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=2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 19 अग(cid:22)त 2016 बिहार औद्योगिक निवेष प्रोत्साहन विधेयक, 2016 बिहार औद्योगिक निवेष प्रोत्साहन विधेयक, 2016 बिहार औद्योगिक निवेष प्रोत्साहन विधेयक, 2016 बिहार औद्योगिक निवेष प्रोत्साहन विधेयक, 2016 [Ñç∫ä∫Ñç∫CNS]OMNS]=
बिहार में निवेष के विकास एवं प्रोत्साहन को सहज बनाने तथा उससे संबंधित अथवा आनुषंगिक विषयों के लिए उपबंध करने के लिए विधेयक।
चूँकि राज्य में उपलब्ध विपुल मात्रा में प्राकृतिक एवं मानव संसाधनों के उचित उपयोग कर नए उद्यमों की स्थापना से राज्य में रोजगार सृजन करने और राज्य की जनता के जीवन स्तर में सुधार लाने हेतु बढ़ावा मिलेगा;
और, चूँकि, राज्य में उद्योग, सेवा और कारोबारी इकाइयों की स्थापना एवं परिचालन के लिए तथा राज्य को एक आकर्षक निवेष स्थल बनाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना आवश्यक है;
भारत-गणराज्य के सड़सठवे वर्ष में बिहार राज्य विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय-अध्याय-अध्याय-अध्याय-I प्रारंभिक।प्रारंभिक।प्रारंभिक।प्रारंभिक।
1111.... स्ांक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।-स्ांक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।-स्ांक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।-स्ांक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।-(1) यह अधिनियम बिहार औद्योगिक निवेष प्रोत्साहन अधिनियम, 2016 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह उस तिथि को प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे।
2222.... परिभाषाएँ।परिभाषाएँ।परिभाषाएँ।परिभाषाएँ।- इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित नहीं हो;
(क) ''अधिनियम'' से अभिप्रेत है, बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम, 2016; (ख) ''क्लियरेन्स'' से अभिप्रेत है अनापत्ति प्रमाण पत्र, आवंटन, सहमति, स्वीकृति, अनुमति, पंजीकरण, नामांकन, अनुज्ञप्ति एवं इस प्रकार किसी सक्षम प्राधिकार या प्राधिकारों, जो कि औद्योगिक उपक्रम बिहार राज्य में स्थापित किये जाने के लिए आवष्यक हो, द्वारा प्रदान किया जाना या निर्गत किया जाना एवं इसमें औद्योगिक प्रतिष्ठानों के वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किये जाने या परियोजना के प्रारंभ होने तक वैसे सभी क्लियरेन्स, जो भी आवष्यक हों, शामिल होंगे;
(ग) ''आयुक्त'' से अभिप्रेत है औद्योगिक विकास आयुक्त के रूप में कार्य करनेवाला राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई व्यक्ति;
(घ) ''सामान्य आवेदन पत्र'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन यथाविहित ऐसे इलेक्ट्रोनिक प्रपत्र, जो सभी प्रकार के क्लियरेन्स हेतु व्यक्तिगत आवेदन प्रपत्रों को संयुक्त करता हो; (ड.) ''कंपनी'' से अभिप्रेत है निगमित निकाय और इसमें फर्म अथवा व्यक्तियों का अन्य संघ षामिल है; (च) ''सक्षम प्राधिकार'' से अभिप्रेत है सरकार का कोई विभाग या एजेंसी जिसे क्लियरेन्स देने या निर्गत करने का अधिकार और जिम्मेवारी सौंपी गयी हो, और इसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद्, नगर पालिका, नगर निगम और विकास प्राधिकारों षामिल होगी;
(छ) ''विभाग'' से अभिप्रेत है सरकार का उद्योग विभाग; (ज) ''उद्यम'' से वही अभिप्रेत है जो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (2006 की संख्या 27) की धारा-2(ई) में है;
(झ) ''प्रोत्साहन'' से अभिप्रेत है नीति के अधीन, समय-समय पर, निवेषकर्त्ताओं को उपलब्ध की जाने वाली वित्तीय एवं गैर वित्तीय लाभ;
(ञ) ''नीति'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य औद्योगिक निवेष प्रोत्साहन नीति; (ट) ''लोक प्राधिकार'' से अभिप्रेत है विभिन्न अधिनियमों के कार्यान्वयन के लिए सक्षम प्राधिकार और इस अधिनियम की धारा-2(ई) में परिभाषित सभी सक्षम प्राधिकार षामिल होगे;
(ठ) ''सचिवालय'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा-5 के अधीन यथा गठित राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् का सचिवालय;
(ड) ''राज्य पर्षद'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा-4 के अधीन यथा गठित राज्य निवेष प्रोत्साहन पर्षद्;
(ढ) ''राज्य-सरकार'' से अभिप्रेत है बिहार-सरकार; (ण) ''उद्योग आधार'' से अभिप्रेत है औद्योगिक इकाइयों का ऐसा पंजीकरण जैसा कि भारत-सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा, समय-समय पर, अधिकथित किया गया हो;
3 (cid:24)बहार गजट (असाधारण), 19 अग(cid:22)त 2016अध्याय-अध्याय-अध्याय-अध्याय-II
औद्योगिक इकाइयों का पंजीकरण और राज्य प्रोत्साहन पर्षद् का गठन, कार्य और शक्तियाँ विकास आयुक्त और राज्य पर्षद् का सचिवालय।
3333.... औद्योगिक इकाइयों का प्ांजीकरण।- औद्योगिक इकाइयों का प्ांजीकरण।- औद्योगिक इकाइयों का प्ांजीकरण।- औद्योगिक इकाइयों का प्ांजीकरण।- (1) किसी भी औद्योगिक इकाई का पंजीकरण उनको छोड़कर स्वैच्छिक होगा, जिन्हें उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के अधीन औद्योगिक विनिर्माण मदों के लिए अनुज्ञप्ति अनिवार्य है।
(2) यद्यपि, ऐसी इकाई जिन्हें केन्द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा उपबंधित क्लियरेन्स/सहायता की आवष्यकता हो, वे इलेक्ट्रोनिक माध्यम से 'सामान्य आवेदन प्रपत्र'(सीएएफ) दाखिल करेंगी।
(3) उत्पादन आरम्भ होने के बाद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इकाई भी उद्योग आधार ज्ञापन ऑनलाइन दाखिल करेंगी।
4444.... राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् का गठनराज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् का गठनराज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् का गठनराज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् का गठन।।।।- - - - (1) विकास आयुक्त की अध्यक्षता में राज्य निवेष प्रोत्साहन पर्षद् का गठन किया जाएगा जिसमें उद्योग, वित्त, वाणिज्य कर, पर्यावरण एवं वन, ऊर्जा, श्रम संसाधन, नगर विकास और आवास तथा राजस्व एवं भूमि सुधार के प्रधान सचिव सदस्य के रूप में होंगे। प्रधान सचिव, उद्योग विभाग पर्षद् के सदस्य-सचिव होंगे। राज्य सरकार इस पर्षद् में पाँच सदस्य नामित करेगी जिसमें दो सदस्य उद्योग के प्रतिनिधि होंगे। (2) राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् के कार्य और षक्तियाँ निम्नलिखित होंगी :-
(क) राज्य निवेश पर्षद् के सचिवालय द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्ताव को इसके द्वारा अनुमोदित किये जायेंगे या प्रस्ताव पर उचित निर्णय लिये जायेंगे;
(ख) राज्य पर्षद् माह में कम से कम एक बार बैठक करेगी;
(ग) यह बिहार राज्य औद्योगिक निवेष नीति पर विभाग को मार्गदर्षन और सलाह देगी;
(घ) राज्य पर्षद्, प्रत्येक बैठक में, निवेष प्रोत्साहन के लिए राज्य पर्षद के सचिवालय के कार्य प्रगति की समीक्षा भी करेगी और निवेष प्रस्तावों पर तीव्र गति से कार्रवाई सुनिष्चित करने के लिए समुचित मार्गदर्षन देगी;
(ड.) यदि सक्षम प्राधिकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन विहित उत्तरदायित्व का वहन नहीं किया गया है, तो राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् सक्षम प्राधिकार के विरूद्ध कार्रवाई हेतु अनुशंसा करेगी;
5555.... राज्य निवेश प्रोत्साहराज्य निवेश प्रोत्साहराज्य निवेश प्रोत्साहराज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् के सचिवालय। - न पर्षद् के सचिवालय। - न पर्षद् के सचिवालय। - न पर्षद् के सचिवालय। - राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् के लिए एक सचिवालय होगा, जो पर्षद् के अध्यक्ष एवं सदस्यों को, प्राप्त निवेश प्रस्तावों के जाँच एवं मूल्यांकन करने में, सहयोग करेगी। सचिवालय को प्राप्त निवेश-प्रस्तावों को, प्राप्ति तिथि के 30 (तीस) दिनों के भीतर राज्य पर्षद् के समक्ष रखना बाध्यकारी होगा। सचिवालय की संरचना, एवं प्रोत्साहन तथा निवेश, प्रोत्साहन एवं सरलीकरण, पारिश्रमिक एवं आनुषंगिक विषय वहीं होंगे, जो नियमावली में अधिकथित किये जायेंगे।
6666.... राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् के सचिवालय राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् के सचिवालय का गठन।का गठन।का गठन।का गठन।- - - - राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् के सचिवालय राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद् के सचिवालय (1)(1)(1)(1) औद्योगिक विकास आयुक्त। -औद्योगिक विकास आयुक्त। -औद्योगिक विकास आयुक्त। -औद्योगिक विकास आयुक्त। - एक औद्योगिक विकास आयुक्त होंगे जो सचिवालय के प्रधान होंगे। बिहार सरकार के उद्योग विभाग के प्रधान सचिव ही साधारणतया औद्योगिक विकास आयुक्त होंगे जब तक कि राज्य सरकार द्वारा अन्यथा निर्णय नहीं लिया जाता है।
(2)(2)(2)(2) गठन :-गठन :-गठन :-गठन :-राज्य पर्षद् के सचिवालय का गठन निम्नलिखित सदस्यों को मिलाकर किया जायेगा :-
(क) वित्त विभाग का संयुक्त सचिव से अन्यून पंक्ति का एक अधिकारी;
(ख) बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् का पर्यावरण अभियंता से अन्यून पंक्ति का एक
अधिकारी;
(ग) नगर विकास एवं आवास विभाग का नगर योजनाकार/वास्तुविद्/षहरी योजनाकार से अन्यून पंक्ति का एक अधिकारी;
(घ) श्रम संसाधन विभाग का संयुक्त श्रमायुक्त से अन्यून पंक्ति का एक अधिकारी;
(ड.) वाणिज्य कर विभाग का उपायुक्त से अन्यून पंक्ति का एक अधिकारी;
(च) बिहार राज्य पावर होल्डिंग कंपनी लि0 का अधीक्षण अभियंता से अन्यून पंक्ति का एक
अधिकारी;
4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 19 अग(cid:22)त 2016(छ) राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा प्रतिनियुक्त होने वाला उप सचिव से अन्यून पंक्ति
का एक अधिकारी;
(ज) श्रम संसाधन विभाग का उप मुख्य कारखाना निरीक्षक से अन्यून पंक्ति का एक
अधिकारी;
(झ) सचिवालय में राज्य सरकार द्वारा या तो प्रतिनियुक्त या संविदा पर नियुक्त होने वाले सचिवालय द्वारा यथापेक्षित अधिकारी एवं कर्मचारी।
(3) सचिवालय के कृत्य। - (3) सचिवालय के कृत्य। - (3) सचिवालय के कृत्य। - (3) सचिवालय के कृत्य। - सचिवालय के निम्नलिखित कृत्य होंगे :-
(क) विद्यमान इकाइयों का आधुनिकीकरण, उन्नयन एवं विस्तारीकरण सहित सभी नए निवेश प्रस्तावों को प्राप्त करना, प्रक्रिया करना तथा यथापेक्षित सभी क्लियरेंस देना;
(ख) बिहार को देष के भीतर एवं बाहर निवेष स्थल के रूप में प्रचार की योजना तैयार करना, इसकी रूपरेखा बनाना एवं इसको बढ़ावा देना;
(ग) सामान्य आवेदन प्रपत्र की प्राप्ति एवं उसकी व्यवस्था करना और यह भी सुनिष्चित करना कि नियमावली के अधीन विहित समय-सीमा के भीतर सभी क्लियरेन्स दे दिए गए हैं;
(घ) क्लियरेंस देने हेतु सक्षम प्राधिकार की ओर से विहित फीस संग्रह एवं जमा करना और संबंधित खाते में फीस एवं जमा अंतरित करना;
(ड.) आवेदकों को क्लियरेन्स के संबंध में जानकारी देना और जहाँ आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि रह गई हो तो इन त्रुटियों की जानकारी आवेदक को देना और उनका सुधार करवाना;
(च) निवेष संबंधी सेक्टर, उत्पाद एवं पैमाना पर सभी सुसंगत सांख्यिकी जानकारी संग्रह करना और संघ एवं राज्य प्राधिकारों को जब अपेक्षा हो उपलब्ध कराना;
(छ) संभावित निवेषकर्त्ताओं के लिए सेक्टर एवं उत्पाद वार सूचना एकत्र करना और विभाग द्वारा यथानिदेशित वेबसाईट्स, प्रिंट और दृष्य माध्यम और अन्य उपायों से इसका प्रसार करना।
(4)(4)(4)(4) सचिवालय के सदस्य आवेदनों की जाँच करेंगे और संबंधित क्लियरेन्स के लिये ऑनलाइन अनुषंसा संबंधित सक्षम प्राधिकार को करेंगे। सम्बंधित सक्षम प्राधिकार ऐसी अनुशंसा-प्राप्ति के 30 दिनों या संबंधित अधिनियम अथवा उसके अधीन बनाई गई नियमावली में विहित समय-सीमा के भीतर जिसके अधीन क्लियरेंस दिया जाना हो, निर्णय लेने के लिए बाघ्य होंगे। क्लियरेंस की सूचना ऑन-लाइन नियत समय के भीतर सचिवालय को दी जायेगी जिसे निवेशक को उपलब्ध कराया जायेगा। यदि संबंधित विभाग क्लियरेंस देने में या निर्णय लेने में असफल रहता है तो क्लियरेंस दिया गया समझा जायेगा एवं राज्य पर्षद् का सचिवालय इससे संबंधित डीम्ड क्लियरेंस निर्गत करेगा। संबंधित सक्षम प्राधिकार उक्त क्लियरेंस जो सचिवालय द्वारा निर्गत किया गया है, का अनुपालन करेगा एवं इस सचिवालय के निर्णय पर पुनर्विचार करने की शक्ति सक्षम प्राधिकार को नहीं होगी।
जब भी निवेशक से सामान्य आवेदन प्रपत्र के माध्यम से क्लियरेंस के लिए अनुरोध प्राप्त होगा तब क्लियरेंस देने की उपर्युक्त रीति लागू होंगी।
(5)(5)(5)(5) आयुक्त को किसी भी लोक प्राधिकार के अन्वेषण या जाँच क्रियान्वित करने के लिए आदेश देने एवं विभिन्न अधिनियमों के अधीन समय-सीमा के भीतर क्लियरेंस संबंधी मुद्दों पर प्रतिवेदन मांग करने की शक्ति होगी। आयुक्त को किसी भी लोक प्राधिकार को, विहित समय-सीमा के भीतर, निर्णय लेने के लिये निदेश देने की शक्ति होगी।
7777.... योग्य योग्य योग्य योग्य इकाईयों को वित्तीय प्रोत्साहन।इकाईयों को वित्तीय प्रोत्साहन।इकाईयों को वित्तीय प्रोत्साहन।इकाईयों को वित्तीय प्रोत्साहन।- - - - सचिवालय पात्र इकाईयों को, समय-समय पर, यथा अधिसूचित नीति के अनुरूप ससमय वित्तीय प्रोत्साहनों की स्वीकृति एवं विमुिक्त सुनिश्चित करेगी। निवेशक सभी प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहन के लिये सामान्य आवेदन पत्र में सचिवालय को आवेदन देंगे। सचिवालय, वित्तीय प्रोत्साहन के लिये प्राप्त आवेदन पर, कार्रवाई करेगा। स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकार एवं स्वीकृति की समय-सीमा नियमावली में विहित की जायेगी।5 (cid:24)बहार गजट (असाधारण), 19 अग(cid:22)त 2016 अध्याय-अध्याय-अध्याय-अध्याय-III विविधविविधविविधविविध 8888.... स्व-प्रमाणनस्व-प्रमाणनस्व-प्रमाणनस्व-प्रमाणन।।।।- - - - (1) आवेदक या अधिकृत व्यक्ति द्वारा क्लियरेन्स हेेतु आवेदन-पत्र एवं संबंधित दस्तावेजों का स्व-प्रमाणन किया जा सकेगा।
(2) स्व-प्रमाणन एवं जांच के आधार पर क्लियरेंस निर्गत किया जाएगा और जहाँ आवष्यक हो, क्लियरेन्स निर्गत करने के बाद, जाँच किया जाएगा।
(3) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, उन प्रावधानों को इंगित भी कर सकेगी जिनके अधीन अनुपालन के लिये स्व-घोषणा पर्याप्त दस्तावेज समक्षा जायेगा।
(4) यदि सत्यापन होने पर यह पाया जाता है कि कोई भी स्व-प्रमाणन असत्य है, तो स्व-प्रमाणन के आधार पर निर्गत क्लियरेन्स रद्द कर दिया जाएगा और असत्य स्व-प्रमाणन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा-197 के अधीन मिथ्या स्व-प्रमाणन के लिए अभियोजन का दायी होगा।
9999.... छूट। - छूट। - छूट। - छूट। - राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा किसी क्लियरेंस को अधिनियम के किसी प्रावधान का छूट दे सकेगी।
10101010.... प्राधिकार देना। - प्राधिकार देना। - प्राधिकार देना। - प्राधिकार देना। - राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, सचिवालय को निवेश के लिये अपेक्षित क्लियरेंस देने हेतु प्राधिकृत कर सकेगी।
11111111.... षास्ति। - षास्ति। - षास्ति। - षास्ति। - (1) कोई लोक प्राधिकार राज्य पर्षद् एवं सचिवालय के निदेषोें का अनुपालन विहित समय-सीमा के भीतर करने में विफल रहता है, दोषसिद्ध होने पर, ऐसी शास्ति से, जिसे पहले अपराध के लिये रु0 10,000/-(दस हजार) और द्वितीय या इसके बाद के अपराध के लिए रु0 50,000/-(पचास हजार) तक बढाया जा सकेगा, दंडनीय होगा। (2) जहाँ अधिनियम के अधीन किसी लोक प्राधिकार द्वारा अपराध किया गया हो वहाँ, यदि आयुक्त का यह समाधान हो जाए कि इस अधिनियम के अधीन सौंपे गए कर्त्तव्यों का निर्वहन करने में प्राधिकार, पर्याप्त एवं युक्तियुक्त कारणों को समनुदेषित किए, बिना असफल हुआ है तो उस पर लागू सेवा नियमावली के अधीन उसके विरूद्ध की जाने वाली कार्रवाई की अनुषंसा कर सकेगा।
12121212.... निवेषक का अधिकार। - निवेषक का अधिकार। - निवेषक का अधिकार। - निवेषक का अधिकार। - इस अधिनियम की धारा-3(2) में किसी बात के अंतर्विष्ट होने पर भी, प्रत्येक निवेषकर्ता अपने उद्यमों की स्थापना एवं प्रचालन आरंभ करने के लिए क्लियरेन्स प्राप्त करने हेतु सुसंगत वैधानिक प्राधिकारों के समक्ष सीधे आवेदन देने के लिए स्वतंत्र होगा।
13131313.... एकीकृत क्लियरेन्स प्रणाली। - एकीकृत क्लियरेन्स प्रणाली। - एकीकृत क्लियरेन्स प्रणाली। - एकीकृत क्लियरेन्स प्रणाली। - क्लियरेन्स एवं अनुमोदन देने के लिए ऑनलाइन प्रणाली विकसित की जाएगी। सामान्य आवेदन प्रपत्र एवं इसके समर्थन में दिए जाने वाले दस्तावेजों को ऑनलाइन प्राप्त किया जायेगा एवं क्लियरेन्स ऑनलाइन संसूचित किया जायेगा।
14141414.... निदेष देने की षक्ति। - निदेष देने की षक्ति। - निदेष देने की षक्ति। - निदेष देने की षक्ति। - राज्य सरकार, समय-समय पर राज्य पर्षद, राज्य पर्षद् सचिवालय, लोक प्राधिकार को नीति का ऐसा सामान्य या विषेष निदेष जो इस अधिनियम के प्रावधानों से असंगत न हो और इस अधिनियम के उद्देष्यों को क्रियान्वित करने के प्रायोजनार्थ आवष्यक एवं समिचीन हो जारी कर सकेगी और संबंधित पर्षद्, सचिवालय और लोक प्राधिकार ऐसे निदेषों का पालन करने और उस पर कार्रवाई करने हेतु बाध्य होंगे। 15151515.... सदसदसदसद्भाव पूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। -्भाव पूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। -्भाव पूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। -्भाव पूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। - इस अधिनियम अथवा उसके अधीन बनाई गई किसी नियमावली के अधीन, सद्भाव पूर्वक किए गए अथवा किए जाने के आषय से किए गए किसी भी कार्य के लिए किसी भी व्यक्ति या प्राधिकार के विरूद्ध कोई वाद, अभियोजन अथवा अन्य विधिक कार्यवाही सुनिष्चित नहीं होगी। नियमावली बनाने की षक्ति। - (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के सभी अथवा किसी 16161616.... नियमावली बनाने की षक्ति। - नियमावली बनाने की षक्ति। - नियमावली बनाने की षक्ति। -
प्रयोजन को क्रियान्वित करने के लिए नियमावली बना सकेगी।
(2)(2)(2)(2) विषिष्टतया और पूर्वगामी षक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निम्नलिखित में से सभी अथवा किसी एक विषय के लिए, ऐसी नियमावली में प्रावधान किए जा सकेंगे। (क) राज्य पर्षद् द्वारा प्रस्तावों को स्वीकृत करने की प्रक्रिया; (ख) राज्य पर्षद् सचिवालय की कार्य-प्रक्रिया और स्टाफ बल का अवधारण, भर्ती, पद्धति और सेवा-षर्तें जिसमें आयुक्त की अनुषासनिक और अपीलीय षक्तियाँ भी षामिल हैं;
(ग) सामान्य आवेदन प्रपत्र को दखिल करने का तरीका एवं प्रपत्र और राज्य पर्षद् सचिवालय द्वारा इसकी प्रक्रिया;
(घ) राज्य पर्षद् सचिवालय की जिम्मेवारी और सेवा देने के लिए समय-सीमा; (ड.) विभिन्न कानूनों के अधीन निरीक्षक ऐजेन्सियों द्वारा सत्यापन की अवधि एवं रीति तथा मिथ्या और अयथार्थ स्व-घोषणा के लिए अधिरोपित किए जाने वाले दंड की अवधि एवं रीति; और
(च) ऑनलाईन अनुश्रवण प्रणाली और क्लियरेन्स/अनुमोदन निर्गत करना।
(3)(3)(3)(3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए प्रत्येक नियमों को राज्य सरकार द्वारा राज्य विधान मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 19 अग(cid:22)त 2016 17171717.... निरसन और व्यावृति। - निरसन और व्यावृति। - निरसन और व्यावृति। - निरसन और व्यावृति। - (1) बिहार सिंगल विण्डो क्लीयेरन्स अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 9, 2006) का एतद् द्वारा निरसित किया जाता है।
(2) ऐसे निरसन के होने पर भी उक्त अधिनियम के अधीन किया गया या किए जाने के आषय से किया गया कुछ भी या की गई कार्रवाई, इस अधिनियम के अधीन किया गया या की गई मानी जाएगी मानो यह अधिनियम उस दिन प्रवृत था जिस दिन कोई कार्य किया गया था अथवा कोई कार्रवाई की गई थी।
उद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतु
बिहार में निवेष के विकास एवं प्रोत्साहन को सहज बनाने तथा उससे संबंधित अथवा आनुषंगिक विषयों के लिए उपबंध करने के लिए बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन विधेयक, 2016 का प्रस्ताव है।
इस प्रस्तावित विधेयक के लागू होने के पश्चात राज्य में उपलब्ध विपुल मात्रा में प्राकृतिक एवं मानव संसाधनों के उचित उपयोग कर नए उद्यमों की स्थापना से राज्य में रोजगार सृजन करने और राज्य की जनता के जीवन स्तर में सुधार लाने हेतु बढ़ावा मिलेगा।
राज्य में उद्योग, सेवा और कारोबारी इकाइयों की स्थापना एवं परिचालन के लिए तथा राज्य को एक आकर्षक निवेष स्थल बनाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना आवश्यक है। अतः बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन विधेयक, 2016 को अधिनियमित कराना ही इसका मुख्य उद्देश्य एवं अभीष्ठ है।
(जय कुमार सिंह) भार-साधक सदस्य = iVuk fnukad 02-08-2016
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