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सं॰ 2/सी0-1032/2009-सा0प्र0-10599
सामान्य प्रशासन विभाग
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2009 द्वारा भू-हदबंदी वादों में भू-धारियों को सहयोग करने, भू-हदबंदी की अनुदान राश्ि श्री अखिलेश्वर प्रसाद वर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 733/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, बेतिया वर प्रसाद वर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 733/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, बेतिया वर प्रसाद वर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 733/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, बेतिया सम्प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बेतिया सदर, प0 चम्पारण के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, बेतिया के चम चम्पारण, बेतिया के सम्प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बेतिया सदर, प0 चम्पा करने, भू-हदबंदी की अनुदान राशि का पत्रांक 127 दिनांक 14.03.2009 द्वारा भू-हदबंदी वादों में भू-धारियों को सहयोग नतम मजदूरी संबंधी वादों का निष्पादन नहीं करने, गैर मजरूआ मालिक भूमि की बन्दोबस्ती में पादन नहीं करने, गैर मजरूआ मालिक भूमि की बन्दोबस्ती में वितरण नहीं करने, न्यूनतम मजदूरी संबंधी वादों का निष् अनियमितता बरतने, जनता दरबार में प्राप्त आवेदन का ससमय निष्पादन नहीं करने तथा बाढ़ साहय्य मद में प्राप्त गेहूँ साहय्य मद में प्राप्त गेहूँ अनियमितता बरतने, जनता दरबार में प्राप्त आवेदन का ससमय निष्पादन नहीं करने तथा बाढ़ ा के वितरण में अनियमितता बरतने तथा अस्थायी गबन करने के आरोपों के लिए गठित एवं कैश डॉल की राशि के वितरण में अनियमितता बरतने तथा अस्थायी गबन करने के आरोपों के लिए ा के वितरण में अनियमितता बरतने तथा अस्थायी गबन करने के आरोपों के लिए चम चम्पारण, बेतिया के पत्रांक 66 दिनांक 10.03.2010 द्वारा उक्त पत्र 'क' तथा जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, बेतिया के पत्रांक 66 दिनांक 10 आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' तथा जिला पदाधिकारी, पश्ि आरोपों से संबंधित साक्ष्य संबंधी अभिलेख प्राप्त हुए। विभागीय पत्रांक 3937 दिनांक 30.04.2010 द्वारा श्री वर्मा को प्रपत्र 2010 द्वारा श्री वर्मा को प्रपत्र आरोपों से संबंधित साक्ष्य संबंधी अभिलेख प्राप्त हुए। विभागीय पत्रांक 3937 दिनांक 30 यी। विभागीय पत्रांक 11420 'क' साक्ष्य सहित उपलब्ध कराते हुए उक्त आरोपों के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। विभागीय पत्रांक 1142 'क' साक्ष्य सहित उपलब्ध कराते हुए उक्त 2015 द्वारा स्मारित भी किया गया। किन्तु, श्री 2010, 6203 दिनांक 02.06.2011 एवं 4281 दिनांक 20.03.2015 द्वारा स्मारित भी किया गया। किन्तु, श्री दिनांक 22.11.2010, 6203 दिनांक 02 वर्मा के द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। वर्मा के द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। 2. अनुशासनिक प्राधिकार के निण् ार्यानुसार उपर्युक्त आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6199 दिनांक ाासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार उपर्युक्त आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6199 दिनांक 2015 द्वारा श्री वर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को 24.04.2015 द्वारा श्री वर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को 2015 द्वारा श्री वर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
3. आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पत्रा
2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 2577 दिनांक 03.11.2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें कुल-आठ आरोपों में से आरोप संख्या 02 को छोड़कर शेष 07 आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये हैं। जिसमें कुल-आठ आरोपों में से आरोप संख्या 02 को छोड़कर शेष 07 आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये हैं। जिसमें कुल-आठ आरोपों में से आरोप संख्या 02 को छोड़कर शेष 07 आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये हैं। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 16903 दिनांक 08.12.2015 द्वारा श्री वर्मा से अभ्यावे 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 11 अग(cid:23)त 2016 पृच्छा समर्पित करने के दिन ही विभागीय जाँच बचाव पक्ष के लिए बंद कर दिया गया। उनके द्वारा समर्पित बचाव बयान पर उनके विरूद्ध प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा लिखित या मौखिक खंडन नहीं किये जाने के बावजूद भी संचालन पदाधिकारी द्वारा दोषसिद्ध घोषित कर दिया गया है जो पूर्वाग्रह ग्रस्त कार्रवाई का द्योतक है। उनका यह भी कहना है कि जाँच प्रक्रिया में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के उपनियम 7 से 20 तक का अनुपालन नहीं किया गया है। उनके द्वारा अनुरोध किया गया है कि उनके विरूद्ध गठित आरोप पत्र एवं जाँच प्रतिवेदन को रद्द करते हुए आरोपमुक्त करने का अनुरोध किया गया।
5. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं श्री वर्मा द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त पाया गया कि जिला पदाधिकारी द्वारा प्रपत्र 'क' में प्रतिवेदित आरोप पत्र के संदर्भ में विभाग द्वारा स्पष्टीकरण पूछे जाने एवं इसके लिए कई बार स्मारित किये जाने के बावजूद भी श्री वर्मा द्वारा विभाग में कोई स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी के समक्ष भी श्री वर्मा द्वारा कागजातों की अनुपलब्धता को आधार बनाते हुए तथ्यात्मक अथवा साक्ष्य समर्थित बचाव समर्पित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष में कतिपय स्थानों पर उल्लेख किया गया है कि कागजातों की प्राप्ति हेतु पर्याप्त समय एवं आवश्यक निदेश दिये जाने के बावजूद तथा उसी जिले में भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के रूप में सम्प्रति अपनी पदस्थापना के बावजूद कागजात प्राप्त नहीं होने का बहाना बनाकर लाभ लेने का प्रयास मान्य नहीं हो सकता है क्योंकि ये सभी आरोप उनके अंचलाधिकारी के रूप में अंचल में उनके पदस्थापित रहने के समय से ही इनके संज्ञान में होने का साक्ष्य है जब वे स्वयं इन अभिलेखों के प्रभार में थे। पुनः विभाग द्वारा दिये गये निदेश के आलोक में भी श्री वर्मा द्वारा ऐसे तकनिकी प्रश्न उठाये गये हैं जो नियमसम्मत् नहीं हैं और इसी आधार पर उनके द्वारा अभ्यावेदन में भी अपने बचाव के समर्थन में कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। श्री वर्मा के अभ्यावेदन में आरोप पत्र के गठन के संदर्भ में अंकित उनका मन्तव्य स्वीकारणीय नहीं है क्योंकि आरोप पत्र विहित प्रपत्र में है। इसी आरोप पत्र के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। इस प्रकार अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिये गये निर्णय में जिला पदाधिकारी द्वारा प्रपत्र 'क' में प्रतिवेदित आरोप पत्र पर भी अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन अन्तर्निहित है। श्री वर्मा द्वारा दिये गये तर्कों के समर्थन में कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। अभ्यावेदन के साथ संचालन पदाधिकारी को समर्पित उनके उस अभ्यावेदन की छायाप्रति संलग्न की गयी है जिसमें उनके द्वारा बचाव प्रस्तुत करने के लिए 12 कागजात उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन मेंं अंकित निष्कर्ष के संदर्भित अंशों का उपर उल्लेख किया गया है जिसके अवलोकन से स्पष्ट होता है कि प्रतिवेदित आरोप साक्ष्य आधारित थे जबकि श्री वर्मा का बचाव बयान साक्ष्य आधारित नहीं था जिसके कारण आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष में इस तथ्य का उल्लेख है कि श्री वर्मा के बचाव को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य के आधार पर गलत ठहराया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि श्री वर्मा द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष भी साक्ष्य आधारित बचाव समर्पित नहीं किया गया है।
6. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री वर्मा के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत श्री वर्मा के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए ''संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया। 7. विभागीय पत्रांक 5324 दिनांक 11.04.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से श्री वर्मा के विरूद्ध विनिश्चित ''संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' के दण्ड प्रस्ताव पर परामर्श की मांग की गई। आयोग के पत्रांक 1086 दिनांक 11.07.2016 द्वारा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी है।
8. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चत दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री अखिलेश्वर प्रसाद वर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 733/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, बेतिया सम्प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बेतिया सदर, प0 चम्पारण के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 के संगत प्रावधान के तहत ''संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है।
आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति श्री अखिलेष्वर प्रसाद वर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 733/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, बेतिया सम्प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बेतिया सदर, प0 चम्पारण एवं सभी संबंधितों को सूचना एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिल कुमार, सरकार के विशेष सचिव। ————