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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 08 February 2016

Published 08 February 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-02-08.122
Languages
English, Hindi

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श्री वर्मा द्वारा उक्त न्यायादेश के आलोक में अपने 10% (दस प्रतिशत) लंबित पेंशन, दिनांक 22विभागीय स्तर पर क्रिमिनल अपील (एस॰जे॰) सं॰-188/2001 में दिनांक 14.12 12.2012 को पारित आदेश के मंतव्य निम्नवत्‌ है :- सं0 08/आरोप-01-108/2014,सा॰प्र॰—114 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 5 जनवरी 2016 श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-667/85 (सम्प्रति सेवानिवृत्त) तत्कालीन जिला भू-अर्जन श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-667/85 (सम्प्रति सेवानिवृत्त) तत्कालीन जिला भू-अर्जन श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-667/85 (सम्प्रति सेवानिवृत्त) तत्कालीन जिला भू-अर्जन ोपों पर निगरानी द्वारा फारबिजगंज थाना कांड सं॰-20 (8) पदाधिकारी, पूर्णियाँ के विरूद्ध रंगे हाथ रिश्वत लेने के आरोपों पर निगरानी द्वारा फारबिजगंज थाना कांड सं॰-20 (8) पदाधिकारी, पूर्णियाँ के विरूद्ध रंगे हाथ रिश्वत लेने के आर 78 धारा-161/420/120 के अधीन फौजदारी मामला दर्ज कराया गया। इस क्रम में विभागीय आदेश सं॰-18040, 78 धारा-161/420/120 के अधीन फौजदारी मामला दर्ज कराया गया। इस क्रम में विभागीय आदेश सं॰-18040, 78 धारा-161/420/120 के अधीन फौजदारी मामला दर्ज कराया गया। इस क्रम में विभागीय आदेश सं॰-18040, दिनांक 22.09.1978 द्वारा इन्हें निलंबित किया गया। कालान्तर में विभागीय आदेश पत्रांक-3160, दिनांक 11 1978 द्वारा इन्हें निलंबित किया गया। कालान्तर में विभागीय आदेश पत्रांक-3160, दिनांक 11.03.1981 1978 द्वारा इन्हें निलंबित किया गया। कालान्तर में विभागीय आदेश पत्रांक-3160, दिनांक 11 1981 तक निलंबित रहे। द्वारा ये निलंबन मुक्त हुए। इस प्रकार श्री वर्मा दिनांक 22.09.1978 से दिनांक 11.03.1981 तक निलंबित रहे। द्वारा ये निलंबन मुक्त हुए। इस प्रकार श्री वर्मा दिनांक 22 माननीय विशेष न्यायाधीश (निगरानी) उत्तर बिहार के न्यायालय में क्रिमनल केस सं॰-22/90 के रूप मेें उक्त माननीय विशेष न्यायाधीश (निगरानी) उत्तर बिहार के न्यायालय में क्रिमनल केस सं॰-22/90 के रूप मेें उक्त माननीय विशेष न्यायाधीश (निगरानी) उत्तर बिहार के न्यायालय में क्रिमनल केस सं॰-22/90 के रूप मेें उक्त वाद की सुनवाई के उपरांत श्री वर्मा के विरूद्ध आरोप साबित हुआ तथा इन्हें एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा वाद की सुनवाई के उपरांत श्री वर्मा के विरूद्ध आरोप साबित हुआ तथा इन्हें एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा हुई। उक्त आदेश के विरूद्ध श्री वर्मा ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में एक अपील (क्रिमिनल अपील (एस॰जे॰) हुई। उक्त आदेश के विरूद्ध श्री वर्मा ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में एक अपील (क्रिमिनल अपील (एस॰जे॰) हुई। उक्त आदेश के विरूद्ध श्री वर्मा ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में एक अपील (क्रिमिनल अपील (एस॰जे॰) 2012 को पारित आदेश द्वारा इन्हें दोष मुक्त करते हुए निगरानी 8/2001) दायर किया जिसमें दिनांक 14.12.2012 को पारित आदेश द्वारा इन्हें दोष मुक्त करते हुए निगरानी सं॰-188/2001) दायर किया जिसमें दिनांक दंडादेश को खारिज कर दिया गया। न्यायालय के दंडादेश को खारिज कर दिया गया। (दस प्रतिशत) लंबित पेंशन, दिनांक 22.09.1978 से श्री वर्मा द्वारा उक्त न्यायादेश के आलोक में अपने 10 1981 तक की निलंबन अवधि के पूर्ण वेतन भुगतान (प्राप्त जीवन यापन भत्ता की राशि घटाकर) करने 1981 तक की निलंबन अवधि के पूर्ण वेतन भुगतान (प्राप्त जीवन यापन भत्ता की राशि घटाकर) करने दिनांक 11.03.1981 तक की निलंबन अवधि के पूर्ण वेतन भुगतान (प्राप्त जीवन यापन भत्ता की राशि घटाकर) करने टना उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-/14) दायर किया गया है। टना उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-/14) दायर किया गया है। हेतु पुनः माननीय पटना उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-/14) दायर किया गया है। विभागीय स्तर पर क्रिमिनल अपील (एस॰जे॰) सं॰-188/2001 में दिनांक 14 अनुपालन में कार्रवाई करते हुए विधि विभाग से मंतव्य माँगा गया। विधि विभाग से प्राप्त मंतव्य निम्नवत्‌ है :- अनुपालन में कार्रवाई करते हुए विधि विभाग से मंतव्य माँगा गया। विधि विभाग से प्राप्त (i) ''विचारण न्यायालय द्वारा साक्ष्य के आधार पर आरोप सिद्ध करते हुए दोषी ठहराया गया तथा दंडादेश विचारण न्यायालय द्वारा साक्ष्य के आधार पर आरोप सिद्ध करते हुए दोषी ठहराया गया तथा दंडादेश विचारण न्यायालय द्वारा साक्ष्य के आधार पर आरोप सिद्ध करते हुए दोषी ठहराया गया तथा दंडादेश पारित किया गया है। परन्तु अपीलीय न्यायालय द्वारा साक्ष्य की तकनीकी त्रुटि के आधार पर दोष मुक्त कर दिया गया पारित किया गया है। परन्तु अपीलीय न्यायालय द्वारा साक्ष्य की तकनीकी त्रुटि के आधार पर दोष मुक्त कर दिया गया पारित किया गया है। परन्तु अपीलीय न्यायालय द्वारा साक्ष्य की तकनीकी त्रुटि के आधार पर दोष मुक्त कर दिया गया ा (ए॰आई॰आर॰-2006 एस॰सी॰ पेज सं॰-531) के सदृश मामले में है। बलदेव सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (ए॰आई॰आर॰-2006 एस॰सी॰ पेज सं॰-531) के सदृश मामले में है। बलदेव सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिय माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह मत व्यक्त किया गया है कि आपराधिक विचारण में अभियुक्त के दोष मुक्त होे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह मत व्यक्त किया गया है कि आपराधिक विचारण में अभियुक्त के दोष मुक्त होे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह मत व्यक्त किया गया है कि आपराधिक विचारण में अभियुक्त के दोष मुक्त होे जाने पर वह सभी बकाया राशि का हकदार नहीं होता जहाँ उस अवधि में कोई कार्य नहीं किया गया हो। उक्त के जाने पर वह सभी बकाया राशि का हकदार नहीं होता जहाँ उस अवधि में कोई कार्य नहीं किया गया हो। जाने पर वह सभी बकाया राशि का हकदार नहीं होता जहाँ उस अवधि में कोई कार्य नहीं किया गया हो। आधार पर निलंबन अवधि/जेल अवधि में केवल जीवन यापन भत्ता ही देय हैै।'' आधार पर निलंबन अवधि/जेल अवधि में केवल जीवन यापन भत्ता ही देय हैै। (ii) अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश की तिथि से पूर्ण पेंशन का भुगतान किया जा सकता है। अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश की तिथि से पूर्ण पेंशन का भुगतान किया जा सकता है। अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश की तिथि से पूर्ण पेंशन का भुगतान किया जा सकता है। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 8 फरवर(cid:22) 2016 (iii) चूँकि श्री वर्मा सेवानिवृत हो चुके है और रिश्वत जैसे गंभीर अपराध में गिरफ्तार होकर जेल गए तथा विचारण न्यायालय द्वारा प्रथम द्रष्ट्‌या दोष भी पाया गया अतः उनकी प्रोन्नति पर विचार किया जाना उचित नहीं होगा। यदि श्री वर्मा आपराधिक मामले में गिरफ्तार किये जाने के तिथि से पूर्व किसी प्रोन्नति के हकदार होते हों तो उस पर विभाग विचार कर सकता है। विधि विभाग के उक्त परामर्श के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर निम्न कार्रवाई की गयी :- (i) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावाली-2005 के नियम-11(5) के प्रावधानानुसार निलंबन अवधि के वेतन भुगतान के संबंध में विभागीय पत्रांक-14007, दिनांक 16.09.2015 द्वारा श्री वर्मा से कारण पृच्छा की गयी तथा निलंबन अवधि में पूर्ण वेतन भुगतान संबंधी उनके दावे के समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। श्री वर्मा को निबंधित डाक द्वारा उनके दो अलग-अलग पते पर उक्त कारण पृच्छा का पत्र भेजा गया परन्तु स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा। इसमें से एक पत्र तो Refused अभ्युक्ति के साथ वापस लौट आया। इस प्रकार समुचित अवसर दिये जाने के बावजूद स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने से यह उजागर हुआ कि श्री वर्मा को अपने दावे के समर्थन में कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में निलंबन अवधि में केवल जीवन यापन भत्ता ही देय होता है। (ii) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा क्रिमिनल अपील (एस॰जे॰) सं॰-188/2001 में पारित आदेश (दिनांक प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, सरकार के अपर सचिव।———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 122%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in

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