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सं0 2/नि0कां0- 301/2007 -सा0प्र0—4295
सामान्य प्रशासन विभाग
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संकल्प
18 मार्च 2016
श्री आनन्द स्वरूप (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 491/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, आदापुर, पूर्वी श्री आनन्द स्वरूप (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 491/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, आदापुर, पूर्वी श्री आनन्द स्वरूप (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 491/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, आदापुर, पूर्वी चम्पारण को निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 10.02.2007 को परिवादी श्री गोपीचन्द्र राम से 5000/- रूपये रि चम्पारण को निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 10
गोपीचन्द्र राम से 5000/- रूपये रि'वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर निगरानी थाना कांड संख्या 017/2007 दिनांक 11.02.2007 दर्ज किया गया। लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर निगरानी थाना कांड संख्या 017/2007 दिनांक 11 2007 दर्ज किया गया। आरक्षी उप-महानिरीक्षक, अन्वेषण ब्यूरो, मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 166 दिनांक 2. आरक्षी उप-महानिरीक्षक, अन्वेषण ब्यूरो, मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 166 दिनांक आरक्षी उप-महानिरीक्षक, अन्वेषण ब्यूरो, मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 166 दिनांक 14.02.2007 द्वारा प्रतिवेदित उपर्युक्त सूचना के आलोक में विभ
2007 द्वारा प्रतिवेदित उपर्युक्त सूचना के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3271 दिनांक
गीय संकल्प ज्ञापांक 3271 दिनांक 26.03.2007 द्वारा दिनांक 11.02.2007 के प्रभाव से श्री स्वरूप को निलंबित किया गया।
2007 के प्रभाव से श्री स्वरूप को निलंबित किया गया।
3. श्री स्वरूप को रिष्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के उपर्युक्त प्र
श्री स्वरूप को रिष्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के उपर्युक्त प्रतिवेदित आरोपों के आधार पर
तिवेदित आरोपों के आधार पर श्री स्वरूप के विरूद्ध आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 8865 दिनांक 27.08.2007 द्वार के विरूद्ध आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 8
2007 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने ा दिया गया। श्री स्वरूप का स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने पर स्मारित भी किया गया। उक्त के आलोक में श्री का निदे'ा दिया गया। श्री स्वरूप का स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने पर स्मारित भी किया गया। उक्त के आलोक में श्री ा दिया गया। श्री स्वरूप का स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने पर स्मारित भी किया गया। उक्त के आलोक में श्री स्वरूप ने अभ्यावेदन दिनांक 17.09
09.2008 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 11601 दिनांक 29
2008 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 11601 दिनांक 29.10. ा श्री स्वरूप के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी से मंतव्य की मांग की गयी, किन्तु 2008 द्वारा श्री स्वरूप के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी से मंतव्य की मांग की गयी, किन्तु ा श्री स्वरूप के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी से मंतव्य की मांग की गयी, किन्तु उक्त मंतव्य प्राप्त नहीं हुआ।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 31 माच(cid:24) 2016 4. श्री स्वरूप के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा के उपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5554 दिनांक 11.06.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
5. विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, बिहार, पटना के पत्रांक 347 दिनांक 16.07.2015 द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध रि'वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने से संबंधित आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
6. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18 के संगत प्रावधान के तहत संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 11049 दिनांक 31.07. 2015 द्वारा श्री स्वरूप से अभ्यावेदन की मांग की गयी।
7. श्री स्वरूप द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 07.09.2015 में कहा गया है कि परिवादी श्री गोपीचन्द्र राम द्वारा अन्यों के बहकावे में आकर उनके विरूद्ध परिवाद पत्र दिया गया था और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के कर्मियों द्वारा अन्यों के प्रभाव में आकर उनके विरूद्ध झूठा एवं बनावटी सत्यापन प्रतिवेदन तैयार कर उनपर ट्रैप केस बनाकर जबर्दस्ती गिरफ्तार किया गया। उनके द्वारा गोपीचन्द्र राम से किसी प्रकार के रि'वत की मांग का आरोप बेबुनियाद है क्योंकि उनका नियोजन उनके क्षेत्राधिकार का विषय नहीं था। जब पंचायत सचिव ने उनसे दि'ाा-निदे'ा मांगा था तो उन्होंने उनके पत्र को प्रखंड ि'ाक्षा प्रसार पदाधिकारी, आदापुर को यह लिखते हुए अग्रेार कार्रवाई हेतु भेज दिया गया था कि पंचायत ि'ाक्षक नियोजन में प्रखंड विकास पदाधिकारी की कोई भूमिका नहीं होती है। परिवादी को पंचायत सेवक एवं मुख्यिा द्वारा प्रताड़ित किया गया था। अतः उनके विरूद्ध रि'वत मांगे जाने का आरोप आधारहीन है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा झूठे सत्यापन प्रतिवेदन के आधार पर उनके साथ जोर-जबर्दस्ती कर उन्हें गिरफ्तार किया गया और ट्रैप का मामला बनाया गया। अतः उनके द्वारा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन करने का प्र'न ही नहीं उठता है। उक्त लिखित अभिकथन को स्वीकार करते हुए उनके द्वारा आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया।
8. श्री स्वरूप के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित अभ्यावेदन एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की सम्यक् समीक्षोपरांत पाया गया कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा श्री आनन्द स्वरूप के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों से संबंधित तथ्यों/साक्ष्यों की गहन समीक्षा की गयी है। उक्त जाँच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित है कि आरोपित पदाधिकारी का भले ही तकनीकी रूप से पंचायत f'kक्षक की नियुक्ति में कोई भूमिका न रही हो, तब भी पंचायत के स्टाफ आदि के साथ मिलीभगत से आरोपित के नियुक्ति के मामले में अनाव'यक रूप से मार्गद'ार्न के नाम पर प्रखंड भेजा गया। और प्रखंड में उसे आरोपित ने भली-भांति देखने और समझने के बाद भी मार्गद'ार्न मांगने का कोई औचित्य नहीं था, इस बात को सुनिि'चत करने के बदले कि उसका तुरन्त उार पंचायत को भेज दिया जाये और इस बात का कोई scope नहीं छोड़ा जाये कि जो नियुक्ति का मामला नियमानुसार पंचायत स्तर पर ही संपादित होता है, वह प्रखंड से मार्गद'ार्न के नाम पर अनाव'यक और नियम विरूद्ध तरीके से लंबित रखा जाये, इसके बदले आरोपित ने परिवादी की नियुक्ति के मामले को प्रखंड के स्तर पर ही लंबित रखा और रहने दिया। आरोपित सरकार के वरीय पदाधिकारी हैं, और उन्हें यह स्पष्ट भली-भांति ज्ञान होना चाहिये, और ज्ञान न होने की कोई प्र'न नहीं उठता है, कि एक वरीय राजपत्रित पदाधिकारी के समक्ष, और वह भी प्रखंड के overall incharge के रूप में सरकार का अत्यंत महत्वपूर्ण पद प्रखंड स्तर पर होता है उस प्रखंड विकास पदाधिकारी, के पद पर कार्यरत आरोपित पदाधिकारी के समक्ष उनके प्रखंड के ही एक अन्य उनसे कनीय पदाधिकारी, प्रखंड f'kक्षा प्रसार पदाधिकारी लगातार रि'वत की मांग करते रहे थे, इसलिए आरोपित का यह प्र'ाासनिक ही नहीं बल्कि वैधिक दायित्व भी था कि ऐसे रि'वत मांगने वाले3 (cid:27)बहार गजट (असाधारण), 31 माच(cid:24) 2016 पदाधिकारी, कर्मचारी पर अविलम्ब क्रिमिलन कार्रवाई करने तथा कठोर अनु'ाासनिक कार्रवाई करने के लिए वे बिना चूक के उचित कदम उठाते। ऐसा कुछ भी नहीं कर के वे मूकद'ार्क बने रहे, तो इसका सिर्फ और सिर्फ एक ही अर्थ होता है कि वे इस रि'वत मांगने की कार्रवाई में सहभागी थे।
9. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में vuq'kklfud प्राधिकार द्वारा श्री स्वरूप के स्पष्टीकरण को स्वीकारयोग्य नहीं पाया गया तथा इसे अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 के संगत प्रावधान के तहत सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि के लिए जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं का दंड अधिरोपित किये जाने का विनिि'चय किया गया। 10. विभागीय पत्रांक 17480 दिनांक 17.12.2015 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से श्री स्वरूप के विरूद्ध विनिि'चत सेवा से बर्खास्तगी के दंड प्रस्ताव पर पराम'ार् की मांग की गई। आयोग के पत्रांक 2961 दिनांक 29.
02.2016 द्वारा अनु'ाासनिक प्राधिकार द्वारा विनिि'चत सेवा से बर्खास्तगी के दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी है। 11. बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनु'ाासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री आनन्द स्वरूप (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 491/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, आदापुर, पूर्वी चम्पारण सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 के संगत प्रावधान के तहत निम्नांकित दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) सेवा से बर्खास्तगी ।
(ii) निलंबन अवधि के लिए जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं।
आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति श्री आनन्द स्वरूप (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 491/11, सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना एवं सभी संबंधितों को सूचना एवं
बिहार-राज्यपाल के vkns'k से,
हअनिल कुमार,
सरकार के अपर सचिव।
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