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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 04 April 2016

Published 04 April 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-04-04.267
Languages
English, Hindi

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अध्यक्ष, बिहार विधान-सभा के आदेश से, अध्यक्ष, बिहार विधान-सभा के आदेश से, राजीव कुमार, राजीव कुमार, सचिव । प्रभारी सचिव2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016

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प्रस्तावना ः-बिहार वित्त अधिनियम, भाग I (बिहार अधिनियम 5/1981) [जो बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005) की धारा 94 द्वारा निरसित किये जाने के पूर्व था।] तथा बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005), केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (अधिनियम 74/1956), बिहार होटल विलास वस्तु कराधान अधिनियम, 1988 (बिहार अधिनियम 5/1988), बिहार मनोरंजन कर अधिनियम, 1948(बिहार अधिनियम XXXV/1948), बिहार विद्युत षुल्क अधिनियम,1948 (बिहार अधिनियम 36/1948) और बिहार विज्ञापन पर कर अधिनियम, 2007 की वित्तीय वर्ष 2011-12 तक के कार्यवाहियों से उत्पन्न विवादों के समाधान हेतु विधेयक।

भारत-गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, प्रारम्भ और पात्रता मानदंड।-(1)यह अधिनियम बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा एवं अधिसूचना निर्गमन की तिथि से तीन माह तक लागू रहेगा। परन्तु राज्य सरकार, इस प्रयोजनार्थ राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, उक्त तीन माह की अवधि को, अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट अवधि तक परन्तु तीन माह से अनधिक के लिए बढ़ा सकेगी।

(4) यह ऐसे सभी विवादों पर लागू होगा जो विधि के अधीन वित्तीय वर्ष 2011-12 तक की कार्यवाहियों से उत्पन्न हाें एवं पक्षकार द्वारा विवाद के समाधान हेतु आवेदन अधिनियम की समाप्ति के पन्द्रह दिन पूर्व तक दिया गया हो एवं समाधान-राषि का भुगतान अधिनियम के लागू रहने की अवधि तक किया गया हो।

अध्याय I

प्रारम्भिक।

2. परिभाषाएं।- इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो-

(क) ''स्वी—त कर'' से अभिप्रेत है विधि के अधीन पक्षकार द्वारा दाखिल विवरणी में स्वीकार की गई देय कर की राशि;

(ख) ''अपील'' से अभिप्रेत है विधि के अधीन बिहार वित्त अधिनियम, 1981 की धारा 9 या बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 10 के अधीन नियुक्त और क्षेत्रीय अधिकारिता वाले वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त(अपील) अथवा वाणिज्य-कर उपायुक्त (अपील) के समक्ष लम्बित अपील;

(ग) ''निर्धारित कर'' से अभिप्रेत है विधि के अधीन कर-निर्धारण अथवा पुनर्निर्धारण आदेश के अधीन चुकाया जाने वाला विनिष्चित कर;

(घ) ''विवाद'' से अभिप्रेत है विधि के अधीन पारित किसी आदेश से उत्पन्न और,यथा स्थिति, निम्नलिखित के समक्ष लम्बित अपील, पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन, रेफेरेन्स, रिट पिटीशन अथवा विशेष इजाजत से याचिका (एस॰एल॰पी॰)ः-

(i) वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अपील) अथवा वाणिज्य-कर उपायुक्त (अपील); (ii) वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रशासन); (iii) वाणिज्य-कर आयुक्त; (iv) वाणिज्य-कर न्यायाधिकरण; (v) उच्च न्यायालय; (vi) भारत का सर्वोच्च न्यायालय;

3 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016

और इसमें शामिल हैं-

(1) विधि के अधीन नियुक्त अथवा विहित अथवा प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा अधिरोपित कर,

सूद अथवा शास्ति या,

(2) विधि के अधीन अथवा बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के अधीन नियुक्त अथवा विहित अथवा प्राधि—त प्राधिकारी द्वारा प्रारम्भ किये गये अथवा के समक्ष लम्बित कर, सूद अथवा शास्ति की वसूली हेतु कार्यवाही;

(ङ.) किसी विवाद के संबंध में ''विवादित राशि'' से अभिप्रेत है कोई कर, सूद अथवा शास्ति की राशि जो पक्षकार द्वारा देयकर के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है;

(च) ''प्रपत्र'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के साथ संलग्न प्रपत्र;

(छ) ''विधि'' से अभिप्रेत है बिहार वित्त अधिनियम का भाग I (बिहार अधिनियम 5/1981) [जो बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005) की धारा 94 द्वारा निरसित किये जाने के पूर्व था।] , बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005), केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (अधिनियम 74/1956), बिहार होटल विलास वस्तु कराधान अधिनियम, 1988 (बिहार अधिनियम 5/1988), बिहार मनोरंजन कर अधिनियम, 1948(बिहार अधिनियम XXXV/1948), बिहार विद्युत षुल्क अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम 36/1948) और बिहार विज्ञापन पर कर अधिनियम, 2007;

(ज) ''पक्षकार'' से अभिप्रेत है कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन किसी विवाद के समाधान हेतु आवेदन दाखिल करता हो;

(झ) ''अधिनियम'' से अभिप्रेत है बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016;

(ञ) इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ ''विहित प्राधिकारी'' से अभिप्रेत है-

(i) किसी अपील के सम्बंध में वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त(अपील) अथवा वाणिज्य-कर उपायुक्त (अपील) जिनके समक्ष अपील लम्बित है,

(ii) वाणिज्य-कर आयुक्त अथवा न्यायाधिकरण अथवा उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित वैसे मामले जहाँ विवादित राशि एक करोड़ रुपये से अधिक हो के मामले में वाणिज्य-कर आयुक्त;

(iii) वाणिज्य-कर आयुक्त अथवा न्यायाधिकरण अथवा उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित वैसे मामले जहाँ विवादित राशि एक करोड़ रुपये तक का हो के संबंध में संबंधित वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त(प्रशासन) जिनके क्षेत्राधिकार में पक्षकार निबंधित हैं अथवा विवादित राशि से संबंधित आदेश पारित हुए हैैं।

(iv) वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त(प्रशासन) के समक्ष लंबित अन्य किसी विवादित मामले में संबंधित वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रशासन)

(ट) ''पुनरीक्षण'' से अभिप्रेत है विधि के अधीन पुनरीक्षण के लिए आवेदन, जो बिहार वित्त अधिनियम, 1981 भाग I की धारा-9 या बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-10 के अधीन नियुक्त वाणिज्य-कर आयुक्त अथवा न्यायाधिकरण के समक्ष लम्बित हो;

(ठ) ''समाधान-राशि'' से अभिप्रेत है वह राशि जिसका भुगतान करने पर विवाद का समाधान हो जायेगा;

(ड) ''न्यायाधिकरण'' से अभिप्रेत है बिहार वित्त अधिनियम, 1981, भाग I की धारा 8 या बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 9 के अधीन गठित न्यायाधिकरण;

(ढ़) ''विवरणीत आवर्त्त'' से अभिप्रेत है विधि के अधीन पक्षकार द्वारा विवरणी में अभिलिखित किया गया सकल आवर्त्त;

(ण) इसमें अपरिभाषित अन्य अभिव्यक्तियों के, वही अर्थ होंगे जो विधि के अधीन क्रमशः उनके प्रति समनुदेषित किए गए हों।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 अध्याय II

विवाद का समाधान

3. समाधान-राशि।- (1) जहाँ विवाद वित्तीय वर्ष 2004-05 तक की कार्यवाहियों से संबंधित हों वहाँ समाधान-राषि तालिका-I के स्तम्भ 2 में उल्लिखित मामलों के लिए उनके सामने स्तम्भ 3 में उल्लेखित दर के अनुसार एवं जहाँ विवाद वित्तीय वर्ष 2005-06 से वित्तीय वर्ष 2011-12 तक की कार्यवाहियों से संबंधित हैं वहाँ समाधान- राषि निम्न तालिका-II के अनुसार होगी :-

तालिका-I

क्र॰ सं॰ विवाद का विवरण समाधान राशि
1 2 3
1. बिहार वित्त अधिनियम, 1981, भाग I के अधीन दावा के समर्थन में प्रपत्र IX सी अथवा प्रपत्र IX के दाखिल नहीं किये जाने के कारण उत्पन्न कोई विवाद । विवादित कर की राशि का 10 प्रतिशत।
2. जहाँ विवाद में, क्रमांक 1 में उल्लेखित के सिवाय, बकाया कर- राशि रूपये 10,00,000 (दस लाख) से अनधिक हो, विवादित बकाया कर- राशि का पच्चीस प्रतिशत।
3. जहाँ विवाद में, क्रमांक 1 में उल्लेखित के सिवाय, बकाया कर-राषि रू॰ 10,00,000 (दस लाख) से अधिक परन्तु 1,00,00,000 (एक करोड़) से अनधिक हो, रू॰2,50,000/-(दो लाख पचास हजार) जोड़ 10,00,000/- (दस लाख) से अधिक विवादित बकाया कर राशि का बत्तीस प्रतिशत।
4. जहाँ विवाद में, क्रमांक 1 में उल्लेखित के सिवाय, बकाया कर-राषि रू॰ 1,00,00,000 (एक करोड़) से अधिक हो, रू॰ 31,30,000/-(इकतीस लाख तीस हजार) जोड़ 1,00,00,000/- (एक करोड़) से अधिक विवादित बकाया कर राशि का चालीस प्रतिशत।
5. विधि के अधीन किसी आदेश से अधिरोपित शास्ति अथवा सूद से उत्पन्न विवाद विवादित, यथास्थिति, शास्ति अथवा सूद की राशि का दस प्रतिशत।
1. रूपये 10,00,000 (दस लाख) से अनधिक विवादित बकाया कर राशि के लिए। विवादित बकाया कर राशि का तीस प्रतिशत।
2. रू॰ 10,00,000 (दस लाख) से अधिक परन्तु 1,00,00,000 (एक करोड़) से अनधिक विवादित बकाया कर राषि के लिए। रू॰ 3,00,000/- (तीन लाख) जोड़ 10,00,000/- (दस लाख) से अधिक विवादित बकाया कर राशि का सैंतीस प्रतिशत।
3. रू॰ 1,00,00,000 (एक करोड़) से अधिक विवादित बकाया कर राषि के लिए। रू॰ 36,30,000/- (छत्तीस लाख तीस हजार) जोड़ 1,00,00,000/- (एक करोड़) से अधिक विवादित बकाया कर राशि का पैतालिस प्रतिशत।
4. विधि के अधीन किसी आदेश से अधिरोपित शास्ति अथवा सूद से उत्पन्न विवाद विवादित, यथास्थिति, शास्ति अथवा सूद की राशि का दस प्रतिशत।
5 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016

स्पष्टीकरण I- समाधान-राषि में स्वीकृत कर का भुगतान शामिल नहीं होगा एवं पक्षकार स्वीकृत कर की संपूर्ण राषि जमा करेगा।

स्पष्टीकरण II- विवाद के समाधान के लिए इच्छुक किसी पक्षकार ने यदि इस समाधान योजना के आरंभ होने के पूर्व, विवादित राषि के मद में समाधान राषि के समतुल्य या अधिक राषि का भुगतान पहले ही कर दिया हो, तो उक्त राषि समाधान-राषि की मानी जायेगी किन्तु समाधान-राषि से अधिक जमा राषि वापस नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण III- विवाद के समाधान के लिए इच्छुक किसी पक्षकार ने यदि इस समाधान योजना के आरंभ होने के पूर्व, किसी विवादित राषि को जमा कर दिया हो तो उक्त राषि समाधान-राषि का भुगतान समझी जाएगी एवं पक्षकार को केवल अंतर-राषि का भुगतान करना होगा।

(2) तत्‌समय प्रवृत्त किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किन्तु इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी ऐसे विवाद का समाधान हो चुका माना जायेगा, जिसके संबंध में उप-धारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट राशि इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट रीति से एवं समय के भीतर सरकारी कोषागार में जमा कर दी गई है, और उसे किसी अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष जारी नहीं रखा जाएगा।

अध्याय III विवाद के समाधान का तरीका

4. समाधान के लिए आवेदन।-(1) विवाद के समाधान के लिए इच्छुक कोई पक्षकार इस अधिनियम की समाप्ति के पन्द्रह दिन पूर्व तक प्रपत्र सेट- I में अपना आवेदन विहित प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

(2) प्रत्येक विवाद के समाधान हेतु अलग-अलग प्रपत्र सेट-I में आवेदन विहित प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगा, जिसके साथ-

(क) एक सौ रूपये का एडहेसिभ मुद्रांक न्यायालय फीस होगा और इसके साथ विधि के अधीन नियुक्त अथवा विहित अथवा प्राधिकृत पदाधिकारी द्वारा निर्गत माँग-पत्र एवं पक्षकार द्वारा इस आशय का एक शपथ पत्र संलग्न होगा कि इसमें सन्निहित तथ्य सत्य और सही हैं। (ख) स्वीकृत कर के भुगतान के समर्थन में कर-भुगतान के साक्ष्य (कोषागार प्रमाण-पत्र चालान सहित) एवं विवरणियों/वार्षिक विवरणी की प्रतियाँ संलग्न किये जाएंगे।

परन्तु यदि विवाद निर्धारित कर से संबंधित न होकर मात्र शास्ति अथवा ब्याज अधिरोपण से संबंधित है तो विवरणी/वार्षिक विवरणी की छाया प्रति देना अनिवार्य नहीं होगा। (ग) वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अपील) या वाणिज्य-कर उपायुक्त (अपील) के समक्ष लम्बित मामलों में दायर अपीलीय आवेदन की सत्यापित प्रति संलग्न होगी,

(घ) वाणिज्य-कर आयुक्त के समक्ष लम्बित पुनरीक्षण आवेदन के मामले में पुनरीक्षण आवेदन की सत्यापित प्रति संलग्न होगी,

(ड.) न्यायाधिकरण के समक्ष लम्बित अपील/पुनरीक्षण आवेदन के मामले में अपील/पुनरीक्षण आवेदन की सत्यापित प्रति संलग्न होगी,

(च) उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष, यथास्थिति, लम्बित रेफेरेन्स अथवा रिट पेटीशन अथवा एस॰एल॰पी॰ के मामले में, सम्बंधित रेफेरेन्स अथवा रिट पेटीशन अथवा एस॰एल॰पी॰ की सत्यापित प्रति संलग्न होगी,

(छ) कर निर्धारण/ब्याज या शास्ति अधिरोपण/संवीक्षा आदेश की सत्यापित प्रति । (ज) आवेदक द्वारा सेट-I के आवेदन में विहित स्थान पर अपना ई-मेल आई0डी0 एवं दूरभाष संख्या अनिवार्य रूप से अंकित करेगा।

(झ) विवाद के समाधान के लिए इच्छुक किसी पक्षकार ने यदि इस समाधान योजना के आरंभ होने के पूर्व विवादित राशि के मद में कोई राशि जमा किया हो तो उससे संबंधित चालान एवं कोषागार प्रमाण-पत्र।6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 (3) उक्त आवेदन प्रपत्र प्रावधानित तरीके से स्वामी द्वारा हस्ताक्षरित एवं सत्यापित होगा अथवा फर्म के मामले में फर्म की ओर से प्राधि—त साझेदार अथवा हिन्दु अविभाजित परिवार के मामले में परिवार का कर्त्ता अथवा कम्पनी अधिनियम, 1956(अधिनियम-1/1956) के अधीन गठित कम्पनी अथवा किसी विधि के अधीन गठित निगम के मामले में, प्रबंध निदेशक अथवा प्रमुख कार्यपालक पदाधिकारी अथवा सोसाईटी अथवा क्लब अथवा व्यक्तियों के संगठन, अथवा व्यक्ति समूह अथवा सरकारी विभाग अथवा स्थानीय प्राधिकार के मामले में, प्रमुख कार्यपालक पदाधिकारी अथवा उसके प्रभारी पदाधिकारी अथवा सभी मामलों में घोषित प्रबंधक द्वारा, आवेदन प्रपत्र प्रावधानित तरीके से हस्ताक्षरित एवं सत्यापित होगाः

(4) उप-धारा (1) के अधीन आवेदन करने वाले पक्षकार को विहित प्राधिकारी का कार्यालय प्राप्ति के प्रतीक रूप में प्रपत्र सेट II में एक प्राप्ति-रसीद देगा।

5. आवेदन का निष्पादन।-(1)धारा 4 में वर्णित अवधि एवं आवश्यकताओं के अनुरूप जब तक आवेदन नहीं होगा तब तक किसी आवेदन पर विहित प्राधिकारी द्वारा विचार नहीं किया जायेगाः

(2) आवेदन प्राप्ति के सात दिनों के अंदर विहित प्राधिकारी प्रपत्र सेट-III में लिखित आदेश द्वारा अपूर्ण एवं अशुद्ध आवेदन को अस्वीकृत कर देगा जिसकी प्रति पक्षकार को अग्रसारित की जायेगी। परन्तु उपर्युक्त अस्वीकृति पक्षकार को नया आवेदन दाखिल करने से वंचित नहीं करेगी। (3) विहित प्राधिकारी, पक्षकार द्वारा आवेदन प्रपत्र सेट- I में उपलब्ध कराई गई विवादित राशि और समाधान-राशि के परिमाण की जाँच करेगा और ऐसी जाँच के सात दिनों के भीतर पक्षकार को प्रपत्र सेट-IV में लिखित रूप से समाधान राशि सरकारी कोषागार में जमा करने एवं उप-धारा (4) के खंड (क) में विनिर्दिष्ट रीति एवं समय से भुगतान के साक्ष्य के रूप में चालान की प्रति उपलब्ध कराने की सूचना देगाः

परन्तु यदि यथास्थिति आवेदन की प्राप्ति के पन्द्रह दिनों के अन्दर पक्षकार को ऐसी कोई सूचना नहीं भेजी जाती है तो विवादित-राशि एवं समाधान-राशि की गणना और समाधान के लिए आवेदन को स्वी—त समझा जायेगा और पक्षकार उप-धारा (4) के खंड (क) में विनिर्दिष्ट रीति से एवं समय के भीतर ऐसी समाधान-राशि जमा करने के लिए अग्रसर होगा।

(4)(क) उप-धारा (3)के अधीन सूचना प्राप्त होने पर पक्षकार बिहार मूल्यवर्द्धित कर नियमावली, 2005 के नियम 27 में प्रावधानित रीति से धारा 3 में विनिर्दिष्ट समाधान राशि को सरकारी कोषागार में जमा करेगा। समाधान राशि का भुगतान अधिनियम के प्रभावी अवधि के भीतर करना अनिवार्य होगा।

(ख) पक्षकार उपर्युक्त सम्पूर्ण समाधान-राशि के जमा करने के सात दिनों के भीतर विवाद को वापस लेने के निमित्त आवेदन उचित न्यायालय अथवा प्राधिकार के समक्ष दाखिल करेगा। स्पष्टीकरण।- इस खंड के प्रयोजनार्थ''उचित न्यायालय अथवा प्राधिकार'' शब्द से अभिप्रेत है-

(i) अपील के मामले में, वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अपील) अथवा वाणिज्य-कर उपायुक्त (अपील);

(ii) वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रशासन) के समक्ष लम्बित विविध पुनरीक्षण के मामले में, वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रशासन);

(iii) वाणिज्य-कर आयुक्त के समक्ष लम्बित पुनरीक्षण आवेदन के मामले में, वाणिज्य-कर आयुक्त; (iv) न्यायाधिकरण के समक्ष लम्बित पुनरीक्षण आवेदन के मामले में, न्यायाधिकरण; (v) रेफेरेन्स अथवा रिट पेटीशन के मामले में, उच्च न्यायालय; और (vi) विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) के मामले में भारत का सर्वोच्च न्यायालय।

(5) विहित प्राधिकारी उप-धारा (4) के खंड (क) के अनुसार सम्पूर्ण समाधान राशि के जमा करने और उप-धारा (4) के खंड (ख) के अनुसार आवश्यक वापसी आवेदन दाखिल करने के सात दिनों के भीतर प्रपत्र सेट V में विवाद के समाधान का आदेश करेगाः7 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 परन्तु यह कि यदि विहित प्राधिकारी के समक्ष विर्निदिष्ट समाधान राशि को इस अधिनियम के समाप्त होने के पूर्व भुगतान करने का साक्ष्य तथा उपर्युक्त विवाद वापसी आवेदन का साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करता है तो विहित प्रपत्र सेट-VI में सुनवाई हेतु एक अवसर देगा एवं युक्तियुक्त कारण प्राप्त नहीं होने पर पक्षकार के समाधान आवेदन को सेट-VII में रद्‌्‌द कर देगा। (6) उप धारा (5) के अधीन निम्नलिखित मामलों में विवाद समाधान आदेश पारित होने पर- (i) न्यायाधिकरण के समक्ष लम्बित पुनरीक्षण आदेश अथवा (ii) रेफेरेन्स अथवा (iii) रिट पेटीशन अथवा (iv) विशेष अनुमति याचिका (स्पेशल लीव पेटीशन)

ऐसा माना जायेगा कि उक्त पुनरीक्षण, रेफेरेन्स, रिट पेटीशन अथवा विशेष अनुमति याचिका वापस लेने के रूप में खारिज कर दिये गये है और किसी आदेश अथवा किसी न्यायालय अथवा न्यायाधिकरण के न्यायादेश में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, ऐसा माना जायेगा कि उक्त पुनरीक्षण, रेफेरेन्स, रिट पेटीशन अथवा विशेष अनुमति याचिका पक्षकार द्वारा कभी नहीं दाखिल की गयी है।

(7) उप-धारा (5) के अधीन समाधान आदेश पारित होने पर, विहित प्राधिकारी-

(क) न्यायाधिकरण के समक्ष लम्बित पुनरीक्षण को छोड़कर, अपील अथवा पुनरीक्षण विवाद के समाधान के मामले में, संगत कार्यवाही में, ऐसे समाधान के पूर्ण ब्योरे के साथ इस आशय का आदेश अभिलिखित करेगा कि विवाद के समाधान हो जाने के आलोक में इस कार्यवाही को चलाने की आवष्यकता नही है;

(ख) इस उपधारा के खंड (क) में विनिर्दिष्ट विवाद अथवा न्यायाधिकरण, किसी उच्च न्यायालय अथवा सर्वोंच्च न्यायालय के समक्ष लम्बित मामलों को छोड़कर, विवाद के समाधान के मामले में, सात दिनों के भीतर समाधान आदेश की सच्ची प्रतिलिपि संबंधित प्राधिकारी को भेजेगा जहाँ ऐसा विवाद लम्बित है, और उक्त आदेश प्राप्त होने पर सम्बंधित प्राधिकारी संगत कार्यवाही में ऐसे समाधान के पूर्ण ब्योरे के साथ इस आषय का आदेश अभिलिखित करेगा कि विवाद के समाधान हो जाने के आलोक में इस कार्यवाही को चलाने की आवश्यकता नहीं है।

स्पष्टीकरणः इस उप-धारा के प्रयोजनार्थ ''संगत कार्यवाही'' शब्द से अभिप्रेत है विधि के अधीन पारित किसी आदेश से उत्पन्न अपील, पुनरीक्षण पुनर्विलोकन, रेफेरेन्स, रिट पीटीशन अथवा विशेष अनुमति याचिका (स्पेशल लीव पीटीशन) की कार्यवाही और इसमें किसी विधि अथवा बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के अधीन नियुक्त अथवा विहित अथवा प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा प्रारम्भ और उनके समक्ष लम्बित कर, सूद अथवा शास्ति की वसूली हेतु कार्यवाही शामिल होगी।8 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 प्रपत्र सेट-I

बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 के अधीन विवाद के समाधान हेतु आवेदन का प्रपत्र

[देखें धारा 4(1) एवं 4(2)]

के समक्ष

...................................................................

...................................................................

मैं, ...............................................................(पूरा नाम साफ अक्षरों में), पिता ................................. ...........................................निवास स्थान..............................................................दूरभाष संख्या....................... ....ई-मेल आई॰डी॰..................................................व्यवसाय का नाम........................................................... अथवा की ओर से .............................................................(साझेदार फर्म/कम्पनी/ए॰ओ॰पी॰/हिन्दु अविभाजित परिवार) और बिहार वित्त अधिनियम, 1981/बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005/अन्य अधिनियम के अन्तर्गत जिसकी निबंधन संख्या....................................निम्नलिखित वाद के समाधान हेतु अनुरोध करता हूँ :

(क) वाद जहाँ लम्बित है............................................................................................

(ख) किये गये कथित दोष से उत्पन्न कार्यवाहियों के ब्योरे निम्नवत्‌ हैं :-

(ग) कर निर्धारण वर्ष .............................. के संवीक्षा/करनिर्धारण/ पुनर्कर निर्धारण/ षास्ति या सूद अधिरोपण से उत्पन्न मांग पत्र जो मुझे/हमलोगों पर ................................. (प्राधिकारी का नाम) के द्वारा तामिल कराया गया है, असंगत हैं और ऐसे संवीक्षा/कर निर्धारण/पुनर्करनिर्धारण/षास्तिया सूद अधिरोपण आदेष के अन्तर्गत स्वीकृत कर/निर्धारित कर/षास्ति/सूद की राषि निम्नवत्‌ है :-

(क) स्वीकृत कर की राषि ः (ख) स्वीकृत कर भुगतान की राशि ः

(ग) मांगपत्र संख्या एवं तिथि ः

(घ) मांगपत्र के अनुसार मांग की कुल राशिः

(ड.) विवादित मांग की राशि-

(i) बिहार वित्त अधिनियम के अंतर्गत

प्रपत्र IX अथवा IX-C समर्पित नहीं किये जाने के फलस्वरूप निर्धारित कर-9 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 (ii) उपर्युक्त (i) के अतिरिक्त निर्धारित

कर के मद में मांग की राशि-

(iii) विवादित सूद की राशि-

(iv) विवादित शास्ति की राशि-

(2) इस समाधान योजना के आरंभ होने के पूर्व विवादित राशि के मद में जमा की गयी रशि का ब्यौरा निम्नवत है :-

चालान संख्या तिथि मद (कर/ब्याज/शास्ति) राशि

(3) *मैं/हमलोग द्वारा रु॰....................... के भुगतान पर निर्धारित कर, रू॰................... ........... के भुगतान पर अधिरोपित ब्याज और रू॰..................... के भुगतान पर अधिरोपित शास्ति या ऐसी राशि जिसपर सहमति हो, का भुगतान कर वाद को निपटाना चाहता हूँ/चाहते हैं। मैं/हमलोग निदेशित समय के अन्दर निर्धारित राशि उचित सरकारी कोषागार में भुगतान करने का वादा करता हूँ/करते हैं।

घोषणा

मैं.......................................................................(नाम साफ अक्षरों में) घोषणा करता हूँ की इस आवेदन में दी गयी सूचना एवं विशिष्टियाँ सही एवं पूर्ण हैं।

तिथि........................................ आवेदक का हस्ताक्षर *जो लागू नहीं हो उसे काट दें। हैसियत10 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 प्रपत्र सेट-II

बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 के अधीन पावती का प्रपत्र

[देखें धारा 4(4)]

...............................................................................का कार्यालय

प्राप्ति संख्या

तिथि

प्रपत्र सेट I में आवेदन...................................................................................................................... ............................................................................................................................से प्राप्त किया।

चेक स्लीप

(1) आवेदन सत्य और सही के संबंध में धारा 4(2)(क) के

अन्तर्गत शपथ-पत्र दाखिल है।

(2) स्वीकृत कर भुगतान के समर्थन में धारा 4(2)(ख) के अन्तर्गत

चालान, कोषागार प्रमाण पत्र सहित संलग्न है।

(3) वार्षिक विवरणी की प्रति संलग्न है या नहीं।

(4) विवाद से संबंधित माँग-पत्र की प्रति संलग्न है।

(5) मामला विवादित होने के समर्थन में साक्ष्य दाखिल है।

(6) सेट-I में ई-मेल आई॰डी॰ एवं दूरभाष संख्या अंकित है।

(7) कर निर्धारण/पुर्नकर निर्धारण/शास्ति/संवीक्षा

आदेश की सत्यापित प्रति संलग्न है।

(8) इस अधिनियम के लागू होने के पूर्व विवादित राशि के विरूद्ध

किये गये भुगतान का साक्ष्य (चालान एवं कोषागार प्रमाण पत्र सहित)

संलग्न है।

(9) आवेदन में सन्निहित विवाद की राशि

स्थान :

प्राप्तकर्त्ता का हस्ताक्षर एवं पदनाम मुहर :

11 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016

प्रपत्र सेट-III

बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 के अधीन अस्वी—त आदेश का प्रपत्र

[देखें धारा 5(2)]

...............................................................................का कार्यालय

(1) व्यवसाय का नाम एवं स्वरूप जिसके संबंध में प्रपत्र सेट I में आवेदन प्राप्त किया गया है

ः

ः

(2) उक्त व्यवसाय का पूर्ण पता ः (3) निबंधन संख्या ः (4) विवाद का केस/सी॰डब्लू॰ जे॰सी॰/एस॰एल॰पी॰/ रेफेरेन्स संख्या (5) विवादित मांग की प्र—ति ः (6) विवाद से संबंधित अवधि ः

आदेश

आपके द्वारा प्रपत्र सेट-I में दाखिल किया गया उक्त आवेदन जिसकी इस कार्यालय की पावती संख्या ...............................तिथि................................है, (i) अधिनियम की धारा-4 में निर्धारित अवधि के अनुरूप नहीं है (ii) अपूर्ण है (iii) अशुद्ध है (iv) विवाद अथवा विवादित राशि से संबंधित साक्ष्य पूर्णरूपेण नहीं दिया गया है (v) अन्य कोई कारण- अतः प्रपत्र सेट-I में दाखिल उक्त आवेदन, बिहार कराधान समाधान अधिनियम, 2016 की धारा 5(2) के अनुसार अस्वी—त किया जाता है। स्थान :

हस्ताक्षर

तिथि :

पदनाम

मुहर :

ज्ञापांक................................................ दिनांक......................................................

प्रतिलिपि अंचल प्रभारी................................................................................................................................... ...................................../व्यवसायी................................................................................को अग्रसारित।

स्थान :

हस्ताक्षर

तिथि :

पदनाम

मुहर :

12 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016

प्रपत्र सेट-IV

बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 की धारा 5(3) के अधीन आदेश

[देखें धारा 5(3)]

(1) व्यवसाय का नाम एवं स्वरूप जिसके संबंध में समाधान के लिए आवेदन प्राप्त किया गया है

(2) प्रपत्र सेट-I की पावती संख्या एवं तिथि ः (3) उक्त व्यवसाय का पूर्ण पता ः

(4) निबंधन संख्या

ः

(5) विवाद का केस/सी॰डब्लू॰ जे॰सी॰/एस॰एल॰पी॰/ रेफेरेन्स संख्या (6) विवादित राशि की प्र—ति ः

(7) विवाद की अवधि ः

आदेश

प्रपत्र सेट-I में दाखिल आवेदन के आलोक में समाधान की राशि निम्नवत प्रगणित है- विवादित कर के मद में - अधिरोपित शास्ति के मद में - अधिरोपित ब्याज के मद में - कुल राशि -

आपको यह निदेश दिया जाता है कि दिनांक................. तक ...................... (अधिनियम) के अन्तर्गत भुगतान करते हुए साक्ष्य प्रस्तुत करें। अगर समाधान हेतु दाखिल आवेदन के पूर्व समाधान राशि के मद में भुगतान किया गया हो तो कोषागार प्रमाण-पत्र चालान के साथ संलग्न करें।

स्थान : तिथि :

हस्ताक्षर पदनाम

मुहर :

ज्ञापांक................................................ दिनांक......................................................

प्रतिलिपि व्यवसायी.............................................................................................................................. ..........................................................................................................................को अग्रसारित।

हस्ताक्षर

पदनाम

स्थान : तिथि : मुहर :

13 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016

प्रपत्र सेट-V

बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 के अधीन समाधान आदेश

[देखें धारा 5(5)]

(1) व्यवसाय का नाम एवं स्वरूप जिसके संबंध में यह आवेदन प्राप्त किया गया है

(2) उक्त व्यवसाय का पूर्ण पता

(3) निबंधन संख्या

(4) विवाद का केस/सी॰डब्लू॰ जे॰सी॰/एस॰ एल॰पी॰/रेफेरेन्स संख्या

(5) विवादित मांग की प्र—ति

(6) विवाद की अवधि

(7) पत्रांक ................ दिनांक............. द्वारा निर्गत प्रपत्र सेट-IV के अनुसार समाधान की निर्धारित राशि- (i) निर्धारित कर के मद में (ii) ब्याज के मद में (iii) शास्ति के मद में (8) विवाद के विरूद्ध किया गया भुगतान (i) निर्धारित कर के मद में (ii) ब्याज के मद में (iii) शास्ति के मद में

आदेश

बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 की धारा 5 की उप-धारा 5 के प्रावधानों के अनुसार एतद्‌ द्वारा विवाद जिसके ब्योरे उपर दिये गये हैं, का समाधान किया जाता है।

हस्ताक्षर पदनाम

स्थान : तिथि : मुहर :

ज्ञापांक................................................ दिनांक...................................................... प्रतिलिपि- वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, बिहार, पटना/अंचल प्रभारी .................... ................अंचल/व्यवसायी....................................................................................को अग्रसारित।

हस्ताक्षर पदनाम

स्थान : तिथि : मुहर :

14 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016

प्रपत्र सेट- VI बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 के अधीन सूूचना

[देखें धारा 5(5)परन्तुक]

1) व्यवसाय का नाम एवं स्वरूप जिसके संबंध में यह आवेदन प्राप्त किया गया है

ः

(2) उक्त व्यवसाय का पूर्ण पता

ः

(3) निबंधन संख्या

ः

(4) विवाद का केस/सी॰डब्लू॰ जे॰सी॰/ एस॰एल॰पी॰/रेफेरेन्स संख्या ः

(5) विवादित मांग की प्र—ति

ः

(6) विवाद की अवधि

ः

ः

(7) पत्रांक ................ दिनांक.............

द्वारा निर्गत प्रपत्र सेट-IV के अनुसार समाधान की निर्धारित राशि- (i) निर्धारित कर के मद में (ii) ब्याज के मद में (iii) शास्ति के मद में

ः

(8) निर्धारित समाधान राशि के विरूद्ध किया गया भुगतान (i) निर्धारित कर के मद में (ii) ब्याज के मद में (iii) शास्ति के मद में

आदेश

बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 की धारा 5 की उप-धारा 5 के प्रावधानों के अनुसार एतद्‌ द्वारा विवाद जिसके ब्योरे उपर दिये गये हैं, के समाधान राशि का भुगतान का साक्ष्य आपके द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है साथ ही धारा 5 के उप-धारा 4 के खंड (ख) विवादित मामला वापसी आवेदन का साक्ष्य नहीं दाखिल किया गया है। अतएव एतद्‌्‌ द्वारा आपको अधोलिखित तिथि एवं समय पर यह कारण बताने का अवसर दिया जाता है कि क्यों नहीं आपके समाधान आवेदन को अस्वीकृत कर दिया जाए । प्राधिकारी जिसके समक्ष उपस्थित होवें- स्थान : तिथि : समय :

हस्ताक्षर पदनाम मुहर

नोट- पक्षकार की ओर से इस सूचना के अनुपालन में चूक की स्थिति में पक्षकार को आगे बिना सुनवाई का अवसर दिये हुए विवाद के समाधान हेतु दाखिल आवेदन को अस्वीकृत कर दिया जायेगा।15 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016

प्रपत्र सेट- VII

बिहार कराधान विवाद समाधान अधिनियम, 2016 के अधीन समाधान आवेदन अस्वीकृत किए जाने की सूूचना

[देखें धारा 5(5) परन्तुक]

ः

(1) व्यवसाय का नाम एवं स्वरूप जिसके संबंध में यह आवेदन प्राप्त किया गया है

(2) उक्त व्यवसाय का पूर्ण पता ः

(3) निबंधन संख्या

ः

ः

(4) विवाद का केस/सी॰डब्लू॰ जे॰सी॰/एस॰एल॰पी॰/ रेफेरेन्स संख्या

(5) विवादित मांग की प्र—ति

ः

(6) विवाद की अवधि

ः

ः

ः

(7) पत्रांक ................ दिनांक............. द्वारा निर्गत प्रपत्र सेट-IV के अनुसार समाधान की निर्धारित राशि- (i) निर्धारित कर के मद में (ii) ब्याज के मद में (iii) शास्ति के मद में (8) निर्धारित समाधान राशि के विरूद्ध किया गया भुगतान (i) निर्धारित कर के मद में (ii) ब्याज के मद में (iii) शास्ति के मद में

आदेश

आपके द्वारा विवाद के समाधान के संबंध में निर्धारित समाधान राशि के भुगतान का साक्ष्य एवं अधिनियम की धारा-5 की उप-धारा 4 के खण्ड (ख) के अनुसार आवश्यक विवाद वापसी के लिए दाखिल आवेदन की प्रति प्रस्तुत नहीं किया गया है।

आपको इस संबंध में दिनांक ....................... को कारण पृच्छा प्रस्तुत करने के लिए एक अवसर दिया गया। परन्तु आपके द्वारा उक्त तिथि को कोई कार्रवाई नहीं की गयी। अतः उपर्युक्त विवाद के समाधान हेतु आपके आवेदन को अस्वीकृत किया जाता है।

हस्ताक्षर

पदनाम

मुहर

(सं0 सं0-बिक्री-कर/संशोधन-08/2015- )

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

(सुजाता चतुर्वेदी),

वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, बिहार,पटना।16 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016

वित्तीय संलेख

बिहार वित्त अधिनियम, भाग-I (बिहार अधिनियम 5/1981) [जो बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005) की धारा 94 द्वारा निरसित किये जाने के पूर्व था।], बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005), केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (अधिनियम 74/1956), बिहार होटल विलास वस्तु कराधान अधिनियम, 1988 (बिहार अधिनियम 5/1988), बिहार मनोरंजन कर अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम XXXV/1948), बिहार विद्युत षुल्क अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम 36/1948), और बिहार विज्ञापन पर कर अधिनियम, 2007 के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2011-12 तक के कार्यवाहियों से उत्पन्न कर, शास्ति एवं सूद की सृजित माँग के समाधान हेतु बिहार कराधान विवाद समाधान विधेयक को अधिनियमित करने का प्रस्ताव है।

इसी उद्देष्य से बिहार कराधान विवाद समाधान विधेयक, 2016 को अधिनियमित कराना आवष्यक है। बिहार कराधान विवाद समाधान विधेयक, 2016 पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।

(बिजेन्द्र प्रसाद यादव)

भार-साधक सदस्य।

उद्देष्य एवं हेतु

राज्य के संसाधनों में अभिवृद्धि आवष्यक है। उपर्युक्त लक्ष्य की पूर्ति हेतु राजस्व वृद्धि के लिए उपाय चिन्हित किये गये हैं। राजस्व संग्रहण में अभिवृद्धि हेतुु चिन्हित इन उपायों को कार्यान्वित करने के लिए बिहार कराधान विवाद समाधान विधेयक, 2016 को अधिनियमित करने की आवष्यकता है। यही इस विधेयक का उद्देष्य है और इसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है।

(बिजेन्द्र प्रसाद यादव)

भार-साधक सदस्य। राजीव कुमार,राजीव कुमार,राजीव कुमार,राजीव कुमार,

पटना,पटना,पटना,पटना,

प्रभारी प्रभारी प्रभारी प्रभारी सचिवसचिवसचिवसचिव,,,,

दिनांक दिनांक दिनांक दिनांक 31313131 मार्च 2016मार्च 2016मार्च 2016मार्च 2016

बिहार विधान-सभा ।बिहार विधान-सभा ।बिहार विधान-सभा ।बिहार विधान-सभा ।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 04 April 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-04-04.267/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-04-04.267.