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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 04 April 2016

Published 04 April 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-04-04.270
Languages
English, Hindi

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अध्यक्ष, बिहार विधान-सभा के आदेश से, अध्यक्ष, बिहार विधान-सभा के आदेश से, राजीव कुमार, राजीव कुमार, सचिव । प्रभारी सचिव2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016

बिहार उत्पाद (संशोधन) विधेयक, 2016

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बिहार उत्पाद अधिनियम, 1915 में संशोधन करने के लिए विधेयक।

भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो।

1.संक्षिप्त नाम एवं आरंभ- (1) यह अधिनियम बिहार उत्पाद (संशोधन) अधिनियम, 2016 कहा जा सकेगा।

(2) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।

2. बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-1 का संशोधन।-(1) बिहार उत्पाद अधिनियम, 1915 (बिहार एवं उड़ीसा अधिनियम II, 1915) (इसमें इसके पश्चात्‌ उक्त अधिनियम कहा गया है) की धारा-1 की उप-धारा (2) के लिए, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा।

3. बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-2 की उप-धारा (17) के पश्चात्‌ एक नई उप-धारा (17 क) का अंतःस्थापन। - धारा-2 की उप-धारा (17) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नई उप-धारा (17 क) अन्तःस्थापित की जाएगी, यथाः-

''(17 क)- सार्वजनिक स्थान से अभिप्रेत है कोई ऐसा स्थान जहाँ लोगों की पहुँच हो चाहे अधिकार से अथवा नहीं और इसमें आम लोगों द्वारा आने-जाने वाले सभी स्थान सम्मिलित हैं और इसमें कोई खुला स्थान भी सम्मिलित है।''

4. बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-2 की उप-धारा (21) के पश्चात्‌ एक नई उप-धारा(22) का अंतःस्थापन।-(i) धारा-2 की उप-धारा (21) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नई उप-धारा (22) अंतःस्थापित की जाएगी, यथा :-

''(22)- अनधिकृत स्थान से अभिप्रेत है वैसा स्थान जो सार्वजनिक स्थान हो और जहाँ विधिमान्य अनुज्ञप्ति अथवा अनुज्ञा पत्र को छोड़कर मद्यपान करने की अनुमति न हो।''

5. बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-4 के बाद एक नई धारा-4 क का अंतःस्थापन।-(1) धारा-4 के पश्चात्‌ निम्नलिखित नई धारा-4 क अंतःस्थापित की जाएगी, यथाः-

''4क- मादक द्रव्य घोषित करने की शक्ति- धारा-2 के अधीन उल्लिखित किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम या उसके किसी भाग के प्रयोजनार्थ ऐसी वस्तुओं या पदार्थों, जिसे मद्यसार (अल्कोहल) के प्रतिस्थानी के रूप में उपयोग किया जा सकता हो, मादक द्रव्यों के रूप में घोषित कर सकती है।''3 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 6. बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-19 का संशोधन।-(i) (खंड-2) (ख) को हटाना-बिहार उत्पाद अधिनियम 1915 (बिहार एवं उड़ीसा अधिनियम II, 1915) की धारा-19 की उप-धारा (2) के खंड (ख) को हटा दिया जाएगा।

(ii) धारा-19 की उप-धारा (4) का संशोधन- बिहार उत्पाद अधिनियम, 1915 (बिहार एवं उड़ीसा अधिनियम II, 1915) की धारा-19 की उप-धारा (4) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''(4)- इस अधिनियम और स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा किसी निर्माणी, बोतलबंद (बॉटलिंग) संयंत्र, अनुज्ञप्तिधारी अथवा किसी व्यक्ति को निर्माण करने बोतलबंद करने, वितरण करने, बिक्री करने, रखने अथवा उसे पीने पर सभी मादक द्रव्यों अथवा किसी मादक द्रव्यों की बाबत या तो पूर्णरूपेण अथवा ऐसी शर्तों पर जो विहित किया जाय सम्पूर्ण बिहार में अथवा किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र में पूर्णरूपेण प्रतिबंध लगा सकेगी।''

7. बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 के अध्याय VIII, ''अपराध और शास्ति'' के अधीन उपबंधो का संशोधन एवं प्रतिस्थापन।-(i) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-47 का प्रतिस्थापन-

उक्त अधिनियम की धारा-47 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः- ''47- विधिविरूद्ध आयात, निर्यात, परिवहन, उत्पादन, स्वामित्व, विक्रय आदि के लिए शास्ति- जो कोई भी, इस अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन किसी नियम या किए गए आदेश या निर्गत अधिसूचना के उपबंधाें के उल्लंघन या इस अधिनियम के अधीन स्वीकृत किसी अनुज्ञप्ति अथवा अनुज्ञा-पत्र या पास के किसी शर्तों के उल्लंघन अथवा इस अधिनियम के अधीन निर्गत विधिमान्य अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र अथवा पास के बिना-

(क) किसी मादक द्रव्य का उत्पादन करता है, स्वामित्व रखता है, बिक्रय करता है, वितरण करता है, बोतल बंद करता है, निर्यात करता है, आयात करता है, ढोता है या हटाता है; या

(ख) किसी भांग/गाँजा पौधों की खेती करता है; या

(ग) कोई कारखाना, मद्यनिर्माणशाला, शराब कारखाना या भांडागार का निर्माण करता है या स्थापित करता है; या

(घ) विक्रय के प्रयोजन से किसी मद्य को बोतल में भरता है; या

(ङ) किसी मादक द्रव्य के उत्पादन के प्रयोजनार्थ किसी सामग्री, आसवनी (स्टिल), बर्तन, उपकरण या उपस्कर अथवा परिसर जो कुछ भी हो, का उपयोग करता है, रखता है या उसके आधिपत्य में है; या4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 (च) राज्य सरकार के प्रतीक चिह्न (लोगो) या किसी राज्य के प्रतीक चिह्न (लोगो) सहित या रहित कोई सामग्री अथवा फिल्म या आवरण (रैपर) या कोई अन्य चीज, जिसमें मादक द्रव्य को पैक किया जा सकता है, रखता है या किसी मादक द्रव्य के पैकिंग के प्रयोजनार्थ कोई उपकरण या उपस्कर या मशीन रखता है; या (छ) कोई मादक द्रव्य बेचता हो, विहित मात्रा से परे कोई मादक द्रव्य संग्रह करता हो, रखता हो या क्रय करता हो; या

(ज) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति प्राप्त, स्थापित, प्राधिकृत या बने रहे किसी शराब कारखाना, मद्यनिर्माणशाला, भांडागार, भंडारण के अन्य स्थान से किसी मादक द्रव्य को हटाता है :

कम-से-कम दस वर्षों के कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकेगा और कम से कम एक लाख का जुर्माना, जिसे बढ़ाकर दस लाख तक किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।''

(ii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-47 क के लिए एक नई धारा का प्रतिस्थापन- उक्त अधिनियम की धारा-47 क निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''47क- कंपनियों द्वारा अपराध किया जाना-

(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करनेवाला व्यक्ति कंपनी है, तो अपराध किए जाने के समय कारबार के संचालन हेतु कंपनी और कंपनी प्रभारी प्रत्येक व्यक्ति और कंपनी के प्रति जिम्मेवार प्रत्येक व्यक्ति को अपराध का दोषी समझा जाएगा और उसके विरूद्ध कार्यवाही की जा सकेगी और तदनुसार दंडित किए जाने का भागी होगा;

परन्तु यह कि जहाँ कंपनी की विभिन्न संस्थापन या शाखाएँ हों या किसी संस्थापन या शाखा में विभिन्न इकाई हो, संबद्ध मुख्य कार्यपालक और कार-बार के संचालन के लिए कंपनी द्वारा नामित ऐसे संस्थापन, शाखा, इकाई के जिम्मेवार और प्रभारी व्यक्ति ऐसे संस्थापन, शाखा, इकाई के मामले में उल्लंघन के लिए उत्तरदायी होंगे :

परन्तु, यह और कि इस उप-धारा की कोई भी बात ऐसे किसी व्यक्ति को किसी दंड के लायक नहीं बनाएगी, यदि वह साबित करता है कि अपराध बिना उसकी जानकारी के हुई या यह कि ऐसे अपराध के होने को रोकने के लिए उसने सभी सम्यक्‌ तत्परता दिखलायी।

(2) उप-धारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जहाँ इस अधिनियम के अधीन कंपनी द्वारा कोई अपराध किया गया है और कंपनी के निदेशक, प्रबंधक, सचिव या5 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 अन्य पदाधिकारी की सहमति या मौनानुमति या उनकी ओर से उपेक्षा के फलस्वरूप अपराध किया जाना साबित हो, तो ऐसे निदेशक, प्रबंधक, सचिव और अन्य पदाधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकेगी और वह तदनुसार दंडित किए जाने का भागी होगा।

(3) यह धारा ऐसी कंपनियों पर लागू नहीं होगी जहाँ अधिकांश शेयर होल्डर केन्द्र अथवा किसी राज्य सरकार अथवा ऐसी कंपनियाँ जिसे बोर्ड छूट दे सके द्वारा धारित हो।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनार्थ-''कंपनी'' से अभिप्रेत है, कोई कारपोरेट निकाय और जिसमें फर्म या व्यष्टि-संगम सम्मिलित हो; और फर्म के संबंध में 'निदेशक', से अभिप्रेत है फर्म में भागीदार।''

(iii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-48 का प्रतिस्थापन - उक्त अधिनियम की धारा-48 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः- ''48- कतिपय मामलों में अपराध किए जाने की बाबत उपधारणा -

(1) इस अधिनियम के किसी सुसंगत उपबंध के अधीन अभियोजन में, जब तक कि प्रतिकूल साबित न हो, यह उपधारित किया जाएगा, कि अभियुक्त व्यक्ति ने किसी मादक द्रव्य, परिसर, स्टिल (आसवनी), बर्तन, उपकरण या उपस्कर रखने के मामले में उस धारा के अधीन दंडनीय अपराध किया है और जिसका संतोषप्रद जवाब देने में वह असमर्थ है।

(2) जहाँ इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध किए जाने में कोई जानवर, पात्र या गाड़ी या अन्य वाहन और किसी परिसरों का इस्तेमाल किया गया हो, जो अधिहरण किये जाने का भागी हो और/अथवा मुहरबंद किये जाने का भागी हो, तो उसके स्वामी अथवा अधिभोगी को ऐसे अपराध का दोषी समझा जाएगा और ऐसे स्वामी के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकेगी और वह तदनुसार दंडित किए जाने का भागी होगा, जब तक कि वह न्यायालय को इस बात से संतुष्ट नहीं करता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के होने को रोकने में सम्यक्‌ सावधानी बरती थी।'' (iv) बिहार एवं उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-49 का प्रतिस्थापन - उक्त अधिनियम की धारा-49 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः- ''49- मानव उपभोग के उपयुक्त विकृत आसव देने के लिए शास्ति -

जो कोई भी, मानव उपभोग के उपयुक्त विकृत कोई आसव देता है या देने का प्रयास करता है, जिसे विकृत किया गया है या उसकी जानकारी में ऐसा आसव उसके पास है या ऐसा विश्वास करने का कारण है कि आसव को विकृत करने का ऐसा प्रयास किया गया है, कम से कम दस वर्षों 6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 के कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकेगा और कम-से-कम एक लाख रूपये का जुर्माना, जो बढ़ाकर दस लाख रूपये तक किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।''

(v) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-50 का प्रतिस्थापन-

उक्त अधिनियम की धारा-50 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः - ''50- मद्य के साथ हानिकर पदार्थ मिश्रित करने के लिए शास्ति - जो कोई स्वयं द्वारा बेचे गए या विनिर्मित या अपने स्वामित्व में रखे गए किसी मद्य के साथ कोई ऐसा हानिकर औषध या विजातीय अवयव, जिसके कारण मानव को विकलांगता या गंभीर क्षति या मृत्यु होने की संभावना प्रबल हो, मिश्रित करता है या मिश्रित करने की अनुमति देता है, वह-

(क) ऐसे किसी कृत्य के फलस्वरूप यदि किसी की मृत्यु हो जाती है, तो मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय होगा और कम से कम पाँच लाख रू0 का जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रू0 तक किया जा सकेगा, का भी भागी होगा;

(ख) ऐसे किसी कृत्य के फलस्वरूप यदि किसी व्यक्ति को विकलांगता या गंभीर क्षति होती है, तो कम से कम दस वर्षों के कठोर कारावास, जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जा सकेगा, और कम से कम दो लाख रू0 का जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रू0 तक किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा;

(ग) ऐसे किसी कृत्य के फलस्वरूप यदि किसी को पारिणामिक क्षति होती है, तो कम से कम आठ वर्षों के कारावास, जिसे बढ़ाकर दस वर्ष किया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रू0 का जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रू0 तक किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा;

(घ) ऐसे किसी कृत्य के फलस्वरूप यदि किसी प्रकार की क्षति नहीं होती है, तो कम से कम आठ वर्षो के कारावास जिसे बढ़ाकर दस वर्षों तक किया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रू0 का जुर्माना जिसे बढ़ाकर पाँच लाख रू0 तक किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनार्थ 'गंभीर क्षति' अभिव्यक्ति का वही अर्थ होगा, जैसा कि भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का XLV) की धारा-320 में है।''

(vi) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-51 का प्रतिस्थापन-

उक्त अधिनियम की धारा-51 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः- ''51- नकली मद्य (शराब) बेचने के लिए शास्ति -

जो कोई यह जानकारी रखते हुए या जिसके पास विश्वास करने का कारण है कि यह देशी शराब है, लेकिन उसे विदेश से आयातित विदेशी शराब के रूप में बेचता है या बिक्री के लिए रखता है या दिखलाता है, तो वह कम से कम दस वर्षों के कारावास जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रूपये का जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रूपये तक किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।''7 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 (vii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-52 का प्रतिस्थापन -

उक्त अधिनियम की धारा-52 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''52- कपट के लिए शास्ति-

जो कोई,

(क) ऐसा मद्य, जिसके बारे में वह जानता है या ऐसा विश्वास करने का उसके पास कारण है कि यह देशी शराब है, लेकिन विदेशी शराब के रूप में बेचता है या बिक्री के लिए रखता है या दिखलाता है, या

(ख) ऐसी देशी शराब वाले किसी बोतल, डिब्बा या पैकेज या अन्य पात्र या ऐसे किसी बोतल के कॉर्क को चिहिन्त करता है, या ऐसी देशी शराब वाले किसी बोतल, डिब्बा, पैकेज या ऐसे अन्य पात्र का कारबार करता है या देशी शराब वाले किसी बोतल, डिब्बा, पैकेज या ऐसे पात्र का कारबार इस अभिप्राय से करता है, जिससे विश्वास करने का कारण हो कि ऐसे बोतल, डिब्बा, पैकेज अथवा अन्य पात्र में विदेशी शराब है;

कम से कम दस वर्षों के कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रू0 का जुर्माना, जिसे बढ़ाकर दस लाख रू0 तक भी किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।''

(viii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-53 का प्रतिस्थापन-

उक्त अधिनियम की धारा-53 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''53- सार्वजनिक स्थान पर मद्यपान के लिए शास्ति-

जो कोई भी इस अधिनियम या इसके अधीन बनाई गई नियमावली, निर्गत अधिसूचना या दिए गए आदेश के उल्लंघन में-

(क) सार्वजनिक स्थल में या अनधिकृत स्थान पर मद्यपान करता है; या

(ख) सार्वजनिक स्थल में या अनधिकृत स्थान में या अधिकृत स्थान में मद्यपान करता है और उपद्रव करता है; या

(ग) मद्य संस्थापन के परिसरों में या अपने परिसरों में नशाखोरी या असमाजिक तत्वों के जमावड़ा की अनुमति देता है; वह,

(1) खंड (क) के अधीन पड़ने वाले अपराध की स्थिति में, कम से कम पाँच वर्षों के कारावास जिसे बढ़ाकर सात वर्षों तक किया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रू0 जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रू0 तक किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।

(2) खंड (ख) के अधीन पड़ने वाले अपराध की स्थिति में, कम से कम सात वर्षों के कारावास जिसे बढ़ाकर दस वर्ष किया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रू0 जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रू0 तक किया जा सकेगा से दंडनीय होगा।8 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 (3) खंड (ग) के अधीन पड़ने वाले अपराध की स्थिति में, कम से कम दस वर्षों के कारावास जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रू0 जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रू0 तक किया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।''

(ix) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-54 का प्रतिस्थापन-

उक्त अधिनियम की धारा-54 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः- ''54- मादक द्रव्य, जिसकी बाबत अपराध किया गया है, के स्वामित्व के लिए शास्ति -यदि कोई व्यक्ति, बिना विधिसम्मत प्राधिकार के, अपने आधिपत्य में ऐसा मादक द्रव्य रखता है, जिसके बारे में उसे जानकारी है या ऐसा विश्वास करने का कारण है कि यह विधिविरुद्ध आयातित, ढ़ोया गया या विनिर्मित है, या जिसके बारे में वह जानता है या ऐसा विश्वास करने का कारण है कि उस पर विहित शुल्क का भुगतान नहीं किया गया है, तो वह कम से कम आठ वर्षों के कारावास जिसे बढ़ाकर दस वर्षों तक किया जा सकेगा से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माना का भी भागी होगा जिसे बढ़ाकर दस लाख रूपये तक किया जा सकेगा और जुर्माना के भुगतान के चूक की स्थिति में उसे और कारावास जिसे बढ़कार एक वर्ष तक किया जा सकेगा, से दंडित किया जाएगा।''

(x) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-55 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-55 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथा :-

''55- रसायनज्ञ की दुकान में मद्यपान के लिए शास्ति-

(1) यदि कोई रसायनज्ञ, औषधि विक्रेता, भैषजिक अथवा औषधालय को चलाने वाला किसी प्रकार के मद्य जो औषधीय प्रयोजनों के लिए वास्तविक रूप से स्वास्थकर नहीं है, को अपने कारोबारी परिसर में पीने हेतु अनुमति दे तो वह कम से कम आठ वर्षों के कारावास जिसे दस वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रूपये का जुर्माना, जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।

(2) यदि कोई व्यक्ति ऐसे परिसरों में ऐसा मद्यपान करता है तो वह कम से कम पाँच वर्षों के कारावास जिसे सात वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा और जुर्माना जो कम से कम एक लाख रूपये होगो जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, से दंडनीय होगा''

(xi) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-56 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-56 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''56- अवैध विज्ञापन के लिए शास्ति- जो कोई किसी मद्य के प्रयोग के लिए किसी मीडिया जिसमें फिल्म एवं दूरदर्शन अथवा कोई सामाजिक प्लेटफार्म शामिल है में याचना करने हेतु9 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 प्रत्यक्ष रूप से अथवा अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन मुद्रित करे, प्रकाशित करे अथवा दे तो वह कम से कम पाँच वर्षों के कारावास जिसे बढ़ाकर सात वर्षों तक किया जा सकेगा अथवा जुर्माना जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा अथवा दोनों से दंडनीय होगा :

परन्तु उत्पाद आयुक्त द्वारा उपभोक्ता की सूचना और शिक्षा के लिए बिक्री स्थल पर प्रदर्शन हेतु सामान्यतया अथवा विशेष रूप से अनुमोदित सूची पत्र और मूल्य सूची एवं विज्ञापन पर यह धारा लागू नहीं होगी।''

(xii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-57 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-57 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''57- किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे के कारण आयात, निर्यात, विनिर्माण, परिवहन, बिक्री अथवा कब्जा के लिए शास्ति-

(1) जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के कारण किसी मादक द्रव्य का आयात, निर्यात, विनिर्माण, परिवहन किया जाता है अथवा उसे बेचा जाता है अथवा उसे कब्जा में रखा जाता है और ऐसा अन्य व्यक्ति जानता है अथवा उसे विश्वास करने का कारण होता है कि ऐसा आयात, निर्यात, विनिर्माण, परिवहन अथवा बिक्री उसके खाते में या अथवा ऐसा कब्जा उसके खाते में है तो मादक द्रव्य इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा आयात किया गया, निर्यात किया गया, वहन किया गया अथवा विनिर्माण किया गया अथवा उसके कब्जे में पाया गया समझा जाएगा और वह कम-से-कम आठ वर्षों के कारावास जिसे दस वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा अथवा जुर्माना जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।

(2) उप-धारा (1) की कोई बात किसी व्यक्ति को जो दूसरे व्यक्ति के कारण किसी मादक द्रव्य का विनिर्माण करता है, विक्रय करता है अथवा अपने कब्जे में रखता है इस अधिनियम के अधीन किसी दंड अथवा ऐसे मादक द्रव्य के अवैध विनिर्माण, बिक्री अथवा कब्जा में रखने के दायित्व से मुक्त नहीं करेगी।''

(xiii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-58 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-58 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''58- प्रतिकर के भुगतान हेतु कलक्टर द्वारा आदेश

(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के अधीन आदेश पारित करते समय कलक्टर का समाधान हो जाता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु अथवा क्षति किसी स्थान पर बेचे जानेवाले मद्य को पीने के कारण हुई है तो वह विनिर्माता और विक्रेता चाहे वह किसी अपराध में सिद्धदोष हुआ है अथवा नहीं को प्रतिकर के रूप में कम10 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 से कम चार लाख रूपये हरेक मृतक के वैध प्रतिनिधि को अथवा दो लाख रूपये गंभीर रूप से पीड़ित व्यक्ति को अथवा बीस हजार रूपये ऐसे व्यक्ति को जिसे कोई अन्य पारिणामिक क्षति हुई हो, भुगतान करने का आदेश दे सकेगा;

परन्तु जहाँ मद्य की बिक्री अनुज्ञप्त दुकान से की जाती हो तो इस धारा के अधीन प्रतिकर भुगतान करने का दायित्व अनुज्ञप्तिधारी पर होगा।

(2) कलक्टर लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 (बिहार एवं उड़ीसा अधिनियम IV, 1914) के अधीन ''लोक मांग'' के रूप में उक्त प्रतिकर की वसूली कर सकेगा।

(3) उप-धारा (1) के अधीन किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति आदेश की तिथि से तीस दिनों के अन्दर उच्च न्यायालय में अपील कर सकेगाः परन्तु आरोपी द्वारा तबतक अपील नहीं किया जा सकेगा जबतक कि वह उप-धारा (1) के अधीन न्यायालय में आदेशित राशि संदत्त न कर दे :

परन्तु यह और कि उच्च न्यायालय 30 (तीस) दिनों की उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌ अपील स्वीकार कर सकेगा यदि उसका समाधान हो जाय कि अपीलकर्ता को समय पर अपील करने से पर्याप्त कारण द्वारा रोका गया था'' (xiv) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-59 का प्रतिस्थापन- उक्त अधिनियम की धारा-59 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''59- अनुज्ञप्तिधारियों, आदि के कदाचार के लिए शास्ति-इस अधिनियम के अधीन जिस किसी को अनुज्ञप्ति अथवा अनुज्ञा पत्र स्वीकृत अथवा निर्गत किया जाय अथवा ऐसे धारक के नियोजन में होने और उसकी ओर से कार्य करने से वह-

(क) ऐसी अनुज्ञप्ति अथवा अनुज्ञा पत्र को किसी उत्पाद पदाधिकारी अथवा सम्यक्‌ रूप से सशक्त किसी अन्य पदाधिकारी की मांग पर प्रस्तुत करने में असफल रहता है; अथवा

(ख) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय अपनी अनुज्ञप्ति अथवा अनुज्ञापत्र की शर्तों के उल्लंघन में जानबूझकर कुछ करता है अथवा कुछ छोड़ देता है; अथवा

(ग) अपने परिसरों में किसी उत्पाद पदाधिकारी द्वारा निरीक्षण के दौरान सहयोग नहीं करता है,

(घ) विवरणी जमा करने में असफल रहता है तो

सिद्धदोष होेने पर

(1) खंड (क) के अधीन आनेवाले किसी अपराध की दशा में कम से

कम एक लाख रूपये जुर्माना जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया

जा सकेगा, से दंडनीय होगा।11 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 (2) खंड (ख) के अधीन आनेवाले किसी अपराध की दशा में कम से

कम सात वर्षों के कारावास जिसे दस वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा

और कम से कम एक लाख रूपया जुर्माना जिसे दस लाख रूपये

तक बढ़ाया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।

(3) खंड (ग) और (घ) के अधीन आनेवाले अपराध की दशा में कम से

कम एक लाख रूपये का जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रूपये

किया जा सकेगा और उत्तरवर्ती विलम्ब के लिए प्रति दिन दस

हजार रूपये से दंडनीय होगा।''

(xv) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-60 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-60 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''60- अवयस्कों अथवा महिलाओं को नियोजित करने अथवा अवयस्कों को मद्य की बिक्री करने हेतु शास्ति-

(1) यदि कोई अनुज्ञप्तिधारी अथवा कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को जो स्पष्ट रूप से 21 वर्ष से कम आयु का हो, किसी मद्य की बिक्री करता है अथवा उसे देता है तो वह कम से कम सात वर्षों के कारावास जिसे दस वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा और जुर्माना जो कम से कम एक लाख रूपये होगा और जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।

(2) यदि कोई अनुज्ञप्तिधारी 21 वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को अथवा किसी महिला को नियोजित करे तो वह कारावास जो कम से कम पाँच वर्षों का होगा और जिसे सात वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा तथा जुर्माना जो कम से कम एक लाख रूपये का होगा और जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा अथवा दोनों से दंडनीय होगा।''

(xvi) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-61 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-61 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थपित किया जाएगा, यथाः-

''61-हमला और बाधा के लिए शास्ति- भारतीय दंड संहिता 1860 (1860 का XLV) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी कोई व्यक्ति किसी उत्पाद पदाधिकारी अथवा पुलिस पदाधिकारी अथवा सरकारी कर्तव्य पर तैनात किसी अन्य पदाधिकारी पर हमला करे अथवा हमला करने की धमकी दे, अथवा बाधा पहुँचाए अथवा बाधा पहुँचाने की कोशिश करे तो वह कम से कम आठ वर्षों के कारावास जिसे दस वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा और जुर्माना जो कम से कम एक लाख रूपये होगा और जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, से दंडनीय होगा।''

(xvii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-62 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-62 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''62-शुल्क अथवा फीस के असंदाय (गैर अदायगी) के लिए शास्ति- यदि इस अधिनियम के अधीन संदाय करने का दायी कोई व्यक्ति कोई शुल्क अथवा फीस का संदाय करने में 12 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 असफल रहे तो वह कम से कम सात वर्षों के कारावास से जिसे दस वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा और कम से कम एक लाख रूपया जुर्माना जिसे दस लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, से भी दंडनीय होगा।''

(xviii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-63 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-63 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''63- अपराध करने के लिए परिसरों आदि को उपयोग में लाने की अनुमति देने हेतु शास्ति- जो कोई इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्तिधारी होने से किसी मकान, कमरा, अहाता, जगह, जानवर अथवा वाहन पर नियंत्रण रखता है अथवा उसका उपयोग करता है, जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे अपराध करने के लिए इसके प्रयोग की अनुमति दे जो इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन दंडनीय हो तो वह उसी रीति से दंडनीय होगा मानो कि उसने स्वयं अपराध किया था।''

(xix) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-64 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-64 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''64- कोई अपराध करने के प्रयत्न हेतु शास्ति- जो कोई इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध करने का प्रयत्न करे वह इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए उपबंधित अधिकतम दंड के आधे का भागी होगा।''

(xx) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-64 के पश्चात्‌ एक नई धारा का अंतःस्थापन- उक्त अधिनियम की धारा-64 के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''64क- न्यायालय की अवमानना हेतु शास्ति-कलक्टर या राज्य सरकार की अधिसूचना द्वारा विहित ऐसे पद के किसी पदाधिकारी, जो कलक्टर की शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं, के समक्ष इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक कार्यवाही को भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा-228 के अर्थान्तर्गत न्यायिक कार्यवाही समझी जाएगी।''

(xxi) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-65 का प्रतिस्थापन -उक्त अधिनियम की धारा-65 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथा - ''65-तंग करनेवाली तलाशी, अभिग्रहण, रोक रखना या गिरफ्तारी के लिए उत्पाद पदाधिकारी पर शास्ति -कोई उत्पाद पदाधिकारी या अन्य पदाधिकारी, जो तंग करने की नियत से और शक-सुबहा के युक्तियुक्त आधार के बिना -

(क) इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग करने के अन्तर्गत किसी बंद स्थान में प्रवेश करता है या तलाशी लेता है या प्रवेश करवाता है या तलाशी करवाता है;

(ख) इस अधिनियम के अधीन अधिहरण के दायी किसी वस्तु के अभिग्रहण या तलाशी के बहाने से किसी व्यक्ति के चल सम्पत्ति का अभिग्रहण करता है;

(ग) किसी व्यक्ति की तलाशी लेता है, उसे रोक रखता है, गिरफ्तार करता है;

13 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016

(घ) इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य तरीके से अपने विधिसम्मत शक्तियों से बढ़ने पर तीन महीने के कारावास से, या दस हजार रूपये तक के जुर्माना, या दोनों से दंडनीय होगा।''

(xxii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-66 का प्रतिस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-66 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथा :-

''66- कर्तव्य करने से इन्कार करने पर उत्पाद पदाधिकारी पर शास्ति-कोई उत्पाद पदाधिकारी, जो बिना विधिसम्मत प्रतिहेतु के, सरकारी कर्तव्य निर्वहण से इन्कार कर देता है या उससे स्वयं को अलग कर लेता है, जब तक कि उत्पाद आयुक्त द्वारा लिखित में ऐसा करने के लिए स्पष्ट रूप से अनुमत न हो, या जब तक कि उसने ऐसा करने के अपने आशय की बाबत अपने कार्यालय के वरीय पदाधिकारी को लिखित में दो महीने का नोटिस न दे दिया होगा, या जो कायरता का दोषी होगा, कारावास से जिसे बढ़ाकर तीन महीने किया जा सकेगा या दस हजार रूपये तक के जुर्माना, या दोनों से दंडनीय होगा।''

(xxiii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-67 का प्रतिस्थापन -

उक्त अधिनियम की धारा-67 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''67- अन्यथा उपबंधित के सिवाय अपराध हेतु शास्ति -जो कोई भी इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के किसी उपबंधों के उल्लंघन में कोई कृत्य करता है और ऐसे उल्लंघन के लिए कोई दंड अन्यथा उपबंधित नहीं हुआ हो, तो वह कम-से-कम छह माह के कारावास जिसे बढ़ाकर सात वर्षों तक किया जा सकेगा या कम-से-कम एक लाख रूपये का जुर्माना जिसे बढ़ाकर दस लाख रूपये तक किया जा सकेगा, या दोनों से दंडनीय होगा।''

(xxiv) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-67 के बाद एक नई धारा-67क का अंतःस्थापन -

उक्त अधिनियम की धारा-67 के बाद निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथा :-

''67क- पूर्व दोषसिद्धि के बाद वर्धित दंड -यदि कोई व्यक्ति, इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध किए जाने का पूर्व में दोषसिद्ध पाए जाने के बाद भी पुनः अपराध करता है और इस अधिनियम के अधीन उस अपराध से सिद्धदोष ठहराया गया है, प्रथम दोषसिद्धि के लिए उपबंधित दंड की दुगुनी सजा से दंडनीय होगा।''

(xxv) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-67 क के बाद एक नई धारा- 67ख का अंतःस्थापन -

उक्त अधिनियम की धारा-67 क के बाद निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथा - ''67ख- विनिर्माताओं, आदि को पक्षकार बनाने (अभियोजित करने) की न्यायालय की शक्ति -जहाँ इस अधिनियम के अधीन अपराध के विचारण के दरम्यान किसी समय, किसी व्यक्ति, जो किसी मादक द्रव्य का विनिर्माता, वितरक या व्यौहारी न हो, द्वारा अपराध किए जाने को अभिकथित होने पर; न्यायालय का अपने समक्ष पेश साक्ष्य पर समाधान हो जाता है कि ऐसा विनिर्माता वितरक अथवा व्यौहारी उस अपराध से चिंतित है तो न्यायालय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 14 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 2) की धारा-319 की उप-धारा (3) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उसके विरुद्ध इस अध्याय के किसी धारा के अधीन कार्यवाही कर सकेगा।''

(xxvi) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-67ख के पश्चात्‌ एक नई धारा- 67ग का अन्तःस्थापन- उक्त अधिनियम की धारा-67ख के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''67ग- वर्धित शास्तियाँ अधिरोपित करने की मजिस्ट्रेट की शक्ति-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा-29 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किसी सत्र न्यायाधीश के लिए इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत किसी प्रकार का दंडादेश पारित करना विधिसम्मत होगा।'' (xxvii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68 का प्रतिस्थापन - उक्त अधिनियम की धारा 68 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, यथा :-

''68- अपराधों का अशमन करना - इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में किया गया कोई अपराध इस अधिनियम के अधीन अशमनीय होगा।''

(xxviii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68 के पश्चात्‌ एक नई धारा 68क का अन्तःस्थापन- उक्त अधिनियम की धारा-68 के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''68क- अधिहरण के भागी कुछ चीजें- जब कभी कोई अपराध किया गया हो जो इस अधिनियम के अधीन दंडनीय है तो निम्नलिखित चीजें अधिहरण के भागी होंगी, यथा-

(क) कोई मादक द्रव्य, वस्तु, स्टिल, बर्तन, औजार, उपकरण जिसकी बाबत अथवा जिसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया हो।

(ख) खंड (क) के अधीन अधिहरण का भागी, किसी मादक द्रव्य के साथ अथवा इसके अतिरिक्त कोई मादक द्रव्य जिसे अवैध रूप से आयात किया गया हो, वहन किया गया हो, विनिर्माण किया गया हो, बेचा गया हो अथवा खरीदा गया हो;

(ग) कोई पात्र, पैकेज अथवा आवरक जिसमें खंड (क) अथवा खंड (ख) के अधीन अधिहरण के भागी कुछ चीजें पाई जाती हो और ऐसे पात्र, पैकेज अथवा आवरक का अन्य 'अंश', यदि कोई हो;

(घ) कोई जानवर, वाहन, बर्तन अथवा अन्य सवारी जिसे ढोने के लिए प्रयुक्त किया जाता हो;

(ङ) कोई परिसर अथवा उसका हिस्सा जिसे इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध करने के लिए उपयोग में लाया जा सकता हो।''

(xxix) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68क के पश्चात्‌ एक नई धारा-68ख का अंतःस्थापन- उक्त अधिनियम की धारा-68क के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-15 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 ''68ख-''अधिहरण के भागी वस्तुओं की बिक्री अथवा उन्हें नष्ट करने का आदेश देने की कलक्टर की शक्ति-यदि प्रश्नगत वस्तु तीव्र और प्राकृतिक क्षय का भागी हो अथवा यदि उत्पाद आयुक्त, कलक्टर, न्यायालय अथवा इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी की यह राय हो कि बिक्री लोक हित में की जाएगी अथवा बिक्री स्वामी के हित में होगी तो उत्पाद आयुक्त, कलक्टर, न्यायालय अथवा पदाधिकारी किसी भी समय ऐसे वस्तुओं को बेचने और आगमों को सरकार को जमा करने का निदेश दे सकेगा :

परन्तु जहाँ कोई वस्तु तीव्र और प्राकृतिक क्षय का भागी हो और नगण्य मूल्य का हो तो न्यायालय अथवा सम्बद्ध पदाधिकारी ऐसे वस्तुओं को नष्ट करने का आदेश दे सकेगा, यदि उसकी राय में ऐसा आदेश मामले की परिस्थिति में समीचीन हो।''

(xxx) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II,1915 की धारा-68ख के पश्चात्‌ एक नई धारा-68ग का अंतःस्थापन- उक्त अधिनियम की धारा-68ख के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''68ग- कुछ मामलों में जिला कलक्टर द्वारा अधिहरणः-

(1) इस अधिनियम अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जहाँ इस अधिनियम के अधीन अधिहरण के भागी किसी चीज को इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अभिगृहीत अथवा निरुद्ध किया जाय तो ऐसी संपत्ति को अभिगृहीत अथवा निरुद्ध करनेवाला पदाधिकारी बिना किसी युक्तियुक्त विलम्ब के उक्त संपत्ति को उस जिला कलक्टर के समक्ष प्रस्तुत करेगा जिसकी अधिकारिता में उक्त क्षेत्र आता हो।

(2) उप-धारा (1) के अधीन उक्त अधिगृहीत वस्तु अथवा सामग्री को प्रस्तुत करने पर यदि जिला कलक्टर का समाधान हो जाय कि इस धारा के अधीन अपराध किया गया है, तो चाहे उस अपराध के लिए अभियोजन संस्थित कर दिया गया हो अथवा नहीं, वह ऐसी संपत्ति के अधिहरण का आदेश दे सकेगा। अन्यथा वह अधिकारवान स्वामी को उसे लौटाने का आदेश दे सकेगा। (3) उप-धारा (2) के अधीन अधिहरण का आदेश देते समय जिला कलक्टर यह भी आदेश कर सकेगा कि ऐसी संपत्ति जिससे अधिहरण का आदेश संबंधित है और उसकी राय में परिरक्षित नहीं रखा जा सकता है अथवा मनुष्य के उपभोग हेतु उपयुक्त नहीं है, को नष्ट कर दिया जाय। जब कभी कोई अधिहृत वस्तु इन उपबंधों के अनुरूप नष्ट किया जाय तो यह यथास्थिति अधिहरण अथवा समपहरण का आदेश करनेवाले मजिस्ट्रेट अथवा पदाधिकारी की उपस्थिति में अथवा उत्पाद पदाधिकारी जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, की उपस्थिति में नष्ट किया जाएगा।

(4) जहाँ उप-धारा (2) के अधीन अधिहरण आदेश पारित करने के बाद जिला कलक्टर की यह राय हो कि लोक हित में ऐसा करना समीचीन है तो वह16 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 अधिहृत संपत्ति अथवा उसके किसी भाग को सार्वजनिक नीलामी द्वारा बेचने अथवा विभाग के माध्यम से निपटाने का आदेश दे सकेगा।

(5) जिला कलक्टर ऐसे अधिहरण के एक माह के अन्दर उत्पाद आयुक्त को अधिहरण की सभी विशिष्टियों का पूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगा।''

(xxxi) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68ग के पश्चात्‌ एक नई धारा का अन्तस्थापन - उक्त अधिनियम की धारा-68ग के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''68घ-अधिहरण और नष्ट करने के आदेश का अन्य दंड के साथ हस्तक्षेप नहीं करना-धारा-68 ग के अधीन अधिहरण का कोई आदेश किसी अन्य ऐसे दंड को अधिरोपित करने से नहीं रोकेगा जिससे प्रभावित व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन इसका भागी है।

(xxxii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68घ के पश्चात्‌ एक नई धारा-68ङ का अन्तःस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-68घ के पश्चात्‌्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''68ङ- अधिहरण में अधिकारिता का वर्जन- जब कभी कोई मद्य, सामग्री, स्टिल, बर्तन, औजार अथवा उपकरण अथवा कोई पात्र, पैकेज, कोई पशु गाड़ी, बर्तन अथवा किसी अपराध को करने में प्रयुक्त अन्य वाहन इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत अथवा निरुद्ध किया जाता है तो तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी किसी न्यायालय को ऐसी संपत्ति के संबंध में कोई आदेश देने की अधिकारिता नहीं होगी।''

(xxxiii) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68ङ में एक नई धारा-68च का अंतःस्थापन - उक्त अधिनियम की धारा-68ङ के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''68च- अधिहृत वस्तु को कलक्टर के हवाले करना -

(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन जब कोई वस्तु, जानवर या चीज या तो न्यायालय के आदेश से या अन्यथा, सम्यक्‌ रूप से अधिहृत किया जाता है तो ऐसी वस्तु, जानवर अथवा चीज को निपटाने के लिए कलक्टर के हवाले कर दिया जाएगा अथवा यथाविहित रीति से उसका निपटान कर दिया जाएगा।

(2) जब धारा-68ग के अधीन किसी संपत्ति के अधिहरण के लिए आदेश पारित किया जाता है और ऐसा आदेश उस संपत्ति के संपूर्ण या किसी हिस्से की बाबत अंतिम होता है तो यथास्थिति ऐसी संपत्ति अथवा उसका हिस्सा बिना किसी विल्लंगम (भार) के राज्य सरकार में निहित होगी।''17 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 4 अ(cid:21)ील 2016 (xxxiv) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68च के पश्चात्‌ एक नई धारा 68छ का अन्तःस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-68च के पश्चात्‌्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''68छ- परिसरों का सीलबंद किए जाने के अधीन होना-यदि किसी उत्पाद पदाधिकारी अथवा उप निरीक्षक से अन्यून किसी पुलिस पदाधिकारी के नोटिस में यह बात आए कि इस अधिनियम के अधीन किसी विशिष्ट परिसर अथवा उसके किसी हिस्से का उपयोग कोई अपराध करने के लिए किया जाता है अथवा किया जाता रहा है तो वह तुरत परिसरों को सीलबंद कर सकेगा और उसके अधिहरण हेतु कलक्टर को प्रतिवेदन भेज सकेगाः

परन्तु यदि उक्त परिसर अस्थायी संरचना हो जिसे प्रभावी ढंग से सीलबंद नहीं किया जा सकता हो तो उत्पाद पदाधिकारी अथवा पुलिस पदाधिकारी कलक्टर के आदेश से उस अस्थायी संरचना को गिरा दे सकेगा।''

(xxxv) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68छ के पश्चात्‌ एक नई धारा- 68ज का अंतःस्थापन- उक्त अधिनियम की धारा-68छ के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा।

''68ज-कुछ मामलों में जहाँ मादक द्रव्य अथवा भांग/गाँजा बेची जाती हों उन्हें बंद करने की कलक्टर की शक्ति -

(1) यदि कलक्टर की यह राय हो कि मादक द्रव्य बेचे जाने वाले किसी स्थान को बंद करना लोक शांति के हित में है तो कलक्टर के लिए यह विधि सम्मत्‌ होगा कि वह लिखित आदेश से ऐसे मादक द्रव्य को बेचने के लिए अनुज्ञप्ति रखनेवाले व्यक्ति को ऐसे स्थान को ऐसे समय अथवा ऐसी अवधि तक बंद करने के लिए कहेगा जो इस आदेश में विनिर्दिष्ट हो।

(2) यदि दंगा अथवा अवैध जमावड़ा सन्निकट हो अथवा होता हो तो किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट जो उपस्थित हो के लिए यह विधिसम्मत्‌ होगा कि वह ऐसे स्थान को बंद करने तथा ऐसी अवधि तक उसे बंद रखने का निदेश देगा जो वह उचित समझे और किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुपस्थिति में उप-धारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति स्वयं उस स्थान को बंद करेगा।

(3) इस धारा के अधीन दिया गया कोई आदेश यदि किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया हो तो कलक्टर के समक्ष और यदि कलक्टर द्वारा दिया गया हो तो उत्पाद आयुक्त के समक्ष अपीलनीय होगा।''18 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 अ(cid:21)ील 2016 (xxxvi) बिहार और उड़ीसा अधिनियम II, 1915 की धारा-68ज के पश्चात्‌ एक नई धारा 68झ इनका अंतःस्थापन-उक्त अधिनियम की धारा-68ज के पश्चात्‌ निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

''68झ-सामूहिक जुर्माना-यदि कलक्टर की यह राय हो कि कोई विशेष गाँव अथवा शहर अथवा किसी गाँव अथवा शहर के अंदर कोई क्षेत्र अथवा उस गाँव अथवा शहर में रहनेवाला कोई विशेष समूह/समुदाय इस अधिनियम के किसी उपबंध का बारबार उल्लंघन कर रहा है अथवा इस अधिनियम के अधीन अपराध करने के लिए अभ्यासतः प्रणत है अथवा इस अधिनियम के प्रशासन को बाधा पहुँचा रहा है तो कलक्टर शहर अथवा गाँव के ऐसे क्षेत्र में रहनेवाले लोगों के ऐसे समूह पर यथोचित सामूहिक जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा और ऐसे जुर्माना की वसूली कर सकेगा मानो कि वे बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 (बिहार एवं उड़ीसा अधिनियम IV, 1914) के अधीन लोक मांग थी।''

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उद्देश्य एवं हेतु

राज्य में मद्य निषेध चरणबद्ध तरीके से लागू करने हेतु नई उत्पाद नीति, 2015 अधिसूचित है। मद्य निषेध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बिहार उत्पाद अधिनियम, 1915 की कतिपय धारायें जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अप्रासंगिक हो चुकी है, उसके स्थान पर नये प्रावधान का अन्तःस्थापन समीचीन है। इसलिए अधिनियम की कतिपय धाराओं में संशोधन, प्रतिस्थापन एवं नई धाराओं का अन्तःस्थापन अपेक्षित है। ये तदर्थ बिहार उत्पाद संशोधन अधिनियम, 1915 में संशोधन हेतु इस विधेयक में कतिपय प्रावधान किये गये हैं जिनको अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य एवं अभीष्ट है।

( अब्दुल जलील मस्तान) भार-साधक सदस्य राजीव कुमार,राजीव कुमार,राजीव कुमार,राजीव कुमार,

पटना,पटना,पटना,पटना,

प्रभारी प्रभारी प्रभारी प्रभारी सचिवसचिवसचिवसचिव,,,,

दिनांक दिनांक दिनांक दिनांक 30303030 मार्च 2016मार्च 2016मार्च 2016मार्च 2016

बिहार विधान-सभा ।बिहार विधान-सभा ।बिहार विधान-सभा ।बिहार विधान-सभा ।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 04 April 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-04-04.270/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-04-04.270.