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सं0 2/नि0था0-3010/2007-सा0प्र0—4462
सामान्य प्रशासन विभाग
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संकल्प
28 मार्च 2016
श्री मनोज कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1078/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, तरैया, सारण को श्री मनोज कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1078/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, तरैया, सारण को श्री मनोज कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1078/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, तरैया, सारण को निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 07.08.2007 को परिवादी श्री धर्मनाथ सिंह से 1500/- रूपये रि निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 07
धर्मनाथ सिंह से 1500/- रूपये रि'वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया एवं निगरानी थाना कांड संख्या 92/2007 दिनांक 08.08.2007 दर्ज किया गया। गिरफ्तार किया गया एवं निगरानी थाना कांड संख्या 92/2007 दिनांक 08 2007 दर्ज किया गया।
2. पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पत्रांक 1037 दिनांक 13 2007 द्वारा प्रतिवेदित उपर्युक्त पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पत्रांक 1037 दिनांक 13.08.2007 द्वारा प्रतिवेदित उपर्युक्त सूचना के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9971 दिनांक 05.10.2007 द्वारा दिनांक 07.08 सूचना के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9971 दिनांक
08.2007 (हिरासत में जाने की तिथि) के प्रभाव से श्री कुमार को निलंबित किया गया। प्रतिवेदित आरोपों के आधार पर श्री कुमार के विरूद्ध की तिथि) के प्रभाव से श्री कुमार को निलंबित किया गया। प्रतिवेदित आरोपों के आधार पर श्री कुमार के विरूद्ध की तिथि) के प्रभाव से श्री कुमार को निलंबित किया गया। प्रतिवेदित आरोपों के आधार पर श्री कुमार के विरूद्ध आरोप प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 4017 दिनांक 10.04.2008 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदे आरोप प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 4017 दिनांक 10
ा स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदे'ा
2008 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक दया गया। श्री कुमार के पत्रांक-'ाून्य दिनांक 26.05.2008 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक दिया गया। श्री कुमार के पत्रांक-
2008 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, सारण से मंतव्य की मांग की गयी। 7829 दिनांक 16.07.2008 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, सारण से मंतव्य की मांग की गयी। 2008 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, सारण से मंतव्य की मांग की गयी।
प्राप्त मंतव्य में प्रतिवेदित किया गया है कि जिला पदाधिकारी, सारण के पत्रांक 13 दिनांक 11.02.2009 द्वारा प्राप्त मंतव्य में प्रतिवेदित किया गया है कि जिला पदाधिकारी, सारण के पत्रांक 13 दिनांक 11
''इसकी कोई भी जानकारी कार्यालय को नहीं है। निगरानी दल के प्रतिवेदन के आलोक में कार्रवाई की जा सकती ''इसकी कोई भी जानकारी कार्यालय को नहीं है। निगरानी दल के प्रतिवेदन के आलोक में कार्रवाई की जा सकती ''इसकी कोई भी जानकारी कार्यालय को नहीं है। निगरानी दल के प्रतिवेदन के आलोक में कार्रवाई की जा सकती है।''
श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा के उपरांत 3. श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा के उपरांत श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा के उपरांत 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 31 माच(cid:24) 2016 4. श्री कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में निलंबन समाप्ति हेतु दायर सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 1251/2011 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 13.05.2011 को पारित आदे'ा के अनुपालन में श्री कुमार को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 16598 दिनांक 06.12.2012 द्वारा उनके योगदान की तिथि 07.09.2011 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया।
5. अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, बिहार, पटना के पत्रांक 109/स0को0 दिनांक 29.05.2015 द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी पर लगाये गये आरोप को आंि'ाक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
6. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(3) के संगत प्रावधान के तहत संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 8616 दिनांक 15.06.2015 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन की मांग की गयी।
7. श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 17.08.2015 में कहा गया है कि निगरानी विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्यों एवं बयानों से यह स्पष्ट होता है कि परिवादी से रि'वत की मांग सीधे आरोपित पदाधिकारी द्वारा नहीं की गयी, तथा राि'ा की बरामदगी नाजीर के पास से हुई है। उनका आगे कहना है कि उन पर रि'वत मांगने एवं रि'वत प्राप्त करने का झूठा, मनगढ़ंत आरोप लगाया गया है। उनका कहना है कि सारी घटना का मूल आधार परिवादी श्री धर्मनाथ सिंह का भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र निर्गत करने से संबंधित है तथा इसकी जाँच न तो निगरानी विभाग द्वारा की गयी और न ही संचालन पदाधिकारी द्वारा तथ्यों की पड़ताल की गयी। परिवादी जिस भूमि का भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र प्राप्त करना चाहते थे वो उनके या उनके पिताजी के नाम से नहीं था। उस भूमि का स्वामित्व मोसमात देवमानो कुँवर के नाम से था। मोसमात देवमानो कुँवर नावल्द थी और परिवादी उसकी संपाि हड़पना चाहते थे, जिसके लिए षड्यंत्र की रचना की गयी थी तथा असफल होने की आ'ांका में उन्हें फंसाने का षड्यंत्र किया गया।
8. श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, सारण का मंतव्य, संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक् समीक्षोपरांत पाया गया कि परिवादी श्री धर्मनाथ सिंह द्वारा दिनांक 12.06.2007 को भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र निर्गत करने हेतु आवेदन दिया गया था, जिस पर दिनांक 12.
06.2007 की तिथि में अंचल अधिकारी द्वारा हल्का कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक को जाँच हेतु निदे'ा दिया गया। स्पष्ट है कि अंचल कार्यालय, तरैया में परिवादी का कार्य लंबित था। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के समक्ष पुलिस उपाधीक्षक-सह-धावादल प्रभारी के द्वारा साक्ष्य स्वरूप उपलब्ध कराये गये प्री-टै्रप मैमोरेण्डम, सत्यापन प्रतिवेदन तथा परिवादी का परिवाद-पत्र समर्पित किया गया था, जिसे रंगे हाथ घूस लेते पकड़े जाने जैसे मामले के लिए साक्ष्य माना जा सकता है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा निगरानी धावादल में शामिल विभिन्न पदाधिकारियों के बयान के आधार पर श्री कुमार के विरूद्ध आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी विभागीय कार्यवाही में सम्यक् जाँचोपरांत श्री विनोद कुमार, अंचल नाजीर के पास से jkf'k का बरामद होना तथा श्री मनोज कुमार (आरोपी पदाधिकारी) के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाने पर घोल के गुलाबी हो जाने के आधार पर आरोपों को सही पाया गया।
9. उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकारयोग्य नहीं पाया गया तथा अनु'ाासनिक प्राधिकार द्वारा इसे अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (xi) के तहत सेवा से बर्खास्तगी का दंड दिये जाने का विनिि'चय किया गया।3 (cid:27)बहार गजट (असाधारण), 31 माच(cid:24) 2016 10. विभागीय पत्रांक 14792 दिनांक 09.10.2015 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से श्री कुमार के विरूद्ध विनिि'चत दंड पर परामर्ष की मांग की गई। आयोग के पत्रांक 1933 दिनांक 03.11.2015 द्वारा आयोग का अभिमत प्राप्त हुआ, जो निम्नवत् है :-
''उपर्युक्त तथ्यों पर सम्यक विचारोपरांत आयोग का मंतव्य है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित मूल आरोप पूर्ण रूप से प्रमाणित नहीं होते हैं। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित आरोपों को आंि'ाक रूप से प्रमाणित माना/पाया गया है और vkaf'kd रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए सेवा से बर्खास्तगी का दंड प्रस्ताव समानुपातिक नहीं है। उक्त परिस्थिति में, आयोग का पराम'ार् है कि विभाग द्वारा समानुपातिक दंड अधिरोपित करने पर विचार किया जाय।''
11. बिहार लोक सेवा आयोग के पराम'ार् के आलोक में vuq'kklfud प्राधिकार द्वारा पूरे मामले की पुनः समीक्षा की गयी। श्री कुमार के विरूद्ध रंगे हाथ घूस लेते पकड़े जाने जैसे गंभीर आरोप है, जिसके लिए संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के द्वारा आंि'ाक रूप से प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी विभागीय कार्यवाही में सम्यक् जाँचोपरांत श्री विनोद कुमार, अंचल नाजीर के पास से राि'ा का बरामद होना तथा आरोपी पदाधिकारी के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाने पर घोल के गुलाबी हो जाने के आधार पर आरोपों को सही पाया गया। जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत 'सेवा से बर्खास्तगी' का दंड अधिरोपित किया गया है।
अतः उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पराम'ार् से असहमत होते हुए घूस लेते रंगे हांथ पकड़े जाने जैसे प्रमाणित आरोप के लिए श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के प्रावधानों के तहत सेवा से बर्खास्तगी का दंड देने का निर्णय अनु'ाासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।
12. अनु'ाासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मनोज कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1078/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, तरैया, सारण सम्प्रति fo'ksष कार्य पदाधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (xi) के तहत सेवा से बर्खास्तगी का दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है।
आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति श्री मनोज कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1078/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, तरैया, सारण सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग,
बिहार-राज्यपाल के vkns'k से,
हअनिल कुमार,
सरकार के अपर सचिव।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 253%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in