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9 vDrwcj 2015
सं0 9/आरोप (राज0 उ0)-2-04/2012-4526—श्री केदार प्रसाद, तत्कालीन उपायुक्त उत्पाद (आ0भा0) बिहार, पटना सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध CWJC NO-2101/2000 बिहार राज्य बनाम सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टेक्सेज में दिनांक 02.12.2010 को पारित न्यायादे'ा के बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली में SLP दायर करने में अकारण अप्रत्याि'ात विलम्ब कर राजस्व विषयक न्यायिक आदे'ा के पालन में ि'ाथिलता बरतने एवं इसके फलस्वरूप माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विभाग की छवि धूमिल होने के आरोप में विभागीय संकल्प सं0-1751 दिनांक 29.04.2014 द्वारा बिहार पें'ान नियमावली 1950 में 43 (B) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
2. संचालन पदाधिकारी-सह-अपर विभागीय जॉच आयुक्त, बिहार, पटना के ज्ञापांक-315 दिनांक 27.
07.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया है, जिसमे दोनों आरोपों को प्रमाणित होना प्रतिवेदित किया गया है। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 21 जनवर(cid:15) 2016 तथ्यों की समीक्षा की गयी थी अथवा नही और उनके द्वारा मुखर vkns'k भी अभिलिखित नही किए जाने की बात अभ्यावेदन में कही गयी।
पुनः दिनांक 21.08.2015 को श्री प्रसाद द्वारा द्वितीय बचाव बयान के संबंध में विभाग मे एक अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा दिनांक 12.08.2015 के अभ्यावेदन पर सम्यक निस्तार की अपेक्षा की गई एवं एक माह के समय की माँग की गई। परन्तु, यह पाया गया कि उनके द्वारा समर्पित तथ्यों और लिखित अभिकथन तथा विभागीय मंतव्य के समीक्षोपरान्त ही संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों को प्रमाणित पाया गया। अतएव उक्त के आलोक में उनका अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
5. अतः पूर्ण विचारोपरान्त संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन सेे सहमत होते हुए बिहार पें'ान नियमावली 1950 के नियम-139 (बी0) के तहत् प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री प्रसाद के विरूद्ध उनके पें'ान से 15% (पन्द्रह) प्रति'ात कटौती करने का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।
6. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के vkns'k से,