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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 02 December 2015

Published 02 December 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-12-02.1299
Languages
English, Hindi

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सं0 5 नि0गो0 वि0 (1) 08/2012-475 निगो0

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

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संकल्प

1 दिसम्बर 2015

डा0 सुबोध कुमार, तत्कालीन कनीय सहायक शोध पदाधिकारी, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, विषयः- डा0 सुबोध कुमार, तत्कालीन कनीय सहायक शोध पदाधिकारी, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, डा0 सुबोध कुमार, तत्कालीन कनीय सहायक शोध पदाधिकारी, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, पटना सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाघिकारी, दुल्लहपुर, वैशाली, हाजीपुर को सरकारी सेवा पटना सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाघिकारी, दुल्लहपुर, वैशाली, हाजीपुर को सरकारी सेवा पटना सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाघिकारी, दुल्लहपुर, वैशाली, हाजीपुर को सरकारी सेवा किये जाने की स्वीकृति के संबंध में। से बर्खास्त किये जाने की स्वीकृति के संबंध में।

1. बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित बिहार प्रशासनिक सेवा प्रथम सीमित प्रतियोगिता परीक्षा, 2003 में षडयंत्रा बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित बिहार प्रशासनिक सेवा प्रथम सीमित प्रतियोगिता परीक्षा, 2003 में षडयंत्रा बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित बिहार प्रशासनिक सेवा प्रथम सीमित प्रतियोगिता परीक्षा, 2003 में षडयंत्रा के तहत प्रक्रिया को दोषपूर्ण, दूषित, कदाचारपूर्ण, अनेक अनियमितता करने तथा जानबूझकर की गई षडयंत्रापूर्ण कार्य की प्राप्त के तहत प्रक्रिया को दोषपूर्ण, दूषित, कदाचारपूर्ण, अनेक अनियमितता करने तथा जानबूझकर की गई षडयंत्रापूर्ण कार्य की के तहत प्रक्रिया को दोषपूर्ण, दूषित, कदाचारपूर्ण, अनेक अनियमितता करने तथा जानबूझकर की गई षडयंत्रापूर्ण कार्य की शिकायत की जाँच दिनांक 07.12.2005 से 28 2005 तक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम के द्वारा की गयी। जाँच के क्रम में 2005 से 28.12.2005 तक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम के द्वारा की गयी। जाँच के क्रम में

2005 दर्ज किया गया तथा उक्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में निगरानी थाना कांड संख्या-19/2005 दिनांक 29.12.2005 दर्ज किया गया तथा उक्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में निगरानी

तों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के क्रम में ही साक्ष्यों के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग कांड के नौ प्राथमिकी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के क्रम में ही साक्ष्यों के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग तों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के क्रम में ही साक्ष्यों के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग सहित अन्य परीक्षाओं में दलाली की सूचना प्राप्त होने के कारण निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के द्वारा भेटनरी कैम्पस में दिनांक सहित अन्य परीक्षाओं में दलाली की सूचना प्राप्त होने के कारण निगरानी अन्वेषण ब्यूरो क े द्वारा भेटनरी कैम्पस में दिनांक 02.02.

ा0 सुबोध कुमार, तत्कालीन कनीय सहायक शोध पदा0, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन 2006 को छापामारी की गयी। छापामारी में डा0 सुबोध कुमार, तत्कालीन कनीय सहायक शोध पदा0, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन 2006 को छापामारी की गयी। छापामारी में ड

संस्थान, पटना सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, दुल्लहपुर, वैशाली, हाजीपुर, सेवा वर्ग-2 मूल स्तर, जन्म तिथि 05. संस्थान, पटना सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, दुल्लहपुर, वैशाली, हाजीपुर, सेवा वर्ग-2 मूल स्तर, जन्म संस्थान, पटना सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, दुल्लहपुर, वैशाली, हाजीपुर, सेवा वर्ग-2 मूल स्तर, जन्म 01.1971, नियुक्ति तिथि 23.08.1997, सेवा निवृति तिथि

वं वरीयता क्रमांक-2486 को गिरफ्तार किया गया तथा 1997, सेवा निवृति तिथि 31.01.2031 एवं वरीयता क्रमांक-2486 को गिरफ्तार किया गया तथा आवासीय गृह की तलाशी ली गयी। तलाशी के क्रम में विभिन्न परीक्षाओं में प्रयुक्त होनेवाले एडमिट कार्ड की छायाप्रति के अलावा आवासीय गृह की तलाशी ली गयी। तलाशी के क्रम में विभिन्न परीक्षाओं में प्रयुक्त होनेवाले एडमिट कार्ड की छायाप्रति के अलावा आवासीय गृह की तलाशी ली गयी। तलाशी के क्रम में विभिन्न परीक्षाओं में प्रयुक्त होनेवाले एडमिट कार्ड की छायाप्रति के अलावा चार लाख रूपये के दो चेक एवं अन्य आपत्तिजनक कागजात बरामद हुए। चार लाख रूपये के दो चेक एवं अन्य आपत्तिजनक कागजात बरामद हुए।

2. डा0 कुमार के संबंध में निगर ानी अन्वेषण ब्यूरो को सूचना थी कि डा0 कुमार विभिन्न परीक्षाओं में दलाल के रूप में डा0 कुमार के संबंध में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को सूचना थी कि डा0 कुमार विभिन्न परीक्षाओं में दलाल के रूप में अवैध कार्य किये हैं। इनका यह कृत्य दण्ड संहिता के अपराधों के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम, 1988 की विभिन्न अवैध कार्य किये हैं। इनका यह कृत्य दण्ड संहिता के अपराधों के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम, 1988 की विभिन्न अवैध कार्य किये हैं। इनका यह कृत्य दण्ड संहिता के अपराधों के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम, 1988 की विभिन्न 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 (cid:22)दस(cid:24)बर 2015 दाण्डिक धाराओं के अन्तर्गत अपराध है उक्त आलोक में निगरानी थाना कांड संख्या-19/2005 दिनांक 29.12.2005 मामले में डा0 कुमार अप्राथमिकी अभियुक्त हैं।

3. इसी तरह बिहार पशुपालन सेवा संवर्ग, सेवा वर्ग-2 मूल स्तर के चयन हेतु आयोजित साक्षात्कार में निगरानी थाना कांड संख्या-19/2005 के नामजद अभियुक्तों के सांठ-गांठ से बिचौलिया का काम करने तथा एक साजिश के तहत कई उम्मीदवारों को निजी लाभ संबंधी आरोप के लिए निगरानी थाना कांड संख्या-20/2006 दिनांक 17.04.2006 दर्ज किया गया। जाँच के क्रम में डा0 सुबोध कुमार के गृह तलाशी के क्रम में कई आपत्तिजनक दस्तावेज, विभिन्न व्यक्तियों के शैक्षणिक सर्टिफिकेट एवं बैंक के चेक भी मिले, जिस पर भारी रकम अंकित रहने तथा यह चेक कतिपय व्यक्तियों द्वारा दिया गया था। 4. निगरानी थाना कांड संख्या-19/2005 मामले के आलोक में डा0 सुबोध कुमार, कनीय सहायक शोध पदाधिकारी को निगरानी (अन्वेषण) ब्यूरो, बिहार, पटना के द्वारा दिनांक 02.02.2006 को हिरासत में लिया गया तथा न्यायिक हिरासत में भेज दिये जाने के कारण विभागीय आदेश-83 नि0गो0 दिनांक 10.03.2006 के द्वारा डा0 कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (2) के तहत कारावास की अवधि के लिए निलंबित किया गया एवं विधि विभागीय आदेश संख्या-3824 जे0 दिनांक 10.10.2006 के द्वारा डा0 कुमार के विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गयी। 5. कारावास अवधि से दिनांक 16.09.2006 को जमानत पर रिहा होने के पश्चात्‌ डा0 कुमार द्वारा दिनांक 18.09.2006 को कनीय सहायक शोध पदाधिकारी, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, पटना में योगदान समर्पित किया गया।

6. उक्त आलोक में विभागीय आदेश संख्या-17 नि0 गो0 दिनांक 16.01.2007 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (3) के तहत योगदान की तिथि 18.09.2006 से डा0 कुमार का निलंबन समाप्त समझते हुए उक्त तिथि से डा0 कुमार का योगदान स्वीकार किया गया परन्तु डा0 कुमार के विरूद्ध आपराधिक मामला जाँच/विचाराधीन रहने के फलस्वरूप लोकहित में विभागीय आदेश-354 नि0 गो0 दिनांक 27.10.2009 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) एवं (ग) के तहत डा0 कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय पत्राांक-11 नि0 गो0 दिनांक 06.01.2010 के द्वारा आरोप पत्रा (प्रपत्रा 'क') संलग्न करते हुए स्पष्टीकरण की माँग की गयी।

7. उक्त आलोक में डा0 कुमार द्वारा दिनांक-11.01.2010 को समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरान्त स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प-223 नि0 गो0 दिनांक 10.06.2010 के द्वारा डा0 कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

8. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्राांक-1011 दिनांक 06.08.2010 की समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा डा0 कुमार के विरूद्ध नये सिरे से विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया तदनुसार विभागीय संकल्प-237 नि0 गो0 दिनांक 08.06.2011 के द्वारा नये सिरे से विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी।

9. उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के पत्राांक-125 निदे0 को0, दिनांक 15.05.2012 के द्वारा की गयी। उक्त अनुशंसा के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा डा0 कुमार को निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया तदनुसार विभागीय आदेश-192 नि0 गो0 दिनांक 29.06.2012 के द्वारा तत्काल प्रभाव से डा0 कुमार को निलंबन से मुक्त किया गया।

10. उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन दिनांक 11.03.2014 में डा0 कुमार के विरूद्ध लगाए गए आरोपों को प्रमाणित पाया गया।

11. उक्त आलोक में विभागीय पत्राांक-198 नि0गो0 दिनांक 31.03.2014 के द्वारा डा0 कुमार से द्वितीय लिखित अभिकथन की अपेक्षा की गयी। उक्त आलोक में डा0 कुमार द्वारा द्वितीय लिखित अभिकथन दिनांक 10.04.2014 को समर्पित किया गया।

12. डा0 कुमार से प्राप्त द्वितीय लिखित अभिकथन की समीक्षा की गयी। उन्होंने अपने द्वितीय लिखित अभिकथन में उल्लेख किया कि पुनः विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करना प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध है। डा0 कुमार के द्वारा यह भी अंकित किया गया कि उनके आवास से बरामद दो लाख का चेक दिनांक 15.06.2005 की तिथि के थे, जिसे दिनांक 01.02.2006 को बरामद 3

(cid:28)बहार गजट (असाधारण), 2 (cid:22)दस(cid:24)बर 2015

किया गया था, वह भुनाने योग्य नहीं था तथा उससे नगद भुगतान नहीं प्राप्त किया जा सकता था। आवास से बरामद प्रवेश पत्राों के संबंध में डा0 कुमार ने अंकित किया कि क्वा0 नं0-7, श्री शंकर प्रसाद, लिपिक के नाम से आवंटित था, जिसमें उनकी सहमति से उन्होंने अपना आवासन रखा था। उसके बगल में एक छात्राावास संचालित था। वस्तुतः उसी छात्राावास से उक्त प्रवेश पत्रा बरामद किया गया था। साथ ही उनके द्वारा यह भी उल्लेख किया गया कि उक्त क्वार्टर श्री शंकर प्रसाद द्वारा छोड़ने के उपरांत अनेक बेकार चीजें एवं कागजात को छोडा गया था, की बरामदी के लिए वे जिम्मेवार नहीं हैं। डा0 कुमार द्वारा यह भी सफाई दी गयी कि जब तक माननीय न्यायालय द्वारा उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाता तब तक सरकारी सेवक के आचरण के विरूद्ध कार्य करने के आरोप को प्रमाणित नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार आरोपी द्वारा अपने द्वितीय लिखित अभिकथन में यह स्वीकार किया गया कि वे जिस क्वार्टर में रह रहे थे उसमें से आपत्तिजनक कागजातें बरामद हुई थी, भले ही उक्त क्वार्टर श्री शंकर प्रसाद के नाम से आवंटित था। अतएव यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि क्वार्टर श्री शंकर प्रसाद, लिपिक के नाम से आवंटित था, जिसमें डा0 कुमार उनकी सहमति से रह रहे थे एवं श्री शंकर प्रसाद द्वारा क्वार्टर छोड़ने के बाद अनेक बेकार चीजें एवं कागजात को छोड़ा गया जिसे ही बरामद किया गया। वस्तुतः निगरानी विभाग द्वारा की गई छापेमारी में विभिन्न परीक्षाओें में प्रयुक्त होने वाले प्रवेश पत्रा, शैक्षणिक प्रमाण-पत्रा, बैंक का चेक एवं अन्य आपत्तिजनक कागजात बरामद हुए थे, जिसे बेकार की चीजें एवं सामान्य कागजात की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। साथ ही आरोेप उनके सरकारी सेवक के लिए अपेक्षित आचरण के विरूद्ध भी गठित था, अतएव इस स्थिति में न्यायिक प्रक्रिया के साथ विभागीय कार्यवाही साथ-साथ चल सकती है। अतः आरोपित द्वारा माननीय न्यायालय द्वारा दोषी ठहराये जाने तक विभागीय कार्यवाही में आरोप प्रमाणित नहीं किया जा सकता संबंधी तथ्य स्वीकार्य नहीं हो सकता। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी द्वारा सुबोध कुमार से प्राप्त द्वितीय लिखित अभिकथन असंतोषप्रद पाया गया।

13. उक्त आलोक में द्वितीय लिखित अभिकथन को असंतोषप्रद पाये जाने की स्थिति में सम्यक विचारोपरांत सरकार द्वारा सरकारी सेवक के लिए निर्धारित आचरण के विपरीत कार्यो में संलिप्त रहने संबंधी प्रमाणित आरोपों के लिए डा0 सुबोध कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली 2005 के अन्तर्गत वृहत दण्ड के तहत सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया।

14. डा0 कुमार के बर्खास्तगी संबंधी दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्राांक-342 दिनांक 26.05.2014 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की अपेक्षा की गयी। उक्त आलोक में आयोग के पत्राांक-945 दिनांक 18.07.2014 के द्वारा बर्खास्तगी संबंधी अनुशासनिक दण्ड के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी है।

15. उक्त आलोक में डा0 सुबोध कुमार, तत्कालीन कनीय सहायक शोध पदाधिकारी, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, पटना सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाघिकारी, दुल्लहपुर, वैशाली, हाजीपुर को सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाता है एवं विभागीय कार्यवाही समाप्त की जाती है।

16. इस संकल्प के निर्गत होने की तिथि से डा0 कुमार का इस विभाग में ग्रहणाधिकार नहीं रहेगा।

17. उक्त निर्णय संकल्प निर्गत की तिथि से प्रभावी होगा।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्रा के अगले असाधारण अंक में सर्वसाधारण की जानकारी हेतु प्रकाशित किया जाय एवं इसकी सूचना संबंधित पदाधिकारियों को दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

ब्रजेश्वर पाण्डेय,

सरकार के अवर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 02 December 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-12-02.1299/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-12-02.1299.