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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 19 February 2016

Published 19 February 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-02-19.159
Languages
English, Hindi

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सं0 02/रा0;आ0द्ध-14/13-191/एम0—रोहतास जिलान्तर्गत मौजा-धैड़ाढ़ क्षेत्रा के चार एकड़ के अतिरिक्त पर्यावरण एवं वन तथा जल संसाध्न विभाग की भूमि में अवैध् पत्थर उत्खनन की मात्राा का आकलन एवं गणना नहीं करने, करबंदिया पहाड़ी के गिजबाही, गायघाट एवं पफाजीलपुर में वृहद पैमाने पर पत्थर के अवैध् उत्खनन की जाँच एवं गणना नहीं करने, बासा एवं आम्रा क्षेत्रा में शेष दस खनन पट्‌टेधरियों द्वारा अवैध् उत्खनन की विध्सिम्मत कार्रवाई नहीं करने तथा अवैध् रूप से बिना अनुज्ञप्ति के लीजधरियों द्वारा पत्थर का किये गये भंडार का निरीक्षण एवं आकलन कर नियमानुसार कार्रवाई नहीं करने, प्रधन सचिव के निरीक्षण एवं जाँच प्रतिवेदन पर कार्रवाई के लिए तत्कालीन उप निदेशक, पटना अंचल श्री लक्ष्मी प्रसाद साहू को दी गयी विशेष जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करने एवं विशेष जिम्मेवारी का अनुपालन नहीं किये जाने के इन कारणों से सरकार के आश्वासन का भी अनुपालन नहीं हुआ, एवं अवैध् उत्खनन को बढ़ावा मिला, तथा अवैध् जप्त पत्थर का निस्तार नहीं होने से राजस्व में हानि हुई। इन सारे 8 ;आठद्ध आरोपों पर विभागीय पत्राांक 2970 दिनांक 06.11.12 द्वारा श्री साहू से स्पष्टीकरण मांगा गया। पुनः विभागीय पत्राांक 3088/एम0 दिनांक 26.11.12 द्वारा 15 ;पन्द्रहद्ध दिनों के अन्दर स्पष्टीकरण पर जवाब मांगा गया। श्री साहू ने अपने पत्राांक 371 दि0 03.12.13 द्वारा स्पष्टीकरण का उत्तर प्रस्तुत किया। स्पष्टीकरण के सम्यक समीक्षोपरांत आरोप-पत्रा ;प्रपत्रा 'क'द्ध गठित कर विभागीय अध्सिूचना ज्ञाप संख्या-1803 दिनांक 28.04.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक ;वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपीलद्ध नियमावली, 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत श्री लक्ष्मी प्रसाद साहू, तत्कालीन उप निदेशक, पटना अंचल सम्प्रति दरभंगा अंचल ;अतिरिक्त प्रभार मुजफ्रपफरपुर अंचलद्ध के विरू( विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

2. जाँच प्राध्किार, सचिव, जल संसाध्न विभाग-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना ने अपने पात्राांक-178/अ0वि0जां0, दिनांक 06.04.2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जाँच प्राध्किार द्वारा आरोप संख्या-01 से 08 तक प्रमाणित नहीं होने का अभिमत दिया गया है। उल्लेखनीय है कि विभागीय कार्यवाही संचालन के दरम्यान आरोपित पदाध्किारी से पूछे गये स्पष्टीकरण पर संचालन पदाध्किारी के ज्ञाप संख्या 34/गो0, दिनांक 17.12.14 में निहित निदेश के 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1111 9999 फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) 2016201620162016 आलोक में समेकित रूप से विभागीय अभिमत संचालन पदाध्किारी को विभागीय पत्राांक 200/एम0 दिनांक 21.01.15 द्वारा उपलब्ध् कराया गया। सरकार ने जाँच प्रतिवेदन से असहमति व्यक्त की और असहमति के बिन्दुओं को कंडिकावार अंकित करते हुए आरोपित पदाध्किारी से द्वितीय कारण-पृच्छा पूछी गयी। श्री साहू तत्कालीन प्रधन सचिव श्री बी0के0 वर्मा के नेतृत्व में रोहतास गये जाँच दल के सदस्य थे, और माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा द्वारा सदन में दिये गये नियमन के अनुपालन में उक्त जाँच सम्पन्न की गयी थी, किन्तु जाँच के दौरान तथा बाद में बैठक करके जो जिम्मेदारी आरोपित पदाध्किारी को दी गयी थी, उनसे उनके द्वारा अनभिज्ञता व्यक्त करना अनुचित था। साथ ही तत्कालीन प्रधन सचिव, श्री के0पी0 रामै¸या ने भी अपने पत्राांक 384/एम0 दिनांक 04.10.2012 के द्वारा स्पष्ट किया गया था कि पूर्व में अवैध् उत्खनन की रोकथाम करने एवं जब्त किये गये सामानों की नीलामी/ कानूनी कार्रवाई करने के बावत उनको निदेश दिया गया था और यह भी निदेश दिया गया था कि जबतक वहाँ किसी नियमित पदाध्किारी का पदस्थापन नहीं होता है, तबतक वहाँ का सारा कार्य वह संपादित करेंगे, किन्तु श्री साहू ने इसकी भी अवहेलना की। इसके अलावा श्री साहू जैसे वरीय तकनीकी पदाध्किारी इससे पूर्णतः अवगत थे कि बिहार खनिज ;अवैध् खनन परिवहन तथा भंडारण निवारणद्ध नियमावली, 2003 की सुसंगत धराओं के तहत जब्त सामग्री चिप्स, बोल्डर, मेटल आदि ;34,80,000 घन पफीटद्ध की नीलामी करने और उससे प्राप्त राजस्व को कोषागार में जमा कराने के लिए समाहर्त्ता सक्षम पदाध्किारी थे, किन्तु श्री साहू ने समाहर्त्ता को इस आशय का परामर्श एवं सुझाव नहीं दिया। इतना ही नहीं, उप निदेशक, पटना के रूप में पदस्थापित श्री साहू को अपने अंचल के अन्तर्गत रोहतास जिले में अवैध् खनन करने वालों के विरू( कानूनी कार्रवाई करने की पूरी शक्ति बिहार लघु खनिज समनुदान नियमावली, 1972 के नियम 40 के तहत प्रदत्त थी, किन्तु उन्होंने वांछित / समुचित कार्रवाई नहीं की। इसके अलावे श्री साहू नेे लिखा है कि जब्त सामग्री के संबंध् में जिलाध्किारी के पत्राांक 1035 दिनांक 01.10.11 के द्वारा विभाग से मार्गदर्शन मांगा गया था, जबकि वास्तव में उक्त पत्रा खान एवं भूतत्व विभाग ;मुख्यालयद्ध को प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि सत्य यह है कि जिला खनन कार्यालय, रोहतास के कार्यालय में मूल संचिका में संबंध्ति पत्रा मूल में तथा कार्यालय प्रति सहित मौजूद है, और उसे वहाँ से भेजा ही नहीं गया, जिसकी संपुष्टि उस कार्यालय में पदस्थापित लिपिक ने लिखित रूप से एक अन्य संचिका में की है। इसके अलावा श्री साहू को विभागीय निदेश के अनुपालन हेतु कई बार पत्रा / स्मार पत्रा लिखे गये थे, किन्तु उन्होंने उनका अनुपालन नहीं किया, जो उनकी घृष्टता, कर्त्तव्यहीनता एवं अनुशासनहीनता का घोतक है।

3. विभागीय पत्राांक-1932, दिनांक 05.06.2015 द्वारा जाँच प्राध्किार के अभिमत से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं को अंकित कर आरोपित पदाध्किारी से बिहार सरकारी सेवक ;वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपीलद्ध नियमावली, 2005 के नियम 18;3द्ध के अन्तर्गत लिखित अभ्यावेदन 15 ;पन्द्रहद्ध दिनो के अन्दर मांगा गया । उल्लेखनीय है कि जाँच प्रतिवेदन में अंकित अभिमत से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दु अंकित करते हुए आरोपित पदाध्किारी से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब मांगा गयाः-

i. अल्प सूचित प्र. सं.-29;अ.सू.-6द्ध में माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा द्वारा सदन में दिये गये नियमन के अनुपालन में प्रधन सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा दिनांक 9.07.11 को रोहतास जिलान्तर्गत संबंध्ति क्षेत्राों का स्थल निरीक्षण एवं जाँच किया गया। प्रधन सचिव के साथ विभाग के तकनीकि पदाध्किारी मेंः- ;कद्ध श्री इन्द्रदेव पासवान, अपर निदेशक

;खद्ध श्री लक्ष्मी प्रसाद साहू, उपनिदेशक, पटना

;गद्ध श्री आनंद प्रकाश सिन्हा, उपनिदेशक;मु0द्ध

;ध्द्ध श्री संजय कुमार सिंह, सहायक निदेशक, भोजपुर

;चद्ध श्री अर्जून प्रसाद, सहायक निदेशक, सासाराम

;छद्ध श्री महेश्वर पासवान, खान निरीक्षक, सासाराम

मौजूद थे। इसलिए प्रधन सचिव द्वारा जाँच के दौरान एवं बाद में बैठक कर जो विशेष जबावदेही/जिम्मेवारी सहायक निदेशक, रोहतास एवं उपनिदेशक, पटना को अवैध् उत्खनन के विरू( कार्रवाई से संबंध्ति दिया गया था, उससे अनभिज्ञ होने की बात बेमानी है। ऐसे भी उपनिदेशक, पटना के अध्ीन जिला खनन कार्यालय, रोहतास पड़ता है। उपनिदेशक नियंत्राी पदाध्किारी है, उन्हें स्वयं भी इन कार्याें को स्वतः पूरी करनी है। तत्कालीन सहायक निदेशक, रोहतास के विरू( विभागीय कार्यवाही अलग से चलाई जा रही है तथा तत्कालीन खान निरीक्षक के विरू( भी आरोप पत्रा ;प्रपत्रा 'क'द्ध गठित कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसलिए आरोपी पदाध्किारी का यह कहना कि उन्हें Single Out कर कार्रवाई3 (cid:30)बहार गजट (cid:30)बहार गजट (cid:30)बहार गजट (cid:30)बहार गजट ((((असाधारणअसाधारणअसाधारणअसाधारण)))),,,, 19191919 फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) 2016201620162016 की जा रही है, सरासर गलत है। जाँच संचालन पदाध्किारी द्वारा सभी आरोपों को समेकित रूप से जाँच कर प्रतिवेदन दिया गया है। यद्यपि आरोपी पदाध्किारी के बचाव ब्यान का उल्लेख किया गया है, परंतु अभियोजन की तरपफ से प्रस्तोता पदाध्किारी के मौखिक एवं लिखित साक्ष्यों का प्रतिवेदन में कहीं उल्लेख नहीं है।

ii. सहायक निदेशक, रोहतास के पत्राांक 831/एम दिनांक 8.08.11 से बताया गया कि धैड़ाढ़ में अनिल सिंह एवं अजय सिंह के खनन पट्‌टा क्षेत्राों से हटकर हुए अवैध् खनन कार्यों की मापी तो की गई परंतु वन विभाग एवं सिंचाई विभाग के प्रतिनिध् िनहीं रहने के कारण, अवैध् खनन का आकलन नहीं किया जा सका। जब नापी कर ली गई तो कितना अवैध् उत्खनन पट्‌टा क्षेत्रा से बाहर हुआ है, उसका सहज आकलन किया जा सकता है। मौजा अमरा एवं बासा में जाँच के समय खनन कार्य बंद पाया गया परंतु स्थल देखने पर पाया गया कि अवैध् खनन कार्य होता रहा है। परंतु आरोपित द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे इनकी लापरवाही स्पष्ट होती है।

iii. मौजा-अमरा एवं बासा ;जिला रोहतासद्ध के खनन पट्‌टा क्षेत्राों के बाहर भंडारित पत्थरों की मापी की गई, जिसे जप्त कर सुरक्षा में स्थानीय निवासी श्री श्याम सुंदर प्रसाद, पिता-देवनाथ साह, ग्राम-विश्रामपुर, थाना-सासाराम जिला-रोहतासके जिम्मेनामे में सुर्पुद किया गया। परंतु उक्त जप्त पत्थर को लोक नीलामी से निस्तारित करने की कार्रवाई नहीं की गई। उपनिदेशक इसके लिए सक्षम पदाध्किारी होते हैं। नियमावली के प्रावधनान्तर्गत उन्हें समाहर्त्ता से मिलकर आवश्यक परामर्श एवं सहयोग देनी चाहिए थी। ऐसा नहीं करने से सरकार को राजस्व की क्षति हुई है। 34,80,165/-सी.एपफ.टी. पत्थर जो बासा/अमरा में जप्त कर जिम्मेनामा पर दिया गया, उसकी चोरी होने से राजस्व की क्षति हुई है। यदि समय पर नीलामी करा दी गई होती तो ऐसा नहीं होता। आरोपी पदाध्किारी ने अपने पत्राांक 410/एम0, दिनांक 04.12.12 में स्वयं स्वीकार किये हैं कि नियमानुसार लघु खनिज के मामले में पट्‌टा/अनुज्ञा स्वीकृत करने/अस्वीकृत करने तथा अन्य कार्रवाई हेतु सम्पूर्ण शक्ति समाहर्त्ता को प्रदत है। ऐसी स्थिति में समाहर्त्ता से मिलकर उन्हें बतानी चाहिए थी, न कि विभाग से निदेश का इंतजार करना चाहिए था। वास्तव में रोहतास कार्यालय से खान एवं भूतत्व विभाग को मार्गदर्शन हेतु कोई पत्रा ही नहीं भेजा गया था। यह आरोपित की घोर लापरवाही का परिचायक है। अन्य अवैध् उत्खनन/भंडारण का तो आजतक नापी/आकलन तक नहीं किया गया है। यह इनके सरकारी कार्य में घोर लापरवाही, कर्त्तव्यहीनता, अनुशासनहीनता को अभिव्यक्त करता है। ज्ञातव्य है कि तत्कालीन प्रधन सचिव ने श्री साहू को रोहतास में रहकर विभागीय दायित्वों का निर्वाह करने का आदेश दिया था।

iv. कार्यालय आदेश ज्ञापांक 305/एम., दिनांक 19.07.11 से प्रधन सचिव द्वारा दिये गये निदेश के बिन्दुओं का त्वरित अनुपालन हेतु रोहतास में दो खान निरीक्षकों एवं एक लिपिक की अतिरिक्त रूप से प्रतिनियुक्ति की गई। पिफर भी उपनिदेशक श्री साहू द्वारा अनुपालन में घोर लापरवाही बरती गई, जो कर्त्तव्यहीनता का परिचायक है।

v. श्री लक्ष्मी प्रसाद साहू, तत्कालीन उपनिदेशक, पटना ने अपने पत्राांक 335/एम0 दिनांक 01.08.11 में स्वयं स्वीकार किये गये हैं कि प्रधन सचिव द्वारा दिये गये निदेश का त्वरित गति से अनुपालन किया जा रहा है तथा अवैध् रूप से भंडारित पत्थर खनिज की मात्राा को नियमानुसार जप्ती के उपरांत स्थानीय थाना में सुरक्षित रखे जाने में तकनीकी कठिनाई हो रही है। इसके लिए उन्हें जिलाध्किारी/ आरक्षी अध्ीक्षक, रोहतास से स्वयं भी मिलना चाहिए था। क्योंकि प्रधन सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग का निरीक्षण प्रतिवेदन जिला के सभी पदाध्किारियों को पूर्व में ही भेजा गया था। यह श्री साहू द्वारा तथ्य से ध्यान हटा कर पत्थर मापिफयाओं को संरक्षण देना प्रमाणित करता है, जिससे अवैध् खनन जारी रहा।

vi. विभागीय पत्राांक 1688/एम., दिनांक 28.07.11 से उपनिदेशक, पटना को उत्खनित पत्थर की मात्राा आकलन कर गणना करने एवं वसूली करने हेतु कुल 3 बिन्दुओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निदेश दिया गया था। जिसका अनुपालन नहीं किया गया, इस प्रकार विधन सभा में सरकार के आश्वासन को इनके द्वारा विपफल करने का प्रयास ही माना जायेगा। यह आचरण सरकारी कर्मचारी के आचरण के बिल्कुल विरू( है। vii. उपनिदेशक, पटना ने अपने पत्राांक 343/एम से केवल सहायक निदेशक द्वारा किये गये कार्यों से विभाग को अवगत कराने का मात्रा प्रयास किया है। उक्त पत्रा में उनके द्वारा स्वीकार किया गया है कि पट्‌टा क्षेत्रा से बाहर4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1111 9999 फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) 2016201620162016 किये गये खनिकार्य की मापी कार्य सुनिश्चित करा ली गई है। परंतु इसकी मात्राा का कहीं उल्लेख नहीं किया गया है। इस प्रकार केवल कागजी खानापूर्ति का कार्य इनके द्वारा किया गया है। यह आचरण भी उनके जैसे वरीय तकनीकी पदाध्किारी को समस्या एवं दायित्व से भागने की ओर इंगित करता है।

viii. प्रधन सचिव, खान एवं भूतत्व ने पत्राांक 384/एम., दिनांक 4.10.12 से उपनिदेशक, पटना को, पूर्व में आवंटित विशेष दायित्व का अनुपालन करने एवं रोहतास में रहकर कार्य निष्पादन करने का आदेश दिया गया, परंतु इसका अनुपालन भी नहीं किया गया। आदेशोल्लंघन का मामला स्वतः प्रमाणित होता है।

ix. विभागीय पत्राांक 1562/एम., दिनांक 14.07.11, पत्राांक 1688/एम., दिनांक 28.07.11, पत्राांक 2970/दिनांक 6.11.12 एवं पत्राांक 3088/ दिनांक 26.11.12 का अनुपालन नहीं करते हुए सरकार के आदेश का श्री साहू द्वारा उल्लंघन कर पत्थर मापिफयाओं को संरक्षण दिया गया, जिससे अवैध् उत्खनन को बढ़ावा मिला एवं सरकार को राजस्व की हानि हुई।

4. आरोपित पदाध्किारी ने अपने पत्राांक 129/एम0 दिनांक 16.06.15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब प्रस्तुत किया। उल्लेखनीय है कि श्री साहू ने अपनी द्वितीय कारण पृच्छा/अभिकथन में कहा है कि ''प्रस्तावित कार्य योजना'' के अतिरिक्त कोई ''अनुमोदित कार्य योजना'' उन्हें नहीं दी गयी थी। सच्चाई यह है कि जब वह तत्कालीन प्रधन सचिव के नेतृत्व में गठित जाँच दल में शामिल थे, तो ''प्रस्तावित कार्य योजना'' विभागीय पदाध्किारियों के द्वारा बनाई गयी थी, किन्तु मुख्य तथ्य को श्री साहू के द्वारा छिपाया जाता रहा और बाल की खाल निकालकर '' प्रस्तावित कार्य योजना की जगह अुमोदित कार्य योजना'' के बारे में पृच्छा की जाती रही है। जबकि उन्होंने प्रस्तावित कार्य योजना का विध्वित्‌ अनुपालन नहीं किया। उन्हें कई बार स्मारित करने के बावजूद उन्होंने वांछित प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया जो उच्चाध्किारी के आदेश की अवहेलना, पत्थर मापिफया को संरक्षण दिये जाने तथा उसके पफलस्वरूप बिहार सरकार को भारी राजस्व की क्षति का द्योतक है।

5. आरोपित पदाध्किारी द्वारा प्रस्तुत जबाब/अभिकथन की समीक्षा की गई। इस विषय की महत्ता के मद्देनजर विभाग द्वारा तीन सदस्यों का जाँच दल बनाकर स्थल जाँच जून, 2015 में करायी गयी और जाँच में यह पाया गया कि जब्त किये गये चिप्स, पत्थर, मेटल, पटिया आदि में से 8,37,673.50 घन पफीट खनिज की चोरी हो गयी, जिसके लिये विभागीय मंत्राी के अनुमोदन से जिम्मानामा लेने वाले श्री श्याम सुन्दर प्रसाद, तथा तत्कालीन दो स्थानीय पदाध्किारियों ;खान निरीक्षक एवं प्रभारी सहायक निदेशकद्ध के विरू( कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। अस्तु उक्त खनिज की जिम्मानामा लेने वाले श्री श्याम सुन्दर प्रसाद, तत्कालीन खान निरीक्षक, श्री महेश्वर पासवान तथा तत्कालीन प्रभारी सहायक निदेशक श्री अर्जुन प्रसाद के विरू( सासाराम टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी तथा बचे हुए चिप्स, बोल्डर, मेटल आदि की लोकनीलामी कराने हेतु समाहर्त्ता, रोहतास को लिखित आदेश दिया गया है। उक्त चोरी किये गये खनिज का मूल्य एवं रॉयल्टी लगभग सैंतालीस लाख इकतालीस हजार रूपये है, जिसके लिये आरोपित पदाध्किारी श्री साहू भी कापफी हद तक जिम्मेदार हैं। सम्य्‌क समीक्षोपरांत श्री लक्ष्मी प्रसाद साहू, तत्कालीन उप निदेशक, पटना अंचल ;सम्प्रति दरभंगा अचंलद्ध ;अतिरिक्त प्रभार मुजपफ्‌पफरपुर अंचलद्ध के विरू( प्रतिवेदित गंभीर कदाचार के आरोपों में दोष सि( पाते हुए सक्षम अनुशासनिक प्राध्किार ;माननीय मुख्य मंत्राी, बिहारद्ध द्वारा बिहार सरकारी सेवक ;वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपीलद्ध नियमावली, 2005 के नियम 14 ;xiद्ध के तहत सेवा से बर्खास्त ;Dismissद्ध करने की शास्ति अध्रिोपण प्रस्ताव को अनुमोदित करते हुए बर्खास्तगी ;Dismissalद्ध प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त करने का निदेश दिया गया है ।

6. उक्त प्रस्तावित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्राांक 2905/एम0 दिनांक 28.07.15 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श मांगा गया।

7. आयोग ने अपने पत्राांक-06/प्रो0-16-03/15-;1677द्धलो0से0आ0 दि0 29.09.15 द्वारा उक्त प्रस्तावित दंड से असहमति का परामर्श संसूचित किया है। सक्षम प्राध्किार द्वारा असहमति के बिन्दुओं को सकारण विश्लेषण किया गया है। उपलब्ध् तथ्यों से स्पष्ट पाया गया कि आरोपित पदाध्किारी ने अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन नहीं किया है। अवैध् उत्खनन के विरू( इन्होंने विध् ि सम्मत कार्रवाई नहीं की। इन्होंने बिहार लघु खनिज नियमावली, 1972 के नियम-40 के तहत प्रदत्त शक्ति का प्रयोग नहीं किया तथा अवैध् उत्खनन रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। इन्होंने तत्कालीन प्रधन सचिव, श्री के0पी0 रमै¸या के द्वारा अवैध् खनन रोकने का दिये गये आदेश की अवहेलना की। इन्होंने 34,80,000 घन पफीट जब्त मेटल,5 (cid:30)बहार गजट (cid:30)बहार गजट (cid:30)बहार गजट (cid:30)बहार गजट ((((असाधारणअसाधारणअसाधारणअसाधारण)))),,,, 19191919 फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) 2016201620162016 चिप्त, बोल्डर की नीलामी एवं प्राप्त राशि को कोषागार में जमा करने का परामर्श सक्षम प्राध्किार, समाहर्त्ता को नहीं दिया। अवैध् खनन में जब्त पत्थरों का निस्तार इन्होंने नहीं किया। पफलस्वरूप सरकार को बड़ी राजस्व की क्षति हुई। जब्त किये गये पत्थर से 8,37,673.50 घन पफीट चोरी हो गई। किन्तु श्री साहू ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। चोरी गये खनिज का मूल्य एवं रॉयल्टी लगभग रु0 3741000.00 ;रूपये सैंतीस लाख एकतालीस हजारद्ध है जिसके लिए श्री साहू जिम्मेवार हैं। 8. उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष, बिहार विधन सभा द्वारा दिये गये नियमन के अनुपालन में तत्कालीन प्रधन सचिव, श्री बी0के0 वर्मा के नेतृत्व में एक जाँच दल गठित किया गया था, जिसके सदस्य आरोपी पदाध्किारी भी थे। लेकिन जाँच के बाद अवैध् खनन रोकने तथा कार्रवाई करने की जिम्मेवारी दी गई, इस पर इन्होंने अनभिज्ञता व्यक्त की है। यह इनकी कर्त्तव्यहीनता तथा लापरवाही का द्‌योतक है।

9. उपर्युक्त समीक्षा से स्पष्ट है कि आरोपित पदाध्किारी ने अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन नहीं किया है तथा इनके कृत्य से सरकार को भारी राजस्व की क्षति हुई है। श्री लक्ष्मी प्रसाद साहू, तत्कालीन उप निदेशक, अंचल कार्यालय, पटना सम्प्रति उप निदेशक, अंचल कार्यालय, दरभंगा ;अतिरिक्त प्रभार तिरहुत अंचल, मुजफ्रपफरपुरद्ध कर्त्तव्यहीनता, आदेश उल्लंघन तथा लापरवाही के दोषी हैं। अतः आयोग द्वारा संसूचित परामर्श से असहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक ;वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपीलद्ध नियमावली, 2005 यथा संशोध्ति 2007 के नियम 14 ;XIद्ध के तहत ''सेवा से बर्खास्तगी'' जो सामान्यतया सरकार के अध्ीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी, की शास्ति अध्रिोपित की जाती है।

आरोपित पदाध्किारी का व्यक्तिगत विवरणः-

नाम-श्री लक्ष्मी प्रसाद साहू पिता का नाम-स्व0 एच0एन0 साहू पता- मोहल्ला ब्रãपुरा, थाना-ब्रãपुरा, जिला-मुजफ्रपफरपुर जन्म तिथि-26.11.1957

जि0ख0 पदाध्किारी के पद पर पदभार ग्रहण-27.04.1989

सेवा सम्पुष्टि की तिथि-27.04.1992

प्रोन्नति का पद-उप निदेशक।

सेवानिवृत्ति की तिथि-30.11.2017

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

सुशील कुमार,

सरकार के अवर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 19 February 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-02-19.159/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-02-19.159.