिति द्वारा कार्य निष्पादन की प्रक्रियाः-
जाली जाति प्रमाण पत्र संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर आरक्षण आयुक्त सह-प्रशासनिक सुधार आयुक्त/प्रभारी सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा इसकी जाँच अनुसूचित जाति/जनजाति (अल्पसंख्यक) कोषांग, अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा करायी जायेगी।
अपराध अनुसंधान विभाग से प्राप्त रिपोर्ट पर सामान्य समिति द्वारा निम्न प्रक्रिया अपनाते हुए अपेक्षित कार्रवाई की जायेगीः-
(क) सामान्य समिति, यदि सतर्कता अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर यह पाती है कि आवेदक का सामाजिक स्तर का क्लेम सही नहीं है या संदेहास्पद है या गलत रूप से क्लेम प्रस्तुत कर रहे हैं तब समिति ऐसे आवेदक को सतर्कता अधिकारी की रिपोर्ट की प्रति के साथ पंजीकृत डाक से रसीद सहित, कारण बताओं सूचना पत्र, शैक्षणिक संस्था या कार्यालय प्रमुख के माध्यम से भेजेंगे। कारण बताओं सूचना पत्र में इस बात का उल्लेख होगा कि आवेदक अपना अभ्यावेदन या उत्तर कारण बताओं सूचना पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर आरक्षण प्रभारी, अवर सचिव/उप सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग को प्रस्तुत करें और किसी भी परिस्थिति में अभ्यावेदन अथवा उत्तर प्रस्तुत करने के लिए 30 दिन से अधिक का समय नहीं दिया जायेगा। यदि आवेदक (प्रमाण पत्र धारक) उसे सुनने का और वाद प्रस्तुत करने का अवसर चाहता है, तो ऐसा आवेदन या उत्तर प्राप्त होने के पश्चात समिति की बैठक आरक्षण प्रभारी अवर सचिव/उप सचिव बुलायेगें और आरक्षण आयुक्त-सह-प्रशासनिक सुधार आयुक्त/प्रभारी सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ऐसी समिति के अध्यक्ष के रूप में आवेदक को सुनवाई एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूर्ण3 "बहार गजट (असाधारण), 19 अ(cid:28)तूबर 2015 अवसर देंगे। आवेदक को ऐसा अवसर देने के बाद भी आवेदक को उसके अभिभावक के माध्यम से या अन्य अवसर देने के आद समिति ऐसी जाँच कर सकेगी, जिससे आवेदक के क्लेम और अन्य आपत्तियों पर विचार करने पर शीघ्र निर्णय लेने के लिए यदि आवश्यक हो तो उभय पक्षों को सुनकर समिति एक उचित निर्णय लेगी।
(ख) ऐसे प्रकरणों जहाँ सतर्कता अधिकारी की रिपोर्ट (प्रमाण पत्र धारक) के पक्ष में हो तो समिति को किसी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होगी।
(ग) समिति द्वारा जाँच दिन प्रतिदिन के आधार पर की जायेगी और किसी भी स्थिति में इसे पूर्ण करने के लिए 2 माह से ज्यादा समय नहीं लेगी। यदि जाँच समिति यह पाती है कि आवेदक (प्रमाण पत्र धारक) का क्लेम झूठा या असत्य है तो समिति ऐसी जाति प्रमाण-पत्र को निरस्त करते हुए एक उचित आदेश पारित करेगी।
समिति यह भी निर्णय ले सकेगी कि जो व्यक्ति अनुसूचित जाति/जनजाति के गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर लाभ प्राप्त किये हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं, वैसे लाभार्थी के विरूद्ध अपराधिक मुकदमा दर्ज करा कर दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी। प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले पदाधिकारी/कर्मचारी यदि जालसाजी में संलिप्त पाए जाते हैं तो उनके विरूद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकेगी।
4. निगरानी कोषांग द्वारा कार्य निष्पादन की प्रक्रियाः-
निगरानी कोषांग द्वारा किसी व्यक्ति विशेष के विरूद्ध प्राप्त शिकायत की जाँच के क्रम में उसके पैतृक निवास/रिश्ते-नातेदार/स्कूल कॉलेज में उपलब्ध अभिलेख/भू-राजस्व संबंधी अभिलेख/समाज के गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त प्रतिवेदन जो साक्ष्य के लिए आवश्यक हो, के आधार पर कार्रवाई की जायेगी। निगरानी कोषांग द्वारा जाँच प्रतिवेदन के एक माह के अन्दर सामान्य समिति को निश्चित रूप से सौंपा जायेगा।
5. नियुक्ति पदाधिकारी द्वारा सामान्य परिस्थितियों में नियुक्ति के क्रम में आवेदक के जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले संबंधित जिला पदाधिकारी द्वारा ही कराया जायेगा।
6. यह आदेश तात्कालिक प्रभाव से लागू होगा।
एतद् संबंधी पूर्व निर्गत आदेश/संकल्प आदि के असंगत अंश संशोधित समझे जायेेंगे।
आदेशः- अतः यह आदेश है कि सर्व साधारण की जानकारी के लिए इसे राजकीय गजट के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय और इसकी प्रति महालेखाकार, बिहार, पटना/बिहार लोक सेवा आयोग/बिहार कर्मचारी चयन आयोग/पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग/अति पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग/सभी विभागाध्यक्ष/सभी प्रमण्डलीय आयुक्त/सभी जिला पदाधिकारी/मुख्य मंत्री सचिवालय/बिहार विधान सभा/बिहार विधान परिषद को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
सरयुग प्रसाद,
सरकार के उप-सचिव।
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