(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:21)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या ॢबह(cid:4)र
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(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 3(cid:15)1) पटन(cid:4)
पटन(cid:4)(cid:31) स मव(cid:4)र(cid:31) 11 अ(cid:15)ील 2(cid:15)1#
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19 Qjojh 2016
सं॰ 22 नि0 सि0 (मुज0)-06-05/2012/
22 नि0 सि0 (मुज0)-06-05/2012/321—श्री श्रीकान्त शुक्ला, (आई0 डी0-3566), तत्कालीन सहायक श्री श्रीकान्त शुक्ला, (आई0 डी0-3566), तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती प्रमण्डल सं0-1, सीतामढ़ी के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध एजेण्डा सं0 113/399 एवं अभियंता, बागमती प्रमण्डल सं0-1, सीतामढ़ी के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध एजेण्डा सं0 113/399 एवं अभियंता, बागमती प्रमण्डल सं0-1, सीतामढ़ी के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध एजेण्डा सं0 113/399 एवं एजेण्डा सं0 113/402 के अन्तर्गत कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य में बरत ी गई अनियमितता से संबंधित मुख्य एजेण्डा सं0 113/402 के अन्तर्गत कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य में बरती गई अनियमितता से संबंधित मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के प्रतिवेदन के आलोक में मामले की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के प्रतिवेदन के आलोक में मामले की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के प्रतिवेदन के आलोक में मामले की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त प्रथम द्वारा की गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त प्रथम द्वारा की गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त प्रथम 12 द्वारा श्री शुक्ला से निम्न बिन्दुओं पर रोपों के लिए विभागीय पत्रांक 991 दिनांक 11.09.12 द्वारा श्री शुक्ला से निम्न बिन्दुओं पर दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 991 दिनांक 11 स्पष्टीकरण पूछा गया।
(i) एजेण्डा सं0 113/402 में अदौरी स्थल पर निर्मित चार परक्यूपाईन स्पर की ढ़लाई की गुणवत्ता अच्छी ) एजेण्डा सं0 113/402 में अदौरी स्थल पर निर्मित चार परक्यूपाईन स्पर की ढ़लाई की गुणवत्ता अच्छी ) एजेण्डा सं0 113/402 में अदौरी स्थल पर निर्मित चार परक्यूपाईन स्पर की ढ़लाई की गुणवत्ता अच्छी नहीं पाई गयी है।
श्री शुक्ला से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। त रहने के कारण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। श्री शुक्ला से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप् समीक्षोपान्त विभागीय संकल्प सं0 1308 दिनांक 24 13 द्वारा श्री शुक्ला के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, समीक्षोपान्त विभागीय संकल्प सं0 1308 दिनांक 24.10.13 द्वारा श्री शुक्ला के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। वभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री शुक्ला द्वारा निम्न बातें विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री शुक्ला द्वारा निम्न बातें वभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री शुक्ला द्वारा निम्न बातें कही गयीः-
(i) आरोप सं0 1 के बचाव बयान में श्री शुक्ला द्वारा कहा गया कि परक्यूपाईन लेईंग कार्य बांये तटबंध से 1 ) आरोप सं0 1 के बचाव बयान में श्री शुक्ला द्वारा कहा गया कि परक्यूपाईन लेईंग कार्य बांये तटबंध से 1 ) आरोप सं0 1 के बचाव बयान में श्री शुक्ला द्वारा कहा गया कि परक्यूपाईन लेईंग कार्य बांये तटबंध से 1 होता है। कार्यपालक अभियंता के अनुसार मुख्य (एक) किलो मीटर बालू पर पैदल चलने पर ही दृष्टिगोचर होता है। कार्यपालक अभियंता के अनुसार मुख्य (एक) किलो मीटर बालू पर पैदल चलने पर ही दृष्टिगोचर अभियंता/अधीक्षण अभियंता कार्य स्थल के एक अन्य बिन्दु पर गये एवं कराये गये कार्य स्थल पर गये बगैर ही इस अभियंता/अधीक्षण अभियंता कार्य स्थल के एक अन्य बिन्दु पर गये एवं कराये गये कार्य स्थल पर गये बगैर ही इस अभियंता/अधीक्षण अभियंता कार्य स्थल के एक अन्य बिन्दु पर गये एवं कराये गये कार्य स्थल पर गये बगैर ही इस संबंध में अपना निरीक्षण प्रतिवेदन दिया है। संबंध में अपना निरीक्षण प्रतिवेदन दिया है।
(ii) आरोप सं0 2 के बचाव बयान में श्री शुक्ला द्वारा कहा गया कि उड़नदस्त ा अंचल, पटना द्वारा मंत्रीमंडल ) आरोप सं0 2 के बचाव बयान में श्री शुक्ला द्वारा कहा गया कि उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा मंत्रीमंडल 92 में निहित नियमों के अनुसार सैंपुल टेस्टिंग एवं सैंपुल का निगरानी विभाग के पत्रांक 1045 दिनांक 06.07.92 में निहित नियमों के अनुसार सैंपुल टेस्टिंग एवं सैंपुल का निगरानी विभाग के पत्रांक 1045 दिनांक 06 एकत्रीकरण तथा सिमेंट में मौजूद कैल्शियम के आधार पर सिमेेंट की गणना नहीं की गयी है। परक्यूपाईन का कार्य एकत्रीकरण तथा सिमेंट में मौजूद कैल्शियम के आधार पर सिमेेंट की गणना नहीं की गयी है। परक्यूपाईन का कार्य एकत्रीकरण तथा सिमेंट में मौजूद कैल्शियम के आधार पर सिमेेंट की गणना नहीं की गयी है। परक्यूपाईन का कार्य कारगर सिद्ध हुआ तथा नदी तटबंध से दूर शिफ्ट हो गई है।
दी तटबंध से दूर शिफ्ट हो गई है।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 11 अ(cid:15)ील 2016 संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जॅाच प्रतिवेदन में निम्न बातें कही गयी हैः-
vkjksi la0&1 उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के कंडिका 8.1.10 में यह प्रतिवेदित किया गया है कि दिनांक 09.05.12 को स्थलीय जॅाच में एजेण्डा सं0 113/399 में स्थल पर 605 अदद से कृछ ज्यादा ही परक्यूपाईन पाये गये, जो कि दिनांक 06.03.12 को पारित विपत्र में अंकित परक्यूपाईन से ज्यादा है।
उड़नदस्ता के जांच प्रतिवेदन में कार्य कराने की वास्तविक तिथि अंकित नहीं है। अतः मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिवेदित यह आरोप की दिनांक 07.04.12 तक परक्यूपाईन कार्य नहीं कराने पर भी लेईंग रजिस्टर में किस तरह परक्यूपाईन दिखा गया है, की पुष्टि नहीं हो पाती है। मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिवेदित आरोप की पुष्टि हेतु मुख्य अभियंता एवं उड़नदस्ता द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। अतएव आरोप सं0 1 प्रमाणित नहीं होता है। vkjksi la0&2 उड़नदस्ता जॅाच प्रतिवेदन में अनुपात दो सैंपुल में से एक खैरा पहाड़ी में 1ः2.7 एवं दूसरा अदौरी स्थल में 1ः4.3 का अनुपात आया। यह अनुपात वास्तविक पी0 सी0 सी0 1ः2.4 से कम है।
एक सैंपुल में 1ः2.7 निर्धारित विशिष्टि से काफी नजदीक है जबकि दूसरे सैंपुल का अनुपात कम है। निगरानी विभाग के पत्र सं0 1045 दिनांक 06.07.92 को ध्यान में रखा जाय तो पन्द्रह से बीस प्रतिशत तक Mixing deviation माना जा सकता है। अदौरी स्थल पर परक्यूपाईन में सिमेंट बालू का अनुपात 1ः4.3 आया है जो 1ः2 प्रावधानित से अधिक है। उड़नदस्ता द्वारा यह एक ही सैंपुल का टेस्ट रिपोर्ट दिखाया गया है जबकि निगरानी विभाग का पत्र सं0 1045 दिनांक 06.07.92 के अनुसार किसी स्थल पर तीन सैंपुल लिया जाना चाहिए था तथा जॅाचफल औसत के आधार पर गुणवत्ता निर्धारण किया जाना चाहिए था।
संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः-
vkjksi la0&1 एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कटाव निरोधक कार्य में बिना परक्यूपाईन लेईंग कार्य कराये ही दिनांक 06.03.12 को एकरारनामा के कार्य मद के विरूद्ध कुल रू0 34.17 लाख का अनियमित भुगतान से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा दिनांक 09.05.12 को उड़नदस्ता के स्थलीय जॅाच में 605 अदद से कुछ ज्यादा ही परक्यूपाईन पाये गये जो दिनांक 06.03.12 में पारित विपत्र में अंकित परक्यूपाईन से ज्यादा पाया जाना एवं मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिवेदित आरोप की पुष्टि मुख्य अभियंता या उड़नदस्ता द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराये जाने के आधार पर श्री शुक्ला के विरूद्ध आरोप सं0-1 से प्रमाणित नहीं पाया गया है परन्तु अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, सीतामढ़ी के दिनांक 07.04.12 को निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार उक्त तिथि तक संवेदक द्वारा कार्य प्रारम्भ नहीें किया जाना तथा मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के दिनांक 03.04.12 के निरीक्षण प्रतिवेदन में भी उल्लेखित कार्य प्रारम्भ करने की कोई एक्टीविटी दिखाई नहीं पड़ी तथा विशेष जॅाच दल के चौथे दौर के निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार परक्यूपाईन लाने का प्रयास जारी था। तत्पश्चात कार्य शुरू किया जायेगा, उक्त के आधार पर दिनांक 06.03.12 तक परक्यूपाईन लेईंग कार्य प्रारम्भ नहीं होने के लिये पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध था। परक्यूपाईन लेईंग रजिस्टर के अवलोकन से स्पष्ट है कि उक्त पंजी में अंकित तिथिवार कराये गये कार्य की मात्रा पर मात्र कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा हस्ताक्षर किया गया है। उक्त पंजी पर विधिवत निर्गत संबंधी प्रमाण पत्र भी अंकित नहीं है एवं न ही उच्च पदाधिकारी द्वारा कभी प्रविष्टि को जॅाच ही किया गया है। ऐसी स्थिति में लेईंग पंजी एवं प्रविष्टि की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाता है। अतः आरोप सं0-1 प्रमाणित होता है।
vkjksi la0&2 एजेण्डा सं0 113/402 में अदौरी स्थल एवं खैरा स्थल परक्यूपाईन ढलाई कार्य में न्यून विशिष्टि के कार्य कराने के फलस्वरूप सरकारी राशि को क्षति पहुँचाने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा खैरा पहाड़ी स्थल पर के कार्य के एक सैंपुल में पी0 सी0 सी0 निर्धारित विशिष्टि (1ः2.4) से काफी नजदीक (1ः2.7) पाया गया, अर्थात 9.08 प्रतिशत सिमेंट की मात्रा में कमी होता है। निगरानी विभाग का पत्रांक 1045 दिनांक 06.07.92 के आलोक में सिमेंट बालू के अनुपात में पायी गयी deviation का 25% तक Permissiable Limit के अंदर माना गया है तथा अदौरी स्थल पर परक्यूपाईन में सिमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः4.3 आया है जो निर्धारित विशिष्ट 1ः2 से अधिक है। निगरानी विभाग का पत्रांक 1045 दिनांक 06.07.92 के अनुसार किसी स्थल पर तीन सैंपल लेकर औसत जाँच फल के आधार पर गुणवत्ता निर्धारिण किया जाना है। परन्तु उड़नदस्ता द्वारा एक ही नमूना के आधार पर जाँच फल दिये गये है, के आधार पर श्री शुक्ला के विरूद्ध उक्त आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया है को स्वीकार योग्य मानते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं0 2 को प्रमाणित नहीं पाया गया है। अतएव प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 789 दिनांक 24.06.14 द्वारा श्री शुक्ला से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। (i) आरोप सं0 1 जो एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कार्यों में बिना परक्यूपाइ्रन लेईंग कार्य कराये ही दिनांक 06.03.12 को एकरारनामा के कार्य मद के विरूद्ध संवेदक को लाभ पहुँचाने के उद्धेश्य से कुल रू0 34.13 लाख का अनियमित भुगतान किया गया।
श्री शुक्ला ने अपने पत्रांक 267 दिनांक 16.05.15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया जिसमें मुख्यतः निम्न बाते कही गई है।
एजेण्डा सं0 113/399 के तहत कार्य का S R C Recommendation एवं स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार कुल 770 सेट परक्यूपाईन लेईंग किया जाना था। दिनांक 15.02.12 से दिनांक 01.03.12 के बीच First Row में 305 अदद एवं Second Row में 300 अदद यानि कुल 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग कराया गया। मापी पुस्तिका3 (cid:26)बहार गजट (असाधारण), 11 अ(cid:15)ील 2016 सं0 1754 दिनांक 02.03.12 को 605 अदद परक्यूपाईन लेईंग के लिये प्रथम चालू विपत्र तैयार कर प्रमण्डल को समर्पित कर दिया गया एवं प्रमण्डल स्तर से दिनांक 06.03.12 को रूपये 34.17 लाख का विपत्र पारित कर भुगतान किया गया। परक्यूपाईन लेईंग कार्य बागमती बॅाये तटबंध के निकटतम रास्ते से जाने पर भी कम से कम 1 से 1.5 Km बालू पर पैदल चलने के बाद ही दृष्टिगोचर हो सकता था। विभागीय उच्चाधिकारियों अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, सीतामढ़ी/मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर अथवा अन्य किसी भी जाँच पदाधिकारी को दिनांक 07.04.12 को यह कार्य तभी दृष्टिगोचर हो सकता है। जब वे उड़नदस्ता द्वारा अपनायी गयी प्रक्रिया को अपनाते जैसा कि दिनांक 09.05. 12 को उड़नदस्ता अंचल द्वारा बालू पर 1.0 से 1.5 कि0 मी0 पैदल चल कर वास्तविक कार्य सम्पादित कार्य के मापी की जाँच की गयी एवं जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 8.1.0 में प्रतिवेदन किया गया है कि दिनांक 09.05.12 को स्थलीय जाँच में एजेण्डा सं0 113/399 में स्थल पर 605 अदद से कुछ ज्यादा ही परक्यूपाईन लेईंग पाया गया जो दिनांक 06. 03.12 को पारित किये गये विपत्र में अंकित परक्यूपाईन से ज्यादा है, के आरोप से मुक्त करने का अनुरोध श्री शुक्ला द्वारा किया गया।
श्री श्रीकान्त शुक्ला से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 07.04.12 एवं मुख्य अभियंता के द्वारा दिनांक 03.04.12 को किये गये पर्यवेक्षण में परक्यूपाईन लेईंग का कार्य नहीं दर्शाया गया है परन्तु उसे श्री शुक्ला के द्वारा यह कहते हुए नकार दिया गया कि परक्यूपाईन लेईंग का कार्य तटबंध से 1.5 कि0 मी0 दूर थी जिसे बालू पर 1.5 कि0 मी0 पैदल चलने के बाद ही देख जा सकता है परन्तु इन पदाधिकारियों द्वारा बिना स्थल पर गये हुए प्रतिवेदन दिया गया है।
इसी कार्य के लिए अध्यक्ष, विशेष जाँच दल के द्वारा दिनांक 20.03.12 को किये गये निरीक्षण प्रतिवेदन के पृष्ठ 27 में यह अंकित है कि परक्यूपाईन आ गया है एवं पृष्ठ 28 पर यह लिखा है कि परक्यूपाईन लाने का प्रयास जारी है। साथ ही पृष्ठ 27 के प्रतिवेदन पर कार्यपालक अभियंता का भी हस्ताक्षर है। इससे यह स्पष्ट है कि दिनांक 21.03.12 तक परक्यूपाईन लेईंग का कार्य शुरू नहीं हुआ था। इस प्रकार भले ही उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में 605 से ज्यादा परक्यूपाईन लेईंग करने का उल्लेख किया गया है परन्तु यह स्पष्ट है कि दिनांक 06.03.12 को 605 परक्यूपाईन लेईंग के लिए किया गया भुगतान अनियमित था एवं उस तिथि तक कार्य नहीं हुआ था एवं जिसके लिए श्री शुक्ला दोषी हैं।
अतएव प्रमणित आरोपों के के लिए श्री श्रीकान्त शुक्ला, तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती प्रमण्डल सं0 1,सीतामढ़ी को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के द्वारा लिया गया है।
(i) वर्ष 2011-12 की चारित्री में निन्दन। (ii) एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्रीकान्त शुक्ला, तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती प्रमण्डल सं0 1, सीतामढ़ी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0 1, लक्ष्मीपुर, जमुई को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है।
(i) वर्ष 2011-12 की चारित्री में निन्दन। (ii) एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, सरकार के संयुक्त सचिव।
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ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 301%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in