(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
ॢबह(cid:4)र गजट
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 19 (cid:20)ावण 1938 (श0) सं(cid:8)या 32 पटना, बुधवार, ———————— 10 अग"त 2016 (ई0) &वषय-सूची
पृष ्ठ भाग-1—(cid:1)नयुि0त, पद"थापन, बदल(cid:15), शि0त, छु 5ी और अ7य 8यि0तगत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—"वयंसेवक गु=म? के समादे-टाओं के आदेश।
---
भाग-1-ख—मैD(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Hाओं के पर(cid:15)Hा-फल, कायJKम, छाLवृिMत Nदान, आOद।
---
भाग-1-ग—PशHा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Hाफल आOद ---
भाग-2—Qबहार-राSयपाल और कायाJTयH? Uवारा (cid:1)नकाले गये &व(cid:1)नयम, आदेश, अVधसूचनाएं और (cid:1)नयम आOद। 3-3 भाग-3—भारत सरकार, पिWचम बंगाल सरकार और उYच 7यायालय के आदेश, अVधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राSय गजट? के उ\रण। ---
भाग-4—Qबहार अVध(cid:1)नयम ---
पृ-ठ भाग-5—Qबहार &वधान मंडल म^ पुर:"था&पत &वधेयक, उ0त &वधान मंडल म^ उप"था&पत या उप"था&पत `कये जानेवाले Nवर सPम(cid:1)तय? के N(cid:1)तवेदन और उ0त &वधान मंडल म^ पुर:"थापन के पूवJ NकाPशत &वधेयक। ---
भाग-7—संसद के अVध(cid:1)नयम िजनपर रा-Dप(cid:1)त कb Sये-ठ अनुम(cid:1)त Pमल चुकb है। ---
भाग-8—भारत कb संसद म^ पुर:"था&पत &वधेयक, संसद म^ उप"था&पत Nवर सPम(cid:1)तय? के N(cid:1)तवेदन और संसद म^ उप"था&पत Nवर सPम(cid:1)तय? के N(cid:1)तवेदन और संसद म^ पुर:"थापन के पूवJ NकाPशत &वधेयक। ---
भाग-9—&वcापन
---
भाग-9-क—वन &वभाग कb नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—(cid:1)न&वदा सूचनाएं, पdरवहन सूचनाएं, 7यायालय सूचनाएं और सवJसाधारण सूचनाएं इMयाOद। 4-4
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पूरक
पूरक-क 5-112 Qबहार गजट, 10 अग"त 2016
भ(cid:2)ग(cid:4)1
०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $
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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचना
29 जुलाई 2016
सं0 क0/स्था0-26/2001- 473—श्री अजय कुमार चौधरी, (भा0प्र0से0), प्रमण्डलीय आयुक्त, भागलपुर प्रमण्डल, भागलपुर को अध्यक्ष, किउल-बदुआ-चान्दन कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण, भागलपुर के पद पर दिनांक 05.07.2016 के पूर्वाह्न के प्रभाव से अधिसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, योगेष्वर धारी सिंह, संयुक्त सचिव (प्रबंधन)।
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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
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ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 21-571+100(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?
Website: http://egazette.bih.nic.in
3 Qबहार गजट, , 10 अग"त 2016भ(cid:2)ग(cid:4)2
ॢबह(cid:2)र(cid:4)र(cid:2)Îयप(cid:2)ल jर क(cid:2)य(cid:2)Z8य¡9 ह(cid:2)र(cid:2) ०नक(cid:2)ल: गय: ॢव०नयम(cid:12) \द:श(cid:12) [०धस३चन(cid:2)e $ jर ०नयम \ॢद?
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वित्त विभाग
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vf/klwpuk
शुद्धि-पत्र
1 vxLr 2016
सं॰ 1/स्था॰(ले॰से॰)-07/2016-6062वि॰—वित्त विभागीय अधिसूचना संख्या-5102/वि॰, दिनांक 23.06.2016 में निम्न प्रकार संशोधन किया जाता हैः-
उक्त अधिसूचना की कंडिका-2 में उल्लिखित ''दिनांक 01.01.2016'' के बदले ''दिनांक 01.01.2006'' पढ़ा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जयन्त कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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सामान्य प्रशासन विभाग
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शुद्धि-पत्र
23 twu 2016
सं॰ 08/आरोप-01-107/2014,सा॰प्र॰-8950—विभागीय संकल्प ज्ञापांक-08/आरोप-01-107/2014,सा॰प्र॰ -8448, दिनांक 13.06.2016 की कंडिका 3 एवं 4 में उल्लिखित ''उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, बक्सर द्वारा मनोनीत करते हुए नियुक्त किया जायेगा के स्थान पर जिला पदाधिकारी, कैमूर (भभुआ) द्वारा मनोनीत करते हुए नियुक्त किया जायेगा'' पढ़ा जाय।
2. संकल्प ज्ञापांक-8448, दिनांक 13.06.2016 की शेष कंडिका यथावत रहेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?
ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 21-571+100(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?
Website: http://egazette.bih.nic.in
4 Qबहार गजट, 10 अग"त 2016भाग-9(ख)
और सवJसाधारण सूचनाएं इMयाOद।
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सूचना ——
No. 948— I, Shivam, S/o Rajeev Ranjan Choudhary R/o A/50 Lohianagar kankarbagh Patna declare that I have changed my name to Shivam Sharma from 09.01.2016 vide Affidavit No. 499/09.01.2016
SHIVAM.
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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त? ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 21-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4? Website: http://egazette.bih.nic.in5 Qबहार गजट, , 10 अग"त 2016
ॢबह(cid:4)र गजट
क(cid:4)
प३रक(cid:13)[(cid:15)(cid:16) (cid:17)(cid:4)०धक(cid:4)र(cid:20) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:17)क(cid:4)०शत
—————
सं॰ 08/अभि॰-03-26/2014,सा॰प्र॰-7715
सामान्य प्रशासन विभाग
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संकल्प
31 ebZ 2016
श्री राजेश कुमार, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-473/2011, तत्कालीन उप-सचिव, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, पटना के विरुद्ध ऑडिटर परीक्षा एवं कनीय अभियंता की परीक्षा में षड्यंत्र पूर्वक चिन्हित अभ्यर्थ्ाियों से मोटी रकम लेकर ओ॰एम॰आर॰सीट में छेड़-छाड़ करने के आरोप के लिए आर्थिक इकाई, बिहार, पटना द्वारा आर्थिक अपराध थाना कांड सं॰-23/12, दिनांक 20.10.2012 दर्ज की गयी। उक्त कांड में श्री कुमार को अप्रथामिकी अभियुक्त बनाया गया। आर्थिक अपराध इकाई द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित किया गया जैसा की संलग्न आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में वर्णित है।
2 गठित आरोप प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित प्रेषित करते हुए श्री कुमार, सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार, पटना से विभागीय पत्रांक-2593, दिनांक 19.02.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गई। श्री कुमार ने अपने पत्रांक-740, दिनांक 04.03.2016 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
3. अतएव अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विचारोपरांत यह निर्णय लिया गया है कि श्री कुमार के विरूद्ध अनुलग्न अनुबंध में अन्तर्विष्ट आरोपों की वृहद जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) में विहित रीति से करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, निगरानी विभाग, बिहार, पटना द्वारा मनोनीत पदाधिकारी होंगे। 4. प्रधान सचिव, निगरानी विभाग, बिहार, पटना से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी पदाधिकारी को उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी, विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे। 5. श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित रहेगें।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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सं॰ 08/आरोप-01-89/2015,सा॰प्र॰-8393
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संकल्प
10 twu 2016
श्री सामदेव नारायण दास, (बि॰प्र॰से॰) कोटि क्रमांक-636/11, तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता-सह-कार्यपालक दंडाधिकारी, खगड़िया सम्प्रति निलंबित (मुख्यालय आयुक्त के कार्यालय, मुंगेर) के विरूद्ध नशे की हालत में अपने कर्मियों के6 Qबहार गजट, 10 अग"त 2016 साथ अभद्र व्यवहार करने, कार्यालय से अनुपस्थित रहने, कार्यो में अभिरूचि नहीं लेने इत्यादि का आरोप जिला पदाधिकारी, खगड़िया के पत्रांक-454/स्था॰ दिनांक 29.06.2015 एवं पत्रांक-804/स्था॰, दिनांक 11.12.2015 द्वारा प्रतिवेदित है। 2. विभागीय स्तर से गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र, प्रपत्र 'क' पर श्री दास से विभागीय पत्रांक-4494, दिनांक 28.03.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री दास द्वारा अपना स्पष्टीकरण दिनांक 22. 04.2016 को विभाग में समर्पित किया गया।
3. आरोप पत्र एवं आरोपित पदाधिकारी के स्पष्टीकरण पर सम्यक् विचारोपरांत श्री दास के विरूद्ध प्रतिवेदित अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 (2) के प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है तथा आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, खगड़िया द्वारा मनोनीत पदाधिकारी को उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. जिला पदाधिकारी, खगड़िया द्वारा इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु विषय के जानकार किसी वरीय पदाधिकारी को उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित किया जायेगा।
5. श्री दास से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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सं॰ 08/आरोप-01-107/2014,सा॰प्र॰-8448
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संकल्प
13 twu 2016
श्री सामदेव नारायण दास, (बि॰प्र॰से॰) कोटि क्रमांक-636/11, तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी, कैमूर (भभुआ) सम्प्रति निलंबित (मुख्यालय आयुक्त के कार्यालय, मुंगेर) के विरूद्ध आँगनबाड़ी सेविका की बहाली के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप जिला पदाधिकारी, कैमूर के पत्रांक-594, दिनांक 11.03.2014 द्वारा प्रतिवेदित है।
2. विभागीय स्तर से गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र प्रपत्र 'क' पर श्री दास से विभागीय पत्रांक-14145, दिनांक 21.09.2015 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री दास द्वारा अपना स्पष्टीकरण दिनांक 22.04.2016 को विभाग में समर्पित किया गया।
3. आरोप पत्र एवं आरोपित पदाधिकारी के स्पष्टीकरण पर सम्यक् विचारोपरांत श्री दास के विरूद्ध प्रतिवेदित अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 (2) के प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है तथा आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, बक्सर द्वारा मनोनीत पदाधिकारी को उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. जिला पदाधिकारी, बक्सर द्वारा इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु विषय के जानकार किसी वरीय पदाधिकारी को उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित किया जायेगा।
5. श्री दास से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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सं॰ 08/आरोप-01-81/2015,सा॰प्र॰-8506
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संकल्प
14 twu 2016
श्री शिव शंकर पासवान, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-1436/11, तत्कालीन परीक्ष्यमान उप समाहर्त्ता, दरभ्ांगा सम्प्रति अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सिकहरना, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के विरूद्ध राजस्व पर्षद्, बिहार, पटना के पत्रांक-173, दिनांक 21.02.2012 द्वारा विभागीय परीक्षा वर्ष-2011 में कदाचार में लिप्त होने का आरोप प्रतिवेदित किया गया। राजपत्रित पदाधिकारियों के द्वितीय अर्द्धवार्षिक विभागीय परीक्षा वर्ष-2011 राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, शास्त्री नगर,7 Qबहार गजट, , 10 अग"त 2016 पटना में दिनांक 01.02.2012 से दिनांक 04.02.2012 तक आयोजित थी। दिनांक 02.02.2012 को विधि, भाग-1 पुस्तक सहित विषय की परीक्षा में आरोपित पदाधिकारी को पुर्जे की सहायता से नकल करते हुए पाया गया।
2. प्रतिवेदित आरोप पर श्री पासवान से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं राजस्व पर्षद्, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य पर विचारोपरांत आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की वृहद जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-15803, दिनांक 22.11.2012 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-55/प्र॰स॰को॰, दिनांक 18.03.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी पदाधिकारी श्री पासवान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप को प्रमाणित पाया गया।
3. जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-5323, दिनांक 11.04.2016 द्वारा श्री पासवान से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की माँग की गयी। श्री पासवान द्वारा दिनांक 06.05.2016 को अपना अभिकथन/अभ्यावेदन समर्पित करते हुए विभागीय कार्यवाही के दौरान समर्पित अपने अन्तिम बचाव बयान पर कायम रहने एवं सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया। श्री पासवान का कहना है कि चिट उनके डेस्क के नीचे से निकाला गया था जो वहाँ पूर्व से रखा हुआ था एवं जिसकी जानकारी उनको नहीं थी।
4. आरोप, अपर विभागीय जाँच आयुक्त का जाँच प्रतिवेदन, आरोपित पदाधिकारी के द्वितीय कारण पृच्छा के तहत प्रस्तुत लिखित अभिकथन जो बचाव बयान के रूप में जाँच पदाधिकारी के समक्ष दिया गया था पर सम्यक् रूप से विचार किया गया। विधि भाग-1 पुस्तक सहित की परीक्षा थी जिसमें मूल पुस्तक एवं बेयर एक्ट रखने की स्वतंत्रता थी परन्तु चिट पूर्जा, पासपोर्ट अथवा गाईड नहीं रखा जा सकता था। जाँच पदाधिकारी ने उल्लेख किया है कि चिट आरोपित पदाधिकारी के टैबुल से उठाया गया न कि डेस्क के नीचे से। आरोपित पदाधिकारी का यह कहना था कि चिट वहाँ पहले से रखा था यह तार्किक नहीं प्रतीत नहीं होता है। कोई भी परीक्षार्थी जब परीक्षा देने जाता है तो सबसे पहले वह अपने बैठने के स्थान एवं उपस्कर की सूक्ष्मता से निरीक्षण करता है एवं आपत्ति जनक हर सामाग्री को वीक्षक को सुपुर्द कर देता है। श्री पासवान ने ऐसा नहीं किया जब कि वे एक जिम्मेदार सेवा संवर्ग के पदाधिकारी थे। इसके आधार पर श्री पासवान के लिखित अभिकथन को अस्वी—त किया जा सकता है एवं जाँच आयुक्त के जाँच प्रतिवेदन को स्वीकार किया जा सकता है। वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए श्री शिव शंकर पासवान, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-1436/11 सम्प्रति अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण, सिकहरना, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के तहत निम्नलिखित शास्ति, अधिरोपित एवं संसूचित की जाती है :-
(i) प्रोन्नति पर देय तिथि से दो वर्ष तक रोक।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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सं॰ 08/आरोप-01-122/2015,सा॰प्र॰-8851
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संकल्प
22 twu 2016
श्री सुगन्ध चतुर्वेदी, (बि॰प्र॰से॰) कोटि क्रमांक-478/11, तत्कालीन उप-सचिव, बिहार राज्य सूचना आयोग के विरूद्ध माननीय राज्य सूचना आयुक्त द्वारा दिनांक 07.12.2015 को पारित आदेश एवं ज्ञापांक-13935, दिनांक 14.12.2015 द्वारा प्रतिवेदित आरोप में सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा-18 के तहत जाँच हेतु विधि पूर्वक साक्ष्य नहीं लिये जाने, जाँच के क्रम में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, आवेदक, जन वितरण प्रणाली के दूकानदारों इत्यादि का परीक्षण नहीं करने इत्यादि का उल्लेख किया गया।
2. राज्य सूचना आयुक्त द्वारा वाद सं॰-80538/2012-13 श्री विपिन बिहारी सिंह बनाम लोक सूचना पदाधिकारी-सह-प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, चक्की, बक्सर में पारित आदेश में श्री सुगन्ध चतुर्वेदी, जाँच पदाधिकारी, तत्कालीन उप-सचिव के विरूद्ध सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के अधीन विभागीय कार्यवाही आरंभ करने का आदेश दिया गया। श्री विपिन बिहारी सिंह द्वारा प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, चक्की, बक्सर से वर्ष-2007-10 तक जन वितरणी प्रणाली के तहत वितरित खाधान्न एवं किरासन तेल के वितरण की जानकारी माँगने पर नहीं प्राप्त होने के कारण राज्य सूचना आयोग में अपील की गयी थी। इसकी जाँच हेतु श्री चतुर्वेदी को राज्य सूचना आयुक्त द्वारा आदेश दिया गया था। श्री चतुर्वेदी द्वारा डुमरॉव जा कर जिला पदाधिकारी, बक्सर एवं अन्य पदाधिकारी की उपस्थिति में जाँच की गयी। जाँच प्रतिवेदन से राज्य सूचना आयुक्त संतुष्ट नहीं हुये उनके द्वारा जाँच में पारदर्शिता नहीं बरतने आवेदक को सूचना नहीं दिये जाने एवं सतही जाँच करने के आधार पर श्री चतुर्वेदी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का आदेश दिया गया।
3. प्रतिवेदित आरोप के आलोक में श्री चतुर्वेदी के विरूद्ध विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र, प्रपत्र 'क' पर आरोपी पदाधिकारी से विभागीय पत्रांक-2528, दिनांक 18.02.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री चतुर्वेदी पत्रांक-2767, दिनांक 29.02.2016 द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री चतुर्वेदी के8 Qबहार गजट, 10 अग"त 2016 स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-3729, दिनांक 11.03.2016 द्वारा राज्य सूचना आयोग से मंतव्य की माँग की गयी। राज्य सूचना आयोग के पत्रांक-137, दिनांक 06.05.2016 द्वारा अपना मंतव्य उपलब्ध कराया गया।
4. श्री चतुर्वेदी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, स्पष्टीकरण एवं राज्य सूचना से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा की गयी। श्री चतुर्वेदी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि उन्होंने आवेदक श्री विपिन बिहारी सिंह को जाँच की सूचना पत्रांक-671, दिनांक 17.09.2014 द्वारा निबंधित डाक से भेजी थी। श्री चतुर्वेदी द्वारा कुछ जन वितरण दूकानों का भी निरीक्षण किया गया था। जाँच के क्रम में श्री चतुर्वेदी को यह जानकारी प्राप्त हुई थी कि पुराने अभिलेखों को लम्बे समय तक रक्षित रखने की परंपरा नहीं थी। राज्य सूचना आयोग से प्राप्त मंतव्य में कहा गया है कि श्री चतुर्वेदी के स्पष्टीकरण पर सूचना आयुक्त से मंतव्य की अपेक्षा की गयी थी, किन्तु उनके द्वारा मंतव्य नहीं दिया गया। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के अनुमोदन के उपरान्त उप सचिव, राज्य सूचना आयोग द्वारा श्री चतुर्वेदी के स्पष्टीकरण पर मंतव्य दिया गया। आयोग से प्राप्त मंतव्य में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन उप सचिव द्वारा जाँच हेतु संबंधित सभी पक्षकारों को निबंधित डाक से सूचित किया गया। उनका कहना है कि श्री चतुर्वेदी द्वारा जाँच में केवल अपना मंतव्य दिया गया था जिसे मुख्य सूचना आयुक्त असहमत हो सकते थे किन्तु इसे गम्भीर दुराचार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। आयोग द्वारा श्री चतुर्वेदी को निर्दोष बताया गया है। इसके अतिरिक्त कहा गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा-15 (4) के तहत आयोग के किसी पदाधिकारी/कर्मी द्वारा की गयी प्रशासनिक लापरवाही के संबंध में माननीय राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के आदेश को ही आयोग का अधिकारिक मत माना जा सकता है और प्रशासी विभाग (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) द्वारा भी तद्नुरूप कोई अग्रेत्तर कार्रवाई किया जाना उचित होगा। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के अनुमोदन के उपरांत प्राप्त आयोग के मंतव्य को सम्यक् विचारोपरांत स्वीकार योग्य पाया गया।
वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सुगन्ध चतुर्वेदी, (बि॰प्र॰से॰) कोटि क्रमांक-478/11, तत्कालीन उप-सचिव, बिहार राज्य सूचना आयोग को आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। तद्नुसार मामले को संचिकास्त किया जाता है।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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सं॰ 08/नि॰था॰-11-01/2016,सा॰प्र॰-9218
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संकल्प
29 twu 2016
श्री ओम प्रकाश, बि॰प्र॰से॰ (कोटि क्रमांक-492/11) जिला योजना पदाधिकारी, सीतामढ़ी को निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 13.05.2016 को 2,00,000 (दो लाख) रूपया रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाने तथा उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड सं॰-52/16, दिनांक 14.05.2016, धारा-7/13 (2)-सह-पठित धारा-13 (1) (डी) भ्र॰नि॰अधि॰, 1988 दर्ज होने की सूचना निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो) बिहार, पटना के ज्ञापांक-1034, दिनांक 20.05.2016 द्वारा उपलब्ध करायी गयी है। योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2625, दिनांक 25.05.2016 द्वारा भी इस आलोक में श्री प्रकाश के विरूद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की गयी है।
उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 9 (1) (ग) एवं नियम-9 (2) क में निहित प्रावधानों के तहत श्री प्रकाश को न्यायिक हिरासत की तिथि (दिनांक 13.05.2016 के प्रभाव से) से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री प्रकाश का मुख्यालय प्रमंडलीय आयुक्त का कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया जाता है। न्यायिक हिरासत से मुक्त होने पर भी इनका निलंबन यथावत् रहेगा तथा कारा से मुक्त होने के पश्चात् ये उक्त निर्धारित मुख्यालय में अपना योगदान देगें।
3. निलंबन की अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. एतद्संबंधी पूर्व निर्गत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7884, दिनांक 01.06.2016 को तकनीकी कारणों से निरस्त किया जाता है।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।9 Qबहार गजट, , 10 अग"त 2016 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ——— सं॰ कारा/नि0को0(क)-41/12-4160 ——— संकल्प 14 जुलाई 2016
श्री विष्वनाथ प्रसाद, काराधीक्षक (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के विरूद्ध शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर में पदस्थापन काल में कर्त्तव्यहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं लापरवाही के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-4377 दिनांक 26.09.2012 के द्वारा उन्हें निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4692 दिनांक 16.10.2012 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
2. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 5497 दिनांक 07.11.2013 के द्वारा श्री प्रसाद को उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि दिनांक 31.10.2013 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध संस्थित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत् परिवर्तित किया गया।
3. उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के पष्चात् प्रमाणित आरोपों के लिए विनिष्चिय किये गये दंड एवं उस पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्ष प्राप्त होने के पष्चात् श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1207 दिनांक 24.02.2015 के द्वारा निम्न दंड अधिरोपित किया गया है :-
'' पेंषन से 05% (पाँच प्रतिषत) 10 (दस) वर्षों के लिए कटौती का दंड ''।
4. उक्त आरोप प्रकरण में श्री प्रसाद दिनांक 26.09.2012 से 31.10.2013 तक निलंबित रहे। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 के उप-नियम 5 में विहित प्रावधानों के तहत् विभागीय ज्ञापांक 3030 दिनांक 19.05.2016 द्वारा श्री प्रसाद से अभ्यावेदन की माँग की गई, कि क्यों नहीं इस आषय का निर्णय लिया जाय कि निलंबन अवधि के लिए आपको जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा।
5. तद्आलोक में श्री प्रसाद द्वारा अपना अभ्यावेदन दिनांक 25.05.2016 को समर्पित किया गया। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा की गई। उनके अभ्यावेदन में जो तथ्य उठाये गये है वह स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति तक विभागीय कार्यवाही का निष्पादन नहीं हो सकने के लिए संस्थित विभागीय कार्यवाही को नियमानुसार बिहार पेंषन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत् परिवर्तित कर दण्ड अधिरोपित किया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि श्री प्रसाद का निलंबन औचित्यपूर्ण था, जिसके लिए उन्हें दण्डित किया गया।
6. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विष्लेषोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 (5) (7) के आलोक में श्री विष्वनाथ प्रसाद, काराधीक्षक (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के निलंबन अवधि दिनांक 26.09.2012 से 31.10.2013 के बीच जीवन निर्वाह भत्ता के अन्तर्गत किये गये भुगतान के पश्चात् देय शेष राशि में से 50% की कटौती करते हुए शेष राषि का भुगतान करने की स्वीकृति दी जाती है। साथ ही उनके निलंबन अवधि को कर्त्तव्य पर बितायी गई अवधि एवं पेंषन प्रदायी सेवा के रूप में गणना की जायेगी। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव वर्मा, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।
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सं॰ कारा/नि0को0(अधी0)-01-10/2014-4161
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संकल्प
14 जुलाई 2016
श्री सीप्रियन टोप्पो, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति मंडल कारा, मधुबनी के विरूद्ध उनके मंडल कारा, कटिहार में पदस्थापन के दौरान दिनांक 05.03.2014 को विचाराधीन बंदी मो0 सत्तार उर्फ सद्दाम के पलायन की घटना में कारा हस्तक एवं विभागीय प्रावधानों का उल्लंघन करने, कारा में 1/4 का जिला सषस्त्र बल उपलब्ध रहने के बावजूद भी उक्त बंदी को ईलाज हेतु सदर अस्पताल, कटिहार कारा बल के संरक्षण में भेजे जाने से संबंधित प्रतिवेदित आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 950 दिनांक 11.02.2015 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई है। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु संयुक्त आयुक्त विभागीय जाँच, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।10 Qबहार गजट, 10 अग"त 2016 2. आयुक्त कार्यालय, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ के पत्रांक 4944 दिनांक 12.12.2015 से प्राप्त संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच-सह-संचालन पदाधिकारी-पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष में प्रतिवेदित किया गया कि उपस्थापन पदाधिकारी, आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित आरोप को प्रमाणित करने में विफल रहे हैं। अतः आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण, साक्ष्य तथा उपस्थापन पदाधिकारी द्वारा दाखिल मंतव्य, साक्ष्य और अभिलेख में संलग्न प्रभार आदान-प्रदान संबंधी प्रभार प्रतिवेदन एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
3. समीक्षोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत् संचालन पदाधिकारी के अधिगम से निम्न बिन्दुओं पर असहमत होते हुए विभागीय ज्ञापांक 1671 दिनांक 15.03.2016 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन की प्रति आरोपित पदाधिकारी श्री टोप्पो को उपलब्ध कराते हुए उनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी :-
(i) दिनांक 03.11.2013 को उक्त बंदी मो0 सत्तार उर्फ सद्दाम मंडल कारा, कटिहार में प्रवेष पाया था। दिनांक 04.03.2014 को उक्त बंदी कारा के वार्ड संख्या-11 के आगे चापाकल के पास 03ः15 बजे अपराहन् में बेहोष होकर गिर गया। फलतः कारा चिकित्सक द्वारा आवष्यक दवाएँ दी गई लेकिन बंदी की हालत में सुधार नहीं देख उसे सदर अस्पताल भेजने की अनुषंसा की गई। फलतः उक्त बंदी को कारा बल के संरक्षण में उसी दिन अर्थात दिनांक 04.03.2014 को 03ः40 बजे अपराह्न में सदर अस्पताल कटिहार में भर्ती कराया गया।
(ii) उस समय कारा पर जिला सषस्त्र बल की 1/4 का बल उपलब्ध था जो दूसरे बंदी श्रवण कुमार का ईलाज सदर अस्पताल कटिहार में दिनांक 14.02.2014 से 04.03.2014 तक कराकर दिनांक 04.03.2014 को 01ः25 बजे दोपहर में वापस आया था। इस प्रकार स्पष्ट है कि बंदी के बेहोष होने के लगभग दो घंटा पहले उक्त जिला सषस्त्र बल कारा पर उपलब्ध था लेकिन इसके बावजूद भी उक्त बंदी को जिला सषस्त्र बल के संरक्षण में ईलाज हेतु सदर अस्पताल कटिहार नहीं भेजकर कारा बल के संरक्षण में भेजा गया। (iii) बंदी को बीमारी की स्थिति में कारा से बाहर चिकित्सा के लिए भेजे जाने में बिहार कारा हस्तक एवं गृह (विषेष) विभाग के सामयिक परिपत्र, जो बंदियों की चिकित्सा एवं सुरक्षा के संबंध में है, का अनुपालन श्री टोप्पो द्वारा नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त कारा पर 1/4 का सषस्त्र बल उपलब्ध होते हुए भी न तो उस बल का उपयोग किया गया और न ही पुलिस अधीक्षक से उक्त बंदी को पुलिस अभिरक्षा में अस्पताल भेजे जाने के लिए बल की माँग की गई। आरोपित पदाधिकारी, श्री टोप्पो द्वारा बंदी को गृह रक्षक और कक्षपाल के हाथों सदर अस्पताल भेज दिया गया जहाँ से बंदी अगले दिन दिनांक 05.03.2014 को पूर्वाह्न 03ः00 बजे पलायन कर गया।
(iv) कारा के नियंत्री पदाधिकारी होने के नाते आरोपित पदाधिकारी, श्री टोप्पो की यह जवाबदेही थी कि उक्त बीमार बंदी का समुचित ईलाज हेतु प्रावधान के तहत् जिला सषस्त्र बल के संरक्षण में सदर अस्पताल भेजा जाना चाहिए था जिसमें वे विफल रहे हैं। उनका यह कृत्य कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक है।
4. श्री टोप्पो द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव अपने पत्रांक 709 दिनांक 09.04.2016 के द्वारा समर्पित किया गया। उन्होंने अपने द्वितीय कारण पृच्छा जबाव में उल्लेख किया है कि कारा में प्रतिनियुक्त 1/4 पुलिस बल एक अन्य बंदी को सदर अस्पताल में भर्ती कर ईलाज करवा रहा था जो दिनांक 04.03.14 को (गेट पंजी के अनुसार 01ः25 बजे) कारा लौटा था तथा जिसके संबंध में प्रभारी कारापाल द्वारा उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। पुलिस बल द्वारा आदेश मानने से इंकार किये जाने की सूचना उन्हें नहीं दी गई। यदि उस समय उन्हें सूचना मिली होती तो वे इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक को देते। श्री टोप्पो का कहना है कि उनके द्वारा कर्त्तव्य के प्रति कोई लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता नहीं बरती गई।
साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि विभागीय ज्ञाप संख्या 1173 दिनांक 04.03.14 द्वारा उन्हें स्थानांतरित करते हुए आदेश दिया गया था कि तत्काल ही बिना पारगमन काल/बिना प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा में स्थानीय व्यवस्था के तहत् प्रभार सौंपते हुए दिनांक 05.03.14 के पूर्वाहन् में मंडल कारा, मधुबनी में योगदान सुनिश्चित करें। दिनांक 04.03.14 को संध्या समय प्रभारी उपाधीक्षक को प्रभार देकर उसी दिन मंडल कारा, मधुबनी का प्रभार ग्रहण कर लिया था। बंदी को सदर अस्पताल भेजने के लिए कारा के ज्ञाप सं0-404 दिनांक 04.03.14 द्वारा संबंधित न्यायालय की स्वीकृति की माँग की गई। उक्त बंदी को दिनांक 04.03.14 को 03ः40 बजे अपराहन् जेल गार्ड से भेज दिया गया था। उक्त तिथि को संध्या में मधुबनी के लिए प्रस्थान किया था। असामयिक स्थानांतरण की स्थिति उत्पन्न नहीं होती तो घटना को रोका जा सकता था। 5. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री टोप्पो द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा जबाव की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री टोप्पो का द्वितीय कारण पृच्छा जबाव स्वीकार करने योग्य नहीं है।11 Qबहार गजट, , 10 अग"त 2016 6. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिपे्रक्ष्य में सम्यक् विष्लेषणोपरांत अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सीप्रियन टोप्पो, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति मंडल कारा, मधुबनी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के प्रावधानों के तहत् निम्न दंड अधिरोपित किया जाता है :-
(i) निंदन। (ii) तीन वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव वर्मा, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।
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