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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 11 April 2016

Published 11 April 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-04-11.300
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:18)या पी0ट$0-40 िनबंधन सं(cid:18)या (cid:1)ब(cid:1)ब(cid:1)ब(cid:1)बहारहारहारहार गजटगजटगजटगजट हारहारहारहार गजटगजटगजटगजट

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सरकारसरकारसरकारसरकार (cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत

ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत 22 चैऽचैऽचैऽचैऽ 1938 (शशशश0)

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पटनापटनापटनापटना, सोमसोमसोमसोमवारवारवारवार, 11 अूीलअूीलअूीलअूील 2016

जल संसाधन विभाग ---------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 11119999 फरवरीफरवरीफरवरीफरवरी 2016201620162016

सं0 22 नि0 सि0 (मुज0)-06-05/2012/

22 नि0 सि0 (मुज0)-06-05/2012/320—श्री भीम शंकर राय, (आई0 डी0-2243), तत्कालीन श्री भीम शंकर राय, (आई0 डी0-2243), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमण्डल सं0-1, सीतामढ़ी सम्प्रति सेवानिवृत के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमण्डल सं0-1, सीतामढ़ी सम्प्रति सेवानिवृत के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमण्डल सं0-1, सीतामढ़ी सम्प्रति सेवानिवृत के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध एजेण्डा सं0 113/399 रामपुर कंठ स्थल पर एवं एजेण्डा सं0 113/403 के त हत अदौरी स्थल पर बाढ़ वर्ष 2012 के एजेण्डा सं0 113/399 रामपुर कंठ स्थल पर एवं एजेण्डा सं0 113/403 के तहत अदौरी स्थल पर बाढ़ वर्ष 2012 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गयी। पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गयी। पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गयी। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित 12 द्वारा श्री राय से निम्न बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण लिए श्री राय से विभागीय पत्रांक 990 दिनांक 11.09.12 द्वारा श्री राय से निम्न बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण निम्न आरोपों के लिए श्री राय से विभागीय पत्रांक 990 दिनांक 11 पूछा गया।

(i) एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कटाव निरोधक कार्यों के विशेष जाँच दल के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट ) एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कटाव निरोधक कार्यों के विशेष जाँच दल के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट ) एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कटाव निरोधक कार्यों के विशेष जाँच दल के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट 00 लाख रूपये का मोबलाईजेशन होता है कि बैंक गारंटी के विरूद्ध विभागीय नियमों का उल्लंघन करते हुए अग्रिम 25.00 लाख रूपये का मोबलाईजेशन होता है कि बैंक गारंटी के विरूद्ध विभागीय नियमों का अग्रिम दिया गया है।

(ii) एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कराये जा रहे कार्यों के दौरान दिनांक 07 12 तक परक्यूपाईन लेईंग ) एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कराये जा रहे कार्यों के दौरान दिनांक 07.04.12 तक परक्यूपाईन लेईंग ुल 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग कार्य प्रारम्भ नहीं होना प्रतिवेदित है। परन्तु लेईंग रजिस्टर में दिनांक 09.03.12 तक कुल 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग कार्य प्रारम्भ नहीं होना प्रतिवेदित है। परन्तु लेईंग रजिस्टर में दिनांक 09 कार्य दिखाकर दिनांक 06.03.12 को कुल 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग कार्य मद में कुल 34,13,711/- रूपये का 12 को कुल 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग कार्य मद में कुल 34,13,711/- रूपये का 12 को कुल 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग कार्य मद में कुल 34,13,711/- रूपये का भुगतान किया गया है। जिससे स्पष्ट है कि एकरारनामा के कार्यमद एवं विभागीय नियमों का उल्लंघन कर परक्यूपाईन भुगतान किया गया है। जिससे स्पष्ट है कि एकरारनामा के कार्यमद एवं विभागीय नियमों का उल्लंघन कर परक्यूपाईन भुगतान किया गया है। जिससे स्पष्ट है कि एकरारनामा के कार्यमद एवं विभागीय नियमों का उल्लंघन कर परक्यूपाईन लेईंग कार्य कराये बिना ही संवेदक को भुगतान कर दिया गया।

ी संवेदक को भुगतान कर दिया गया।

(iii) एजेण्डा सं0 113/402 के तहत अदौरी स्थल एवं खैरा पहाड़ी स्थल पर कराये गये परक्यूपाईन ढ़लाई ) एजेण्डा सं0 113/402 के तहत अदौरी स्थल एवं खैरा पहाड़ी स्थल पर कराये गये परक्यूपाईन ढ़लाई ) एजेण्डा सं0 113/402 के तहत अदौरी स्थल एवं खैरा पहाड़ी स्थल पर कराये गये परक्यूपाईन ढ़लाई कार्यों में विशिष्ट से अधिक बालू की मात्रा पायी गयी है। न्यून विशिष्टि के कार्य सम्पादन के फलस्वरूप सरकार को कार्यों में विशिष्ट से अधिक बालू की मात्रा पायी गयी है। न्यून विशिष्टि के कार्य सम्पादन के फलस्वरूप सरकार को कार्यों में विशिष्ट से अधिक बालू की मात्रा पायी गयी है। न्यून विशिष्टि के कार्य सम्पादन के फलस्वरूप सरकार को वित्तीय क्षति हुई है।

श्री राय से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। श्री राय से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। श्री राय से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। 13 द्वारा श्री राय के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0 1309 दिनांक 24.10.13 द्वारा श्री राय के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0 1309 दिनांक 24 से विभागीय कार्यवाही संचालित की (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति गयी।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री राय द्वारा निम्न बाते कही विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री राय द्वारा निम्न बाते कही विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री राय द्वारा निम्न बाते कही गयी हैः-2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 11 अूीलअूीलअूीलअूील 2016 (i) आरोप सं0 1 के बचाव बयान में श्री राय द्वारा कहा गया कि साक्ष्य में Cash Book की कॉपी एवं मापपुस्त की प्रति समर्पित करते हुए कहा गया कि इनके द्वारा कोई अग्रिम नहीं दी गयी है। उड़नदस्ता अंचल के जाँच प्रतिवेदन में भी इस तरह के अग्रिम नहीं देने की पुष्टि होती है।

(ii) आरोप सं0 2 के बचाव बयान में श्री राय द्वारा कहा गया है कि परक्यूपाईन लेईंग कार्य बाँये तटबंध से लगभग एक (1) कि0 मी0 बालू पर पैदल चलने पर ही दृष्टिगोचर होता है। श्री राय के अनुसार मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता कार्य स्थल के एक अन्य बिन्दु पर गये एवं कराये गये कार्य स्थल पर गये बगैर ही इस संबंध में अपना निरीक्षण प्रतिवेदन दिया है।

(iii) आरोप सं0 3 के बचाव बयान में श्री राय द्वारा कहा गया है कि उड़नदस्ता अंचल के द्वारा मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पत्रांक 1045 दिनांक 06.07.92 में निहित नियमों के अनुसार सैंपुल टेस्टिंग एवं सैंपुल का एकत्रीकरण तथा सिमेंट में मौजूद कैल्शियम के आधार पर सिमेंट की गणना नहीं की गयी है। परक्यूपाईन का कार्य कारगर सिद्ध हुआ तथ नदी तटबंध से दूर शिफ्ट हो गयी है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जॅाच प्रतिवेदन में निम्न बातें कही गयी हैः- आरोप सं0-1- श्री राय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर यह फलित होता है कि आरोपी पदाधिकारी श्री राय के द्वारा मोबलाईजेशन अग्रिम नहीं दी गयी है । अतएव आरोप सं0 1 प्रमाणित नहीं होता है।

आरोप सं0-2- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 8.1.0 में यह प्रतिवेदित किया गया है कि दिनांक 09.

05.12 को स्थलीय जाँच में एजेण्डा सं0 113/399 में स्थल पर 605 अदद से कुछ ज्यादा ही परक्यूपाईन पाये, जो कि दिनांक 06.03.12 को पारित विपत्र में अंकित परक्यूपाईन से ज्यादा है।

उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में कार्य कराने की वास्तविक तिथि अंकित नहीं है। अतः मुख्य अभियंता द्वारा यह आरोप की दिनांक 07.04.12 तक परक्यूपाईन कार्य नहीं कराने में भी लेईंग रजिस्टर में किस तरह परक्यूपाईन दिखाया गया है, की पुष्टि नहीं हो पाती है। मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिवेदित आरोप की पुष्टि हेतु मुख्य अभियंता एवं उड़नदस्ता द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। अतः आरोप सं0 2 प्रमाणित नहीं होता है।

आरोप सं0-3- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में अनुपात दो साईज सैंपुल में से एक खैरा पहाड़ी स्थल में 1ः2.7 एवं दूसरे अदौरी स्थल में 1ः4.3 आया। यह अनुपात वास्तविक पी0 सी0 सी0 1ः2.4 से कम है।

एक सैंपुल में 1ः2.7 निर्धारित विशिष्टि से काफी नजदीक है जबकि दूसरे सैंपुल का अनुपात कम है। निगरानी विभाग के पत्र सं0 1045 दिनांक 06.07.92 को ध्यान में रखा जाय तो पन्द्रह से बीस प्रतिशत तक Mixing deviation माना जा सकता है। अदौरी स्थल पर परक्यूपाईन में सिमेंट बालू का अनुपात 1ः4.3 आया है जो 1ः2 प्रावधानित से अधिक है। उड़नदस्ता द्वारा यह एक ही सैंपुल का टेस्ट रिपोर्ट दिखाया गया है जबकि निगरानी विभाग का पत्र सं0 1045 दिनांक 06.07.92 के अनुसार किसी स्थल पर तीन सैंपुल लिया जाना चाहिए था तथा जाँचफल औसत के आधार पर गुणवत्ता निर्धारण किया जाना चाहिए था।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः-

आरोप सं0-1- एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कटाव निरोधक कार्य में नियम के विरूद्ध कार्यपालक अभियंता के द्वारा संबंधित संवेदक को 25 लाख मोबलाईजेशन अग्रिम प्रदान करने से संबंधित है। इस आरोप के संबंध में संचालन पदाधिकारी ने अपने मंतव्य में अंकित किया है कि आरोपित कार्यपालक अभियंता श्री भीम शंकर राय द्वारा मोबिलाईजेशन अग्रिम नहीं देने की पुष्टि होती है, के आधार पर आरोप सं0 1 को प्रमाणित नहीं माना गया है। प्रमण्डलीय रोकड़बही एवं मापपुस्त सं0 1754 में मोबलाईजेशन अग्रिम की राशि 25 लाख दिए जाने का उल्लेख नहीं है। उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में उल्ल्ेखित है कि मोबलाईजेशन अग्रिम दिए जाने के आरोप की पुष्टि नहीं होती है तथा श्री राय के बयान की दिनांक 20.03.12 को विशेष जाँच दल के निरीक्षण प्रतिवेदन में मोबलाईजेशन की अग्र्रिम राशि 25 लाख मानवीय भूल/टंकण भूलवश अंकित हो गया है। उपरोक्त तथ्य के आधार पर माना गया कि इस कार्य में संवेदक को मोबलाईजेशन अग्रिम नहीं दिया गया है। अतः आरोप सं0 1 प्रमाणित नहीं होता है।

आरोप सं0-2- एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कटाव निरोधक कार्य में बिना परक्यूपाईन लेईंग कार्य कराये ही दिनांक 06.03.12 को एकरारनामा के कार्य मद के विरूद्ध कुल 34.17 लाख का अनियमित भुगतान से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा दिनांक 09.05.12 को उड़नदस्ता के स्थलीय जाँच में 605 अदद से कुछ ज्यादा ही परक्यूपाईन पाये गये जो दिनांक 06.03.12 को पारित विपत्र में अंकित परक्यूपाईन से ज्यादा पाया जाना एवं मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिवेदित आरोप की पुष्टि हेतु मुख्य अभियंता या उड़नदस्ता द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराये जाने के आधार पर श्री राय के विरूद्ध आरोप सं0 2 को प्रमाणित नहीं पाया गया है। परन्तु अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, सीतामढ़ी के दिनांक 07.04.12 के निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार उक्त तिथि तक संवेदक द्वारा कार्य प्रारम्भ नहीं किया जाना तथा मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के दिनांक 03.04.12 के निरीक्षण प्रतिवेदन में भी उल्लेखित है कि कार्य प्रारम्भ करने की कोई एक्टीविटी दिखाई नहीं पड़ी तथा विशेष जाँच दल के चौथे दौर के निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार परक्यूपाईन लाने का प्रयास जारी था। तत्पश्चात कार्य शुरू किया जायेगा। उक्त के आधार पर दिनांक 06.03.12 तक परक्यूपाईन लेईंग कार्य प्रारम्भ नहीं होने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध था। परक्यूपाईन लेईंग रजिस्टर के अवलोकन से स्पष्ट है कि उस पंजी में अंकित तिथिवार कराये गये कार्य की मात्रा पर मात्र कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा हस्ताक्षर किया गया है। उक्त पंजी पर विधिवत निर्गत संबंंधी प्रमाण पत्र भी अंकित नहीं है3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 11 अूीलअूीलअूीलअूील 2016 एवं न ही उच्च पदाधिकारी द्वारा कभी प्रविष्टि के जाँच ही किया गया है। ऐसी स्थिति में लेईंग पंजी एवं प्रविष्टि की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाता है। अतः आरोप सं0 2 प्रमाणित होता है।

आरोप सं0-3- एजेण्डा सं0 113/402 में अदौरी स्थल एवं खैरा स्थल परक्यूपाईन ढ़लाई कार्य में न्यून विशिष्टि के कार्य कराने के फलस्वरूप सरकारी राशि को क्षति पहुँचाने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा खैरा पहाड़ी स्थल पर के कार्य के एक सैंपुल में पी0 सी0 सी0 निर्धारित विशिष्टि (1ः2.4) से काफी नजदीक (1ः2.7) पाया गया। अर्थात 9.08 प्रतिशत सिमेंट की मात्रा में कमी होता है। निगरानी विभाग का पत्रांक 1045 दिनांक 06.07.92 के आलोक में सिमेंट बालू के अनुपात में पायी गयी deviation का 25% तक Permissible limit के अंदर माना गया है तथा अदौरी स्थल पर परक्यूपाईन में सिमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः4.3 आया है जो निर्धारित विशिष्ट 1ः2 से अधिक है। निगरानी विभाग का पत्रांक 1045 दिनांक 06.07.92 के अनुसार किसी स्थल पर तीन सैंपल लेकर औसत जाँच फल के आधार पर गुणवत्ता निर्धारण किया जाना है। परन्तु उड़नदस्ता द्वारा एक ही नमूना के आधार पर जाँच फल दिया गया है, के आधार पर श्री राय के विरूद्ध आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया है, को स्वीकार योग्य मानते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं0 3 प्रमाणित नहीं होता है।

इसी बीच श्री राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के दिनांक 31.01.14 को सेवानिवृत होने केे कारण इनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0 72 सह ज्ञापांक 847 दिनांक 01.07.14 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया।

अतएव प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 900 दिनांक 11.07.14 द्वारा श्री राय से बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

(i) एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कार्यों में बिना परक्यूपाईन लेईंग के कार्य कराये ही दिनांक 06.03.12 को एकरारनामा के कार्य मद के विरूद्ध संवेदक को लाभ पहुँचाने के उद्धेश्य से कुल 34.13 लाख का अनियमित भुगतान करने के आरोप को प्रमाणित पाया गया है।

श्री राय ने अपने पत्रांक- शून्य दिनांक 10.06.15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया जिसमें मुख्यतः निम्न बाते कही गई है।

(i) विभागीय पत्रांक 900 (अनु0) दिनांक 11.07.14 में अंकित आरोप नवीन आरोप है तथा विभागीय ज्ञापांक 1309 दिनांक 24.10.13 द्वारा मेरे विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित संगत आरोप (सं0-2) से भिन्न आरोप है।

विभागीय पत्रांक 1309 दिनांक 24.10.13 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में वर्णित आरोप एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कराये जा रहे कार्याें के दौरान अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, सीतामढ़ी/मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर तथा विशेष जाँच दल के स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार दिनांक 07.04.12 तक परक्यूपाईन लेईंग कार्य प्रारम्भ नहीं होना प्रतिवेदित है। परन्तु लेईंग रजिस्टर में दिनांक 01.03.12 तक कुल 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग कार्य दिखाकर दिनांक 06.03.12 को कुल 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग कार्य मद में कुल 34,13,711/- रू0 का भुगतान किया गया। स्पष्ट है कि एकरारनामा के कार्य मद एवं विभागीय नियमों का उल्लंघन कर परक्यूपाईन लेईंग कार्य कराये बिना ही संवेदक को भुगतान किया गया। उक्त वित्तीय अनियमितता के लिए आप प्रथम दोषी हैं।

जबकि विभागीय पत्रांक 900 दिनांक 11.07.14 में द्वितीय कारण पृच्छा में अंकित आरोप एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कार्यों मेंं बिना परक्यूपाईन लेईंग कार्य कराये ही दिनांक 06.03.12 को एकरारनामा के कार्य मद के विरूद्ध संवेदक को लाभ पहुॅंचाने के उद्धेश्य से कुल रू0 34.13/- लाख का अनियमित भुगतान करने के आरोप को प्रमाणित पाया गया है।

उक्त के आलोक में श्री राय का कहना है कि चुँकि पुराने आरोप से द्वितीय कारण पृच्छा का आरोप भिन्न एवं नवीन है। अतः उत्तर की अपेक्षित बाध्यता विधि सम्मत नहीं है क्योंकि इसमें संवेदक को लाभ पहुँचाने के उद्धेश्य नया आरोप लगाया गया है।

(2) मेरे विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में नियुक्त जाँच पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में किये गये भुगतान को अनियमित नहीं पाया गया है एवं इस प्रकार सरकार को कोई वित्तीय क्षति प्रतिवेदित नहीं है। (3) विभागीय पत्रांक 1012 दिनांक 27.09.06 की विशेषतः कंडिका (4) (i) (क) एवं 4 (ii) जिसमें क्रमशः वित्तीय अनियमितता जिसमें राज्य सरकार को वित्तीय क्षति हुई हो तथा सेवाकाल में प्रारम्भ की गयी विभागीय कार्यवाही को सेवानिवृत के दिन से लागू होने वाले आदेश अन्तर्गत पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) में सम्परिवर्तित कर दिया जाय, तब ही विभागीय कार्यवाही निष्पादित की जानी है, के लिए ही 43 (बी0) के तहत कार्यवाही किये जाने का स्पष्ट आदेश है जो प्रस्तुत मामले में लागू नहीं होता है। (क) क्योंकि मेरी सेवानिवृति दिनांक 31.01.14 के पाँच माह बाद विभागीय पत्रांक 847 दिनांक 01.07.14 निर्गत है। (ख) इसमें किसी वित्तीय क्षति प्रतिवेदित नहीं है एवं आरोप से मुक्त करने का अनुरोध श्री राय के द्वारा किया गया है।

श्री राय, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 07.04.12 एवं मुख्य अभियंता के द्वारा दिनांक 03..04.12 को किये गये पर्यवेक्षण में परक्यूपाईन लेईंग का कार्य नहीं दर्शाया गया है। परन्तु उसे श्री राय ने यह कहते हुए नकार दिया कि परक्यूपाईन लेईंग का कार्य तटबंध से 1.5 कि0 मी0 दूर थी। जिसे बालू पर 1.5 कि0 मी0 पैदल चलने के बाद ही देखा जा सकता है। परन्तु इन पदाधिकारियों द्वारा बिना स्थल पर गये हुए प्रतिवेदन दिया गया है।4 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 11 अूीलअूीलअूीलअूील 2016 जबकि इसी कार्य के लिए अध्यक्ष, विशेष जाँच दल के द्वारा दिनांक 20.03.12 को किये गये निरीक्षण प्रतिवेदन के पृष्ठ 27 में यह अंकित है कि परक्यूपाईन आ गया है एवं पृष्ठ 28 पर यह लिखा है कि परक्यूपाईन लाने का प्रयास जारी है। साथ ही पृष्ठ 27 के प्रतिवेदन पर कार्यपालक अभियंता श्री राय का भी हस्ताक्षर है। इससे यह स्पष्ट है कि दिनांक 21.03.12 तक परक्यूपाईन लेईंग का कार्य शुरू नहीं हुआ था। इस प्रकार भले ही उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में 605 से ज्यादा परक्यूपाईन लेईंग करने उल्लेख किया गया है। परन्तु यह स्पष्ट है कि दिनांक 06.03.12 को 605 परक्यूपाईन लेर्इंग के लिए किया गया भुगतान अनियमित था एवं उस तिथि तक कार्य नहीं हुआ था एवं जिसके लिए श्री भीम शंकर राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत दोषी हैं।

अतएव प्रमाणित आरोपों के लिए श्री भीम शंकर राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के द्वारा लिया गया है।

(i) पाँच प्रतिशत (5%) प्रतिशत पेंशन की कटौती एक वर्ष के लिए। उक्त निर्णय के आलोक में श्री भीम शंकर राय, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, 402, मुनेश्वर इनक्लेव, आशियाना नगर, ए0 जी0 कॉलोनी, पटना-25 को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है।

(i) पाँच प्रतिशत (5%) पेंशन की कटौती एक वर्ष के लिए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, सरकार के संयुक्त सचिव।

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अधी+कअधी+कअधी+कअधी+क, सिचवालयसिचवालयसिचवालयसिचवालय मुिणालयमुिणालयमुिणालयमुिणालय, (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार, पपपपटनाटनाटनाटना (cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत एवंएवंएवंएवं मु/ित।मु/ित।मु/ित।मु/ित। (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार गजटगजटगजटगजट (असाधारणअसाधारणअसाधारणअसाधारण) 300-571+10-ड$ड$ड$ड$0ट$ट$ट$ट$0प ीप ीप ीप ी0।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 11 April 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-04-11.300/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-04-11.300.