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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 11 August 2016

Published 11 August 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-08-11.658
Languages
English, Hindi

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सं॰ 2/सी0-1092/2011-सा0प्र0-10500 सं॰ सामान्य प्रशासन विभाग ——— ladYi 1 vxLr 2016

श्री मनीष शर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 965/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, रून्नीसैदपुर, श्री मनीष शर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 965/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, रून्नीसैदपुर, श्री मनीष शर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 965/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, रून्नीसैदपुर, सीतामढ़ी सम्प्रति आप्त सचिव, माननीय मंत्री, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध सीतामढ़ी सम्प्रति आप्त सचिव, माननीय मंत्री, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध सीतामढ़ी सम्प्रति आप्त सचिव, माननीय मंत्री, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध पाँच योजनाओं में अनियमितता बरतने, सभी योजनाओं में आवंटन का विचलन करने, सासंद/विधायक मद की कुल पाँच योजनाओं में अनियमितता बरतने, सभी योजनाओं में आवंटन का विचलन करने, पाँच योजनाओं में अनियमितता बरतने, सभी योजनाओं में आवंटन का विचलन करने, बिना निविदा/कोटेशन के मात्र प्रमाणकों पर निर्माण सामग्रियों का कार्य करने के आरोप के लिए ग्रामीण विकास विभाग बिना निविदा/कोटेशन के मात्र प्रमाणकों पर निर्माण सामग्रियों का कार्य करने के आरोप के लिए ग्रामीण विकास विभाग बिना निविदा/कोटेशन के मात्र प्रमाणकों पर निर्माण सामग्रियों का कार्य करने के आरोप के लिए ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 9569 दिनांक 27.07.2011 के माध्यम से जिला पदाधिकारी, सीत

2011 के माध्यम से जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के पत्रांक 886 दिनांक 14

ामढ़ी के पत्रांक 886 दिनांक 14.05.2007 द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क', विभाग को उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री शर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क', विभाग को उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री शर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क', विभाग को उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री शर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने की अनुशंसा की गयी।

उक्त आरोप के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 10608 दिनांक 16.09.2011 द्वारा श्री शर्मा से स्पष्ट उक्त आरोप के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 106

श्री शर्मा से स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया गया। श्री शर्मा के पत्रांक-कैम्प-1, दिनांक 10.11.2011 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। करने का निदेश दिया गया। श्री शर्मा के पत्रांक-कैम्प-1, दिनांक 10 2011 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

गये कार्य सांसद/विधायक मद के श्री शर्मा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में कहा गया है कि उनके द्वारा कराये गये कार्य सांसद/विधायक मद के श्री शर्मा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में कहा गया है कि उनके द्वारा कराये

अंकित है कि उक्त कार्यों में संवेदक/आपूर्तिकर्त्ता को नही लगाया जाना थे। इन मदों के कार्यान्वयन निर्देशिका में यह अंकित है कि उक्त कार्यों में संवेदक/आपूर्तिकर्त्ता को नही लगाया जाना थे। इन मदों के कार्यान्वयन निर्देशिका में यह

है। विभागीय स्तर से मनोनीत अभिकर्त्ता (सरकारी सेवक) के माध्यम से उक्त कार्य को सम्पादित कराया जाना है, है। विभागीय स्तर से मनोनीत अभिकर्त्ता (सरकारी सेवक) के माध्यम से उक्त कार्य को सम्पादित कराया जाना है, है। विभागीय स्तर से मनोनीत अभिकर्त्ता (सरकारी सेवक) के माध्यम से उक्त कार्य को सम्पादित कराया जाना है,

न का कोई प्रावधान नहीं है। जिससे कि संवेदक/आपूर्तिकर्त्ता का समावेश नहीं हो, अर्थात्‌ ऐसे मामलों में निविदा कोटेशन का कोई प्रावधान नहीं है। जिससे कि संवेदक/आपूर्तिकर्त्ता का समावेश नहीं हो, अर्थात्‌ ऐसे मामलों में निविदा कोटेश

उनका कहना है कि सामग्रियों का क्रय मनोनीत अभिकर्त्ता द्वारा किया गया था। जिन्होंने विभाग द्वारा स्वी—त अनुसूचित उनका कहना है कि सामग्रियों का क्रय मनोनीत अभिकर्त्ता द्वारा किया गया था। जिन्होंने विभाग द्वारा स्वी उनका कहना है कि सामग्रियों का क्रय मनोनीत अभिकर्त्ता द्वारा किया गया था। जिन्होंने विभाग द्वारा स्वी

दर पर निर्माण सामग्रियों का क्रय कर निर्माण कार्य कराया गया था। जिसका समायोजन उनके स्तर से नियमानुसार दर पर निर्माण सामग्रियों का क्रय कर निर्माण कार्य कराया गया था। जिसका समायोजन उनके स्तर से नियमानुसार दर पर निर्माण सामग्रियों का क्रय कर निर्माण कार्य कराया गया था। जिसका समायोजन उनके स्तर से नियमानुसारकिया गया था एवं सामानों के क्रय में इनकी कोई भूमिका नहीं है। ानों के क्रय में इनकी कोई भूमिका नहीं है। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 11 अग(cid:23)त 2016 पथ निर्माण विभाग के पत्रांक 904 दिनांक 14.02.2000 के आलोक में सामग्रियों की आपूर्ति के लिए कोटेशन प्राप्त करने का प्रश्न है, यह परिपत्र सांसद/विधायक निधि मद के कार्यों पर लागू ही नहीं होता है, क्योंकि सांसद/विधायक निधि के कार्य के लिए निविदायें निकाली ही नहीं जाती है तथा न तो कार्य को टुकड़ों में बांटकर कार्य सम्पादन कराया जाता है। विधायक/सांसद निधि का कार्य विभागीय अभिकर्त्ता द्वारा कराया जाता है तथा सामग्रियों का क्रय स्वी—त अनुसूचित दर पर किया जाता है तथा प्रसंगाधीन मामले में भी यही प्रक्रिया अपनायी गयी है तथा स्थापित किसी नियम/परिपत्र का उल्लंघन नहीं किया गया है। सांसद/विधायक निधि के कार्यों में ठीकेदार के माध्यम से कार्य कराये जाने की मनाही है। अतः कार्य विभागों के लिए निर्गत निदेश सांसद/विधायक निधि मामले में लागू नहीं होते हैं।

विभागीय स्तर पर कराये जाने वाले कार्यों को बिना निविदा/कोटेशन के सामानों की आपूर्ति विषय से सबंधित आरोपों की सुनवाई माननीय लोकायुक्त स्तर पर कई मामलों में की गयी है तथा माननीय लोकायुक्त द्वारा ऐसे मामलों को अनियमितता की श्रेणी में नहीं माना गया है।

साथ ही उनका कहना है कि ग्रामीण विकास विभाग एवं अन्य कार्य विभागों द्वारा विभागीय कार्यों में कोटेशन के माध्यम से सामग्रियों के क्रय नहीं करने को अनियमितता नहीं मानी गयी है। जाँच पदाधिकारी द्वारा जाँच के क्रम में कार्य में किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं पायी गयी है और न ही सरकार को किसी प्रकार की वित्तीय हानि का ही प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है।

विभागीय पत्रांक 7009 दिनांक 11.06.2014 द्वारा जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी से मन्तव्य की मांग की गयी। कतिपय स्मारों के बावजूद जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी का मन्तव्य अप्राप्त रहने के कारण ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 9569 दिनांक 27.07.2011 द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप प्रपत्र 'क' के साथ श्री शर्मा का स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी का मन्तव्य एवं श्री शर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने की विभागीय अनुशंसा की समीक्षा की गयी।

श्री शर्मा के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के पत्रांक 1959 दिनांक 17.08.2010 द्वारा ग्रामीण विकास विभाग को उपलब्ध कराये गये मन्तव्य में प्रतिवेदित है कि योजनान्तर्गत प्राप्त राशि के अन्तर्गत ही भुगतान किया गया है, अतएव विचलन से मो0 47,389.00 रू0 भुगतान का आरोप नहीं बनता है। भुगतान के समय उल्लिखित खनन कर कटौती की गई है। जिन सामग्रियों का दूकानदार द्वारा खनन कर जमा किए जाने संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के कारण खनन कर की कटौती नहीं की गई है। तकनीकी पदाधिकारी से जाँच कराने के पश्चात्‌ ही भुगतान किया गया है। सामग्रियों का क्रय स्वी—त अनुसूचित दर पर की गई थी। योजना की स्थलीय जाँच तकनीकी परीक्षण कोषांग के कार्यपालक अभियंता द्वारा की गई है। जाँच प्रतिवेदन में किसी भी योजना में कार्य की मात्रा/गुणवत्ता संबंधी कोई अनियमितता नहीं पाई गई है। निगरानी विभाग द्वारा लगाया गया आरोप पूर्णतया प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है। ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 9569 दिनांक 27.07.2011 द्वारा उनके विरूद्ध साक्ष्यों सहित आरोप प्रपत्र 'क' में प्रतिवेदित है कि उनके द्वारा पूर्व में ही श्री शर्मा से स्पष्टीकरण प्राप्त कर समीक्षा की जा चुकी थी, तदोपरान्त विभाग द्वारा श्री शर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने की अनुशंसा की गयी थी।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त तथ्यों के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 618 दिनांक 14.01.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 696 दिनांक 24.05.2016 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित है कि जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के मन्तव्य, जो प्रचलित प्रावधानों, स्थल निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन पर आधारित3 (cid:27)बहार गजट (असाधारण), 11 अग(cid:23)त 2016 है, में यह अभिमत व्यक्त किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं एवं ग्रामीण विकास विभाग, जो इस कार्य का नोडल/प्रशासी विभाग है, के द्वारा भी आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होने के निष्कर्ष के साथ आरोपित पदाधिकारी को आरोप मुक्त किये जाने की अनुशंसा की गयी है। आरोप की योजनाओं के कार्यान्वयन एवं क्रय की प्रक्रिया विभागीय नीति पर ही आधारित होती है एवं जब ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ही आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होने/आरोप मुक्त किये जाने की अनुशंसा की गयी है, तो ऐसी स्थिति में जिला पदाधिकारी के मन्तव्य एवं विभागीय अभिमत के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी के स्तर से कोई भिन्न अभिमत व्यक्त किये जाने की न तो कोई प्रासंगिकता है एवं न ही इसका कोई औचित्य है।

ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 264883 दिनांक 04.03.2016 द्वारा श्री मनीष कुमार शर्मा एवं श्री शिवकुमार शैव के विरूद्ध लगाये गये आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में समीक्षोपरान्त विभाग द्वारा दोनों पदाधिकारियों को आरोपमुक्त करने के अनुशंसा की गयी है।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री शर्मा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी का मन्तव्य एवं ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा प्राप्त अनुशंसा के सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री शर्मा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित नहीं पाये गये। जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी द्वारा भी प्रासंगिक योजनाओं के कार्यान्वयन तथा गुणवत्ता में कोई अनियमितता नहीं पायी गयी है तथा माननीय मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा भी श्री शर्मा को आरोप मुक्त करने की अनुशंसा की गयी है। उक्त तथ्यों के आलोक में श्री शर्मा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मनीष शर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 965/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, रून्नीसैदपुर, सीतामढ़ी सम्प्रति आप्त सचिव, माननीय मंत्री, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

अनिल कुमार,

सरकार के विशेष सचिव। ————

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 11 August 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-08-11.658/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-08-11.658.