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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 11 April 2016

Published 11 April 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-04-11.292
Languages
English, Hindi

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ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत 22 चैऽचैऽचैऽचैऽ 1938 (शशशश0)

((((संसंसंसं0 पटनापटनापटनापटना 292) ) ) ) पटनापटनापटनापटना

पटनापटनापटनापटना, सोमसोमसोमसोमवारवारवारवार, 11 अूीलअूीलअूीलअूील 2016

जल संसाधन विभाग ---------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 19191919 जनवरी 2016जनवरी 2016जनवरी 2016जनवरी 2016

सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-10/2013/124—श्री मुकेश कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, चन्द्रदेई श्री मुकेश कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, चन्द्रदेई सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-10/2013/ अनुमंडल, अररिया के विरूद्ध ज्ञात स्त्रोतों से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप में आर्थिक अपराध थाना काण्ड सं0 अनुमंडल, अररिया के विरूद्ध ज्ञात स्त्रोतों से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप में आर्थिक अपराध थाना काण्ड सं0 अनुमंडल, अररिया के विरूद्ध ज्ञात स्त्रोतों से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप में आर्थिक अपराध थाना काण्ड सं0 24/13 दिनांक 23 धारा-13 (2) पठित धारा-13 (1) ई0 भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 दर्ज किया गया। आर्थिक अपराध ई0 भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 दर्ज किया गया। आर्थिक अपराध 24/13 दिनांक 23 धारा-13 (2) पठित धारा-13 (1) 08.2013 द्वारा श्री सिंह को इकाई, बिहार, पटना से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय अधिसूचना सं0 948 दिनांक 13.08 इकाई, बिहार, पटना से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय अधिसूचना सं0 948 दिनांक 13 2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1072 दिनांक 06.09.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेव निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1072 दिनांक 06 एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जाँच प्रतिवेदन में आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप को प्रमाणित पाया द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जाँच प्रतिवेदन में आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप को प्रमाणित पाया द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जाँच प्रतिवेदन में आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप को प्रमाणित पाया धकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरान्त धकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरान्त गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरान्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 919 दिनांक 14.07.2014 द्वारा श्री सिंह जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 919 दिनांक 14 जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 919 दिनांक 14 से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, पाया गया कि श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में मुख्य रूप से कहा गया है कि मेरे द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित पाया गया कि श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में मुख्य रूप से कहा गया है कि मेरे द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित पाया गया कि श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में मुख्य रूप से कहा गया है कि मेरे द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित नहीं किया गया है क्योंकि वे हिन्दू अविभाज्य परिवार के सदस्य है। अविभाज्य परिवार के सम्पत्ति अभी भी परिवार के मुखिया नहीं किया गया है क्योंकि वे हिन्दू अविभाज्य परिवार के सदस्य है। अविभाज्य परिवार के सम्पत्ति अभी भी परि नहीं किया गया है क्योंकि वे हिन्दू अविभाज्य परिवार के सदस्य है। अविभाज्य परिवार के सम्पत्ति अभी भी परि अर्थात उनके पिता के अधीन है और उनके द्वारा ही समय-समय पर इन परिसम्पत्तियों को पुत्र एवं बहुओं में अर्थात उनके पिता के अधीन है और उनके द्वारा ही समय-समय पर इन परिसम्पत्तियों को पुत्र एवं बहुओं में अर्थात उनके पिता के अधीन है और उनके द्वारा ही समय-समय पर इन परिसम्पत्तियों को पुत्र एवं बहुओं में आवश्यकतानुसार वितरित किया गया है। साक्ष्य के रूप में बैलेंस शीट एवं वेतन विवरणी की छायाप्रति संलग्न किया गया। आवश्यकतानुसार वितरित किया गया है। साक्ष्य के रूप में बैलेंस शीट एवं वेतन विवरणी की छायाप्रति संलग्न किया गया। आवश्यकतानुसार वितरित किया गया है। साक्ष्य के रूप में बैलेंस शीट एवं वेतन विवरणी की छायाप्रति संलग्न किया गया।े गये बैलेंस शीट में स्वयं एवं पत्नी की कुल आय (69,35,399 श्री मुकेश कुमार सिंह द्वारा प्राप्त कराये गये बैलेंस शीट में स्वयं एवं पत्नी की कुल आय (69,35,399 श्री मुकेश कुमार सिंह द्वारा प्राप्त कराय 1,09,92,086) = 1,79,27,485/- रूपये दर्शाया गया है। आर्थिक अपराध इकाई द्वारा दिये गये सूचना में श्री सिंह द्वारा 1,09,92,086) = 1,79,27,485/- रूपये दर्शाया गया है। आर्थिक अपराध इकाई द्वारा दिये गये सूचना में श्री सिंह द्वारा 1,09,92,086) = 1,79,27,485/- रूपये दर्शाया गया है। आर्थिक अपराध इकाई द्वारा दिये गये सूचना में श्री सिंह द्वारा 23,29,000/- रूपये का क्रय की गयी जमीन का समावेश बैलेंस शीट मेें यह कहकर नहीं किया गया है 23,29,000/- रूपये का क्रय की गयी जमीन का समावेश बैलेंस शीट मेें यह कहकर नहीं किया गया है कि उक्त जमीन 23,29,000/- रूपये का क्रय की गयी जमीन का समावेश बैलेंस शीट मेें यह कहकर नहीं किया गया है उनके नाम से हिन्दू अविभाज्य परिवार के द्वारा खरीद की गई है। श्री सिंह द्वारा मकान किराया एवं उपहार से प्राप्त नगद उनके नाम से हिन्दू अविभाज्य परिवार के द्वारा खरीद की गई है। श्री सिंह द्वारा मकान किराया एवं उपहार से प्राप्त नगद उनके नाम से हिन्दू अविभाज्य परिवार के द्वारा खरीद की गई है। श्री सिंह द्वारा मकान किराया एवं उपहार से प्राप्त नगद राशि को स्वयं एवं पत्नी के आय में समावेश किया गया है जबकि उक्त राशि 2006 से 2010 के बीच में ही अर्जन किया राशि को स्वयं एवं पत्नी के आय में समावेश किया गया है जबकि उक्त राशि 2006 से 2010 के बीच में ही अर्जन किया राशि को स्वयं एवं पत्नी के आय में समावेश किया गया है जबकि उक्त राशि 2006 से 2010 के बीच में ही अर्जन किया र्जित सम्पत्ति की लागत राशि को पूरा करने के लिए दर्शाया गया है। अर्जित सम्पत्ति की र्जित सम्पत्ति की लागत राशि को पूरा करने के लिए दर्शाया गया है। अर्जित सम्पत्ति की गया है। उपरोक्त आय का स्त्रोत अर्जित सम्पत्ति की लागत राशि को पूरा करने के लिए दर्शाया गया है। अर्जित सम्पत्ति की लागत राशि को पूरा करने के लिए घरेलू खर्च तथा व्यक्तिगत खर्च को एक तिहाई से भी कम दिखाया गया है। श्री सिंह लागत राशि को पूरा करने के लिए घरेलू खर्च तथा व्यक्तिगत खर्च को एक तिहाई से भी कम दिखाया गया है। श्री सिंह लागत राशि को पूरा करने के लिए घरेलू खर्च तथा व्यक्तिगत खर्च को एक तिहाई से भी कम दिखाया गया है। श्री सिंह रिटर्न में दिखाया गया है और न ही इससे एवं उनकी पत्नी द्वारा ली गई नगद राशि के रूप में उपहार को न तो आयकर एवं उनकी पत्नी द्वारा ली गई नगद राशि के रूप में उपहार को न तो आयकर रिटर्न में दिखाया गया है और न ही इससे संबंधित बैंक लेन देन का साक्ष्य ही दिखलाया गया है। संबंधित बैंक लेन देन का साक्ष्य ही दिखलाया गया है। 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 11 अूीलअूीलअूीलअूील 2016 श्री मुकेश कुमार सिंह की पत्नी के द्वारा मकान किराया से प्राप्त आय की राशि 47,45,123/- रूपये को अंशतः माना जा सकता है परन्तु श्री सिंह एवं उनकी पत्नी के द्वारा नगद राशि के रूप में प्राप्त उपहार की कुल राशि 36.70 लाख रूपये एवं श्री सिंह के नाम से हिन्दू अविभाज्य परिवार के द्वारा श्री सिंह के सेवाकाल के दौरान वर्ष 2006 से 2010 के बीच सात स्थानों पर 23.29 लाख रूपये की क्रय की गई जमीन श्री सिंह के दो भाई एवं चार बहन के होते हुए हिन्दू अविभाज्य परिवार के दौरान सिर्फ श्री सिंह के नाम से किया जाना एवं उपहार के रूप में केवल इन्हें एवं इनकी पत्नी को ही नगद राशि देना को मान्य नहीं किया जा सकता है। वर्ष 2012-13 की अवधि के लिए श्री सिंह, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित चल एवं अचल सम्पत्ति तथा दायित्वों की विवरणी में कई चल एवं अचल सम्पत्ति की जानकारी उनके द्वारा विभाग को न देकर उसे छिपाया गया है। उक्त आरोप के संदर्भ में श्री सिंह द्वारा संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव बयान में बिहार सरकारी सेवक नियमावली 1976 के मेमो नं0 3/108/76-21734 दिनांक 05.11.1978 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि परिवार के किसी सदस्य (पत्नी) के द्वारा स्वयं अर्जित राशि से क्रय किये गये सम्पत्ति का उल्लेख करना आवश्यक नहीं है दूसरी तरफ उनके द्वारा चल एवं अचल सम्पत्ति तथा दायित्वों की विवरणी में अपनी पत्नी के नाम से सम्पत्ति अंशतः दर्शाया गया है जो एक दूसरे के विरोधाभाषी है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री सिंह के विरूद्ध उक्त आरोप को प्रमाणित पाया गया है।

इस प्रकार श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की सम्यक समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री मुकेश कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, चन्द्रदेई अनुमंडल, अररिया सम्प्रति सहायक अभियंता (निलंबित), मुख्य अभियंता का कार्यालय, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, जल संसाधन विभाग, अनिसाबाद, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के संशोधन से संबंधित नियमावली 2007 के नियम 14 (xi) के तहत ''सेवा से बर्खास्त'' करने का निर्णय लिया गया है।

तदुपरान्त श्री सिंह को ''सेवा से बर्खास्त'' करने के प्रस्ताव में विभागीय पत्रांक 214 दिनांक 21.01.15 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति प्राप्त करने का अनुरोध किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने पत्रांक 442 दिनांक 13. 05.15 द्वारा श्री सिंह को सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव में सहमति प्रदान की।

पुनः श्री सिंह को सेवा से बर्खास्त करने से संबंधित विभागीय प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की स्वीकृति हेतु भेजा गया। मंत्रिपरिषद द्वारा दिनांक 30.06.15 की बैठक में श्री सिंह को ''सेवा से बर्खास्त'' करने के प्रस्ताव में स्वीकृति प्रदान की गयी है।

सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री मुकेश कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, चन्द्रदेई अनुमंडल, अररिया सम्प्रति सहायक अभियंता (निलंबित), मुख्य अभियंता का कार्यालय, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, जल संसाधन विभाग, अनिसाबाद, पटना को विभागीय अधिसूचना सं0-1559 दिनांक 10.07.15 द्वारा ''सेवा से बर्खास्त'' किया गया। सेवा से बर्खास्तगी के उक्त दण्ड के विरूद्व श्री सिंह द्वारा पुनर्विलोकन आवेदन समर्पित किया गया, जिसमें विभागीय कार्यवाही में नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त, युक्तियुक्त अवसर, संविधान के अनुच्छेद 311 (1), 311 (2), 311 (2) B 320 (3) C एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 से पालन किये बिना 17(1) का उल्लंधन करने एवं गंभीर आरोप होने के बावजूद विभागीय जॅाच आयुक्त से विभागीय कार्यवाही न कराने जैसे अन्य कतिपय आरोप लगाये गये है। श्री सिंह से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री सिंह के पुनर्विलोकन अर्जी में कोई विचारणीय तथ्य नहीं रहने एवं उनके द्वारा लगाये गये आरोप सत्य से परे होने के कारण अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री मुकेश कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति बर्खास्त के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड ''सेवा से बर्खास्त'' को यथावत रखने का आदेश संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।

———— अधी*कअधी*कअधी*कअधी*क, सिचवालयसिचवालयसिचवालयसिचवालय मुिणालयमुिणालयमुिणालयमुिणालय, (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार, पपपपटनाटनाटनाटना (cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत एवंएवंएवंएवं मु.ित।मु.ित।मु.ित।मु.ित। (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार गजटगजटगजटगजट (असाधारणअसाधारणअसाधारणअसाधारण) 292-571+10-ड$ड$ड$ड$0ट$ट$ट$ट$0प ीप ीप ीप ी0।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 11 April 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-04-11.292/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-04-11.292.