(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:18)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 4 क(cid:4)०तZक 1(cid:26)3(cid:27) (cid:28)श(cid:15)(cid:29)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 1234) पटन(cid:4)
पटन(cid:4)(cid:30) स(cid:31)मव(cid:4)र, 2" [Çत३बर 2(cid:15)15
सं0 कारा/नि0को0-1-0-113/06—6348
कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग -------- संकल्प 14 अक्तूबर 2015
श्री पे्रम कुमार, काराधीक्षक, (सम्प्रति निलंबित) को उनके मंडल कारा, सीतामढ़ी में पदस्थापन के दौरान श्री पे्रम कुमार, काराधीक्षक, (सम्प्रति निलंबित) को उनके मंडल कारा, सीतामढ़ी में पदस्थापन के दौरान श्री पे्रम कुमार, काराधीक्षक, (सम्प्रति निलंबित) को उनके मंडल कारा, सीतामढ़ी में पदस्थापन के दौरान आपूरक श्री रामलखन यादव से 1,00,000/- (एक लाख रूपये) घूस लेते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के द्वारा दिनांक आपूरक श्री रामलखन यादव से 1,00,000/- (एक लाख रूपये) घूस लेते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो आपूरक श्री रामलखन यादव से 1,00,000/- (एक लाख रूपये) घूस लेते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो 06.11.2006 को रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। तत्पश्चात् उनके विरूद्ध निगरानी थाना 2006 को रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। तत्पश्चात् उनके विरूद्ध निगरानी थाना 2006 को रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। तत्पश्चात् उनके विरूद्ध निगरानी थाना काण्ड संख्या-73/06 दिनांक 07.11.2006 धारा-7/13 (2) सहपठित धारा-13 (1) (डी0) भ्रष्टाचार निरोध 2006 धारा-7/13 (2) सहपठित धारा-13 (1) (डी0) भ्रष्टाचार निरोध काण्ड संख्या-73/06 दिनांक 07 लिए श्री कुमार को गिरफ्तार होने की तिथि 06.11.2006 के अधिनियम-1988 दर्ज किया गया था। उक्त घटना के लिए श्री कुमार को गिरफ्तार होने की तिथि 06 अधिनियम-1988 दर्ज किया गया था। उक्त घटना के प्रभाव से गृह (विशेष) विभाग की अधिसूचना ज्ञापांक-15799 दिनांक
ी अधिसूचना ज्ञापांक-15799 दिनांक 20.11.2006 के द्वारा निलंबित किया गया था।
2006 के द्वारा निलंबित किया गया था। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26 अ(cid:24)तूबर 2015 विरूद्ध पूर्व से चल रहे विभागीय कार्यवाही के निष्पादन होने तक इन्हें पुनः विभागीय संकल्प ज्ञापांक 672 दिनांक 05. 02.2014 के द्वारा निलंबित किया गया।
5. संचालन पदाधिकारी प्रधान सचिव-सह-अपर विभागीय जांच आयुक्त, गन्ना उद्योग विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 34 दिनांक 30.06.2014 के द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप को प्रमाणित पाया गया। फलस्वरूप विभागीय पत्रांक 6251 दिनांक 04.12.2014 के द्वारा जांच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की गई । श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में उल्लेख किया गया है कि आपूरक श्री रामलखन यादव द्वारा भुगतान हेतु समर्पित विपत्र पर घटना की तिथि से एक माह पूर्व अर्थात 06.10.2006 को ही हस्ताक्षर कर दिया गया था। यदि उनके द्वारा इसके लिए रिश्वत की मांग की जाती तो उक्त तिथि के पूर्व ही इसकी शिकायत कराई जाती, जो नहीं की गई। साथ ही निगरानी विभाग द्वारा जिन दो गवाहों को बाद में Post trap memorandum में उल्लेख किया गया है, वे complainant श्री यादव के रिश्तेदार है। इसके अतिरिक्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 (3) (ii) (ख) एवं 17 (4) के अनुसार आरोप पत्र के साथ उन दस्तावेजों एवं साक्ष्यों की सूची, जिनसे आरोप के मदों का सिद्ध होना प्रस्तावित हो, नहीं दी गई है।
6. श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर, उनके विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी का अधिगम एवं संचिका में उपलब्घ अन्य अभिलेखों की सम्यक् समीक्षा से स्पष्ट होता है कि :-
(i) आरोपित पदाधिकारी के द्वारा बचाव बयान हेतु जिन अभिलेखों की मांग की गई है उसे निगरानी विभाग द्वारा पुलिस पेपर के रूप में दिनांक 17.03.2009 को माननीय न्यायालय के माध्यम से उन्हें उपलब्ध करा दिया गया था। पुलिस पेपर के अतिरिक्त और कोई पेपर आरोपित पदाधिकारी को देय नहीं है।
(ii) संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा घूस में ली गई jkf'k को अपने हाथ से स्पर्श किया गया था क्योंकि इसके बाद ही उनके हाथ की अंगुलियों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में डुबोने पर घोल का रंग गुलाबी हो गया। साथ ही संचालन पदाधिकारी द्वारा गवाहों का और रिश्वत देने वाले आपूरक का बयान भी दर्ज किया गया है जिसमें उनके द्वारा रिश्वत दिये जाने की पुष्टि की गई है। इस प्रकार श्री कुमार के पत्रांक शून्य दिनांक 05.01.2015 के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में उनके द्वारा उन्हीं बातों/तथ्यों को अंकित किया गया है जिसका उल्लेख उन्होंने अपने बचाव बयान में संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखा था। संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन पूर्णतः सुनवाई एवं उसका विश्लेषण कर अभिलेखों, साक्ष्यों एवं तथ्यों पर आधारित है जबकि श्री कुमार द्वारा दिया गया द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर अपने ऊपर लगाये गये आरोपों से बचने की एक सोची-समझी रणनीति के अन्तर्गत बाद की सुविचारित (After thought) पर आधारित है और स्वीकार्य नहीं है।
7. उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के अधिगम एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री प्रेम कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी, सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के प्रावधानों के तहत '' सेवा से बर्खास्तगी '' का दंड निरूपित करने का विनिश्चय किया गया।
8. उपर्युक्त विनिश्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 1695 दिनांक 16.03.2015 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गई। इसके आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1291 दिनांक 11.08. 2015 द्वारा प्रस्तावित दंड से सहमति व्यक्त की गई है। प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों के सम्यक् विश्लेशणोपरांत श्री प्रेम कुमार, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी (सम्प्रति निलंबित) को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत् निम्न दंड अधिरोपित किया जाता हैः-
'' सेवा से बखार्स्तगी का दंड। ''