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जल संसाधन विभाग
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5 tuojh 2016
सं0 22 नि0 सि0 (सिवान)-11-195/1994/11
सि0 (सिवान)-11-195/1994/11—मो0 इफ्तेखार अहमद, तत्कालीन अवर प्रमण्डल मो0 इफ्तेखार अहमद, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमण्डल, सिवान सम्प्रति सेवानिवृत जिन्हें 7 नं0 गोगरा तटबंध के 31वें कि0 मी0 के पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमण्डल, सिवान सम्प्रति सेवानिवृत जिन्हें 7 नं0 गोगरा तटबंध के 31वें कि0 मी0 के पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमण्डल, सिवान सम्प्रति सेवानिवृत जिन्हें 7 नं0 गोगरा तटबंध के 31वें कि0 मी0 के
प्त परिवाद की जाँच उड़नदस्ता से करायी गयी। आस-पास 800 फीट में रिभेटमेंट कार्य में अनियमतता के संबंध में प्राप्त परिवाद की जाँच उड़नदस्ता से करायी गयी। आस-पास 800 फीट में रिभेटमेंट कार्य में अनियमतता के संबंध में प्रा
विभागीय उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गई। श्री अहमद से प्राप्त विभागीय उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गई। श्री अहमद से प्राप्त विभागीय उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गई। श्री अहमद से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि उनके द्वारा विशिष्ट के अनुरूप स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि उनके द्वारा विशिष्ट के अनुरूप स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि उनके द्वारा विशिष्ट के अनुरूप े एवं गलत भुगतान करने का आरोप प्रमााणित होता है। इस प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अहमद को कार्य नहीं कराने एवं गलत भुगतान करने का आरोप प्रमााणित होता है। इस प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अहमद को े एवं गलत भुगतान करने का आरोप प्रमााणित होता है। इस प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अहमद को विभागीय आदेश सं0-29 दिनांक 07.03.95 द्वारा निम्नांकित दण्ड संसूचित किया गया थाः- विभागीय आदेश सं0-29 दिनांक 07
निन्दन की सजा, जिसकी प्रविष्टि उनके वर्ष 1993-94 के चारित्री में की जायेगी। निन्दन की सजा, जिसकी प्रविष्टि उनके वर्ष 1993-94 के चारित्री में की जायेगी। 1. निन्दन की सजा, जिसकी प्रविष्टि उनके वर्ष 1993-94 के चारित्री में की जायेगी।
2. उनकी सात वार्षिक वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।
सात वार्षिक वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।
3. कमी पाये गये सामानों का मूल्य उनसे वसूल की जायेगी।
कमी पाये गये सामानों का मूल्य उनसे वसूल की जायेगी।
उक्त दण्डादेश को सरकार द्वारा पुर्नसमीक्षोपरान्त क्रमांक (2) द्वारा संसूचित दण्ड को संशोधित करते हुए उक्त दण्डादेश को सरकार द्वारा पुर्नसमीक्षोपरान्त क्रमांक (2) द्वारा संसूचित दण्ड को संशोध्ि उक्त दण्डादेश को सरकार द्वारा पुर्नसमीक्षोपरान्त क्रमांक (2) द्वारा संसूचित दण्ड को संशोध्ि
विभागीय आदेश सं0 650 दिनांक 20
650 दिनांक 20.04.98 द्वारा ''सात वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध'' किया गया।
वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध'' किया गया।
11 के आलोक में ''कमी पाये गये झारखंड सरकार, जल संसाधन विभाग के पत्रांक 1384 दिनांक 15.03.11 के आलोक में ''कमी पाये गये झारखंड सरकार, जल संसाधन विभाग के पत्रांक 1384 दिनांक 15
सामानों का मूल्य'' निर्धारण के संबंध में पुर्नसमीक्षा की गई। पाया गया कि श्री अहमद को उक्त दण्ड उड़नदस्ता अंचल सामानों का मूल्य'' निर्धारण के संबंध में पुर्नसमीक्षा की गई। पाया गया कि श्री अहमद को उक्त दण्ड उड़नदस्ता अंचल सामानों का मूल्य'' निर्धारण के संबंध में पुर्नसमीक्षा की गई। पाया गया कि श्री अहमद को उक्त दण्ड उड़नदस्ता अंचल 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 11 [(cid:10)$ल 2016 पानी में पूरी तरह डूबे हुये होने के कारण साउण्डींग का सहारा लेकर मापी ली गई थी। उड़नदस्ता अंचल द्वारा बाढ़ के बाद कार्य जलमुक्त होने पर उनकी मापी लेकर विभाग को उपसंहारात्मक प्रतिवेदन समर्पित करने की बात कही गई थी, लेकिन उड़नदस्ता अंचल द्वारा मापी लेकर उपसंहारात्मक प्रतिवेदन विभाग को समर्पित नहीं किया गया। मामला वर्ष 1993-94 का है, इसलिए अब उपसंहारात्मक प्रतिवेदन प्राप्त कर ''कमी पाये गये सामानों का मूल्य निर्धारण संभव नहीं है। अतएव सरकार द्वारा वसूलनीय राशि का निर्धारण नहीं हो सकने के कारण ''कमी पाये गये सामानों का मूल्य उनसे वसूल की जायेगी'' को विलोपित करने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश सं0 29 दिनांक 07.03.95 द्वारा संसूचित दण्ड क्रमांक (3) ''कमी पाये गये सामानों का मूल्य उनसे वसूल की जायेगी'' को विलोपित किया जाता है। दण्डादेश की शेष शर्त्तें यथावत् रहेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
गजानन मिश्र,
विशेष कार्य पदाधिकारी।
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