(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
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श्री वर्मा द्वारा उक्त न्यायादेश के आलोक में अपने 10% (दस प्रतिशत) लंबित पेंशन, दिनांक 22 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 8 फरवर(cid:22) 2016 (iii) चूँकि श्री वर्मा सेवानिवृत हो चुके है और रिश्वत जैसे गंभीर अपराध में गिरफ्तार होकर जेल गए तथा विचारण न्यायालय द्वारा प्रथम द्रष्ट्या दोष भी पाया गया अतः उनकी प्रोन्नति पर विचार किया जाना उचित नहीं होगा। यदि श्री वर्मा आपराधिक मामले में गिरफ्तार किये जाने के तिथि से पूर्व किसी प्रोन्नति के हकदार होते हों तो उस पर विभाग विचार कर सकता है। विधि विभाग के उक्त परामर्श के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर निम्न कार्रवाई की गयी :- (i) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावाली-2005 के नियम-11(5) के प्रावधानानुसार निलंबन अवधि के वेतन भुगतान के संबंध में विभागीय पत्रांक-14007, दिनांक 16.09.2015 द्वारा श्री वर्मा से कारण पृच्छा की गयी तथा निलंबन अवधि में पूर्ण वेतन भुगतान संबंधी उनके दावे के समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। श्री वर्मा को निबंधित डाक द्वारा उनके दो अलग-अलग पते पर उक्त कारण पृच्छा का पत्र भेजा गया परन्तु स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा। इसमें से एक पत्र तो Refused अभ्युक्ति के साथ वापस लौट आया। इस प्रकार समुचित अवसर दिये जाने के बावजूद स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने से यह उजागर हुआ कि श्री वर्मा को अपने दावे के समर्थन में कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में निलंबन अवधि में केवल जीवन यापन भत्ता ही देय होता है। (ii) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा क्रिमिनल अपील (एस॰जे॰) सं॰-188/2001 में पारित आदेश (दिनांक प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, सरकार के अपर सचिव।