(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:18)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 1(cid:23) प(cid:24)ष 1(cid:26)3(cid:23) (cid:28)श(cid:15)(cid:29)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 15) पटन(cid:4)
पटन(cid:4)(cid:30) व५ह!प०तव(cid:4)र, (cid:23) जनवर" 2(cid:15)1$ जल संसाधन विभाग
&&&&&&&&
vf/klwpuk
10 fnlEcj 2015
सं0 22 नि0 सि0 (पट0)-03-02/2005
22 नि0 सि0 (पट0)-03-02/2005/2666—श्री रामायण सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गंगा श्री रामायण सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गंगा सोन बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, दीघा, पटना द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि में वर्ष 2005 बाढ़ के पूर्व कटाव निरोधक कार्यों सोन बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, दीघा, पटना द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि में वर्ष 2005 बाढ़ के पूर्व कटाव निरोधक कार्यों सोन बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, दीघा, पटना द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि में वर्ष 2005 बाढ़ के पूर्व कटाव निरोधक कार्यों
किये गये अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा की गयी। से संबंधित आमंत्रित निविदाओं के निष्पादन में किये गये अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा की गयी। से संबंधित आमंत्रित निविदाओं के निष्पादन में
उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरान्त निम्नलिखित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह के उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरान्त निम्नलिखित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह के उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरान्त निम्नलिखित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 339 दिनांक 13.04.05 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपी विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 339 दिनांक 13 05 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयीः- के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयीः-
(1) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्यों से संबंधित एजेण्डा सं0 80/548 (बी0) के (1) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्यों से संबंधित एजेण्डा सं0 80/548 (बी0) के (1) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्यों से संबंधित एजेण्डा सं0 80/548 (बी0) के अन्तर्गत एक स्वीकृत प्राक्कलन के विरूद्ध बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति प्राप्त किये कार्य को विभक्त कर चार अन्तर्गत एक स्वीकृत प्राक्कलन के विरूद्ध बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति प्राप्त किये कार्य को विभक् अन्तर्गत एक स्वीकृत प्राक्कलन के विरूद्ध बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति प्राप्त किये कार्य को विभक् ग्रुपों में निविदा आमंत्रित करना एवं प्राप्त करना। ग्रुपों में निविदा आमंत्रित करना एवं प्राप्त करना।
(2) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्यों के लिये दिनांक 10.02.05 को प्राप्त आठ (2) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्यों के लिये दिनांक 10 (2) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्यों के लिये दिनांक 10
अद्द कार्यों से संबंधित निविदा संचिकायें जो अंचल कार्यालय में दिनांक 25.02.05 को प्राप्त हुआ, को अद्द कार्यों से संबंधित निविदा संचिकायें जो अंचल कार्यालय में दिनांक 25 05 को प्राप्त हुआ, को अपने पत्रांक 78 दिनांक 16.02.05 की तिथि में निर्गत कर बैक डेटिंग करना।
05 की तिथि में निर्गत कर बैक डेटिंग करना।
(3) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्य से संबंधित आर0 बी0 ग्रुप सं0-1, के (3) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्य से संबंधित आर0 बी0 ग्रुप सं0-1, के (3) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्य से संबंधित आर0 बी0 ग्रुप सं0-1, के निविदादाता में अंजली कन्सट्रक्शन के निविदा दस्तावेज को खोलते समय संलग्न अनुलग्नकों पर हस्ताक्षर/इनिशियल निविदादाता में अंजली कन्सट्रक्शन के निविदा दस्तावेज को खोलते समय संलग्न अनुलग्नकों पर हस्ताक्षर निविदादाता में अंजली कन्सट्रक्शन के निविदा दस्तावेज को खोलते समय संलग्न अनुलग्नकों पर हस्ताक्षर
नहीं करना।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 7 जनवर(cid:18) 2016 (4) बाढ़ वर्ष 2005 पूर्व कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्य से संबंधित एल0 बी0 ग्रुप सं0-4 के निविदादाता मे0 राय कन्सट्रक्शन के निविदा दस्तावेज पर अंकित निविदित दर एवं अन्य प्रविष्टियों में प्रयोग की गयी स्याही में अन्तर तथा तुलनात्मक विवरणी पर इनके दर एवं राशि की लिखावट अन्य लिखावट से मेल नहीं खाने के कारण निविदा दस्तावेज के साथ हेर-फेर करने का आरोप।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों के मात्र प्रक्रियात्मक भूल मानते हुए प्रतिवेदन समर्पित किया गया। समीक्षोपरान्त जाँच प्रतिवेदन पर असहमति जताते हुए विषयांकित आरोपों को प्रक्रियात्मक भूल की संज्ञा नहीं मानी गई बल्कि प्रत्येक आरोप में श्री सिंह की मंशा स्पष्टः संदेहात्मक पाया गया। साथ ही इनकी सत्यनिष्ठा पर भी प्रश्नचिन्ह पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक 733 दिनांक 13.07.06 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह दिनांक 30.11.09 को सेवानिवृत हो चुके हैं। समीक्षोपरान्त विभागीय आदेश सं0 61 दिनांक 16.05.12 सह ज्ञापांक 507 दिनांक 16.05.12 द्वारा पूर्व में संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया एवं विभागीय पत्रांक 596 दिनांक 11.06.12 द्वारा पुनः द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। उक्त के क्रम में श्री सिंह द्वारा कतिपय अभिलेखों की माँग की गई। विभागीय पत्रांक 953 दिनांक 04.09.12 द्वारा श्री सिंह को सूचित किया गया कि माँग की गयी वांछित अभिलेख उनके द्वारा प्राधिकृत लेखा लिपिक को प्राप्त करा दिये गये हैं। कई स्मारों एवं दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञप्ति के माध्यम से सूचना देने के बावजूद भी श्री सिंह द्वारा नियम-43 (बी0) के तहत पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित नहीं किया गया। फलस्वरूप श्री सिंह के द्वारा पूर्व में समर्पित किये गये द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को ही सरकर के स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः- आरोप सं0-1ः- प्रमाणित नहीं पाया गया।
आरोप सं0-2ः- इस संदर्भ में श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब मेंं पत्र को गंतव्य कार्यालय में विलम्ब से उपलब्ध कराने का कारण कर्मचारियों को चुनाव कार्य में संलग्न रहना कहा गया है परन्तु इनके उक्त कथन को मान्य नहीं किया जा सकता है क्योंकि इनका कार्यालय एवं अंचल कार्यालय जहाँ पत्र प्राप्त कराना था एक ही शहर में रहते हुए दिनांक 16.02.05 को निर्गत पत्र को गंतव्य कार्यालय में दिनांक 25.02.05 को प्राप्त कराना इनके लापरवाही का द्योतक है। अतः उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया।
आरोप सं0-3ः- इस संदर्भ में श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया कि एक संवेदक द्वारा परिस्थितिजन्य आधारित तनावपूर्ण वातावरण उत्पन्न करने के कारण निविदा पत्र के साथ संलग्न कुछ कागजातों पर भूलवश उनका इनिशियल छूट गया। समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह द्वारा अपनी भूल स्वीकार कर ली गयी है। वर्णित स्थिति में उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया।
आरोप सं0-4ः- इस संदर्भ में श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में मुख्य रूप से कहा गया कि प्रायः संवेदकों द्वारा निविदा कागजातों के प्रत्येक मद को, मात्र दर को छोड़कर, पूर्व से ही तैयार कर लिया जाता है तथा अंतिम समय में प्रतिस्पर्धा की स्थिति में दरों का आकलन कर दर का प्रतिशत अंकित कर निविदा बॉक्स में डाला जाता है। ऐसी स्थिति में दो तरह के स्याही का प्रयोग किया जाना निविदाकार का निजी मामला है।
तुलनात्मक विवरणी में निविदित दर एवं राशि को मिटाकर अंकित करने के संदर्भ में श्री सिंह द्वारा कहा गया कि कार्यालय द्वारा की गई भूल को उन्होंने अपनी देख-रेख में अन्य कर्मी से सुधार करवाया। फलतः लिखावट में भिन्नता पाया जाना स्वाभाविक है।3 (cid:28)बहार गजट (असाधारण), 7 जनवर(cid:18) 2016 विभागीय समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह को निविदाकार के द्वारा व्यवहृत अन्य स्याही के रंग के बारे में अपनी अभ्युक्ति दर्ज करनी चाहिये थी ताकि बाद में किसी भी व्यक्ति के मन में किसी भी प्रकार की आशंका उत्पन्न न हो। श्री सिंह द्वारा ऐसा न कर स्थिति को जटिल बना दिया गया किन्तु उनके द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि निविदा खोलने के समय उनके द्वारा पूर्ण पारदर्शिता बरती गई। अन्यथा इस कार्य से संबंधित अन्य निविदाकारों द्वारा परिवाद पत्र विभाग में उपलब्ध कराया जाता। वर्णित स्थिति में उक्त आरोप अंशतः प्रमाणित पाया गया।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री रामायण सिंह, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता आरोप सं0-2 एवं 3 के लिए पूर्ण रूप से तथा आरोप सं0-4 के लिए अांशिक रूप से दोषी पाये गये। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-297 दिनांक 29.01.15 द्वारा श्री सिंह को निम्न दण्ड संसूचित किया गया।
(1) पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की राशि की कटौती पॅाच वर्षो तक के लिए।
उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा अपील अभ्यावेदन/पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक- शून्य दिनांक 07.08. 15 समर्पित किया गया जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः-
श्री सिंह द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी मेें कहा गया है कि उनके द्वारा पूर्व में आमंत्रित निविदा को विभागीय सचिव श्री वी0 जयशंकर द्वारा रद्द कर पुनर्निविदा आमंत्रित करने का आदेश दिया गया जिसके कारण 18.30 लाख रूपये सरकारी राजस्व की क्षति हुई जिसकी समीक्षा नहीं की गई। साथ ही यह भी कहा गया है कि वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी के अदूरदर्शिता के कारण 18.30 लाख रूपये सरकारी राजस्व की क्षति में संलिप्ता को उजागर किये जाने की स्थिति में उन्हें बचाने के उद्धेश्य से मेरे विरूद्ध दण्डादेश संसूचित किया गया है।
श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी के साथ संलग्न द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब में विभागीय पत्रांक 26 दिनांक 05.03.05 का उल्लेख किया गया है जिसमें कारण दर्शाते हुए पुनर्निविदा आमंत्रित करने का निदेश है। उक्त पत्र से स्पष्ट है कि श्री सिंह द्वारा उक्त निविदा को आठ ग्रुपों में खंडित कर अपने रेन्ज में लेकर निविदा आमंत्रित की थी, जिसकी जाँचोपरान्त अनियमित मानते हुए पुनर्निविदा आमंत्रित करने का निदेश दिया गया जो सरकार का विशेषाधिकार है। इस प्रकार श्री सिंह द्वारा वरीय पदाधिकारी के विरूद्ध लगाये गये आरोप स्वतः विखंडित हो जाता है। इसके अतिरिक्त कोई अन्य नया तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जो पुनर्विचार योग्य हो। समीक्षोपरान्त श्री सिंह से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री रामायण सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-शून्य दिनांक 07.08.15 को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
सतीश चन्द्र झा,
सरकार के अपर सचिव।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 15%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in