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4 ekpZ 2016
सं॰ 22/fu0 fl0 ¼iw0½&01
01&12@2009@377—श्री अख्तर आलम, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता
कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ त्मक कार्य में लापरवाही बरते जाने, स्पर एवं तटबंध नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व बाढ़ संधषा नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व बाढ़ संधर्षात्मक कार्य में लापरवाही बरते जाने, स्पर एवं 09 द्वारा निलंबित किया के क्षतिग्रस्त होने आदि कतिपय आरोपों के लिए विभागीय आदेश सं0-3292 दिनांक 26.08.09 द्वारा निलंबित किया के क्षतिग्रस्त होने आदि कतिपय आरोपों के लिए विभागीय आदेश सं0-3292 दिनांक 26 10 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। तदोपरान्त श्री अख्तर आलम गया, पुनः अधिसूचना ज्ञापांक 1634 दिनांक 04.11.10 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। तदोपरान्त श्री अख्तर आलम गया, पुनः अधिसूचना ज्ञापांक 1634 दिनांक 04 ण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत संकल्प के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत संकल्प के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्र ज्ञापांक 980 दिनांक 08.08.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के क्रम में ही 11 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के क्रम में ही 11 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के क्रम में ही 12 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्व संचालित विभागीय कार्यवाही को 12 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्व संचालित विभागीय कार्यवा श्री अख्तर आलम के दिनांक 31.07.12 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्व संचालित विभागीय कार्यवा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) में अधिसूचना ज्ञापांक 1426 दिनांक 24.12.12 द्वारा समपरिवर्तित किया 12 द्वारा समपरिवर्तित किया बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) में अधिसूचना ज्ञापांक 1426 दिनांक 24 11 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित गया। जॅाचोपरान्त संचालन पदाधिकारी ने पत्रांक 3994 दिनांक 05 गया। जॅाचोपरान्त संचालन पदाधिकारी ने पत्रांक 3994 दिनांक 05.12.11 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित गाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। संचालन किया। उक्त जॅाच प्रतिवेदन में श्री आलम के विरूद्व लगाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं पाय किया। उक्त जॅाच प्रतिवेदन में श्री आलम के विरूद्व ल त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरान्त जॅाच प्रतिवेदन से पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरान्त जॅाच प्रतिवेदन से त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरान्त जॅाच प्रतिवेदन से 13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी, श्री आलम असहमत होते हुए श्री आलम से विभागीय पत्रांक 161 दिनांक 07.02.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी, श्री आलम असहमत होते हुए श्री आलम से विभागीय पत्रांक 161 दिनांक 07 से प्राप्त उत्तर की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि बाढ़ 2009 में लाभा पहाड़पुर महानन्दा े प्राप्त उत्तर की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि बाढ़ 2009 में लाभा पहाड़पुर महानन्दा े प्राप्त उत्तर की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि बाढ़ 2009 में लाभा पहाड़पुर महानन्दा दायॅा तटबंध के चेन सं0-688 पर अवस्थित स्पर एवं उनके डानस्ट्रीम में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के लिए श्री अख्तर दायॅा तटबंध के चेन सं0-688 पर अवस्थित स्पर एवं उनके डानस्ट्रीम में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के लिए श्री अख्तर दायॅा तटबंध के चेन सं0-688 पर अवस्थित स्पर एवं उनके डानस्ट्रीम में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के लिए श्री अख्तर आलम पूर्ण रूप से दोषी है।
सम्यक समीक्षोपरान्त प्रमाि
सम्यक समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अख्तर आलम, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ णत आरोपों के लिए श्री अख्तर आलम, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ .15 द्वारा निम्न दण्ड नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना सं0-1211 दिनांक 21.05. नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना सं0-1211 दिनांक 21 संसूचित किया गयाः- 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 11 अ(cid:15)ील 2016 श्री आलम द्वारा उक्त विभागीय दण्ड के विरूद्व पुनर्विलोकन आवेदन दायर किया गया, जिसकी समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी समीक्षा में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि सामूहित जिम्मेवारी के तहत तटबंघ टूटने पर सबको समान दण्ड दिया जाता। जबकि मुख्य अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता को दो दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक एवं अधीक्षण अभियन्ता को चेतावनी एवं श्री आलम को भारी दण्ड देकर न्याय नहीं किया गया। समीक्षा में पाया गया कि कार्य के प्रभारी श्री अख्तर आलम, कार्यपालक अभियन्ता थे, को कार्य से संबंधित आवश्यक सामग्री/संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित एवं कार्य कराते हुए तटबंध को सुरक्षित रखने की जवाबदेही होती है जबकि मुख्य अभियन्ता/अधीक्षण अभियन्ता/निरक्षीय/पर्यवेक्षीय पदाधिकारी होते है। कार्य प्रभारी कार्यपालक अभियन्ता को सहयोग के लिए कार्यरत सहायक अभियन्ता से संदर्भ में श्री आलम द्वारा उनके स्तर से किसी प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी विभाग/वरीय पदाधिकारी को प्रतिवेदित नहीं किया गया है उक्त परिपे्रक्ष्य में सभी को समान दण्ड अधिरोपित किया जाना न्यायसंगत नहीं होता। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि स्पर के अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम में उनके द्वारा प्रस्तावित एवं तकनीकी सलाहकार द्वारा अनुशंसित कटाव निरोधक कार्य की स्वीकृति राज्यस्तरीय योजना समिति द्वारा दी जाती तो शायद तटबंध टूटने की स्थिति ही नहीं आती, साथ ही यह भी कहना है कि दिनांक 22.06.09 को नदी का जलस्तर खतरा के स्तर से 4 फीट नीचे था। इस सामान्य परिस्थिति में दिनांक 15.06.09 से बाढ़ संधर्षात्मक कार्य कराने का न कोई औचित्य था और न अध्यक्ष/वरीय अधिकारी का विभागीय निदेश था। यहॅा यह तथ्य विचारणीय है कि यदि श्री आलम को तटबंध की सुरक्षा हेतु उनके द्वारा प्रस्तावित कटाव निरोधक कार्य कराया जाना आवश्यक था और विभाग से इसकी पूर्व स्वीकृति नहीं थी तो श्री आलम का दायित्व था कि वरीय पदाधिकारी/विभाग से अनुमति प्राप्त कर दिनांक 15.06.09 से ही बाढ़ संधर्षात्मक कार्य प्रारम्भ कर दिया जाना चाहिए था जबकि उनके द्वारा अंतिम समय तक स्थिति भयावह होने का इंतजार किया गया।
इस प्रकार श्री अख्तर आलम से प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की सम्यक समीक्षा की गयी, समीक्षोपरान्त उनके पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य एवं विचारणीय विन्दु नहीं होने के कारण उनके अर्जी को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए पूर्व मेें संसूचित निम्न दण्डः-
1. तीस (30%) प्रतिशत पेंशन पर दस वर्षो के लिए रोक। 2. निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी, को यथावत रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री अख्तर आलम, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित उक्त दण्ड को यथावत रखने का आदेश संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
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