(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:18)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 1(cid:23) प(cid:24)ष 1(cid:26)3(cid:23) (cid:27)श(cid:15)(cid:28)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 13) पटन(cid:4)
पटन(cid:4)(cid:29) व५ह प०तव(cid:4)र, (cid:23) जनवर! 2(cid:15)1#
जल संसाधन विभाग
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16 uoEcj 2015
सं0 22 नि0 सि0 (भाग0)-09-17/2014/2
सि0 (भाग0)-09-17/2014/2532—श्री अवधेश कुमार झा, आई0डी0 क्रमांक 3219, श्री अवधेश कुमार झा, आई0डी0 क्रमांक 3219, कार्यपालक अभियंता के द्वारा बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, नवगछिया के पदस्थापन अवधि के दौरान मदरौनी (सहोरा) गाँव कार्यपालक अभियंता के द्वारा बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, नवगछिया के पदस्थापन अवधि के दौरान मदरौनी (सहोरा) गाँव कार्यपालक अभियंता के द्वारा बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, नवगछिया के पदस्थापन अवधि के दौरान मदरौनी (सहोरा) गाँव 14 के बीच कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का के पास कोशी नदी के दायें तट पर दिनांक 15.06.14 से 30.06.14 के बीच कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का के पास कोशी नदी के दायें तट पर दिनांक 15 14 को दिये गये परामर्श के अनुसार प्रबंधन सही ढंग से नहीं करने, अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल द्वारा दिनांक 19.06.14 को दिये गये परामर्श के अनुसार प्रबंधन सही ढंग से नहीं करने, अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल द्वारा दिनांक 19 एवं D/S nose protection बेडवार का निर्माण नहीं कराने, सहोरा (मदरौनी) ग्राम से संबंधित टूटान स्थाल के U/S एवं बेडवार का निर्माण नहीं कराने, सहोरा (मदरौनी) ग्राम से संबंधित टूटान स्थाल के के कार्य की गति को बिल्कुल धीमा रखने तथा खरीक प्रखण्ड के अन्तर्गत राघोपुर ग्राम के निकट गंगा नदी पर के कार्य की गति को बिल्कुल धीमा रखने तथा खरीक प्रखण्ड के अन्तर्गत राघोपुर ग्राम के निकट गंगा नदी पर के कार्य की गति को बिल्कुल धीमा रखने तथा खरीक प्रखण्ड के अन्तर्गत राघोपुर ग्राम के निकट गंगा नदी पर निर्मित रिंग बाँध को कटाव से रोकने में तकनीकी रूप से विफल रहने आदि आरोपों के लिए इनके विरूद्ध विभागीय निर्मित रिंग बाँध को कटाव से रोकने में तकनीकी रूप से विफल रहने आदि आरोपों के लिए इनके विरूद्ध विभागीय निर्मित रिंग बाँध को कटाव से रोकने में तकनीकी रूप से विफल रहने आदि आरोपों के लिए इनके विरूद्ध विभागीय सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 .01.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 संकल्प ज्ञापांक 16 दिनांक 05. के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया।
2. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 245 दिनांक 24 15 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 245 दिनांक 24.02.15 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन गये निर्णय के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य की समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के उपरान्त लिए गये निर्णय के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य की समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के उपरान्त लिए 15 द्वारा श्री अवधेश कुमार झा, से असहमति के बिन्दुओं को अंकित करते हुए विभागीय पत्रांक 1393 दिनांक 22.06.15 द्वारा श्री अवधेश कुमार झा, से असहमति के बिन्दुओं को अंकित करते हुए विभागीय पत्रांक 1393 दिनांक 22 कार्यपालक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। कार्यपालक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। 3. विभागीय पत्रांक 1393 दिनांक 22
ं श्री अवधेश कुमार झा, कार्यपालक अभियंता के विभागीय पत्रांक 1393 दिनांक 22.06.15 के आलोक में श्री अवधेश कुमार झा, कार्यपालक अभियंता के 15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर समर्पित किया जिसमें निम्नांकित तथ्यों को प्रस्तुत पत्रांक 1062 दिनांक 14.08.15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर समर्पित किया जिसमें निम्नांकित तथ्यों को प्रस्तुत 15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर समर्पित किया जिसमें निम्नांकित तथ्यों को प्रस्तुत किया गयाः-
असहमति के विन्दु-(i) A
A ''स्थल पर भरा बोरा विगत दस दिनों से रखने का निर्देश दिया जा रहा है फिर ''स्थल पर भरा बोरा विगत दस दिनों से रखने का निर्देश दिया जा रहा है फिर इतनी लापरवाही क्यों'' के संबंध में श्री झा का कहना है कि आदेश पंजी के पृष्ठ 1 से 3 से स्पष्ट है कि दिनांक 24. इतनी लापरवाही क्यों'' के संबंध में श्री झा का कहना है कि आदेश पंजी के पृष्ठ 1 से 3 से स्पष्ट है कि दिनांक 24 इतनी लापरवाही क्यों'' के संबंध में श्री झा का कहना है कि आदेश पंजी के पृष्ठ 1 से 3 से स्पष्ट है कि दिनांक 24 ायंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर भी थे, 14 के पूर्व मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर जो अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर भी थे, 06.14 के पूर्व मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर जो अधीक्षण अभ्ि स्थल पर कभी नहीं आये थे और न ही बोरा भरकर रखने का आदेश दिये थे। आरोप प्रमाणित करने के लिए यह स्थल पर कभी नहीं आये थे और न ही बोरा भरकर रखने का आदेश दिये थे। आरोप प्रमाणित करने के लिए यह स्थल पर कभी नहीं आये थे और न ही बोरा भरकर रखने का आदेश दिये थे। आरोप प्रमाणित करने के लिए यह साक्ष्य नियमानुकूल नहीं है। मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के आदेश से दिनांक 26.06.14 को तीन साक्ष्य नियमानुकूल नहीं है। मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के आदेश से दिनांक 26 साक्ष्य नियमानुकूल नहीं है। मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के आदेश से दिनांक 26 0 सी0 में प्रतिशपथ पत्र दायर करने पटना गया था इसलिए मुख्य अभियंता द्वारा पंजी में दर्ज उक्त टिप्पणी एम0 जे0 सी0 में प्रतिशपथ पत्र दायर करने पटना गया था इसलिए मुख्य अभियंता द्वारा पंजी में दर्ज उक्त टिप्पणी 0 सी0 में प्रतिशपथ पत्र दायर करने पटना गया था इसलिए मुख्य अभियंता द्वारा पंजी में दर्ज उक्त टिप्पणी पर सहायक अभियंता द्वारा उत्तर उसी समय दिया गया। पर सहायक अभियंता द्वारा उत्तर उसी समय दिया गया।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 7 जनवर(cid:18) 2016 (ii) मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के बेतार संवाद संख्या -2 दिनांक 29.06.14 में अंकित टिप्पणी ''स्थल पर कराये जा रहे कार्य में प्रभावी मैनेजमेंट की कमी महसूस की गई'' के संदर्भ में श्री झा का कहना है कि बेतार संवाद में लगाये गये आरोपों एवं बिन्दुओं पर इनके पत्रांक 733 दिनांक 30.06.14 द्वारा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर को उत्तर देते हुए इसकी प्रति विभाग को भी दी गयी।
दिनांक 24.06.14 को आदेशानुसार तीन एम0 जे0 सी0 में प्रतिशपथ पत्र दायर करने पटना गया एवं दिनांक 25.06.14 को 9.30 बजे सहोरा स्थल पर पहुँचा इसी बीच alarming situation पैदा हुई। उस दिन मुख्य अभियंता-सह-अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक शक्तियों के साथ स्थल पर मौजूद थे लेकिन तटबंध के लम्बत बह रही कोशी नदी के तेज प्रहार से कटाव होता रहा एवं लगातार एक किलोमीटर में कटाव लग गया था। इस स्थल पर अधिकतम जल स्त्राव आने एवं alarming situation पैदा होने के पूर्व ही अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल द्वारा दिनांक 19.06.14 को दिये आदेश का अनुपालन कर लिया गया था। (iii) ''आपके ससमय निदेश के बावजूद कार्य प्रारम्भ करने में संवेदक से कुछ विलम्ब हुआ जिससे आपके प्रबंधन में कमी का बोध होता है'' के संदर्भ में श्री झा का कहना है कि (1) दिनांक 19.06.14 को शाम में अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल के निरीक्षण के उपरान्त उनके द्वारा निर्देशित कार्यों के लिए संवेदक माँ काली कन्सट्रक्शन को सूचित किया गया (2) दिनांक 20.06.14 को संवेदक को स्थल पर बुलाकर कार्य का स्वरूप समझाया गया एवं संवेदक ने जे0 सी0 बी0 मशीन से कार्य शुरू किया (3) दिनांक 21.06.14 को जे0 सी0 बी0 से स्लोप कटिंग करने में दिक्कत हो रही थी (4) दिनांक 22.06.14 को सुबह 6 बजे स्थल निरीक्षण कर कोशी नदी मेें बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए कम से कम समय में पोकलेन मशीन लाकर अविलम्ब स्लोप कटिंग कार्य पूरा करने का निदेश संवेदक को दिया गया और बालू की ढुलाई, भराई, सिलाई एवं स्टैकिंग का कार्य कराया गया। सामान्यतः पोकलेन मशीन लाने में तीन दिन का समय लगता है परन्तु संवेदक द्वारा दिनांक 23.06.14 को शाम 5 बजे पोकलेन मशीन लाकर युद्ध स्तर पर कार्य शुरू किया गया।
(iv) असहमति के बिन्दु- ''आप स्थलीय स्थिति से वाकिफ रहे होंगे तो जे0 सी0 बी0 जो कारगर नहीं रहा, के स्थान पर प्रारम्भ में ही पोकलेन मशीन से कार्य प्रारम्भ कराया जाना चाहिए था। संवेदक द्वारा छोटे कार्य के लिए पोकलेन मशीन लाने में असमर्थता व्यक्त करने एवं उसका अधिक व्यय होने के आपके कथन को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि कटाव जारी था एवं उससे अधिक जान-माल का नुकसान संभावित था'' के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी श्री झा का कहना है कि कोशी नदी में सामान्यतः जे0 सी0 बी0 मशीन से कार्य आसानी से हो जाता है। इसकी उपयोगिता सहज उपलब्धता, स्लोप कटिंग में मिट्टी की कम मात्रा एवं नदी में कम जल स्त्राव के कारण प्रथम विकल्प के रूप में जे0 सी0 बी0 से अविलम्ब कार्य कराने का निदेश संवेदक को दिया गया। विभागीय पोकलेन मशीन की अनुपलब्धता, पोकलेन की क्षमता से मिट्टी की कम मात्रा, इस क्षेत्र में पोकलेन की अनुपलब्धता एवं सामान्यतः तीन दिनों में स्थल पर पहुंचने में लगनेवाला समय के कारण शुरू में पोकलेन मशीन से काम प्रारम्भ नहीं कराया गया। (v) ''बेडवार हेतु खाली बोरा एवं एन0 सी0 दिनांक 20.06.14 को संवेदक को उपलब्ध कराया गया इससे स्पष्ट है कि आपके द्वारा इसका उपयोग सुनिश्चित नहीं कराया गया'' के संदर्भ में श्री झा का कहना है कि दिनांक 22.06.14 को संवेदक को 5000 (पाँच हजार) बोरा एवं एन0 सी0 उपलब्ध कराया गया तथा उसी दिन रात तक 5000 (पाँच हजार) बोरा भरकर रख लिया गया। इस प्रकार कार्रवाई भी की गयी एवं उसी भरे हुए बोरों का दिनांक 23.06. 14 एवं 24.06.14 को उपयोग किया गया। उक्त तथ्यों द्वारा दिनांक 19.06.14 से 23.06.14 तक लगातार इस स्थल की सुरक्षा हेतु आवश्यक कदम पूरी कर्मठता, गंभीरता एवं व्यवस्थित तरीके से करने तथा दिनांक 19.06.14 से 23.06.14 तक तिथिवार आदेश/निदेश का अनुपालन का विवरण भी श्री झा द्वारा अंकित किया गया है। इसके अतिरिक्त श्री झा द्वारा यह भी कहा गया है कि इस स्थल की सुरक्षा की आशातीत सफलता केवल स्लोप कटिंग से निष्कर्ष पर पहुँचना, तकनीकी रूप से उचित नहीं है क्योंकि बाढ, 2014 के पूर्व मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 3.2(iii) के निदेश के आलोक में मुख्य अभियंता, भागलपुर द्वारा कार्यों का स्वरूप निर्धारित कर तकनीकी सलाहकार समिति के समक्ष उपस्थापन हेतु एक कटाव निरोधक समिति का गठन किया गया था जिसका Recommendation थाः- (i) 12mx1.2m crated boulder apron in the length of 950m in U/S of existing Geobag. (ii) Boulder pitching in slope of 2:1 upto D F L with end anchorage of 6m width. परन्तु 122वीं बैठक के एजेण्डा संख्या 122/327 में तकनीकी सलाहकार समिति द्वारा उक्त प्रस्ताव को नकारते हुए निम्न अनुशंसा की गयीः- Laying and placing R C C Jack Jetty in 3 rows with bamboo submerged vanes as per design in a length of 950m in U/S of existing Geobag, इससे स्पष्ट है कि S O P के अनुसार गठित कमिटि की अनुशंसा की अनदेखी तकनीकी सलाहकार समिति द्वारा किया जाना, स्थल पर हुई परेशानी का प्रमाणित अभिलेख है।3 (cid:28)बहार गजट (असाधारण), 7 जनवर(cid:18) 2016 (vi) असहमति के बिन्दु ''मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 1953 दिनांक 28.06.14 के कंडिका-3 के अनुसार कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, नवगछिया को अपने निर्देशन में इस स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराने का निर्देश दिया गया था। इससे स्पष्ट है कि आप उक्त कार्य से सम्बद्ध रहे हैं'' के संदर्भ में श्री झा का कहना है कि विभागीय मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.5.1 एवं बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण नियमावली 2003 के कंडिका 4.1.2 (क) के अनुसार अधीक्षण अभियंता इस स्थल के समग्र प्रभारी थे। इस नियमावली में नियम है कि रिस्क श्रेणी 'ए' के अन्तर्गत तटबंध एवं संरचना के वैसे स्थल आएंगे जहा पर नदी का कटाव संरचना/तटबंध के टो अथवा स्लोप पर आरम्भ हो गया हो जिससे संरचना/तटबंध के क्षतिग्रस्त अथवा इससे संबंधित खतरे की स्थिति उत्पन्न हो गयी हो। इस श्रेणी के स्थल पर चौबीस घंटा निगरानी के लिए विशेष दल 'ए' को प्रतिनियुक्त करने की कार्रवाई करेंगे अथवा विशेष दल में एक अधीक्षण अभियंता के अधीन तीन कार्यपालक अभियंता एवं छः सहायक अभियंता/कनीय अभियंता की टीम आठ-आठ घंटे की पाली में ऐसे स्थलों पर कार्यरत रहेंगे। बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों का सम्पादन मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता के देखरेख मेें किया जायेगा। संचालन पदाधिकारी को इस स्थल से सम्बद्ध नहीं होने का बयान नहीं दिया बल्कि स्थल के प्रभारी मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता के द्वारा बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण नियमावली 2003 एवं S O P के आलोक में तीन पालियों में कार्यपालक अभियंताओं के टीम द्वारा कार्य कराने का बयान दिया है और श्री झा का दायित्व मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता द्वारा निर्देशित कार्यों के लिए स्थल पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कराना था परन्तु कार्य की गति को धीमा करने के लिए किसी प्रकार जिम्मेवार नहीं हैं। बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण नियमावली 2003 के नियम एवं S O P के कंडिका- 4.5.1 में अंकित विभागीय निदेश मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 1953 दिनांक 28.06.14 के निदेश से उपर है। (vii) असहमति के बिन्दु- ''राघोपुर स्थित जमींदारी बांध के स्थल पर आपके उपस्थित नहीं रहने की पुष्टि होती है'' के संदर्भ में श्री झा का कहना है कि मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 2564 दिनांक 23.08.14 में स्पष्ट किया गया है कि इस्माइलपुर विन्द टोली तटबंध के स्पर संख्या-7 पर हो रहे कटाव का पुनस्र्थापन कार्य हेतु उसी स्थल पर कैम्प करने का निदेश कार्यपालक अभियंता को था। अतः उक्त स्थल पर अनुपस्थिति इसी प्रमण्डल के दूसरे अति संवेदनशील स्थल पर स्तर संख्या-7 की सुरक्षा में व्यस्त रहने के कारण थी। साथ ही इस स्थल पर मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के द्वारा खुद स्थल पर उपस्थित रहकर कार्य कराया गया जो बिहार सिंचाई़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण नियमावली 2003 के कंडिका- 4.1.2 (क) के आलोक में आवश्यक थी। (viii) ''कटाव प्रारम्भ होने के पूर्व जब जमींदारी बांध पर दवाब हुआ है, उसी समय से युद्ध स्तर पर कार्य प्रारम्भ कर स्थिति पर नियंत्रण किया जा सकता था जबकि आप ही प्रभारी थे। दिनांक 22.08.14 को कटाव प्रारम्भ होने के एक सप्ताह पूर्व से ही जमींदारी बांध पर गंगा नदी का दवाब था परन्तु युद्ध स्तर पर उपयोगी कार्य कराकर बांध को कटाव से सुरक्षित नहीं किया जा सका'' के संदर्भ में श्री झा का कहना है कि मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 2564 दिनांक 23.08.14 में स्पष्ट किया गया है कि एक सप्ताह से जमींदारी बांध के D/S में गंगा नदी का दवाब था तथा आवश्यक बाढ़ संघर्षात्मक कार्य पूरा करके स्थल को सुरक्षित कर लिया गया था। अतः नदी के दवाब को देखते हुए आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य पूरा कर लिया गया था। कटाव शांत पानी में भी कभी-कभी बिना दवाब वाले भाग में लग जाता है। उक्त पत्र में यह भी प्रतिवेदित है कि दिनांक 22.08.14 को रात में कटाव लग गया तथा स्थल पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध सामग्री का मुख्य अभियंता के मार्गदर्शन एवं उपस्थिति में उपयोग के बाद भी कटाव पर नियंत्रण नहीं हो सका। कटाव पूर्व कराये गये कार्य का विवरण परिशिष्ट के रूप में संलग्न किया गया है और अंत में सभी आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। 4. श्री झा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उतर में प्रस्तुत किये गये उपर्युक्त तथ्यों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त निम्नांकित तथ्य पाये गयेः- (i) स्थल पर भरा बोरा विगत दस दिनों से रखने के निदेश में लापरवाही के मुख्य अभियंता की दिनांक 24. 06.14 की टिप्पणी के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी श्री झा का कहना है कि दिनांक 24.06.14 के पूर्व मुख्य अभियंता न तो स्थल पर आये और न ही इस प्रकार का निदेश दिये। श्री झा द्वारा उल्लेखित स्थल पंजी के पृष्ठ संख्या 1 से 3 से इनके बयान की पुष्टि होती है। मुख्य अभियंता के संदर्भित निदेश की पुष्टि में साक्ष्य होने की पुष्टि संचिका में नहीं है। फलस्वरूप साक्ष्य के अभाव में उक्त बिन्दु पर श्री झा का बचाव बयान स्वीकार योग्य है।
(ii) एन0 आर0 02 में मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिवेदित प्रभावी प्रबंधन में कमी के संदर्भ में श्री झा का कहना है कि अधिकतम जल स़्श्राव पहुंचने तथा alarming situation पैदा होने के पूर्व ही अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल द्वारा दिनांक 19.06.14 को दिये निदेश का अनुपालन कर लिया गया था। परन्तु मुख्य अभियंता, भागलपुर द्वारा आलोच्च स्थल के दिनांक 25.06.14 से 28.06.14 तक स्थलीय निरीक्षण के बाद ही एन0 आर0 02 प्रतिवेदित किया गया है अतएव उनके उक्त मंतव्य से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त दिनांक 19.06.14 को अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल द्वारा अंकित किया गया है कि ''कराये गये कटाव निरोधक कार्य के U/S में नदी के तट में भारी कटाव हो रहा है एवं कतिपय निदेश भी दिया गया जिस पर उसी दिन श्री झा द्वारा सहायक अभियंता को कार्रवाई का निदेश दिया गया तथा सहायक अभियंता द्वारा स्थल देखकर निदेश की मांग करने पर ही दिनांक 22.08.14 को आरोपित पदाधिकारी श्री झा के आलोच्य स्थल पर जाने का बोध होता है। साथ ही बांध की उंचाई अधिक रहने के कारण जे0 सी0 बी0 प्रभावी नहीं होने की सूचना पर श्री झा द्वारा पोकलेन मशीन से स्लोप कटिंग कर बेडवार बनाने4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 7 जनवर(cid:18) 2016 का निदेश दिया गया एवं खाली बोरा तथा एन0 सी0 दिनांक 22.06.14 को ही उपलब्ध कराया गया जबकि निदेश दिनांक 19.06.14 का ही था। इससे स्पष्ट है कि श्री झा द्वारा कटाव को गंभीरता से नहीं लिया गया है।
स्थल आदेश पंजी में मुख्य अभियंता के दिनांक 27.06.14 की टिप्पणी ''नामित संवेदकों द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है'' एवं दिनांक 28.06.14 की टिप्पणी ''एन0 सी0 लेईंग/परक्यूपाईन लेईंग या अन्य संघर्षात्मक कार्य में seriousness नहीं दिखाई दे रहा है'' से मुख्य अभियंता के एन0 आर0 02 में अंकित मंतव्य की पुष्टि होती है जिससे श्री झा का इस संदर्भ में बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है।
(iii) ''आपके ससमय निदेश के बावजूद कार्य प्रारम्भ करने में संवेदक से कुछ विलम्ब हुआ इससे आपके प्रबंधन में कमी का बोध होता है'' के संदर्भ में श्री झा द्वारा दिनांक 19.06.14 से 23.06.14 तक के निदेश के आलोक में उनके स्तर से कृत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है जिससे स्वतः स्पष्ट होता है कि दिये गये निदेश को अनुपालित कराने में श्री झा विफल रहे एवं इसके कारण दिनांक 24.06.14 को लगभग एक किलोमीटर में कटाव होते हुए पाया गया। उक्त तथ्यों/बचाव/साक्ष्य के आलोक में इस संदर्भ में श्री झा का बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
(iv) दिनांक 19.06.14 को अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल द्वारा छः स्लोपिंग बेडवार बनाने के लिए स्लोप में मिट्टी कटिंग हेतु प्रारम्भ से ही पोकलेन मशीन का उपयोग नहीं किये जाने के संबंध में श्री झा का कहना है कि जे0 सी0 बी0 मशीन की उपलब्धता, कटिंग में मिट्टी की कम मात्रा एवं सामान्यतया उपयोगी रहने के कारण प्रथम विकल्प में जे0 सी0 बी0 का उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त श्री झा द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि बाध की उंचाई अधिक होने के कारण जे0 सी0 बी0 कारगर नहीं रहा। श्री झा का उक्त कथन/बचाव बयान इसलिए स्वीकार योग्न नहीं है क्योंकि बांध की अधिक उंचाई के कारण जे0 सी0 बी0 की असफलता की संभावना से श्री झा अवगत रहे होंगे। बेडवार हेतु खाली बोरा एवं एन0 सी0 भी दिनांक 22.06.14 को संवेदक को इनके द्वारा उपलब्ध कराया गया जबकि अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल द्वारा दिनांक 19.06.14 को ही बेडवार बनाने का निदेश था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने एवं कटाव की स्थिति से भी श्री झा अवगत रहे होंगे इसके बावजूद कटाव को गंभीरता से न लेकर दिनांक 23.06.14 की संध्या से स्लोप कटिंग का कार्य पोकलेन मशीन से प्रारम्भ किया गया एवं अगले ही दिन एक किलोमीटर में कटाव लग गया। इससे स्पष्ट है कि दिनांक 19.06.14 के निदेश के अनुपालन में विलम्ब हुआ एवं आरोपित पदाधिकारी श्री झा दिनांक 19.06.14 के बाद ही दिनांक 22.06.14 को आलोच्य स्थल पर आये जबकि दिनांक 19.06.14 के निदेश अनुपालित कराने की जिम्मेवादी इनकी थी।
(v) मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 1953 दिनांक 28.06.14 के कंडिका-3 में अंकित कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, नवगछिया को अपने निर्देशन में इस स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराने के संदर्भ में श्री झा द्वारा मानक संचालन प्रकिया के कंडिका- 4.5.1 एवं बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण नियमावली 2003 के कंडिका-4.1.2 (क) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उक्त स्थल का समग्र प्रभारी अधीक्षण अभियंता जिनके अधिन तीन कार्यपालक अभियन्ता एवं छः सहायक अभियन्ता एवं कनीय अभियंता तीन पालियों में कार्यरत रहे हैं, होते हैं एवं उनका दायित्व सामग्रियों की व्यवस्था एवं सूचना का प्रेषण करना है।
अतः संदर्भित नियिम से स्पष्ट होता है कि नदी का कटाव संरचना/तटबंध के टो अथवा स्लोप पर प्रारम्भ होने पर अधीक्षण अभियंता के समग्र निर्देशन में कार्य करने हेतु मुख्य अभियंता प्रत्येक पाली में एक कार्यपालक अभियंता एवं दो सहायक अभियंता/कनीय अभियंता प्रतिनियुक्त करेंगे। श्री झा का कहना है कि उक्त संदर्भित नियम मुख्य अभियंता के पत्रांक 1953 दिनांक 28.06.14 से उपर है। हालांकि उक्त नियमन के अनुसार अधीक्षण अभियंता समग्र प्रभारी होते हैं परन्तु मुख्य अभियंता के पत्रांक 1953 दिनांक 28.06.14 एवं अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर के पत्रांक 804 दिनांक 15.07.14 से श्री झा द्वारा आलोच्य कार्य का पर्यवेक्षण किये जाने का बोध होता है। अतएव उक्त परिप्रेक्ष्य में श्री झा का बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है।
(vi) राघोपुर स्थित जमींदारी बांध के स्थल पर उपस्थित नहीं रहने के संबंध में श्री झा द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2014 में रिंग बांध मे टूटान नहीं हुआ बल्कि रिंग बांध के D/S मेंं जमींदारी बांध, जो रिंग बांध पर पहुंच पथ का काम करता है, में दिनांक 22.08.14 को कटाव हुआ था। जमींदारी बांध पर कटाव के समय उपस्थित नहीं रहने के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी श्री झा का कहना है कि इस्माइलपुर विन्द टोली तटबंध के स्पर संख्या 7 पर कटाव के पुनस्र्थापन कार्य में मुख्य अभियंता के निर्देशानुसार व्यस्त रहने के कारण अनुपस्थित रहा। श्री झा का उक्त कथन स्वीकार योग्य है क्योंकि मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 2564 दिनांक 23.08.14 से इसकी पुष्टि होती है।
(vii) कटाव पूर्व जमींदारी बांध पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के संबंध में श्री झा का कहना है कि जमींदारी बांध पर नदी के दबाव के समय बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कर सुरक्षात्मक कार्य पूरा कर लिया गया था। कराये गये कार्य की संलग्न विवरणी से स्पष्ट होता है कि दिनांक 11.08.14 से ही बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया जा रहा था। दिनांक 22. 08.14 को कटाव की सूचना पर श्री झा को स्पर संख्या 7 पर ही कार्य का पर्यवेक्षण करने हेतु निदेशित करते हुए अधीक्षण अभियन्ता/मुख्य अभियन्ता द्वारा अपने निर्देशन में संघर्षात्मक कार्य कराया गया परन्तु टूटान नहीं रोक जा सका। इसकी पुष्टि मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 2564 दिनांक 23.08.14 से भी होती है। श्री झा का यह भी कहना है कि उक्त परिस्थिति में विभागीय मानक संचालन प्रकिया के अनुसार अधीक्षण अभियंता ही समग्र प्रभारी होते5 (cid:28)बहार गजट (असाधारण), 7 जनवर(cid:18) 2016 हैं। उक्त से स्पष्ट होता है कि कटाव के पूर्व श्री झा द्वारा कार्य कराया गया है एवं इस संदर्भ में इनका बचाव बयान स्वीकार योग्य है।
5. उपयुक्त पाये गये तथ्यों के आलोक में श्री झा के विरूद्ध ''मदरौनी सहोरा गांव के पास कोशी नदी के दायें तट पर दिनांक 15.06.14 से 30.06.14 के बीच कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का प्रबंधन सही ढंग से नहीं करने, दिनांक 19.06.14 का अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल के परामर्श को अनुपालित कराने में विलम्ब के लिए जिसके कारण कटाव पर समय रहते नियंत्रण नहीं हो पाया तथा इस पर किया गया व्यय भी कारगर नहीं रहा एवं मदरौनी सहोरा ग्राम से संबंधित टूटान स्थल के U/S एवं D/S nose protection के कार्य की गति को धीमा रखने जिसके कारण कराया गया कार्य अनुपयोगी साबित हुआ'' का आरोप प्रमाणित पाया गया है एवं उक्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री झा को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः-
(i) निन्दन वर्ष 2014-15 (ii) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। 6. सरकार के स्तर पर लिए गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अवधेश कुमार झा, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, नवगछिया को निम्न दण्ड देते हुए उन्हें संसूचित किया जाता।
(i) निन्दन वर्ष 2014-15 (ii) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
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