(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:19)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या गजट ॢबह(cid:4)र गजट ॢब
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत (cid:24) च(cid:26)(cid:27) 1(cid:21)3(cid:24) (cid:29)श(cid:15)(cid:30)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 23(cid:21)) पटन(cid:4)
पटन(cid:4)(cid:31) स मव(cid:4)र(cid:31) 28 म(cid:4)चZ 2(cid:15)1$
सं0 08/आरोप-01-132/2014,सा॰प्र॰—1174 सं0 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 22 जनवरी 2015
प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-18209 दिनांक 28.11
ष्ण, बि0प्र0से0, (कोटि क्रमांक-402/11) तत्कालीन अंंचल अधिकारी, पालोजोरी, देवघर (सम्प्रति श्री उदय —ष्ण, बि0प्र0से0, (कोटि क्रमांक-402/11) तत्कालीन अंंचल अधिकारी, पालोजोरी, देवघर (सम्प्रति ष्ण, बि0प्र0से0, (कोटि क्रमांक-402/11) तत्कालीन अंंचल अधिकारी, पालोजोरी, देवघर (सम्प्रति अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी) के विरूद्ध अंचल कार्यालय, पालोजोरी के नजारत रोकड़ से सरकारी राशि के अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी) के विरूद्ध अंचल कार्यालय, पालोजोरी के नजारत रोकड़ से सरकारी राशि के अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी) के विरूद्ध अंचल कार्यालय, पालोजोरी के नजारत रोकड़ से सरकारी राशि के गबन से संबंधित प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-18209 दिनांक 28 11.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित की सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित की सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित की डल, पटना के पत्रांक-1902 दिनांक 28.08.2014 गयी थी। जाँच पदाधिकारी, संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक-1902 दिनांक 28 गयी थी। जाँच पदाधिकारी, संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमं ष्ण के विरूद्ध गठित सभी नौ द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया जिसमें आरोपित पदाधिकारी श्री उदय —ष्ण के विरूद्ध गठित सभी नौ द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया जिसमें आरोपित पदाधिकारी श्री उदय आरोपों को निष्कर्ष रूप में साक्ष्य के अभाव में प्रमाणित नहीं पाया गया। आरोपों को निष्कर्ष रूप में साक्ष्य के अभाव में प्रमाणित नहीं पाया गया। 2. श्री उदय —ष्ण के विरूद्ध गठित आरोप का सारांश
ष्ण के विरूद्ध गठित आरोप का सारांश यह है कि दिनांक 20.02.1996 से दिनांक 21
1996 से दिनांक 21.12.1999 तक अंचल अधिकारी, पालोजोरी के पदस्थापन काल में उनके द्वारा अंचल नजारत के रोकड़ पंजियों का नियमानुसार तक अंचल अधिकारी, पालोजोरी के पदस्थापन काल में उनके द्वारा अंचल नजारत के रोकड़ पंजियों का नियमानुसार तक अंचल अधिकारी, पालोजोरी के पदस्थापन काल में उनके द्वारा अंचल नजारत के रोकड़ पंजियों का नियमानुसार संधारण नहीं कराया गया एवं समय-समय पर पर्यवेक्षण नहीं किया गया। फलतः इस अवधि में बैंक में रखी गयी संधारण नहीं कराया गया एवं समय-समय पर पर्यवेक्षण नहीं किया गया। फलतः इस अवधि में बैंक में रखी गयी संधारण नहीं कराया गया एवं समय-समय पर पर्यवेक्षण नहीं किया गया। फलतः इस अवधि में बैंक में रखी गयी राशियों से प्राप्त सूद की राशियों को रोकड़ पंजी में इन्द्राज नहीं किया गया तथा रोकड़ पंजी एवं बैंक खातों के राशि यों से प्राप्त सूद की राशियों को रोकड़ पंजी में इन्द्राज नहीं किया गया तथा रोकड़ पंजी एवं बैंक खातों के राशि यों से प्राप्त सूद की राशियों को रोकड़ पंजी में इन्द्राज नहीं किया गया तथा रोकड़ पंजी एवं बैंक खातों के राशि 00 (छः लाख पचपन हजार दौ में अंतर प्रारंभ हुआ। परिणामस्वरूप अतंतः जाँच की तिथि तक गबन की राशि 655242.00 (छः लाख पचपन हजार दौ में अंतर प्रारंभ हुआ। परिणामस्वरूप अतंतः जाँच की तिथि तक गबन की राशि 655242 बयालिस) रूपये की हो गयी।
3. उक्त आरोपों के आलोक में श्री उदय 2 (iv) दोषी नाजिर के पदस्थापन काल में लगभग छः से सात अंचलाधिकारी पदस्थापित हुए थे एवं किसी भी अंचलाधिकारी द्वारा नाजिर द्वारा की जा रही इस अनियमितता को उजागर नहीं किया गया। अंततः मामले के प्रकाश में आने पर उपायुक्त, देवघर द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए गबन की राशि वसूल कर ली गयी।
(v) हॉलाकि आरोपी पदाधिकारी, श्री उदय —ष्ण के द्वारा भी अपने पदस्थापन काल में इस अनियमितता को संज्ञान में नहीं लिया गया लेकिनं इनके विरूद्ध राशि का गबन किये जाने का कोई सीधा आरोप नहीं है। फिर भी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के रूप में उनसे हुई सजगता की कमी एवं लापरवाही के लिए वे दोषी हैं। 4. वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक् विचारोपरांत श्री उदय —ष्ण, बि0प्र0से0, (कोटि क्रमांक-402/11) तत्कालीन अंंचल अधिकारी, पालोजोरी, देवघर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) एवं नियम 19 के तहत् निम्नलिखित शास्ति अधिरोपित की जाती हैः-
(i) निन्दन
आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, सरकार के अपर सचिव।