(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:18)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
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नी 2007 की उत्पाद नीति पर पुनर्विचार करने के लिए आवश्यकता इन्हीं सब कारणों से सरकार को अपनी 2007 की उत्पाद नीति पर पुनर्विचार करने के लिए आवश्यकता
सं0 11/नयी उत्पाद नीति-01-03/2015—3893 निबंधन उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग -------- संकल्प 21 दिसम्बर 2015 नयी उत्पाद नीति, 2015 निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग द्वारा समय-समय पर जारी उत्पाद नीति में पिछले वर्षों में काफी निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग द्वारा समय-समय पर जारी उत्पाद नीति में पिछले वर्षों में काफी निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग द्वारा समय-समय पर जारी उत्पाद नीति में पिछले वर्षों में काफी बदलाव हुए। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उत्पाद नीति, 2007 के जरिए हुए, जिसके तहत राज्य में शराब की दुकानों की बदलाव हुए। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उत्पाद नीति, 2007 के जरिए हुए, जिसके तहत राज्य में शराब की दुकानों की संख्या तथा उत्पाद शुल्क की व्यवस्था में काफी सुधार किया गया। इस नीति के तहत गैर-कानूनी ढंग से शराब बिक्री संख्या तथा उत्पाद शुल्क की व्यवस्था में काफी सुधार किया गया। इस नीति के तहत गैर-कानूनी ढंग से शराब बिक्री संख्या तथा उत्पाद शुल्क की व्यवस्था में काफी सुधार किया गया। इस नीति के तहत गैर-कानूनी ढंग से शराब बिक्री पर भी रोकथाम लगाने की कोशिश की गई तथा इसके जरिए राज्य सरकार का यह प्रयास रहा कि जितना भी अवैध पर भी रोकथाम लगाने की कोशिश की गई तथा इसके जरिए राज्य सरकार का यह प्रयास रहा कि जितना भी अवैध पर भी रोकथाम लगाने की कोशिश की गई तथा इसके जरिए राज्य सरकार का यह प्रयास रहा कि जितना भी अवैध व्यापार है, वह कम हो सके तथा इस गैरकानूनी व्यवसाय पर नियंत्रण पाया जा सके एवं इसे वैधिक संरचना के भीतर े सके तथा इस गैरकानूनी व्यवसाय पर नियंत्रण पाया जा सके एवं इसे वैधिक संरचना के भीतर े सके तथा इस गैरकानूनी व्यवसाय पर नियंत्रण पाया जा सके एवं इसे वैधिक संरचना के भीतर लाया जा सके। इस नीति के तहत दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में इस प्रकार का बदलाव किया गया, जिससे इस लाया जा सके। इस नीति के तहत दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में इस प्रकार का बदलाव किया गया, जिससे इस लाया जा सके। इस नीति के तहत दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में इस प्रकार का बदलाव किया गया, जिससे इस व्यापार के एकाधिकार की प्रवृत्ति पर रोक लगी। यद्यपि इस नीति से राज्य में उत्पा द शुल्क में आशातीत वृद्धि हुई, व्यापार के एकाधिकार की प्रवृत्ति पर रोक लगी। यद्यपि इस नीति से राज्य में उत्पाद शुल्क में आशातीत वृद्धि हुई, किन्तु कुछ नकारात्मक प्रभाव भी स्पष्ट हुए। यह बात सामने आई कि सबसे गरीब तबके के लोगों पर सबसे ज्यादा किन्तु कुछ नकारात्मक प्रभाव भी स्पष्ट हुए। यह बात सामने आई कि सबसे गरीब तबके के लोगों पर सबसे ज्यादा किन्तु कुछ नकारात्मक प्रभाव भी स्पष्ट हुए। यह बात सामने आई कि सबसे गरीब तबके के लोगों पर सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से इसका दुष्प्रभाव सामने आया। प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से इसका दुष्प्रभाव सामने आया। इन्हीं सब कारणों से सरकार को अप महसूस हुई। इसी परिप्रेक्ष्य में नयी उत्पाद नीति, 2015 बनाने का निर्णय हुआ। महसूस हुई। इसी परिप्रेक्ष्य में नयी उत्पाद नीति, 2015 बनाने का निर्णय हुआ।
नई उत्पाद नीति, 2015
1. नई उत्पाद नीति, 2015 इस उत्पाद नीति का लक्ष्य पूरे राज्य में पूर्ण मद्यपान निषेध लागू करना है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू इस उत्पाद नीति का लक्ष्य पूरे राज्य में पूर्ण मद्यपान निषेध लागू करना है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू इस उत्पाद नीति का लक्ष्य पूरे राज्य में पूर्ण मद्यपान निषेध लागू करना है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। प्रथम चरण में पूरे राज्य में देशी एवं मसालेदार देशी शराब की अनुज्ञप्तियों पर रोक लगेगी। मद्यपान एगा। प्रथम चरण में पूरे राज्य में देशी एवं मसालेदार देशी शराब की अनुज्ञप्तियों पर रोक लगेगी। मद्यपान एगा। प्रथम चरण में पूरे राज्य में देशी एवं मसालेदार देशी शराब की अनुज्ञप्तियों पर रोक लगेगी। मद्यपान निषेध संविधान के अनुच्छेद-47 के द्वारा राज्य को दिए गए नीति निर्देशक सिद्धांतों में से एक है और राज्य से आशा निषेध संविधान के अनुच्छेद-47 के द्वारा राज्य को दिए गए नीति निर्देशक सिद्धांतों में से एक है और राज्य से आशा निषेध संविधान के अनुच्छेद-47 के द्वारा राज्य को दिए गए नीति निर्देशक सिद्धांतों में से एक है और राज्य से आशा की जाती है कि वह इसके अनुपालन के लिए सतत् प्रयत्नशील रहे। इस हेतु निम्नलिखित निर्णय किए जायेंगे :- की जाती है कि वह इसके अनुपालन के लिए सतत् प्र यत्नशील रहे। इस हेतु निम्नलिखित निर्णय किए जायेंगे :-
प्रथम चरण में दिनांक 01 अप्रैल, 2016 से पूरे राज्य में देशी तथा मसालेदार देशी शराब के विनिर्माण, (क) प्रथम चरण में दिनांक 01 अप्रैल, 2016 से पूरे राज्य में देशी तथा मसालेदार देशी शराब के विनिर्माण, प्रथम चरण में दिनांक 01 अप्रैल, 2016 से पूरे राज्य में देशी तथा मसालेदार देशी शराब के विनिर्माण, व्यापार एवं उपभोग हेतु अनुज्ञप्ति/अनुमति नहीं दी जायगी। व्यापार एवं उपभोग हेतु अनुज्ञप्ति/अनुमति नहीं दी जायगी। (ख) दिनांक 01 अप्रैल, 2016 से मात्र शहरी क्षेत्र ों में केवल विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 ही उपलब्ध दिनांक 01 अप्रैल, 2016 से मात्र शहरी क्षेत्रों में केवल विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 ही उपलब्ध कराई जाएंगी। शहरी क्षेत्रों में भी मात्र नगर निगम तथा नगर परिषद् के स्तर पर ही विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 कराई जाएंगी। शहरी क्षेत्रों में भी मात्र नगर निगम तथा नगर परिषद् के स्तर पर ही विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 कराई जाएंगी। शहरी क्षेत्रों में भी मात्र नगर निगम तथा नगर परिषद् के स्तर पर ही विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 उपलब्ध हो सकेगी।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 21 (cid:23)दस(cid:25)बर 2015 (ग) उपरोक्त सभी विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 की दुकानें "ऑफ" होंगी अर्थात् इन दुकानों में वहां बैठकर पीने की व्यवस्था नहीं होगी।
(घ) उपरोक्त अनुसार सभी ग्रामीण क्षेत्रों में तथा नगर पंचायत स्तर तक सभी बार और रेस्टोरेंट, जो अभी विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 बेचते थे, को अनुज्ञप्ति नहीं दी जाएगी। बार एवं रेस्टोरेंट हेतु लाईसेंस मात्र नगर निगम तथा नगर परिषद् क्षेत्र तक ही सीमित रहेगा और वह भी मात्र विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 के लिए। (ड.) विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 की सभी दुकानें जो शहरी क्षेत्र तक सीमित रहेंगी, वह बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के सीधे नियंत्रण में रहेंगी और बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ही इन दुकानों को चलाएगा। बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा सभी नियमों का पालन किया जायगा एवं वह सरकार को देय अनुज्ञप्ति शुल्क तथा अन्य भुगतान नियमानुसार करेगा। इस हेतु बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड राज्य के अन्य लोक उपक्रमों के कार्यरत/सेवानिवृत्त कर्मचारियों को रख सकेगी तथा बेलट्रॉन एवं अन्य एजेंसियों के माध्यम से पर्याप्त संख्या में कार्यबल प्राप्त कर सकेगी।
(च) इस नीति के प्रभावी होने के बाद सभी आसवनियों को आवश्यकतानुसार अपनी आधारित क्षमता के आधार पर छोआ से, सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित मात्रा तक, ईथेनॉल बना सकने का अधिकार होगा।
2. प्रर्वत्तन तंत्र को सुदृढ़ करना (क) पुलिस एवं उत्पाद के प्रर्वतन तंत्र को मजबूत करने हेतु तत्काल प्रभाव से यह निर्णय लिया जाता है कि पुलिस विभाग से पर्याप्त संख्या में अधिकारी एवं अन्य सिपाहियों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर उत्पाद विभाग में सेवाएं सौंपी जाए। प्रतिनियुक्ति की अन्य शर्त्तें उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग, गृह विभाग से विमर्श कर तय कर सकेगा। (ख) जिलों में इन पुलिस अधिकारियों तथा उत्पाद विभाग के अधिकारियों से मद्य निषेध हेतु आवश्यक कदम उठाने के लिए जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को पूर्ण रूप से प्राधिकृत किया जायगा। सभी जिलाधिकारी अपने अधीनस्थ एक वरीय उप समाहर्त्ता श्रेणी के पदाधिकारी को चिन्हित करेंगे, जिन्हें वरीय उपसमाहर्त्ता (मद्यपान निषेध) कहा जायगा और वे जिले में मद्यपान निषेध के सभी प्रयासों के लिए नोडल अधिकारी होंगे। विभिन्न विभागों से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों यथा जीविका के स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी इत्यादि एवं अन्य विभागों के कर्मी यथा-शिक्षक, आशा इत्यादि से सहयोग एवं समन्वय की जिम्मेदारी जिला पदाधिकारी की होगी।
(ग) मद्य निषेध के क्षेत्र में काम करने वाले पुलिस तथा उत्पाद के अधिकारियों/सिपाहियों को प्रेरित करने के लिए नकद ईनाम देने का भी प्रावधान किया जायगा, जिसके तहत जो उत्पाद अधिकारी/सिपाही, पुलिस अधिकारी/सिपाही अच्छी मात्रा में देशी/विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 जब्त करते हैं तो उक्त दल को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मद्य निषेध के क्षेत्र में सराहनीय भूमिका प्रदान करने के लिए और इस दिशा में सतत् प्रत्यनशील रहने वाले उत्पाद तथा पुलिस के अधिकारी तथा सिपाही को "उत्पाद पदक" भी प्रदान किया जाएगा। इस पदक को देने की विस्तृत प्रक्रिया को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग, गृह विभाग से परामर्श कर तय कर सकेगा। (घ) नई उत्पाद नीति में प्रर्वतन तंत्र को सुदृढ़ करना होगा। इस हेतु निम्नलिखित प्रस्ताव किया जाता है :- (i) सभी डिस्टीलरी जो राज्य में स्प्रीट बनाते हैं उनका समस्त परिवहन ऐसे टैंकर्स के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें डिजीटल लॉक की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सभी डिस्टीलरी द्वारा की जाएगी।
(ii) उसी प्रकार विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 में बोटलिंग प्लान्ट से लेकर बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा संचालित गोदाम तक ले जाने का काम जिन ट्रकों द्वारा होगा उनमें भी डिजीटल लॉक की व्यवस्था होगी और वह ट्रक कंटेनर के रूप में होंगे। इसे सुनिश्चित करने के लिए बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड को प्राधिकृत किया जायेगा।
(iii) बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड सभी जिलों में अनिवार्य रूप से एक डिपो विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 हेतु रखेगी।
(iv) बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के गोदामों से बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 की खुदरा दुकानों तक जो भी परिवहन होगा, वह भी कंटेनर रूपी ट्रकों के माध्यम से होगा और उनमें भी डिजीटल लॉक की व्यवस्था बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड को अनिवार्य रूप से करानी होगाी।
(v) स्प्रीट के अन्तर्राज्यीय परिवहन को भी नियंत्रण में करने हेतु यह व्यवस्था की जायगी कि जो भी स्प्रीट अथवा विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0 से भरे टैंकर, जो राज्य में प्रवेश करते हों, उन्हें राज्य की सीमा पर प्रवेश करते ही कंपोजिट चौकी पर डिजीटल लॉक कर दिया जाय और बिहार की सीमा पार करते वक्त वहां की कंपोजिट चौकी पर इस डिजीटल लॉक को खोला जाय। राज्य की सीमा को पार करने के लिए इन टैंकरों अथवा ट्रकों को अधिकतम 24 घंटे का ट्रांजिट समय दिया जायगा। (vi) इन कम्पोजिट चौकियों को आने वाले समय में बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड पूर्ण रूप से संभाले और ऐसी व्यवस्था करनी होगी बिहार राज्य में प्रवेश करने वाले हर टैंकर व ट्रक, जिसमें विदेशी शराब/आई0एम0एफ0एल0/स्प्रीट ले जाई जा रही हो, उनमें डिजीटल लॉक एवं जी0पी0एस0 की व्यवस्था हो। (vii) प्रवर्त्तन तंत्र को और मजबूत करने तथा तकनीकी रूप से नयी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने हेतु बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड योजना कार्यान्वित करेगा।3 (cid:28)बहार गजट (असाधारण), 21 (cid:23)दस(cid:25)बर 2015 3. स्वैच्छिक मद्य निषेध हेतु प्रयास
उपरोक्त प्रवर्त्तन तंत्र सुदृढ़ करने के अलावे यह आवश्यक होगा कि सरकार पूरे राज्य में मद्य निषेध का प्रचार-प्रसार करे और मद्यपान से होने वाली दुष्प्रभावों के बारे में आम जन-मानस को सचेत करे। सरकार का यह लक्ष्य है कि सम्पूर्ण राज्य में मद्य निषेध पूर्ण रूप से किया जाय, किन्तु उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि ग्रामीण जनता अपनी स्वेच्छा से मद्य निषेध की ओर बढ़े। मात्र मद्य निषेध कानून बनाने से यह लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा और सरकार को अन्य प्रकार के सामाजिक तंत्र पर भी विचार करना होगा, जिससे कि मद्य निषेध का यह अभियान एक जन आंदोलन बन सके। इस निमित्त निम्नलिखित प्रयास किये जायेंगे :-
(क) जो भी गांव जिला पदाधिकारी द्वारा पूर्ण मद्य निषेध घोषित किया जाता है, उसमें उस निमित्त काम करने वाली जीविका के स्वयं सहायता समूहों को एवं महिला स्वयंसेवी संस्थाओं/समूहों/व्यक्तियों/आशा, आंगनबाड़ी तथा शिक्षक इत्यादि को जिला पदाधिकारी की अनुशंसा पर एक लाख रुपये का अनुदान बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा दिया जायगा।
(ख) नशा मुक्ति को जन आंदोलन बनाने के लिए बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड व्यापक रूप से गांव-देहातों एवं शहरी क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार करेगा और इस व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगा, ताकि मद्य निषेध एक जन आंदोलन का रूप ले सके। इस हेतु सभी प्रकार के कार्यक्रम जिला एवं ग्रामीण स्तर पर किए जाए, जिससे मदिरा पान की बुराई एवं मद्य निषेध से होने वाले लाभ को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। इस काम के लिए बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड राज्य सरकार के अन्य विभागों की सहायता प्राप्त कर सकेगा।
(ग) प्रत्येक जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य विभाग द्वारा De-addiction सेन्टर खोला जाएगा। उसमें जो लोग नशा के आदि हैं, उनके नशा मुक्ति के लिए उपचार किया जा सकेगा। यह De-addiction सेन्टर जिला पदाधिकारी के पूर्ण नियंत्रण में काम करेगा। De-addiction सेन्टर खोलने संबंधी अन्य प्रशासनिक/वित्तीय निर्णय लेने के लिए एक प्राधिकृत समिति का गठन किया जाता है, जो निम्न प्रकार होगी :-
1. विकास आयुक्त, बिहार - अध्यक्ष 2. प्रधान सचिव, गृह विभाग - सदस्य 3. प्रधान सचिव, वित्त विभाग - सदस्य 4. प्रधान सचिव, निबंधन उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग - सदस्य 5. प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग - सदस्य 6. प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग - सदस्य 7. प्रधान सचिव, समाज कल्याण विभाग - सदस्य 8. सचिव, ग्रामीण विकास विभाग - सदस्य 9. उत्पाद आयुक्त - सदस्य 10. प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड - सदस्य सचिव उपरोक्त समिति De-addiction सेन्टर हेतु नियम, आधारभूत संरचना के सृजन, दवाईयों का क्रय एवं सेन्टर चलाने हेतु आवश्यक प्रबंधकों, काउंसलरों तथा IT Experts को रखने हेतु पर्यवेक्षण करेंगी। उक्त समिति, सेन्टर चलाने हेतु व्यापक नियमावली भी बना सकेगी तथा इन सेन्टर्स के कार्यकलापों का अनुश्रवण करने में सक्षम होगी। समिति आवश्यकतानुसार संबंधित जिला पदाधिकारी को भी बैठक में बुला सकेगी। (घ) मदिरा के दुष्प्रभावों पर जानकारी हेतुु वेबसाइट भी बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा खोली जाएगी, जिसमें जन साधारण का सुझाव मद्य निषेध हेतु लिया जाएगा और राज्य सरकार द्वारा नशाबन्दी के लिए विस्तृत जानकारी जन मानस को दी जाएगी। इस वेबसाइट के जरिये सरकार मदिरापान के दुष्प्रभावों पर न केवल विस्तृत जानकारी देगी, अपितु मद्य निषेध की दिशा में काम करने वाले संस्थाओं का एक नेटवर्क भी कायम करेगी। 4. उपरोक्त उत्पाद नीति के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु एवं राज्य को पूर्ण नशा बन्दी की ओर ले जाने हेतु बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड सभी आवश्यक प्रयास करेगी। ऐसा करने हेतु जितने कार्यबल की आवश्यकता हो वह बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड राज्य सरकार को उपक्रमों, बेल्ट्रॉन, राज्य सरकार के सेवा निवृत्त अधिकारियों/कर्मचारियों तथा अन्य एजेंसियों के माध्यम से ले सकेगी।
5. उपरोक्त उत्पाद नीति की प्रभावी ढंग से समीक्षा मुख्य सचिव स्तरीय समिति द्वारा की जायेगी, जो निम्नलिखित को मिलाकर होगी :-
1. मुख्य सचिव, बिहार - अध्यक्ष 2. पुलिस महानिदेशक - सदस्य 3. विकास आयुक्त - सदस्य 4. प्रधान सचिव, गृह विभाग - सदस्य 5. प्रधान सचिव, वित्त विभाग - सदस्य 6. प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग - सदस्य 7. प्रधान सचिव, निबंधन उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग - सदस्य 8. प्रधान सचिव, समाज कल्याण विभाग - सदस्य 9. प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग - सदस्य4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 21 (cid:23)दस(cid:25)बर 2015 10. प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड - सदस्य 11. उत्पाद आयुक्त - सदस्य सचिव 6. इस नीति के लक्ष्यों के अधीन निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग इस नीति को लागू करने हेतु जो आवश्यक दिशा निर्देश बनायेगा, वह इस समिति द्वारा अनुमोदित किया जा सकेगा। जहाँ भी वांछित स्थिति होगी, ऐसी स्थिति में प्रस्ताव राजस्व पर्षद् को अनुमोदनार्थ भेजा जाएगा। समिति उत्पाद नीति के तहत अन्य किसी प्रकार के दिशा-निर्देश देने के लिए सक्षम होगी। समिति नशा मुक्ति, पर्यटन इत्यादि कारणों से विदेशी शराब की दुकानों के आच्छादन की स्थिति को देखते हुए आवश्यकतानुसार नई दुकानें खोलने पर निर्णय ले सकती है। साथ ही यह समिति फौजी संस्थानों में व्यवस्था हेतु दिशा-निर्देश तय कर सकेगी।
7. यह नीति दिनांक 01 अप्रैल 2016 से प्रभावी होगी। इस नीति के प्रभावी होने पर उत्पाद राजस्व संवर्द्धन के उद्देश्य से लॉटरी द्वारा खुदरा शराब दुकान की अनुज्ञप्तियों की बन्दोबस्ती नीति, 2007 संबंधी विभागीय संकल्प संख्या-2703, दिनांक 07.06.2007 एवं बिहार उत्पाद (देशी/मसालेदार देशी, विदेशी शराब/ बीयर तथा कम्पोजिट शराब की खुदरा बिक्री की अनुज्ञप्तियों की बंदोबस्ती) नियमावली, 2007 संबंधी विभागीय अधिसूचना संख्या-2704, दिनांक 07.06.2007 के प्रावधान इस हद तक संशोधित समझा जाएगा। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प का प्रकाशन सर्वसाधारण की जानकारी हेतु बिहार गजट के असाधारण अंक में किया जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0के0 पाठक, प्रधान सचिव, निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1342'5)1+500'ड(cid:17)-ट.-प(cid:17)-? Website: http://egazette.bih.nic.in